बेटी की बड़ी चूचियाँ दबा-दबा कर रात भर चोदा पापा ने
पापा ने बेटी की बड़ी चूचियाँ दबा-दबा कर रात भर जोर से चोदा। टाइट चूत और गोल गांड दोनों में लंड ठूसकर बेटी को पूरी तरह अपना बना लिया।

पापा ऑफिस से जल्दी आ गए थे। माँ अपनी बहन के यहाँ तीन दिन के लिए गई हुई थी। घर में सिर्फ पापा राजेश और बेटी नैनसी रह गए थे। नैनसी 21 साल की थी। कॉलेज की लड़की। गोरी रंगत, बहुत बड़ी और भारी चूचियाँ, पतली कमर और उभरी हुई गोल गांड। आज उसने टाइट व्हाइट टॉप और छोटी जींस पहनी हुई थी। टॉप इतना टाइट था कि उसकी चूचियों की पूरी शेप और निप्पल की गांठ साफ दिख रही थी।
रात के 10 बज रहे थे। नैनसी टीवी देख रही थी। राजेश उसके पास आकर बैठ गए। उनकी नजर बार-बार बेटी की भारी चूचियों पर जा रही थी।
“नैनसी… आजकल तू बहुत सेक्सी लगने लगी है,” राजेश ने धीमे से कहा।
नैनसी मुस्कुराई, “पापा… आप भी ना।”
राजेश ने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया। “नहीं बेटी… सच में। तेरी ये बड़ी चूचियाँ… और ये गांड… दिन भर मन करता है।”
नैनसी का चेहरा लाल हो गया लेकिन वो हटी नहीं। राजेश का हाथ धीरे-धीरे ऊपर सरकने लगा। टॉप के अंदर जाकर उन्होंने सीधे उसकी ब्रा के ऊपर से भारी चूची को पकड़ लिया और जोर से दबाया।
“आह्ह पापा…” नैनसी की हल्की कराह निकल गई।
राजेश ने दूसरी चूची भी पकड़ ली। दोनों हाथों से मसलने लगे। निप्पल को उंगलियों से पिंच किया। नैनसी की साँसें तेज हो गईं।
“पापा… ये गलत है…” उसने कमजोर आवाज में कहा।
“गलत है तो क्यों नहीं रोक रही?” राजेश ने टॉप ऊपर उठा दिया और ब्रा के हुक खोल दिए। नैनसी की बहुत बड़ी, गोरी और भारी चूचियाँ बाहर आ गईं। राजेश ने एक चूची मुँह में ले ली और जोर से चूसने लगे। दूसरी को हाथ से मसल रहे थे।
नैनसी की आँखें बंद हो गईं। “पापा… जोर से चूसो… आाह्ह…”
राजेश ने दोनों चूचियों पर थप्पड़ मारे। चूचियाँ हिलने लगीं। फिर उन्होंने नैनसी को सोफे पर लिटा दिया। जींस और पैंटी एक साथ खींच ली। नैनसी की चिकनी चूत और गोल गांड अब नंगी थी।
राजेश ने अपने कपड़े उतारे। उनका मोटा लंबा लंड बाहर निकल आया। नैनसी की आँखें फटी रह गईं।
“इतना बड़ा… पापा…”
राजेश ने लंड उसके होठों पर रगड़ा। “चूस इसे बेटी। आज अपने पापा का लंड चख।”
नैनसी ने मुँह खोला। राजेश ने लंड अंदर ठूस दिया। नैनसी आँखों में पानी लाकर गहराई तक चूस रही थी। राजेश उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोद रहे थे।
10 मिनट बाद उन्होंने लंड निकाला और नैनसी के पैर फैला दिए। बिना किसी कंडोम के सीधे उसकी गीली चूत में एक झटके में आधा लंड घुसा दिया।
“आआह्ह पापा… इतना मोटा!” नैनसी चिल्लाई।
राजेश ने और धक्का दिया। पूरा लंड उसकी टाइट चूत में समा गया। फिर उन्होंने कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। नैनसी की बड़ी चूचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। राजेश एक हाथ से उन्हें मसल रहे थे, थप्पड़ मार रहे थे।
“तेरी चूत कितनी टाइट है बेटी… और ये चूचियाँ… पागल कर रही हैं,” राजेश हांफते हुए बोले।
“पापा… और जोर से… चूची दबाओ… आाह्ह,” नैनसी खुद मांग रही थी।
राजेश ने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और फुल पावर से ठोकने लगे। हर धक्के के साथ नैनसी की चूचियाँ उसके चेहरे पर गिर रही थीं। राजेश उन्हें मुँह में लेकर चूस रहे थे, काट रहे थे।
नैनसी का पहला ऑर्गैज्म आ गया। उसकी चूत जोर से सिमट गई। राजेश रुके नहीं। उन्होंने स्पीड और बढ़ा दी।
“एक और बार झेल बेटी,” कहकर और रफली चोदने लगे।
नैनसी का दूसरा ऑर्गैज्म भी आ गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए मजे से।
आखिर में राजेश जोर से बोले, “अंदर छोड़ूँ अपनी सेक्सी बेटी के अंदर?”
“हाँ पापा… अंदर ही भर दो… आाह्ह,” नैनसी ने कहा।
राजेश ने लास्ट के जोरदार धक्के मारे और नैनसी की चूत में गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया। इतना कि थोड़ा बाहर भी निकल आया।
दोनों हांफते हुए पड़े रहे। राजेश का लंड अभी भी अंदर था। उन्होंने नैनसी की बड़ी चूची को फिर से दबाते हुए कहा, “ये तो सिर्फ शुरुआत है बेटी। आज रात तेरी गांड भी खोलनी है। और कल भी… जब तक माँ नहीं आती।”
नैनसी ने आँखें खोलकर देखा। “पापा… मेरी गांड भी…?”
राजेश मुस्कुराए और उसकी चूची पर एक जोर का थप्पड़ मारा। “हाँ। अभी थोड़ा आराम कर। फिर पेट के बल लेटना। आज तेरी गोल गांड में भी लंड जाएगा।”
नैनसी की साँसें अभी भी तेज थीं। लेकिन उसने सिर हिला दिया।
“जी पापा… मैं तैयार हूँ।”
थोड़ा आराम करने के बाद राजेश ने नैनसी से कहा, “अब पेट के बल लेट जा बेटी।”
नैनसी बिस्तर पर पेट के बल लेट गई। उसकी गोल और उभरी हुई गांड हवा में उठी हुई थी। राजेश ने दोनों हाथों से उसकी गांड को मसलना शुरू किया। जोर-जोर से दबाया, थप्पड़ मारे। नैनसी की गांड लाल होने लगी।
“पापा… जोर से मारो,” नैनसी ने तकिया दबाते हुए कहा।
राजेश ने तेल निकाला और उसकी गांड के छेद पर अच्छी तरह लगाया। उंगली से अंदर तक मला। नैनसी सिसक रही थी। फिर राजेश ने अपना लंड उसकी गांड की दरार में रखकर देर तक रगड़ा। जब लंड अच्छी तरह गीला हो गया तो उन्होंने सिर छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाव दिया।
“आह्ह पापा… दर्द हो रहा है…” नैनसी की आवाज निकली।
“सहन कर बेटी… अभी मजा आएगा,” राजेश ने कहा और एक जोर का धक्का दिया।
आधा लंड उसकी गांड में चला गया। नैनसी की आँखों से आँसू आ गए। राजेश रुके, फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेलते गए। पूरा मोटा लंड उसकी गांड में समा गया।
“अब पूरा अंदर है बेटी… तेरी गांड में,” राजेश ने कहा।
फिर बहुत धीमे धक्के शुरू किए। नैनसी की कराहें दर्द और मजे की मिली-जुली थीं। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ने लगी। राजेश एक हाथ से उसकी बड़ी चूचियों को नीचे से मसल रहे थे।
“पापा… अब थोड़ा तेज… आाह्ह,” नैनसी बोल बैठी।
राजेश ने स्पीड बढ़ा दी। गांड पर थप्पड़ मार-मार कर जोर-जोर से ठोकने लगे। नैनसी की बड़ी चूचियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। उसका ऑर्गैज्म गांड में लंड रहते हुए ही आ गया। चूत से पानी निकल आया।
राजेश ने और 15 मिनट लगातार गांड चोदी। आखिर में जोर से धक्के मारकर उसकी गांड में ही गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। निकालने पर सफेद वीर्य छेद से बाहर आने लगा।
दोनों पसीने से तर थे। राजेश ने नैनसी को घुमाया और उसकी बड़ी चूचियों को फिर से मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगे, काटने लगे, थप्पड़ मारने लगे।
“पापा… फिर से खड़ा हो गया…” नैनसी ने हैरानी से कहा।
राजेश मुस्कुराए। “तेरी ये भारी चूचियाँ और गांड देखकर बार-बार खड़ा हो जाएगा।”
उन्होंने नैनसी को ऊपर बैठा लिया। नैनसी ने खुद लंड अपनी चूत में डाल लिया और उछल-उछल कर बैठने लगी। उसकी बड़ी चूचियाँ राजेश के चेहरे पर गिर-गिर रही थीं। राजेश उन्हें मुँह में लेकर चूस रहे थे।
“और तेज बैठ बेटी… अपनी चूचियाँ मेरे मुँह में डाल,” राजेश बोले।
नैनसी पागलों की तरह उछल रही थी। उसके कई छोटे-छोटे ऑर्गैज्म आ गए। फिर राजेश ने उसे डॉगीस्टाइल में कर दिया। एक हाथ से बाल पकड़े, दूसरे से चूची मसलते हुए पीछे से जोर-जोर से ठोकने लगे।
रात भर दोनों थकने का नाम नहीं ले रहे थे। कभी मिशनरी में चूचियाँ दबा-दबा कर, कभी साइड से, कभी नैनसी को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े। हर बार राजेश उसकी बड़ी चूचियों को मसलते, थप्पड़ मारते, मुँह में लेते।
आखिरी राउंड में राजेश ने फिर से उसकी गांड ली। इस बार नैनसी खुद गांड ऊपर करके मांग रही थी।
“पापा… गांड में डालो… जोर से… आाह्ह,” वो चिल्ला रही थी।
राजेश ने बिना तेल के ही थोड़ा जोर लगाकर लंड गांड में घुसा दिया और फुल स्पीड में ठोकने लगे। नैनसी की कराहें पूरे घर में गूंज रही थीं। आखिर में राजेश ने एक बार चूत में और एक बार गांड में वीर्य छोड़ दिया।
सुबह होते-होते दोनों पूरी तरह थक चुके थे। नैनसी राजेश की बाँहों में लेटी हुई थी। उसकी बड़ी चूचियाँ अभी भी उनके हाथ में थीं।
“पापा… माँ जब आएगी तब क्या होगा?” नैनसी ने धीमे से पूछा।
राजेश ने उसकी चूची को दबाते हुए कहा, “तब हम नॉर्मल बन जाएँगे। लेकिन जब भी माँ बाहर होगी या देर से आएगी… मैं तेरे कमरे में आ जाऊँगा। और तू भी मेरे पास आ सकती है। तेरी ये बड़ी चूचियाँ और गांड अब सिर्फ मेरी हैं।”
नैनसी मुस्कुराई और उनके लंड को हाथ में ले लिया जो फिर से हल्का सख्त हो रहा था।
“जी पापा… जब भी बुलाना। मैं तैयार रहूँगी।”
बाहर सुबह की रोशनी फैल रही थी। घर फिर से शांत हो गया था। लेकिन पापा और बेटी के बीच जो तगड़ा और गन्दा सेक्स शुरू हुआ था, वो अब छुपाकर चलता रहने वाला था।

