बेटी ने बाप का हाथ अपनी गीली चुत पर रखा - पापा रात भर चोदो
बेटी ने खुद बाप का हाथ अपनी गीली चुत पर रखा और कहा – पापा आज रात भर चोदो। 24 साल की जवान बेटी ने बाप को उकसाया, फिर पूरी रात हर पोजीशन में चुदी। पहली बार, गाँड तक, सुबह तक माल से भरी रही। मना करने का कोई मौका ही नहीं दिया!

विकास 48 साल का था। पत्नी की मौत को तीन साल हो चुके थे। घर में सिर्फ़ वही और उसकी 24 साल की बेटी आराध्या रहती थी।
आराध्या एकदम जवान और सेक्सी थी। 5 फुट 5 इंच की ऊँचाई, गोरी चमकदार त्वचा, लंबे काले बाल, पतली कमर, गोल टाइट गाँड और भरे हुए स्तन जो टी-शर्ट में भी साफ़ उभरते थे। कॉलेज खत्म करके अब वो घर से ही ऑनलाइन काम करती थी। घर में अक्सर छोटी शॉर्ट्स और पतली टॉप पहनकर घूमती थी। विकास की नज़रें कई बार उसकी जाँघों और स्तनों पर ठहर जातीं, लेकिन वो खुद को रोक लेता था।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से आराध्या का व्यवहार बदल गया था। वो जानबूझकर पिता के सामने और भी बोल्ड कपड़े पहनने लगी थी। कभी शॉर्ट्स इतनी छोटी कि गाँड के गाल झाँक जाते, कभी बिना ब्रा के पतली टॉप जिसमें निप्पल साफ़ दिखते। कभी देर रात लिविंग रूम में आकर टीवी देखने बैठती और पिता के बिल्कुल पास सट जाती।
एक शाम की बात है। बाहर बारिश हो रही थी। विकास अपने कमरे में लैपटॉप पर काम कर रहा था। दरवाज़ा खुला था। आराध्या अंदर आई। उसने सिर्फ़ एक ओवरसाइज़्ड टी-शर्ट पहनी हुई थी — शायद नीचे कुछ भी नहीं। टी-शर्ट जाँघों के बीच तक थी। वो बिस्तर के किनारे बैठ गई।
“पापा… आज अकेला महसूस हो रहा है,” उसने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी आँखों में एक अजीब चमक थी।
विकास ने लैपटॉप बंद किया। “क्या बात है बेटा?”
आराध्या ने अचानक उनका हाथ पकड़ लिया और अपनी जाँघ पर रख दिया। टी-शर्ट थोड़ी ऊपर खिसक गई। नंगी जाँघ की गर्माहट विकास के हाथ में महसूस हुई। वो सहम गया।
“पापा… मैंने देखा है आप मुझे कैसे देखते हो,” आराध्या ने धीरे से कहा। “मैं भी… आपको देखती हूँ। माँ के जाने के बाद आपने किसी को नहीं छुआ। मैं जानती हूँ।”
विकास ने हाथ खींचने की कोशिश की, लेकिन आराध्या ने और कस लिया। वो धीरे-धीरे और पास खिसक आई। टी-शर्ट और ऊपर हो गई। अब साफ़ दिख रहा था — उसके नीचे कुछ भी नहीं था। चिकनी, मुंडाई हुई चुत हल्की गीली लग रही थी।
“आराध्या… ये गलत है… मैं तुम्हारा बाप हूँ…” विकास की आवाज़ काँप रही थी, लेकिन उनकी नज़रें बेटी की नंगी चुत पर टिकी थीं।
आराध्या मुस्कुराई। उसने पिता का हाथ पकड़कर अपनी चुत पर रख दिया। “छू के देखो पापा… कितनी गीली हूँ सिर्फ़ आपके लिए।”
विकास की उँगलियाँ उसकी नरम, गरम और गीली चुत को छू गईं। आराध्या ने हल्की सी आह भरी। “आह्ह… पापा…”
उस पल विकास का संयम टूट गया। सालों का दबा हुआ वासना एक झटके में बाहर आ गई। उसने बेटी को खींचकर अपनी छाती से लगा लिया और उसके होंठों को चूम लिया। आराध्या ने पूरा साथ दिया। दोनों के होंठ एक-दूसरे में गुँथ गए। जीभें मिल गईं।
विकास ने टी-शर्ट ऊपर खींचकर निकाल दी। आराध्या पूरी नंगी हो गई। भरे हुए गोल स्तन, सख्त निप्पल, पतली कमर और वह चमकदार गीली चुत। विकास ने एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। आराध्या की उँगलियाँ उनके बालों में घुस गईं।
“पापा… और… जोर से…” वो कराह उठी।
विकास ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। खुद उसके ऊपर आ गए। अपनी पैंट और कमीज जल्दी-जल्दी उतारी। उनका मोटा, सख्त लंड बाहर निकल आया। आराध्या की आँखें चौड़ी हो गईं, लेकिन उसमें डर नहीं, बल्कि भूख थी।
“पापा… बड़ा है आपका…” उसने फुसफुसाते हुए कहा और हाथ बढ़ाकर लंड को पकड़ लिया। ऊपर-नीचे करने लगी।
विकास ने उसके पैर फैलाए। लंड को उसकी चुत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। सिर्फ़ आधा अंदर गया। आराध्या की भौंहें सिकुड़ गईं।
“आह्ह्ह… पापा… धीरे… पहली बार है…”
विकास रुक गए। “दर्द हो रहा है?”
आराध्या ने सिर हिलाया, फिर मुस्कुराई। “थोड़ा… लेकिन मत रुको। अंदर तक डालो।”
विकास ने धीरे-धीरे और अंदर धकेला। पूरा लंड उसकी टाइट चुत में समा गया। दोनों हांफने लगे। आराध्या की चुत ने पिता के लंड को कसकर पकड़ रखा था।
फिर विकास ने धीरे-धीरे चलाना शुरू किया। हर धक्के के साथ आराध्या की आहें तेज़ होती गईं। “आह्ह… पापा… और गहरा… हाँ… ऐसे…”
विकास ने गति बढ़ा दी। बिस्तर चरमरा रहा था। आराध्या के स्तन हर धक्के के साथ हिल रहे थे। विकास ने उन्हें दबोच रखा था और निप्पल चूस रहे थे। आराध्या की टाँगें उनकी कमर से लिपट गईं।
“पापा… मैं… मैं आने वाली हूँ…” आराध्या ने कर्कश आवाज़ में कहा।
विकास ने और तेज़ चोदा। कुछ ही पल में आराध्या जोर से कराह उठी और झड़ गई। उसकी चुत ने लंड को बार-बार जकड़ लिया। विकास भी अपने को रोक नहीं पाए। कुछ और जोरदार धक्कों के बाद उन्होंने गहरी कराह के साथ बेटी की चुत के अंदर ही सब कुछ उड़ेल दिया।
दोनों पसीने से तरबतर बिस्तर पर लेते रहे। विकास अभी भी अंदर थे। आराध्या ने उनकी पीठ सहलाते हुए कहा, “पापा… ये सिर्फ़ शुरुआत है। आज रात भर मुझे चोदना। मैं आपकी हूँ।”
विकास ने उसकी आँखों में देखा। अब कोई ग्लानि नहीं थी। सिर्फ़ वासना थी। उन्होंने धीरे से फिर से हिल्स करना शुरू कर दिया। लंड फिर से सख्त होने लगा था।
बारिश अभी भी जोरों पर थी। कमरे में सिर्फ़ पसीने और सेक्स की गंध फैली हुई थी। विकास अभी भी आराध्या के अंदर थे। उनका लंड थोड़ा नरम पड़ा था, लेकिन बेटी के शब्दों ने फिर से आग लगा दी थी।
“रात लंबी है बेटा… आज तुम्हें पूरा सिखाऊँगा।”
आराध्या मुस्कुराई। उसने पिता के कंधों को पकड़कर उन्हें अपनी ओर और खींच लिया। “तो सिखाओ पापा… मैं तैयार हूँ।”
विकास ने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की। आराध्या की चुत अभी भी गीली और संवेदनशील थी। हर धीमे धक्के पर वो हल्की आहें भर रही थी। कुछ ही देर में विकास का लंड फिर पूरी तरह सख्त हो गया और आराध्या की टाइट चुत में गहराई तक धँस गया।
इस बार विकास जल्दबाजी में नहीं थे। उन्होंने बेटी के दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख दिए। इस पोजीशन में उनका लंड और भी गहरा जा रहा था। आराध्या की आँखें बंद थीं, मुँह半开, और हर धक्के के साथ लंबी कराह निकल रही थी।
“आह्ह्ह… पापा… वहाँ… बहुत गहरा लग रहा है…”
विकास ने झुककर उसके स्तनों को मुँह में लिया। एक-एक करके चूसा, काटा, जीभ से घुमाया। आराध्या की उँगलियाँ उनके बालों में उलझ गईं। वो पिता के सिर को और अपने सीने से चिपकाए हुए थी।
थोड़ी देर बाद विकास ने अचानक लंड बाहर निकाला। आराध्या की चुत खाली होने पर वो हल्की सी सिसक उठी। विकास ने उसे पलटा और घुटनों के बल झुका दिया। आराध्या की गोल, टाइट गाँड अब उनके सामने थी। उन्होंने दोनों गालों को फैलाया और थूक लगाकर लंड फिर से चुत में डाल दिया।
अब वो पीछे से जोर-जोर से चोदने लगे। हर धक्के के साथ आराध्या की गाँड थपथपा रही थी। विकास ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसकी क्लिट को मसलना शुरू किया। आराध्या पागलों की तरह कराहने लगी।
“पापा… और तेज… हाँ… ऐसे ही… आह्ह्ह…”
विकास ने उसकी लंबी काली बालों को मुट्ठी में भर लिया और हल्के से खींचा। आराध्या की गर्दन पीछे की ओर मुड़ गई। दोनों की नज़रें आईने में मिल गईं। आराध्या मुस्कुरा रही थी — पूरी तरह डूबी हुई, पूरी तरह वासना में।
“देखो खुद को… कितनी सुंदर लग रही हो मेरे लंड पर,” विकास ने भारी आवाज़ में कहा।
आराध्या ने आईने में अपनी नंगी बॉडी, हिलते स्तन और पिता का मोटा लंड अपनी चुत में जाता हुआ देखा। नजारा इतना तेज़ था कि वो फिर से सीमा के करीब पहुँच गई।
“पापा… मैं… फिर से आने वाली हूँ…”
विकास ने गति और बढ़ा दी। कुछ ही पल में आराध्या जोरदार तरीके से काँप उठी। उसकी चुत ने पिता के लंड को बार-बार जकड़ लिया। पैर काँप रहे थे। विकास ने उसे सँभालते हुए खुद भी रुकने की कोशिश की, लेकिन बेटी की टाइट चुत ने उन्हें भी सीमा पार करवा दिया। उन्होंने गहरी कराह के साथ फिर से उसके अंदर ही सब कुछ उड़ेल दिया।
दोनों बिस्तर पर ढेर हो गए। विकास ने आराध्या को अपनी छाती से लगा लिया। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं।
थोड़ी देर बाद आराध्या ने सिर उठाया। उसकी आँखों में अभी भी भूख बाकी थी। “पापा… अभी थके नहीं न?”
विकास हँसे। “तुम्हारे लिए? कभी नहीं।”
आराध्या उठकर बैठ गई। उसने पिता के नरम पड़े लंड को हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर झुककर उसे मुँह में ले लिया। विकास की साँस अटक गई। आराध्या पहली बार ऐसा कर रही थी, लेकिन बड़ी लगन से चूस रही थी। जीभ से चाट रही थी, ऊपर-नीचे कर रही थी, कभी-कभी आँखें उठाकर पिता को देख रही थी।
कुछ ही देर में लंड फिर सख्त हो गया। आराध्या ने उसे मुँह से निकाला और विकास की गोद में आमने-सामने बैठ गई। उसने खुद लंड को अपनी चुत पर सही किया और धीरे-धीरे अंदर ले लिया।
अब वो खुद ऊपर-नीचे हो रही थी। स्तन विकास के चेहरे के सामने हिल रहे थे। विकास ने दोनों स्तनों को मुँह में भर-भरकर चूसा। आराध्या की गति बढ़ती गई। चप-चप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
“पापा… मुझे अपनी गाँड में भी लेना है,” आराध्या ने अचानक कर्कश आवाज़ में कहा।
विकास की आँखें चौड़ी हो गईं। “पक्का?”
आराध्या ने सिर हिलाया। “हाँ… आज रात सब कुछ चाहिए।”
विकास ने उसे बिस्तर पर लिटाया। आराध्या के पेट के बल लेटने को कहा। उन्होंने दराज से तेल निकाला और आराध्या की गाँड पर लगाया। उँगली से धीरे-धीरे छेद को ढीला किया। आराध्या की साँसें तेज़ हो गईं, लेकिन उसने मना नहीं किया।
जब विकास ने लंड का सिरा गाँड पर रखा और धीरे से धक्का दिया, आराध्या ने चादर कसकर पकड़ ली। “आह्ह्ह… पापा… दर्द… लेकिन मत रुको…”
विकास बहुत धीरे-धीरे अंदर गए। पूरा लंड समा जाने पर दोनों रुक गए। आराध्या की पीठ पसीने से तर थी। विकास ने झुककर उसके कंधे चूमे और धीरे-धीरे हिलना शुरू किया।
दर्द धीरे-धीरे आनंद में बदलने लगा। आराध्या फिर से कराहने लगी। विकास ने एक हाथ उसकी चुत में डालकर क्लिट सहलानी शुरू की। दोहरी अनुभूति से आराध्या पागल हो गई।
रात के ढलते पहर तक विकास ने बेटी को हर तरह से भोगा। कभी बिस्तर पर, कभी कुर्सी पर बैठाकर, कभी खिड़की के पास खड़ा करके जहाँ बाहर अंधेरा और बारिश थी। आराध्या कभी नीचे थी, कभी ऊपर, कभी घुटनों के बल। उसकी चुत और गाँड दोनों विकास के माल से भरी हुई थीं।
सुबह के करीब चार बजे दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। आराध्या की उँगलियाँ पिता की छाती पर घूम रही थीं।
“पापा… अब से रोज़ रात ऐसे ही होगी न?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
विकास ने उसके माथे को चूमा। “जब तक तुम चाहोगी बेटा… तुम अब सिर्फ़ मेरी हो।”
आराध्या मुस्कुराई और आँखें बंद कर लीं। बाहर बारिश थम चुकी थी, लेकिन कमरे के अंदर बाप-बेटी की नई जिंदगी की शुरुआत हो चुकी थी।

