भैया ने बहन की टाइट चूत में लंड डालकर रात भर चोदा

भैया ने बहन की टाइट चूत में लंड डालकर रात भर जोर से चोदा। पहली बार दोनों ने एक-दूसरे को पूरा निचोड़ लिया और सीमाएँ तोड़ दीं।

लेखक: Aanya Sen5 मिनट पढ़ने में
भैया ने बहन की टाइट चूत में लंड डालकर रात भर चोदा

घर में सिर्फ दो ही लोग थे आज। माँ-बाप शादी में गए हुए थे और रात भर वापस नहीं आने वाले थे। रोहन 25 साल का था, अनन्या 22 की। दोनों सगे भाई-बहन।

रात के 11 बज रहे थे। अनन्या अपने कमरे में थी। उसने सिर्फ एक ढीली टी-शर्ट पहन रखी थी, नीचे कुछ नहीं। रोहन लिविंग रूम में टीवी देख रहा था। अचानक अनन्या बाहर आई और सोफे पर उसके बगल में बैठ गई।

“भैया… नींद नहीं आ रही,” उसने धीमे से कहा।

रोहन ने तरफ देखा। टी-शर्ट इतनी ऊपर थी कि उसकी जांघों की सफेदी साफ दिख रही थी। “क्या हुआ?”

अनन्या चुप रही। फिर अचानक उसने अपना सिर रोहन के कंधे पर रख दिया। “भैया, मुझे डर लग रहा है अकेले। आज तुम्हारे पास सो जाऊँ?”

रोहन की साँस थोड़ी तेज हो गई। “अनन्या… तू बड़ी हो गई है।”

“तो क्या हुआ,” अनन्या ने धीमे से कहा और अपना हाथ उसके सीने पर रख दिया। “मैं तुम्हारे पास सुरक्षित महसूस करती हूँ।”

रोहन ने कुछ नहीं कहा। अनन्या का हाथ धीरे-धीरे नीचे सरकने लगा। जब उसका हाथ रोहन की जांघ पर पहुँचा तो दोनों की नजरें मिल गईं।

अनन्या ने हिम्मत करके कहा, “भैया… मैं जानती हूँ ये गलत है। लेकिन आज रात मुझे तुम चाहिए। सिर्फ तुम।”

रोहन ने उसकी ठुड्डी पकड़ी। “पक्का सोच लिया?”

अनन्या ने सिर हिलाया। “हाँ।”

रोहन ने उसे कसकर किस किया। गहरा, भूखा सा। अनन्या ने मुँह खोल दिया। दोनों की जीभ मिल गई। रोहन के हाथ उसकी टी-शर्ट के अंदर चले गए और नंगे बूब्स को मसलने लगे। अनन्या कराह उठी।

“कमरे में चल,” रोहन ने कहा।

दोनों अनन्या के कमरे में गए। रोहन ने लाइट बंद कर दी, सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। अनन्या ने टी-शर्ट उतार दी। वो पूरी नंगी खड़ी थी। चिकनी चूत, गोल गांड, पिंक निप्पल्स।

रोहन ने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड पूरा खड़ा था। अनन्या ने घुटनों के बल बैठकर उसे हाथ में लिया।

“इतना हार्ड… भैया,” उसने कहा और चाटना शुरू कर दिया। पहले धीरे, फिर जोर से मुँह में ले लिया। रोहन के हाथ उसके बालों में थे। अनन्या गहराई तक ले रही थी, आँखों से पानी आ रहा था लेकिन रुक नहीं रही थी।

10 मिनट बाद रोहन ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसने पहले उसके पूरे बदन को चूमा – गर्दन, बूब्स, पेट, जांघों के अंदर। जब जीभ चूत पर पहुँची तो अनन्या की कमर उठ गई।

“भैया… अब मत तड़पाओ,” अनन्या ने कहा।

रोहन ऊपर आया। लंड उसकी गीली चूत पर रखा और आँखों में देखते हुए धीरे से अंदर धकेला। अनन्या की साँस रुक गई। पूरा अंदर जाने में थोड़ा समय लगा क्योंकि वो बहुत टाइट थी।

एक बार पूरा अंदर गया तो दोनों रुके। बस एक-दूसरे को देखते रहे।

“मैं अंदर हूँ… तेरे भाई,” रोहन ने धीमे से कहा।

“और मैं तुम्हारी बहन… जो अभी तुम्हारी हो गई है,” अनन्या ने जवाब दिया।

फिर संभोग शुरू हुआ। पहले बहुत धीमा और गहरा। हर धक्के के साथ अनन्या हल्की कराह निकालती। रोहन उसके माथे, आँखों और होंठों पर किस करता रहता।

धीरे-धीरे स्पीड बढ़ी। अनन्या ने पैर उसकी कमर पर लपेट लिए। बिस्तर की आवाज आने लगी।

“जोर से करो भैया… मैं तैयार हूँ,” अनन्या बोली।

रोहन ने उसके दोनों हाथ सिर के ऊपर पकड़ लिए और तेज धक्के देने लगे। अनन्या की आँखें बंद हो गईं। पहला ऑर्गैज्म आते ही उसकी चूत जोर से सिमट गई। रोहन रुके नहीं।

उन्होंने अनन्या को साइड में कर दिया। एक पैर ऊपर उठाकर साइड से चोदने लगे। इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था। अनन्या एक हाथ से उसकी पीठ पकड़े थी, दूसरे से अपनी चूत सहला रही थी।

“भैया… मैं दूसरी बार आने वाली हूँ…”

रोहन ने स्पीड और बढ़ा दी। अनन्या का दूसरा ऑर्गैज्म इतना जोरदार था कि जांघें काँपने लगीं।

उसके बाद रोहन ने उसे डॉगीस्टाइल में कर दिया। पहले धीमे-धीमे गांड सहलाते हुए अंदर जाते, फिर अचानक जोर के धक्के देते। अनन्या के बाल एक हाथ में थे, दूसरे से गांड पर हल्के थप्पड़ पड़ रहे थे।

“बोलो… कैसा लग रहा है?” रोहन ने पूछा।

“बहुत अच्छा… और जोर से… भैया प्लीज,” अनन्या ने जवाब दिया।

लगभग एक घंटे तक वो बदल-बदल कर सेक्स करते रहे। आखिर में रोहन ने अनन्या को फिर सीधा किया, पैर कंधों पर रखे और फाइनल धक्के देने लगे।

“अंदर छोड़ोगे?” अनन्या ने भीगी आँखों से पूछा।

“हाँ… आज से तू मेरी है,” रोहन ने कहा और जोर से झड़ गए। गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया।

दोनों लंबे समय तक जुड़े रहे। पसीना, साँसें और चुप्पी।

अनन्या ने उसके सीने पर गाल रखकर कहा, “भैया… ये सिर्फ एक रात की बात नहीं है ना?”

रोहन ने उसके बाल सहलाते हुए जवाब दिया, “नहीं। जब भी मौका मिलेगा। अब मैं खुद को रोक नहीं सकता।”

थोड़ी देर आराम के बाद अनन्या ने फिर से उसका लंड हाथ में ले लिया जो फिर से सख्त हो रहा था।

“भैया… अब मेरी गांड भी ले लो। पहली बार।”

रोहन ने उसे पेट के बल लिटाया। उंगली से तैयार किया, तेल लगाया। जब लंड का सिर गांड में प्रवेश करने लगा तो अनन्या ने तकिया दबा लिया।

“दर्द हो रहा है तो बता,” रोहन ने कहा।

“हो रहा है… लेकिन मत रुको,” अनन्या ने जवाब दिया।

धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। रोहन कुछ देर रुके। फिर बहुत धीमे धक्के शुरू किए। अनन्या की कराहें पहले दर्द की थीं, फिर मजे में बदल गईं।

“अब थोड़ा तेज कर सकते हो,” उसने कहा।

रोहन ने स्पीड बढ़ाई। एक हाथ से उसकी चूत सहला रहे थे। अनन्या का ऑर्गैज्म गांड सेक्स के दौरान ही आ गया। उसके बाद रोहन ने भी उसकी गांड में ही झड़ गए।

दोनों नहाकर फिर बिस्तर पर आए। बाकी रात वो कभी धीमे, कभी तेज सेक्स करते रहे। कभी बातें करते, कभी चुपचाप एक-दूसरे को छूते। सुबह होते-होते दोनों थक चुके थे।

सुबह अनन्या ने रोहन के सीने पर सिर रखकर कहा, “भैया, माँ-बाप जब आएंगे… तब क्या होगा?”

रोहन ने उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “तब हम पहले जैसे बन जाएँगे। लेकिन रात को जब घर शांत होगा… मैं तेरे कमरे में आ जाऊँगा। और तू भी मेरे में आ सकती है।”

अनन्या मुस्कुरा दी। “मैं आऊँगी।”

बाहर सुबह की रोशनी फैल रही थी। घर फिर से नॉर्मल होने वाला था। लेकिन दोनों के बीच जो रिश्ता बना था, वो अब छुपाकर रखा जाने वाला था।

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