मैंने उसकी चूत पूरी भर दी उस रात
मुंबई के होटल रूम में बारिश वाली एक रात। खिड़की से चिपककर तेज़ धक्के, गहरी कराहें, और वो हवस जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी। जब तक मैंने उसकी चूत पूरी तरह भर नहीं दी… तब तक साँस भी नहीं ली।

मुंबई के एक महँगे होटल की बारहवीं मंज़िल पर, कमरा नंबर 1207। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी, बिजली चमक रही थी और अंदर एक अलग ही गर्मी थी।
आरव 28 साल का था – लंबा, चौड़े कंधे, तीखी जबड़े की रेखा और गहरी काली आँखें। उसने मीटिंग के बाद अपना सूट उतार दिया था। सिर्फ काली जींस और सफ़ेद शर्ट पहनी हुई थी, बाजू ऊपर चढ़े हुए। शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले थे, जहाँ से उसकी सख्त छाती की मांसपेशियाँ साफ़ दिख रही थीं।
उसके सामने थी रिया।
रिया 25 साल की थी। लंबे लहरदार काले बाल, भरे हुए होंठ और गहरी नेकलाइन वाली लाल ड्रेस। ड्रेस इतनी टाइट थी कि उसकी नाभि तक दिख रही थी और जाँघों की नरम त्वचा चमक रही थी। उसने ऊँची एड़ी के सैंडल उतार रखे थे और बिस्तर के पास खड़ी थी – थोड़ी घबराई हुई, थोड़ी उत्तेजित।
“आरव… आज रात… सिर्फ़ आज रात,” रिया ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी साँसें पहले से ही तेज़ चल रही थीं।
आरव की नज़रें उसके पूरे शरीर पर ऊपर से नीचे तक घूमीं। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई। वह धीरे-धीरे उसके पास गया। उसके हाथ ने रिया की कमर को कसकर पकड़ा। उँगलियाँ उसकी नरम त्वचा पर दब गईं।
“सिर्फ़ आज रात?” आरव ने उसके कान के पास गर्म साँस छोड़ते हुए कहा। “तो आज रात मैं तुझे भूलने लायक बना दूँगा।”
उसके हाथ ने ड्रेस के ज़िपर को धीरे से नीचे खिसकाया। लाल ड्रेस उसके शरीर से सरकते हुए फ़र्श पर गिर गई। अब रिया सिर्फ़ काले फीते का ब्रा और मैचिंग पैंटी में थी। उसके भरे-भरे, गोल स्तन ब्रा से लगभग बाहर निकल रहे थे। निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे।
आरव ने उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया। पहले धीरे, फिर गहरा। उसकी जीभ रिया के मुँह में घुसकर उसकी जीभ को चूसने लगी। रिया ने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। जब शर्ट खुली तो उसकी सख्त छाती और पेट की मांसपेशियों पर उसके हाथ फिरने लगे। आरव की जींस के अंदर उसका लंड पहले से ही पूरी तरह तन चुका था – मोटा, लंबा और सख्त।
उसने रिया को बिस्तर पर धीरे से धकेल दिया। वह पीठ के बल लेट गई। उसके बाल बिखरे हुए थे और छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आरव ने उसके ब्रा के स्ट्रैप उतारे। जब ब्रा हटाया तो उसके नरम, भारी स्तन आज़ाद हो गए। निप्पल गहरे गुलाबी और तने हुए थे।
आरव ने झुककर पहले बाएँ निप्पल को मुँह में लिया। जीभ से घुमाया, हल्के से काटा, फिर ज़ोर से चूसा। रिया की आँखें बंद हो गईं। उसके हाथ आरव के बालों में घुस गए।
“आह… आरव… धीरे…” उसकी आवाज़ में पहली बार कराह निकली।
उसने दाएँ तरफ़ भी वही किया। एक हाथ से दूसरे स्तन को मसलने लगा और दूसरे हाथ से पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। रिया पहले से ही गीली थी। उसकी उँगलियों ने उसकी चूत की गांठ को धीरे से घुमाया, फिर दो उँगलियाँ अंदर तक घुसा दीं।
रिया की कमर उठ गई। “फ़्क… आह… और अंदर…”
आरव ने उसकी पैंटी को नीचे खींचकर पैरों से निकाल दिया। अब वह पूरी तरह नंगी थी। उसकी जाँघें फैली हुई थीं और गीली चूत चमक रही थी। आरव ने अपनी जींस और अंडरवियर उतार दी। उसका लंड बाहर निकल आया – मोटा, नसों वाला, सिर पहले से ही पानी से गीला।
वह रिया के बीच में आ गया। उसने अपना लंड उसकी गीली पोरों पर रगड़ा, गांठ पर थप-थप किया। रिया के नाखून उसकी पीठ पर लग गए।
“अब अंदर डाल…” रिया ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा।
आरव ने धीरे से सिर को उसके द्वार पर दबाया। फिर एक मज़बूत धक्के में पूरा अंदर तक घुस गया। रिया की आँखें खुल गईं, मुँह से गहरी कराह निकल गई।
“आह्ह… इतना… बड़ा…”
आरव ने रुककर उसके चेहरे को देखा, फिर धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। पहले धीमे, गहरे धक्के। हर बार पूरा निकालकर फिर गहराई तक। रिया के स्तन हर धक्के पर हिल रहे थे। उसकी कराहें तेज़ होने लगीं।
“और तेज़… प्लीज़…”
आरव ने उसके दोनों हाथ ऊपर खींचकर पकड़ लिए। अब उसके शरीर का पूरा भार रिया पर था। धक्के तेज़ हो गए। बिस्तर की चरमराहट, बाहर की बारिश और रिया की ऊँची कराहें – कमरा पूरी तरह सेक्स से भर गया।
उसने कोण बदल दिया। एक हाथ से उसकी कमर उठाई, दूसरे से उसके स्तन को दबाया। अब हर धक्का उसकी अंदर की संवेदनशील जगह पर लग रहा था। रिया के पैर उसकी कमर पर लॉक हो गए।
“मैं… मैं आने वाली हूँ…” रिया ने काँपते हुए कहा।
आरव ने रफ़्तार और बढ़ा दी। उसकी कमर ने तेज़, गहरे, लगातार धक्के मारने शुरू कर दिए। रिया का शरीर अचानक तन गया। उसके अंदर जोरदार संकुचन शुरू हुए और वह ज़ोर से चिल्लाई—
“आह्ह्ह… आरव… येस्स… फ़्कक्क…”
वह चरम सुख में काँपने लगी। उसके रस आरव के लंड पर बहने लगे। आरव ने उसके चरम के बीच भी नहीं रोका। वह और तेज़, और गहराई तक पीटता रहा।
जब रिया थोड़ी ढीली पड़ी तो आरव ने उसे पलट दिया। अब वह कुत्ते की मुद्रा में थी – कमर उठी हुई, चेहरा तकिए पर। आरव ने पीछे से उसकी गीली चूत को फिर से खोला और एक ही धक्के में पूरा अंदर डाल दिया।
“उफ़्फ़… और गहरा…” रिया ने तकिए में चिल्लाया।
आरव ने उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया। अब पूरे ज़ोर से पीटने लगा। त्वचा की थप-थप की आवाज़, उसके अंडे उसकी गांठ पर लग रहे थे। एक हाथ से उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे, दूसरे से उसके स्तन को मसलने लगा।
रिया का दूसरा चरम भी आने वाला था। उसके पैर काँप रहे थे। आरव ने महसूस किया कि उसका अपना भी नियंत्रण नहीं रह रहा।
“रिया… मैं भरने वाला हूँ…” उसने तेज़ साँस लेते हुए कहा।
“अंदर… अंदर डाल…” रिया ने आँखें बंद करके कहा।
आरव ने आख़िरी कुछ तेज़, गहरे धक्के मारे। फिर उसका लंड धड़का और उसने अपना पूरा वीर्य उसके अंदर गहराई तक छोड़ दिया। गर्म, गाढ़े झोंके। रिया ने अंदर भरने का अहसास महसूस किया और वह भी दूसरी बार ज़ोर से आ गई।
दोनों कुछ पल तक ऐसे ही रहे – जुड़े हुए, साँस लेते हुए, शरीर थका हुआ।
आरव ने धीरे से निकाला। उसके वीर्य का थोड़ा हिस्सा रिया की जाँघों पर बहने लगा। वह उसके पास लेट गया और उसके शरीर को अपने से चिपका लिया।
रिया ने उसकी छाती पर हाथ रखकर कहा, साँसें अभी भी फूल रही थीं—
“यह… सिर्फ़ आज रात थी न?”
आरव ने उसके होंठों पर नरम चुंबन लिया और धीरे से बोला— “देखते हैं रात कितनी लंबी है।”
रात अभी भी लंबी थी। बाहर बारिश और तेज़ हो चुकी थी। बिजली की चमक से कमरे के अंदर-बाहर अँधेरा-उजाला हो रहा था। बिस्तर पर दोनों अभी भी नंगे थे। आरव का लंड पहले से ही फिर से आधा तन रहा था। रिया की जाँघों पर उसके वीर्य के सफ़ेद निशान सूख रहे थे।
रिया ने उसकी छाती पर हाथ फेरते हुए कहा, आवाज़ अभी भी थकी हुई थी—
“आरव… अभी तो बस शुरुआत थी न?”
आरव ने उसके बाल पीछे किए, उसके मुँह को अपनी तरफ़ खींचकर गहरा चुंबन लिया। इस बार चुंबन में कोई कोमलता नहीं थी। उसके दाँतों ने उसके निचले होंठ को हल्के से काटा, जीभ ज़ोर से उसके मुँह में घुसाई। एक हाथ से उसके दोनों कलाई पकड़कर उसके सिर के ऊपर दबा दिए।
“अब मैं तुझे नहीं छोड़ूँगा,” उसने उसके कान में गरम-गरम साँस के साथ कहा। “आज रात मैं तेरा पूरा शरीर इस्तेमाल करूँगा।”
वह उठकर खड़ा हो गया। उसने रिया को बिस्तर से खींचकर फ़र्श पर खड़ा किया, फिर उसे घुमाकर खिड़की के पास ले गया। फ़र्श से छत तक का शीशा, बाहर पूरा मुंबई का रात का नज़ारा और तेज़ बारिश। रिया के हाथ शीशे पर दब गए, उसकी पीठ आरव की छाती से चिपक गई।
आरव ने पीछे से उसकी कमर को कसकर पकड़ा। उसने अपना अब पूरी तरह सख्त, मोटा लंड उसकी पहले से गीली चूत पर रगड़ा। फिर बिना किसी चेतावनी के एक मज़बूत धक्के में पूरा अंदर तक ठेल दिया।
“आह्ह्ह… फ़्कक्क!” रिया ने ज़ोर से चिल्लाया। उसके नाखून शीशे पर खुरच गए।
आरव ने एक हाथ से उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे, दूसरे हाथ से उसके एक स्तन को ज़ोर से मसला। अब पूरे ज़ोर से पीटने लगा। हर धक्का इतना गहरा और तेज़ था कि रिया का शरीर शीशे पर धक्के खा रहा था। उसके अंडे उसकी गांठ पर तेज़ी से थप-थप कर रहे थे।
“इतनी टाइट… अभी भी,” आरव ने दाँतों से उसके कान के नीचे की त्वचा को काटकर कहा। “तेरी चूत आज रात मेरी है।”
उसने रफ़्तार और बढ़ा दी। त्वचा की थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। रिया की कराहें अब बेकाबू थीं – आधी चीख, आधी मज़ा। उसके पैर काँप रहे थे।
आरव ने उसे पलट दिया। अब रिया की पीठ शीशे से चिपक गई थी। उसने उसके एक पैर को ऊपर उठाया और अपने कंधे पर रख दिया। इस कोण से उसका लंड और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के में उसका सिर उसकी गर्भाशय के मुँह पर टकरा रहा था।
“नीचे देख… लोग देख सकते हैं,” आरव ने उसके मुँह के पास लाकर कहा। “अगर कोई देख ले तो क्या करेगी?”
रिया की आँखों में आँसू और हवस दोनों थे। “चोद… और ज़ोर से… मैं आने वाली हूँ…”
आरव ने उसके अंगुली से उसकी गांठ को तेज़ी से घुमाया। रिया का शरीर अचानक तन गया। उसके अंदर मज़बूत संकुचन शुरू हुए, उसके रस आरव के लंड पर बहने लगे और वह ज़ोर से चिल्लाई—
“आह्ह्ह… आरव… मैं आ रही हूँ… फ़्कक्क येस्स!”
उसके चरम के बीच आरव ने नहीं रोका। वह और तेज़, और कठोर पीटता रहा, जब तक रिया के पैर लगभग ढीले नहीं पड़ गए। जब उसका चरम थोड़ा शांत हुआ, तो आरव ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया।
अब वह उसके ऊपर आ गया। उसने उसके दोनों पैर चौड़े करके उसके कंधों पर रख दिए (मेटिंग प्रेस)। इस पोज़िशन में उसके शरीर का पूरा भार रिया पर था। उसने अपना लंड फिर से उसकी टपकती चूत में ठेल दिया और पूरे ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।
हर धक्का इतना गहरा था कि रिया के मुँह से सिर्फ़ टूटी-फूटी कराहें निकल रही थीं। उसके स्तन हर धक्के पर हिल रहे थे। आरव ने झुककर उसके निप्पल को मुँह में लिया और ज़ोर से चूसा, दाँतों से हल्के से काटा।
“और ले… पूरा ले,” उसने उसके मुँह के पास कहा।
रिया के हाथ उसकी पीठ पर खुरच रहे थे, लाल धारियाँ छोड़ते हुए। उसने तीसरी बार चरम महसूस किया। इस बार उसका शरीर इतना कसकर सिकुड़ा कि आरव का नियंत्रण लगभग छूटने वाला था।
लेकिन आरव ने नहीं छोड़ा। उसने रिया को पलट दिया – अब वह चेहरा नीचे, नितंब ऊपर की मुद्रा में थी। आरव ने उसकी कमर को ऊपर उठाया, उसके दोनों हाथ पीछे खींचकर पकड़ लिए (जैसे लगाम), और पीछे से पूरे बल से पीटने लगा।
“यह चूत… आज रात मेरी है,” उसने हर धक्के के साथ कहा। “बोल… किसकी है?”
“तेरी… तेरी है… आह्ह… तेरी चूत है…” रिया ने लगभग रोने वाली आवाज़ में कहा।
आरव ने एक हाथ से उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे, दूसरे से उसके नितंब पर ज़ोर से थप्पड़ मारा। लाल निशान बन गया। फिर उसने अपना लंड थोड़ा निकाला, सिर्फ़ सिर अंदर छोड़कर, और फिर एक ही मज़बूत धक्के में पूरा अंदर ठेल दिया।
रिया का मुँह तकिए में धँसा हुआ था, उसकी कराहें अब दबी हुई थीं। आरव ने महसूस किया कि उसका अपना चरम भी नज़दीक है। उसने रफ़्तार और तेज़ कर दी। कमर की मांसपेशियाँ तनी हुई, गहरे, लगातार धक्के।
“मैं भरने वाला हूँ… तुझे अंदर तक…”
“हाँ… अंदर डाल… पूरा डाल…” रिया ने चिल्लाया।
आरव ने आख़िरी कुछ निर्दयी धक्के मारे। फिर उसका लंड ज़ोर से धड़का और उसने अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य उसके अंदर गहराई तक छोड़ दिया – झोंका दर झोंका। इतना कि थोड़ा बाहर भी बहने लगा। रिया ने उसके वीर्य को महसूस करके फिर से चरम सुख पाया, उसके शरीर में तेज़ कंपन आ गए।
दोनों कुछ पल तक ऐसे ही रहे। आरव अभी भी अंदर था, उसका लंड धीरे-धीरे नरम हो रहा था, लेकिन उसके वीर्य से रिया की चूत पूरी तरह भर गई थी।
वह धीरे से निकाला। सफ़ेद वीर्य उसकी जाँघों पर बहने लगा। आरव ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया, उसके पसीने से तर शरीर को अपने से चिपकाया।
रिया की साँसें अभी भी तेज़ थीं। उसने उसकी छाती पर हाथ रखकर धीरे से कहा—
“आरव… अब मैं चल नहीं पाऊँगी…”
आरव ने उसके होंठों पर नरम चुंबन लिया, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी भूख थी।
“अभी तो सिर्फ़ पार्ट 2 हुआ है। सुबह तक मैं तुझे और तोड़ूँगा।”
बाहर बारिश अभी भी तेज़ थी। कमरे में सिर्फ़ उनकी तेज़ साँसें और सेक्स की गंध थी।

