भाभी की टाइट चूत में देवर ने रातभर वीर्य भरा - हिंदी सेक्स स्टोरी
भैया के जाते ही हवसी देवर ने नई-नवेली भाभी की टाइट और गरम चूत में रातभर अपना गाढ़ा वीर्य भरा। पहले धीरे से मनाने के बाद पूरी रात बर्बर तरीके से चुदाई की, छातियाँ दबाईं, गांड फाड़ी और बार-बार माल गिराया। पढ़ो यह एकदम गंदी और मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी।
राहुल की उम्र चौबीस साल थी। उसके बड़े भाई रोहन की शादी हुए अभी सिर्फ तीन महीने ही हुए थे। और रोहन की नई पत्नी… अनन्या।
अनन्या… नाम लेते ही राहुल के अंदर कुछ हिल जाता था। बाईस साल की गोरी-चिट्टी, मुलायम बदन, लंबी काली ज़ुल्फें, भारी-भरकम गोल छातियाँ जो ब्लाउज़ में दब-दब कर दिखती थीं, पतली कमर और वह गोल-गोल मांसल नितंब जो उसके स्लिम सूट में ऐसे डोलते थे जैसे कोई जादू हो। हर बार जब वह घर में घूमती, राहुल का लिंग अपने आप तन जाता।
एक रात…
राहुल सो नहीं पाया। प्यास लगी थी। वह रसोई जाने के लिए उठा। गलियारे से गुजरते हुए उसने देखा कि भाई-भाभी के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ है। अंदर से धीमी-धीमी सिसकियाँ और गीली-गीली आवाज़ें आ रही थीं।
उसने साँस रोककर झाँक लिया।
अंदर नंगा बदन… अनन्या बिल्कुल नग्न लेटी हुई थी। रोहन उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी दोनों छातियों को ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। अनन्या की आँखें बंद थीं, मुँह खुला हुआ और वह हाँफ रही थी।
“आह्ह… रोहन… धीरे… छाती फट जाएगी…”
रोहन ने जवाब में उसकी एक छाती मुँह में भर ली और दूसरी को उँगलियों से कसकर मसला। अनन्या की कमर उछल पड़ी। फिर रोहन ने उसकी टाँगें फैला दीं और अपना मोटा लिंग सीधा उसकी भीगी योनि में धकेल दिया।
“उम्मफ्फ… हाँ… अंदर तक… मार!”
राहुल देखते रहा। उसका भाई उसकी भाभी को इतनी ज़ोर से चोद रहा था कि बिस्तर की चारपाई खट-खट कर रही थी। रोहन ने अनन्या के गले को हल्का सा दबाया, उसकी छातियाँ दबाते हुए तेज़ी से पेलने लगा। अनन्या की आँखों से मज़े के आँसू निकल आए, उसकी योनि से गीली आवाज़ें आ रही थीं – थप-थप-छलप-छलप।
अचानक रोहन काँप उठा।
“अनन्या… मैं झड़ने वाला हूँ… तेरी योनि में ही…”
“हाँ… अंदर डाल… पूरा वीर्य मेरी योनि में गिरा दे…”
रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना सारा गरम वीर्य अनन्या की योनि के अंदर उड़ेलने लगा। अनन्या भी उसी समय झड़ गई, उसकी टाँगें काँप रही थीं, योनि से दूध जैसा सफेद वीर्य बाहर निकल रहा था।
राहुल वहाँ से हट गया। उसका लिंग इतना सख्त हो गया था कि पैंट में दर्द हो रहा था। उसने तुरंत बाथरूम जाकर हाथ से झड़ लिया, लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी –
मैं भी इसे ऐसे ही चोदूंगा… इसकी छातियाँ दबाऊँगा… इसकी योनि में अपना वीर्य गिराऊँगा…
अगले दिन रोहन ने बताया – “राहुल, ऑफिस का ज़रूरी काम है। मैं दो दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ। कल सुबह फ्लाइट है। अनन्या का थोड़ा ख्याल रखना।”
राहुल के अंदर शैतान जाग उठा।
पहली रात…
रोहन चला गया। घर में सिर्फ राहुल और अनन्या थे। रात के ग्यारह बजे अनन्या टीवी देख रही थी। उसने एक पतला सा नाइटी पहना हुआ था – बिल्कुल पारदर्शी। छातियाँ साफ दिख रही थीं, निप्पल्स के गहरे घेरे साफ नज़र आ रहे थे।
राहुल उसके पास बैठ गया।
“भाभी… आप बहुत खूबसूरत लग रही हो आज।”
अनन्या शर्मा गई। “राहुल… ऐसे मत बोला करो। मैं तुम्हारी भाभी हूँ।”
राहुल ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“भाभी… मैं जानता हूँ। पर मैं रोज़ रात सो नहीं पाता। कल रात मैंने… आपको और भैया को… देखा था।”
अनन्या का चेहरा लाल हो गया। वह उठने लगी, लेकिन राहुल ने उसका हाथ ज़ोर से पकड़ लिया।
“मत जाओ… प्लीज़। मैं पागल हो जाऊँगा। आपकी छातियाँ… आपकी योनि… मैं बस एक बार छूकर देखना चाहता हूँ। मैं किसी को नहीं बताऊँगा। भैया को भी नहीं।”
अनन्या की साँस तेज़ हो गई। उसके अंदर भी कुछ हिल रहा था। नई शादी के बाद भी रोहन अक्सर जल्दी थक जाता था। और राहुल… जवान, मांसपेशियों वाला, और उसकी आँखों में इतनी भूख थी…
“राहुल… यह गलत है…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
राहुल उठा और उसके बिल्कुल पास आ गया। उसने धीरे से अनन्या की नाइटी का फीता खोला। नाइटी खुलते ही उसकी बड़ी-बड़ी नग्न छातियाँ बाहर आ गईं – गोरी, मुलायम और निप्पल्स पहले से ही तन चुके थे।
राहुल ने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया।
“इतनी नरम… इतनी भारी…” उसने एक छाती मुँह में ले ली और चूसने लगा। अनन्या की आँखें बंद हो गईं।
“आह्ह… राहुल… नहीं… मत करो…”
लेकिन उसने रोका नहीं। उसके हाथ अनन्या की कमर पर फिसलते हुए उसके नितंबों पर चले गए। उसने नाइटी बिल्कुल उतार दी। अनन्या अब पूरी नग्न थी।
राहुल ने उसे सोफे पर लिटाया। उसने उसकी टाँगें फैला दीं। अनन्या की योनि बिल्कुल गीली थी – बालों से भीगी हुई।
“भाभी… आप भी गीली हो गई हो…”
उसने जीभ निकालकर एक लंबा स्पर्श किया उसकी योनि पर। अनन्या की कमर उछल पड़ी।
“उम्म्ह… राहुल… आँह… वहाँ… जीभ अंदर डालो…”
राहुल ने उसकी योनि चाटना शुरू कर दी – धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से। उसने भगशेफ को मुँह में लेकर चूसा, दो उँगलियाँ अंदर डालकर पेलने लगा। अनन्या हाथ से उसके बाल पकड़कर अपनी योनि पर दबा रही थी।
“मैं झड़ने वाली हूँ… राहुल… रुको… आह्ह्ह!”
अनन्या ज़ोर से काँपी और उसकी योनि से पानी जैसा रस राहुल के मुँह पर गिरने लगा। राहुल ने सब चाट लिया।
फिर उसने अपनी पैंट उतारी। उसके लिंग ने आठ इंच का कड़ा, नसों वाला लिंग खड़ा था। अनन्या ने आँखें खोलकर देखा तो उसके मुँह से आवाज़ निकल गई।
“इतना बड़ा… रोहन से भी बड़ा…”
राहुल उसके ऊपर चढ़ गया। उसने लिंग को अनन्या की योनि के छेद पर रखा और धीरे से धकेलना शुरू किया।
“आह्ह… धीरे… फट जाएगी… उम्मफ्फ!”
एक धक्के में आधा लिंग अंदर चला गया। अनन्या ने उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। राहुल ने और धक्का मारा – पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया।
फिर शुरू हुआ असली मज़ा।
राहुल ने उसकी दोनों छातियाँ पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए पेलना शुरू किया। हर धक्के पर अनन्या की छातियाँ हिल रही थीं।
“भाभी… कितनी टाइट हो… कितनी गरम…”
“राहुल… और ज़ोर से… हाँ… वहीं… आँह… चोद दो अपनी भाभी को…”
राहुल पागल हो गया। उसने अनन्या की टाँगें अपने कंधों पर उठा लीं और इतनी तेज़ी से पेलने लगा कि सोफा खटखटा रहा था। अनन्या की सिसकियाँ घर में गूँज रही थीं।
“मैं… मैं झड़ने वाला हूँ भाभी…”
“अंदर… अंदर डाल… मेरी योनि में अपना वीर्य गिरा… बिल्कुल भैया जैसा…”
राहुल ने एक गहरा धक्का मारा और अपना पूरा गरम, गाढ़ा वीर्य अनन्या की योनि के अंदर उड़ेलने लगा। अनन्या भी साथ में झड़ गई – उसकी योनि राहुल के लिंग को बार-बार सिकोड़ रही थी।
दोनों हाँफ रहे थे। राहुल अभी भी उसके अंदर था। उसने अनन्या के माथे को चूमते हुए कहा –
“भाभी… यह सिर्फ शुरुआत है। कल रात… मैं तुम्हें पूरी रात चोदूंगा। पाँच घंटे… बिना रुके। तुम्हारी हर चीज़… हर तरह से।”
अनन्या ने आँखें खोलकर उसकी आँखों में देखा। शर्म भी थी, डर भी था… लेकिन उसकी योनि अभी भी राहुल के लिंग को पकड़े हुए थी। उसने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा –
“कल… देख लेंगे…”
राहुल ने उसकी छाती दोबारा मुँह में ले ली और धीरे से काटते हुए बोला –
“कल नहीं… कल से तुम सिर्फ मेरी हो। मेरी रंडी भाभी।”
दूसरी रात।
घर बिल्कुल सुनसान था। सिर्फ एक मंद रोशनी लाउंज में जल रही थी। अनन्या बाथरूम से निकलकर आई। उसने सोचा था राहुल सो गया होगा… लेकिन नहीं।
राहुल उसके बेडरूम के दरवाज़े पर खड़ा था। सिर्फ एक काला लोअर पहने हुए। उसकी छाती पर पसीना चमक रहा था और लोअर में उसका लिंग पहले से ही तना हुआ था।
अनन्या का दिल धड़कने लगा। “राहुल… कल रात जो हुआ… वह एक बार था। अब मत करो। मैं तुम्हारी भाभी हूँ…”
राहुल धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने अनन्या का हाथ पकड़ा और उसकी पीठ को दीवार से सटा दिया।
“भाभी… कल तुमने मेरी योनि में वीर्य लिया था। आज मैं तुम्हें याद दिलाऊँगा कि तुम मेरी हो। पूरी रात। पाँच घंटे। बिना रुके।”
उसने अनन्या की नाइटी को एक झटके में फाड़ दिया। नाइटी के टुकड़े फर्श पर गिर गए। अनन्या बिल्कुल नग्न थी – बड़ी-बड़ी गोरी छातियाँ, तने हुए निप्पल्स और उसकी योनि अभी भी कल रात के वीर्य से थोड़ी गीली थी।
राहुल ने उसकी दोनों छातियाँ पकड़ लीं और ज़ोर से दबाया। “इतनी नरम… इतनी भारी… मैं इन्हें आज रात सुजा दूँगा।”
उसने एक छाती मुँह में भर ली और काटते हुए चूसने लगा। दूसरी छाती को उँगलियों से इतना मसला कि अनन्या की आवाज़ निकल गई। “आह्ह… राहुल… दर्द… धीरे…!”
“दर्द में मज़ा आता है ना भाभी?” राहुल ने उसके कान में साँस छोड़ते हुए कहा। “बोल… कितना दर्द चाहिए?”
अनन्या शर्माकर मुँह फेरने लगी, लेकिन राहुल ने उसका मुँह पकड़ लिया। “बोल ना… ‘राहुल भैया, मेरी छाती तोड़ दो’।”
अनन्या की आँखें नम हो गईं। फिर उसने हल्की आवाज़ में कहा – “राहुल… मेरी छाती… तोड़ दो…”
राहुल पागल हो गया। उसने अनन्या को उठाया और बिस्तर पर फेंक दिया। उसने उसकी टाँगें फैला दीं और बिना किसी चेतावनी के अपना पूरा आठ इंच का कड़ा लिंग एक ही धक्के में उसकी योनि में घुसा दिया।
“उम्मफ्फ्फ… आह्ह्ह… रोहन से बड़ा है… फट गई…!”
राहुल ने उसके दोनों हाथ ऊपर पकड़ लिए और तेज़ी से पेलना शुरू किया। हर धक्के पर बिस्तर खट-खट कर रहा था। अनन्या की छातियाँ उसके चेहरे पर बार-बार पड़ रही थीं।
“भाभी… बोल… कैसी लग रही है तेरी योनि?” “बहुत… बहुत भरी हुई… आँह… और अंदर… पूरा डाल…!”
राहुल ने रफ्तार बढ़ा दी। वह अब इतनी तेज़ी से चोद रहा था कि अनन्या की आवाज़ें चीखने लगी थीं। उसने उसका गला हल्का सा दबाया। “चुपचाप ले… मेरी रंडी भाभी। आज मैं तुझे छोड़ने वाला नहीं।”
अनन्या की आँखें मज़े से लाल हो गईं। उसने अपनी टाँगें राहुल की पीठ से लपेट लीं। “मार… और ज़ोर से मार… मेरी योनि फाड़ दे… आह्ह राहुल…!”
पहला घंटा:
राहुल ने पूरा एक घंटा उसे इसी अवस्था में चोदा। बीच-बीच में रुककर उसकी छातियाँ दबाता, काटता, थप्पड़ मारता। अनन्या दो बार झड़ चुकी थी, उसकी योनि से पानी निकल-निकलकर बिस्तर भीग चुका था। राहुल अभी तक नहीं झड़ा था।
वह निकल आया। अनन्या हाँफ रही थी। “राहुल… बस… थक गई…”
राहुल मुस्कुराया। “अभी तो शुरुआत है भाभी। अब तेरी गाँड की बारी।”
उसने अनन्या को पेट के बल लिटाया। उसके नीचे दो तकिए रख दिए ताकि उसकी गाँड ऊपर उठी रहे। फिर उसने थूक से अपना लिंग गीला किया और अनन्या की टाइट गाँड के छेद पर लिंग रख दिया।
“नहीं… राहुल… वहाँ नहीं… पहली बार है… आह्ह!”
राहुल ने धीरे से धक्का मारा। आधा लिंग अंदर गया। अनन्या ने चादर पकड़ ली। “दर्द… निकाल… प्लीज़…!”
राहुल झुककर उसके कान में बोला – “सह ले भाभी… थोड़ी देर बाद मज़ा आएगा। मैं धीरे कर रहा हूँ… देख।”
उसने धीरे-धीरे पूरा लिंग उसकी गाँड में घुसा दिया। फिर रुक गया। अनन्या की साँसें तेज़ थीं। “बोल… अंदर है पूरा?” “हाँ… पूरा… बहुत बड़ा… आँह…”
फिर राहुल ने पेलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज़। अनन्या की गाँड की छप-छप आवाज़ निकलने लगी। उसने एक हाथ आगे बढ़ाकर अनन्या की योनि में दो उँगलियाँ डाल दीं और भगशेफ दबाने लगा।
“देख कैसे एक साथ दोनों छेद ले रही है मेरी भाभी…”
अनन्या पागल हो चुकी थी। “राहुल… और तेज़… गाँड में मार… हाँ… वहीं… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह!”
वह ज़ोर से काँपी। उसकी गाँड राहुल के लिंग को सिकोड़ने लगी। राहुल ने उसी समय अपना पहला वीर्य उसकी गाँड के अंदर छोड़ दिया – गरम-गरम, लंबा और गाढ़ा।
दूसरा और तीसरा घंटा:
राहुल ने अनन्या को उठाया। अब वह बिल्कुल ढीली हो चुकी थी, बदन हिल रहा था।
उसने उसे कुत्ते की तरह (डॉगी) किया – बाल पकड़कर, छाती दबाते हुए, कभी योनि में, कभी गाँड में। फिर उसे अपनी गोद में बिठाकर (काउगर्ल) चोदा, ताकि अनन्या खुद ऊपर-नीचे हो। अनन्या की बड़ी छातियाँ उसके मुँह में जाती रहीं।
“छातियाँ मेरे मुँह में दे… हाँ… ऐसे… काटूँ क्या?” “काट… थोड़ा काट… आँह राहुल… मैं तेरी हूँ… पूरी तेरी…!”
फिर खड़े होकर सेक्स – दीवार के साथ। राहुल ने अनन्या की एक टाँग ऊपर उठाई और इतनी तेज़ी से पेला कि अनन्या की चीखें निकलने लगीं।
बीच में वह उसे रसोई ले गया। काउंटर पर लिटाया, फ्रिज खोलकर बर्फ के टुकड़े निकाले और उसकी छातियों व योनि पर फेरने लगा। अनन्या काँप रही थी। “ठंडा… आँह… अब गरम लिंग डालो… प्लीज़…!”
राहुल ने बर्फ के बाद अपना गरम लिंग उसकी योनि में धकेल दिया। अनन्या चिल्लाई।
चौथा और पाँचवाँ घंटा:
रात के तीन बज चुके थे। अनन्या अब बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ सिसकियाँ और “राहुल… राहुल…” निकल रहा था। उसके बदन पर लाल निशान थे – छातियों पर दाँतों के, गाँड पर थप्पड़ों के, गले पर उँगलियों के।
राहुल ने उसे बिस्तर पर लिटाया। अब आखिरी दौर।
उसने अनन्या के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया। आँखों में आँखें डालकर बोला –
“भाभी… मैं तुझे प्यार करता हूँ। पागल हूँ तेरे लिए। भैया के जाते ही मैं तुझे अपनी बना लूँगा। तू मेरी रखैल बनेगी… मेरी निजी रंडी।”
अनन्या की आँखों से आँसू निकल आए – मज़े और भावनाओं दोनों के। “राहुल… मैं भी… तेरी हूँ… आज से… बस चोदते रह… मत रुक… आँह!”
राहुल ने उसकी टाँगें उसके कंधों तक मोड़ दीं (फुल मीटिंग प्रेस)। फिर पूरी ताकत से पेलना शुरू किया।
पाँच मिनट… दस मिनट… बीस मिनट… अनन्या इस दौर में चार बार झड़ चुकी थी। उसकी योनि से लगातार पानी निकल रहा था। राहुल का लिंग अब पक्का मशीन की तरह काम कर रहा था – अंदर-बाहर, अंदर-बाहर।
आखिर में राहुल ने उसका गला थोड़ा ज़ोर से दबाया, उसकी आँखों में देखा और कहा –
“अब ले मेरी पूरी नशा… मेरी भाभी…”
उसने एक गहरा, लंबा धक्का मारा और अपना दूसरा बड़ा वीर्य सीधा उसकी कोख के अंदर उड़ेलने लगा। इतना ज़्यादा कि बाहर निकलने लगा। अनन्या भी उसी समय सबसे बड़ी झड़ के साथ झड़ गई – बिस्तर पूरा गीला हो गया।
राहुल उसके ऊपर गिरा पड़ा रहा। दोनों हाँफ रहे थे। पसीने से लिपटे हुए।
राहुल ने धीरे से अनन्या के होंठ चूमे। “थक गई?”
अनन्या ने आँखें मुश्किल से खोलीं। मुस्कुराते हुए, बिल्कुल टूटी हुई आवाज़ में बोली –
“पाँच घंटे… तूने सच में पाँच घंटे चोदा… अब मैं चल नहीं पाऊँगी… तू ही उठाना कल सुबह…”
राहुल ने उसकी छाती दबाते हुए कहा – “कल सुबह भी लूँगा। और जब भैया आएगा… तब भी चुपके से। तू मेरी है अनन्या। मेरी गरम, सेक्सी, रंडी भाभी।”
अनन्या ने उसके सीने पर सिर रख दिया। “हाँ… तेरी। अब सो जा… मेरे यार।”
बाहर ऊँघी निकल रही थी। अंदर दो बदन लिपटे हुए थे – एक बिल्कुल चुदी हुई, सुजी हुई छातियों और गीली योनि वाली भाभी… और एक जवान देवर जो अब उसका असली मालिक बन चुका था।
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