चूची दिखाकर बॉस को बुलाया और दोनों छेद दे दिए - हिंदी सेक्स स्टोरी
टाइट शर्ट में चूचियाँ टकराते हुए बॉस को ललचाया, शॉर्ट स्कर्ट उठाकर गांड दिखाई और घर बुलाया… रात भर अपनी चुत और गांड दोनों छेद खोलकर रो-रोकर, चीख-चीखकर हवस मिटवाई!
मेरा नाम आर्यन मल्होत्रा है। और मैं तुम्हें वह कहानी बताने जा रहा हूँ जिसने मेरी ज़िंदगी के सबसे गरम, सबसे पागल करने वाले रात को जन्म दिया।
मैं एक बड़ी कंपनी में मैनेजर था। मेरी जिंदगी सामान्य चल रही थी… जब तक वह नहीं आई।
अनन्या। पहली नज़र में ही मेरी साँसें अटक गई थीं। वह साधारण लड़की नहीं थी। बिल्कुल अमीर घर की लाड़ली थी—महंगी गाड़ी, महंगे बैग, और एक ऐसा फिगर जो देखकर इंसान पागल हो जाए। लंबी टाँगें, कमर इतनी पतली कि एक हाथ में समा जाए, और ऊपर ऐसे गोल-मटोल, भारी स्तन कि टाइट शर्ट में बंधे होने के बावजूद जैसे बाहर निकलने को बेताब रहते। कूल्हे इतने गोल और मांसल कि हर कदम पर लहराते।
और उसका पहनावा… जानलेवा! रोज आती थी हाई हील्स में, घुटनों से चार-पाँच इंच ऊपर छोटी स्कर्ट, और टाइट-टाइट शर्ट जिसमें उसके निप्पल्स तक की शक्ल साफ दिख जाती। बाल खुले, होंठ चमकते, और आँखों में एक शैतानी सी शरारत।
वह जब मेरे केबिन में आती, तो जान-बूझकर झुकती। फाइल रखने के लिए टेबल पर झुकती तो उसकी छोटी स्कर्ट ऊपर उठ जाती और उसकी टाइट पैंटी में बंधी गोल गांड मेरी आँखों के सामने नाचने लगती। कभी पानी का गिलास देने के नाम पर मेरे बिलकुल करीब आकर झुकती, ताकि उसके गहरे क्लीवेज में मेरी नजरें खो जाएं। मैं पागल हो जाता था।
मेरा लंड रोज उसकी वजह से कठोर हो जाता। मैं कुर्सी पर बैठे-बैठे अपनी पेंट तंग महसूस करता। वह जानती थी। आँखों से आँखें मिलाकर धीरे से मुस्कुरा देती, जैसे कह रही हो—“देख रहे हो ना? मजा आ रहा है ना?”
एक दिन तो हद हो गई। वह केबिन में आई। दरवाजा बंद किया। फाइल मेरे टेबल पर रखते हुए इतनी ज्यादा झुकी कि उसकी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर हो गई। काली टांग्ज में बंधी उसकी चिकनी, गोल गांड और बीच में हल्की गीली रेखा… सब कुछ साफ। मैंने बिना देखे नहीं रह सका। मेरी नजरें वहीं चिपक गईं।
वह धीरे से बोली, “सर… देख रहे हो?” आवाज में हंसी थी, शर्म नहीं।
मैंने उठकर दरवाजे की तरफ देखा, फिर उसे घूरते हुए कहा, “तुम जानती हो तुम क्या कर रही हो अनन्या?”
वह सीधी हुई, मेरे करीब आई। इतनी करीब कि उसके स्तन मेरे सीने से छू रहे थे। उसकी खुशबू ने मेरा दिमाग सुन्न कर दिया। उसने धीरे से मेरी पेंट पर हाथ रखा… जहाँ मेरा लंड पहले से पत्थर की तरह सख्त था।
“हाँ… जानती हूँ,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। “और मुझे अच्छा भी लग रहा है।”
फिर वह मेरे कान के पास आई और बोली, “आर्यन… कल मम्मी-पापा दोनों बाहर जा रहे हैं। दो दिन के लिए। घर पूरा खाली रहेगा। तुम आना… रात को।”
मेरी धड़कनें तेज हो गईं। “तुम क्या कह रही हो?”
उसने मेरी आँखों में आँखें डालकर जवाब दिया, “मैं कह रही हूँ कि मैं बहुत हवस में हूँ। रोज तुम्हें देख-देखकर मेरी चूत भीग जाती है। कल रात तुम आना… और मुझे हर हाल में, हर तरीके से चुदवाना। मेरी हवस मिटा दो। जितना गंदा, जितना जबरदस्त… उतना अच्छा।”
उसने मेरा लंड पेंट के ऊपर से ही जोर से दबाया, फिर मुस्कुराते हुए केबिन से चली गई।
मैं वहीं कुर्सी पर बैठकर रह गया। मेरा लंड इतना कठोर था कि दर्द होने लगा। रात भर उसकी छोटी स्कर्ट, उसकी गांड, उसके स्तन और उसकी वो गंदी बातें आँखों के सामने घूमती रहीं।
अगली शाम मैं तैयार होकर निकला। काली शर्ट, जीन्स। दिल जोर-जोर से धधक रहा था।
उसका घर एक पॉश सोसाइटी में था। जैसे ही मैंने घंटी बजाई, दरवाजा खुला… और मेरे सामने अनन्या खड़ी थी।
उसने सिर्फ एक छोटी सी रेड सिल्क ड्रेस पहनी थी… जो उसकी जाँघों के बीच मुश्किल से कवर कर रही थी। कोई ब्रा नहीं, कोई पैंटी नहीं। सिर्फ वह ड्रेस और हाई हील्स। उसके निप्पल्स ड्रेस के कपड़े से टकरा रहे थे और नीचे की तरफ उसकी चूत की हल्की छाया साफ दिख रही थी।
वह मुस्कुराई। “आ गए… मेरे हवस के राजा?”
मैंने जवाब में कुछ नहीं कहा। बस उसे कमर से पकड़कर अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया।
दरवाजा बंद होते ही मैंने अनन्या को दीवार से सटा दिया। उसकी छोटी रेड ड्रेस मेरे हाथों में मुड़ गई। उसके नंगे, गरम शरीर की गर्मी मेरे पूरे अस्तित्व में उतर गई। मैंने उसके होंठों को जोर से चूसा, जीभ अंदर घुसा दी। वह मेरे मुँह में कराह उठी और अपनी टाँगें मेरी कमर के चारों ओर और कस लीं।
“आर्यन… आज रात मुझे बख्शना मत,” वह हांफते हुए बोली। “जितना गंदा मन करे… करना। मेरी हवस पूरी करो।”
मैंने उसे उठाया और सीधे उसके बेडरूम में ले गया। बिस्तर बहुत बड़ा और नरम था। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी ड्रेस एक झटके में ऊपर खींचकर फेंक दी। अब वह पूरी तरह नंगी थी… सिर्फ हील्स में।
क्या शरीर था उसका। गोरा, चमकदार। स्तन भारी और गोल, गुलाबी निप्पल पहले से ही सख्त। कमर इतनी पतली और कूल्हे इतने गोल कि हाथ रखने से मजा आ जाए। और बीच में उसकी चिकनी, मुंडवाई हुई चूत… पहले से ही गीली, सूजी हुई और चमक रही थी।
मैंने उसके दोनों स्तनों को हाथों में भर लिया और जोर से मसला। निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगा—कभी दाँतों से हल्के काटता, कभी जीभ से गोल-गोल घुमाता। अनन्या के हाथ मेरे बालों में घुस गए। वह कमर उठा-उठाकर अपनी चूत मेरी पेंट से रगड़ने लगी।
“आह्ह… आर्यन… जोर से चूसो… हाँ… ऐसे ही!”
मैंने उसके स्तन छोड़कर नीचे का रुख किया। उसकी टाँगें चौड़ी करके मैंने अपनी जीभ उसकी गीली चूत पर फेरी। जैसे ही मेरी जीभ उसकी प ethली पर लगी, वह जोर से काँप उठी और चीख निकली।
“उम्मम्म… हां… चाटो… अपनी रंडी की चूत चाटो!”
मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और जीभ अंदर तक घुसा दी। उसके रस का स्वाद… मीठा और नशीला। मैं उसकी चूत चूसता रहा, प ethली को होंठों में लेकर खींचता, दो उँगलियाँ अंदर घुसाकर जोर-जोर से हिलाता। अनन्या पागल हो रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर लग रहे थे, कमर बार-बार उछल रही थी।
“आर्यन… मैं झड़ने वाली हूँ… मत रोको… आह्ह!”
मैंने और तेज किया। जीभ और उँगलियाँ दोनों से उसकी चूत को चोदता रहा। कुछ ही पलों में वह जोर से काँपी, उसकी टाँगें मेरे सिर को दबा गईं और वह चिल्लाते हुए झड़ गई। उसके रस मेरे मुँह और ठोड़ी पर फैल गए।
मैं उठा और जल्दी-जल्दी अपनी शर्ट और जीन्स फेंकी। मेरा लंड पहले से ही फौलाद की तरह सख्त था—मोटा, लंबा, नसों से भरा और सिरे से चिकना। अनन्या की आँखें लंड देखकर और बड़ी हो गईं। वह खुद घुटनों के बल आ गई और बिना कुछ कहे उसे दोनों हाथों से पकड़कर मुँह में ले लिया।
“उम्मम्म…” वह गलफरे की आवाज निकालती हुई उसे गले तक ले गई। मेरी आँखें बंद हो गईं। इतना गरम, गीला मुँह। वह कभी सिर्फ सिरे को चूसती, कभी पूरा अंदर ले जाकर अपनी जीभ घुमाती, कभी मेरे अंडों को मुँह में लेकर सहलाती।
मैंने उसके बालों में हाथ डाल लिया और हल्के धक्के मारने लगा। वह आँखें उठा-उठाकर मुझे देखती और और जोर से चूसती। लार उसकी ठोड़ी से टपक रही थी।
“बस… अब और नहीं,” मैंने कहा और उसे बिस्तर पर चित्त लिटा दिया। “अब तेरी चूत की बारी है।”
मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं, अपने लंड को उसकी भीगी चूत पर रगड़ा… और एक ही झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया।
“आआआह्ह्ह…!” अनन्या की जोरदार चीख निकली। उसकी चूत ने मुझे बुरी तरह जकड़ लिया। इतनी गरम, इतनी टIGHT और गीली। मैंने थोड़ी देर रुककर उसे महसूस किया, फिर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
थप-थप-थप-थप… बिस्तर चरमरा उठा। उसके स्तन मेरे हर धक्के के साथ उछल रहे थे। मैंने झुककर उसके निप्पल मुँह में ले लिए और नीचे से उसकी चूत कुचलता रहा।
“हां… चोदो… जोर से चोदो अपनी अनन्या को!” वह कराह रही थी। “मैं तुम्हारी रंडी हूँ… आज रात… आह्ह… और गहरा!”
मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर चढ़ा लीं और और गहराई तक जाने लगा। हर धक्के पर उसकी चीखें तेज हो रही थीं। मैंने एक हाथ से उसके गले को हल्के से दबाया और दूसरा हाथ उसकी प ethली पर रगड़ने लगा।
वह फिर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को बुरी तरह दबाया और गर्म रस बह निकला। लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने उसे पलटा और घुटनों के बल कर दिया। उसकी गोल, मांसल गांड मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से उसे फैलाया और फिर से अपना लंड उसकी चूत में धँसा दिया। अब धक्के और तेज थे। मेरी जाँघें उसकी गांड से जोर-जोर से टकरा रही थीं। आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।
“आह्ह… आर्यन… गांड भी मारो… आज सब कुछ चोदो!” वह हाथों से चादर पकड़कर चीख रही थी।
मैंने लंड निकाला, थूक लगाकर उसकी टIGHT गांड के छेद पर लगाया और धीरे से धकेला। अनन्या पहले थोड़ी सहम, फिर खुद पीछे की तरफ धकेलने लगी।
“हां… अंदर… पूरा अंदर करो…!”
मैंने उसकी गांड भी चोदनी शुरू कर दी। एक हाथ से उसकी चूत में उँगलियाँ घुमाईं, दूसरे से उसके बाल खींचे। वह पागलों की तरह कराह रही थी, गाली दे रही थी, और खुद बोल रही थी—
“और जोर से… हां… मैं तुम्हारी हरामी कुतिया हूँ… चोदो… फाड़ दो मुझे!”
मैंने फिर उसे चित्त किया। अब मैं उसकी टाँगें फैलाकर मिशनरी में इतनी जोर से चोद रहा था कि बिस्तर खिसकने लगा। पसीने से दोनों के शरीर चमक रहे थे। वह मुझे अपनी बाहों और टाँगों में जकड़े हुए थी।
“आर्यन… मैं फिर से आ रही हूँ… तुम्हारे साथ… अंदर झाड़ना… पूरा अंदर!”
उसकी बातें सुनकर मेरा भी नियंत्रण खत्म हो गया। मैंने आखिरी तेज धक्के लगाए और जोर से गुर्राते हुए अपना पूरा वीर्य उसकी गरम चूत के अंदर उड़ेल दिया। एक के बाद एक झटके… इतना ज्यादा कि बाहर भी निकलने लगा।
अनन्या भी मेरे साथ जोर से झड़ गई। उसके पूरे शरीर में कंपकंपी दौड़ गई।
हम दोनों हांफते हुए एक-दूसरे पर गिर पड़े। मैं अभी भी उसके अंदर था। वह हँसते हुए मेरे सीने पर लेट गई और बोली, “यह सिर्फ शुरुआत थी… रात अभी बहुत बाकी है।”
और सच में रात बाकी थी। आधे घंटे बाद वह खुद मेरे लंड को फिर से मुँह में लेकर खड़ा कर रही थी। फिर हम बाथरूम में गए… जहाँ मैंने उसे शीशे के सामने से खड़ी करके चोदा। फिर बालकनी के पास खड़ी करके। फिर फिर से बिस्तर पर… कभी उसकी गांड में, कभी मुँह में, कभी चूत में।
हर बार वह नई-नई गंदी बातें बोलती—“आज मुझे अपनी हवस की प्यासी कुतिया बना दो”, “मेरे अंदर इतना झाड़ना कि कल चल भी न पाऊँ”, “दोनों छेद चोदो… बारी-बारी से”।
सुबह के चार बजे तक हम रुकें। कमरा सेक्स की गंध से भर चुका था। चादरें गीली थीं। अनन्या मेरे सीने पर लेटी हुई थी, मेरा लंड अभी भी उसकी आधी चूत में था। वह थकी हुई मुस्कुराते हुए बोली…
“आर्यन… मेरी हवस तो मिट गई… लेकिन अब नई हवस पैदा हो गई है। अगली बार जब मम्मी-पापा बाहर जाएँ… फिर आना। तब और मजे लेंगे।”
मैंने उसकी नंगी गांड पर थप्पड़ मारते हुए जवाब दिया, “जरूर आएगा… मेरी प्यासी रानी।”
और फिर हम दोनों थककर सो गए… शरीर एक-दूसरे में उलझे हुए, और मन में अगली रात के और गंदे ख्याल।
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