भतीजे ने मामी की टाइट चूत और गाँड दोनों खोल दिए
किचन में मामी की टाइट चूत में लंड घुसा दिया, फिर गाँड भी खोल दी। शाम से रात तक भारी चूचियाँ दबा-दबा कर दोनों छेद चोदता रहा।

शाम के करीब साढ़े छह बज रहे थे। घर में सिर्फ मामी और उसका भतीजा रोहित ही थे। मामा ऑफिस की मीटिंग के लिए शहर से बाहर गए हुए थे और अगले दिन शाम को ही लौटने वाले थे।
रोहित अपने कमरे में लेटा हुआ था। तभी मामी किचन से आवाज लगाती हैं—
“रोहित… पानी का जग खाली हो गया है। फ्रिज से नया ला देना।”
रोहित उठा और किचन की तरफ गया। मामी सिंक के पास खड़ी बर्तन धो रही थीं। उन्होंने हल्की पीली साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज काफी टाइट था। उनकी बड़ी-बड़ी भारी चूचियाँ ब्लाउज में जोर से तनी हुई थीं और साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था। कमर पतली और गाँड गोल-मोटी थी।
रोहित ने जग निकालते हुए चुपचाप उनकी तरफ देखा। कुछ दिनों से उसके मन में गंदी इच्छाएँ उठ रही थीं। मामी की बॉडी देख-देख कर रात भर उसका लंड तन जाता था।
आज मौका था…
रोहित धीरे से पीछे गया और अचानक मामी की कमर में दोनों हाथ रख दिए। मामी चौंक गईं।
“रोहित… ये क्या कर रहा है? हट जा पीछे से।”
रोहित ने जवाब नहीं दिया। उसने कमर और जोर से दबाई और अपना पहले से तना हुआ मोटा लंड उनकी गाँड से सटा दिया।
मामी की साँसें तेज हो गईं।
“रोहित… पागल हो गया है क्या? मैं तेरी मामी हूँ… छोड़ मुझे…”
रोहित ने उनके कान के पास मुँह लाकर धीरे से कहा—
“मामी… मामा नहीं हैं आज। मैं बहुत दिनों से सोच रहा हूँ। आपकी ये भारी चूचियाँ और मोटी गाँड देख-देख कर मेरा लंड हर रात तन जाता है। आज तो मजा लेना ही है।”
मामी ने विरोध करते हुए उसके हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन रोहित ने उनकी दोनों कलाई पकड़ लीं और सिंक से लगा दिया। उसने एक हाथ से साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी भारी चूचियाँ जोर-जोर से दबाने लगा।
मामी कराह उठीं—
“आह्ह… छोड़… गलत बात है ये… मैं तेरी मामी हूँ…”
रोहित ने ब्लाउज की डोरी खोल दी। मामी की बड़ी-बड़ी गोल चूचियाँ बाहर झूलने लगीं। निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। रोहित ने दोनों हाथों से चूचियाँ पकड़कर मसलनी शुरू कर दीं। कभी निप्पल को उंगलियों से दबाता, कभी झुककर मुँह में लेकर जोर से चूसता।
मामी की आँखें बंद हो रही थीं। वह अभी भी मना कर रही थीं, लेकिन आवाज कमजोर पड़ चुकी थी।
“रोहित… मत कर… मामा को पता चल गया तो…”
रोहित ने उनकी साड़ी ऊपर की और पैंटी खींचकर नीचे कर दी। मामी की मोटी गाँड और उसके नीचे छिपी हुई चूत अब नंगी थी। रोहित ने उंगली से चूत सहलाई तो पाया कि मामी पहले से गीली हो चुकी हैं।
“देखो मामी… आपकी चूत तो पहले से गीली है। आप भी चाहती हो।”
मामी शर्म से लाल हो गईं। रोहित ने अपना लंड बाहर निकाला – मोटा, लंबा और नसों से भरा हुआ। उसने मामी की दोनों टाँगें फैलाईं और लंड का सिरा उनकी चूत पर रखा। फिर एक जोर का धक्का देकर आधा लंड अंदर घुसा दिया।
मामी जोर से कराह उठीं—
“आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है तेरा…”
रोहित रुका नहीं। उसने और जोर लगाकर पूरा लंड मामी की चूत में धँसा दिया। मामी की चूत बहुत गरम और टाइट थी। रोहित ने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उनकी भारी चूचियाँ आगे-पीछे हिल रही थीं।
रोहित एक हाथ से मामी की चूची दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी गाँड मसल रहा था। मामी की कराहें अब किचन में गूँज रही थीं।
“मामी की चूत कितनी मस्त है… आज पूरा दिन चोदूँगा आपको… मामा के आने तक…”
रोहित ने मामी को पलटा और सिंक पर ही लिटा दिया। उसने उनकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरे धक्के लगाने लगा। मामी की आँखें बंद थीं और मुँह से हल्की-हल्की आवाजें निकल रही थीं। विरोध अब लगभग खत्म हो चुका था।
थोड़ी देर बाद रोहित ने मामी को उठाया और अपने कमरे में ले गया। बिस्तर पर डालते ही उसने उनकी साड़ी पूरी तरह उतार दी। अब मामी बिल्कुल नंगी लेटी थीं। रोहित ने फिर से लंड उनकी चूत में डाला और इस बार और तेज गति से चोदने लगा। मामी की चूचियाँ उसके मुँह में थीं। वह कभी एक चूची चूसता, कभी दूसरी को।
“मामी… आज रात अगर मामा नहीं आए तो मैं उनकी जगह सोऊँगा… और आपको और गहराई तक चोदूँगा… गाँड में भी डालूँगा…”
मामी ने आँखें खोलकर उसे देखा। कुछ बोल नहीं पाईं। सिर्फ कराहते हुए उसके बाल पकड़ लिए।
रोहित ने मामी को घोड़ी बना लिया। पीछे से जोर-जोर से धक्के लगाते हुए एक हाथ से उनकी चोटी खींच रहा था और दूसरे हाथ से चूची दबा रहा था। मामी की गाँड उसकी जाँघों से टकरा-टकराकर लाल हो रही थी।
पूरा शाम इसी तरह चला। कभी किचन में, कभी सोफे पर, कभी बिस्तर पर। रोहित मामी को बार-बार चोदता, उनकी चूचियाँ दबाता, गाँड थपथपाता और गंदी बातें बोलता। मामी अब खुलेआम कराह रही थीं। उनका शरीर पसीने से तर हो चुका था।
रात होने वाली थी। रोहित अभी भी मामी के अंदर था। उसने उनके कान में कहा—
“मामी… मामा आज रात नहीं आने वाले। मैं उनकी जगह सोऊँगा। रात को आपको और मजे दूँगा… गाँड में भी लंड ठूस दूँगा। तैयार रहना।”
मामी ने सिर्फ आँखें बंद कीं और हल्के से सिर हिलाया। उनका शरीर थक चुका था, लेकिन चूत अभी भी रोहित के मोटे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
रात के लगभग ग्यारह बज चुके थे। घर में अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ था। मामा का फोन आया था कि मीटिंग लंबी चलने वाली है और वे कल सुबह ही लौट पाएंगे।
रोहित ने फोन काटते ही मामी की तरफ देखा।
मामी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। शाम भर की चुदाई से उनका शरीर थका हुआ था, लेकिन आँखों में एक अजीब सी शर्म और इच्छा दोनों साफ दिख रही थीं। रोहित ने कपड़े उतारे और नंगा होकर मामी के बगल में लेट गया। ठीक उसी जगह जहाँ रोज मामा सोते थे।
मामी ने धीमे स्वर में कहा—
“रोहित… ये सही नहीं है… मामा की जगह…”
रोहित ने जवाब में मामी को अपनी तरफ खींच लिया और उनके होंठों पर जोर से किस कर दिया। एक हाथ से उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज खोलकर भारी चूचियाँ बाहर निकाल लीं। उसने दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाना और मसलना शुरू कर दिया।
“मामी… आज रात मैं मामा की जगह हूँ। पूरी रात आपको चोदूँगा… जितना गहरा हो सके।”
रोहित ने मामी की साड़ी और पैंटी पूरी तरह उतार दी। अब मामी बिल्कुल नंगी थीं। रोहित उनके ऊपर चढ़ गया और अपना पहले से सख्त मोटा लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। मामी की चूत शाम भर की चुदाई से थोड़ी सूजी हुई और गीली थी। रोहित ने एक जोर का धक्का दिया और पूरा लंड एक बार में अंदर धँसा दिया।
मामी जोर से कराह उठीं—
“आह्ह्ह… रोहित… धीरे… बहुत अंदर तक जा रहा है…”
रोहित ने मामी की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और पूरी ताकत से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ उसका मोटा लंड मामी की चूत की गहराई तक जा रहा था। मामी की चूचियाँ उसके हाथों में दब-दब कर फैल रही थीं। रोहित कभी झुककर निप्पल चूस लेता, कभी उनके होंठ काटता।
“मामी की चूत कितनी गरम है… मामा से कितना बड़ा लंड है मेरा… महसूस हो रहा है न?”
मामी सिर्फ कराह रही थीं। उनके नाखून रोहित की पीठ में गड़ रहे थे। रोहित ने गति और तेज कर दी। बिस्तर चरमरा रहा था। मामी की आवाजें अब दब नहीं पा रही थीं।
थोड़ी देर बाद रोहित ने लंड बाहर निकाला। मामी की चूत से रस की धार बह निकली। उसने मामी को बलपूर्वक पेट के बल लिटा दिया और उनके कूल्हे ऊपर उठाए। मामी समझ गईं क्या होने वाला है। उन्होंने हल्के स्वर में विरोध किया—
“रोहित… वहाँ मत डालना… दर्द होगा…”
रोहित ने थूक लगाकर मामी की गाँड के छेद को गीला किया। फिर अपना मोटा लंड वहाँ लगाकर धीरे-धीरे धकेलने लगा। मामी की मुट्ठियाँ कस गईं और मुँह से दर्द भरी आवाज निकली।
“आह्ह्ह्ह… दर्द… निकाल… बहुत मोटा है…”
रोहित रुका नहीं। उसने धीरे-धीरे पूरा लंड मामी की गाँड में ठूस दिया। मामी का शरीर तन गया। रोहित ने उनकी कमर पकड़ी और रुक-रुक कर धक्के लगाने शुरू किए। एक हाथ से मामी की चूत में उंगली डालकर सहला रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूची जोर से दबा रहा था।
“मामी की गाँड कितनी टाइट है… आज पूरी तरह खोल दूँगा… रोज ऐसे ही चोदूँगा जब मामा नहीं होंगे।”
मामी की आवाजें अब दर्द और मजे दोनों से भरी हुई थीं। रोहित ने गति बढ़ा दी। गाँड की चुदाई करते हुए वह उनकी चोटी खींच रहा था और कभी-कभी उनके गाल पर थप्पड़ भी मार रहा था। मामी का चेहरा तकिए में धँसा हुआ था। वह कराहते हुए बड़बड़ा रही थीं।
कुछ देर बाद रोहित ने लंड गाँड से निकाला और फिर से चूत में डाल दिया। अब वह मामी को अपनी गोद में बिठाकर ऊपर-नीचे कर रहा था। मामी की भारी चूचियाँ उसके चेहरे से रगड़ खा रही थीं। रोहित दोनों चूचियों को मुँह में भर-भर कर चूस रहा था और नीचे से जोरदार धक्के लगा रहा था।
मामी खुद भी कमर हिलाने लगी थीं। उनका शरीर पसीने से तर था। रोहित ने मामी को फिर से लिटाया, उनकी दोनों टाँगें फैलाईं और पूरी गहराई तक धक्के लगाने लगा। मामी की आँखें बंद थीं। वह चरम के करीब पहुँच चुकी थीं।
रोहित की भी साँसें तेज चल रही थीं। उसने आखिरी जोरदार धक्के लगाए और मामी की चूत के अंदर ही अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गर्म धार मामी के अंदर फैल गई। उसी समय मामी भी जोर से काँपते हुए झड़ गईं। उनकी चूत रोहित के लंड को और कसकर पकड़ रही थी।
रोहित कुछ देर तक मामी के ऊपर पड़ा रहा। फिर धीरे से लंड बाहर निकाला। मामी की चूत और गाँड दोनों से उसका पानी बह रहा था। छेद थोड़े फैले हुए और लाल दिख रहे थे।
रोहित ने मामी को अपनी बाँहों में ले लिया और उनकी चूचियों को हल्के हाथों से सहलाने लगा। मामी थकी हुई आँखें खोलकर बोलीं—
“रोहित… तूने आज बहुत दूर तक कर दिया…”
रोहित ने उनके माथे पर किस किया और धीरे से कहा—
“मामी… जब भी मामा रात को नहीं आएंगे… मैं उनकी जगह सोऊँगा। और आपको ऐसे ही गहराई तक चोदूँगा… चूत में भी, गाँड में भी। आपकी दोनों छेद मेरे लंड के लिए हमेशा तैयार रहेंगी।”
मामी ने कुछ नहीं कहा। बस रोहित के सीने से चिपक गईं। बाहर रात गहरी थी और कमरे में मामी-भतीजा नंगे शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे थे। बिस्तर पर अभी भी शाम और रात की चुदाई के निशान मौजूद थे।

