बेटे ने माँ को पहली बार चोदा - माँ-बेटे की गंदी सेक्स

बेटे ने पहली बार माँ की बड़ी चूत और गाँड को चोदा। अकेली रात में माँ ने खुद सिखाया और दोनों होल चुदवा लिए।

लेखक: Aarav Jain6 मिनट पढ़ने में
बेटे ने माँ को पहली बार चोदा - माँ-बेटे की गंदी सेक्स

घर में सिर्फ माँ और बेटा थे। पापा जॉब के सिलसिले में दो हफ्ते के लिए बाहर गए हुए थे। रोहन २२ साल का था, कॉलेज का लास्ट ईयर। उसने अभी तक किसी लड़की के साथ कुछ नहीं किया था। बस फोन पे वीडियो देख-देख के हाथ से निकालता था। लेकिन आज उसका दिल और दिमाग दोनों एकदम अलग हालत में थे।

शाम के सात बज रहे थे। माँ किचन से निकलकर आई। उसने सिर्फ एक पतली सी कॉटन की मैक्सी पहनी थी। नीचे कुछ नहीं। कपड़ा उसके बड़े-बड़े बूब्स पे तन गया था। निप्पल्स के निशान साफ दिख रहे थे। माँ की उम्र ४२ की थी, लेकिन शरीर अभी भी जवान लगता था। बड़े गोल-गोल बूब्स, पतली कमर, और उसके बाद बड़ी सी टाइट गाँड। जब वह चलती थी तो गाँड हिल-हिल के रोहन का लंड सीधा खड़ा हो जाता था।

रोहन सोफे पे बैठा टीवी देख रहा था। माँ उसके पास आई और बैठ गई। मैक्सी थोड़ी ऊपर हो गई। उसकी मोटी सफेद जाँघें निकल आईं। रोहन की नज़र उन जाँघों पे अटक गई। फिर उसकी नज़र धीरे-धीरे ऊपर गई… वहाँ जहाँ मैक्सी के नीचे उसकी चूत का हल्का सा आउटलाइन बन रहा था।

माँ ने उसकी नज़र पकड़ ली। थोड़ी मुस्कुराई।

“क्या देख रहा है बेटा?”

रोहन का चेहरा लाल हो गया। “कुछ नहीं माँ…”

माँ ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और अपनी जाँघ पे रख दिया। “देख सकता है। कोई नहीं है घर में।”

रोहन का हाथ काँपने लगा। उसने धीरे से जाँघ पे हाथ फेरा। माँ की त्वचा बहुत नरम थी। उसने थोड़ा ऊपर बढ़ाया। मैक्सी और ऊपर सरक गई। अब उसकी चूत के ऊपर वाला हिस्सा दिखने लगा। बाल साफ मुँडाए हुए थे। गुलाबी, मोटी, और थोड़ी सी गीली।

रोहन का लंड पैंट में फटने को हो रहा था। माँ ने उसकी पैंट पे हाथ रखा।

“इतना टाइट हो गया है… पहली बार है ना?”

रोहन ने सिर हिलाया। “हाँ माँ…”

माँ ने उसकी पैंट का बटन खोला और ज़िप नीचे की। उसके छोटे से अंडरवियर से लंड निकल आया – सीधा, तन हुआ, और ऊपर से पानी निकल रहा था। माँ ने उसे देखा और मुस्कुराई।

“छोटा नहीं है… तगड़ा है। आज तुझे सिखाती हूँ कैसे मज़ा लेना है।”

उसने अपनी मैक्सी बिल्कुल ऊपर उठा दी। अब वह सोफे पे नंगी बैठी थी। बड़े-बड़े बूब्स नीचे लटक रहे थे। निप्पल्स गहरे ब्राउन और खड़े थे। नीचे उसकी मोटी चूत खुली हुई थी। दो बड़ी सी फोल्ड्स, और बीच में गुलाबी छेद।

रोहन बावला हो गया। उसने पहले दोनों हाथों से उसके बूब्स पकड़े। इतने बड़े थे कि उसके हाथ में नहीं आ रहे थे। उसने दबाया, निचोड़ा, रगड़ा। निप्पल्स को उंगलियों से मसला। फिर मुँह में ले लिया। चूसने लगा जैसे बच्चा दूध पीता है। माँ की आँखें बंद हो गईं।

“हाँ बेटा… ऐसे ही चूस… ज़ोर से…”

रोहन ने एक बूब छोड़ा और नीचे हाथ ले गया। उसकी चूत पे हाथ रखा। गरम और गीली थी। उसने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। माँ की कमर हिल गई।

“आह्ह… धीरे… पहली बार है तेरा… सीख…”

रोहन ने उंगलियाँ अंदर-बाहर कीं। चूत से पानी निकलने लगा। उसने उंगली निकाल के चखा। फिर झुक गया और सीधा मुँह लगा दिया। चूत चाटने लगा। क्लिट को जीभ से रगड़ा, छेद के अंदर जीभ डाली। माँ के दोनों हाथ उसके बालों में चले गए।

“बहुत अच्छा कर रहा है… ऐसे ही… थोड़ा और ऊपर… हाँ वहीं…”

रोहन पागल हो चुका था। उसने माँ को सोफे पे लिटाया। उसके दोनों पैर फैलाए। अपना लंड उसकी चूत पे रख दिया। माँ ने खुद उसका लंड पकड़ा और अपनी चूत के छेद पे सेट किया।

“अब धीरे से अंदर डाल… दर्द होगा थोड़ा, लेकिन फिर मज़ा आएगा।”

रोहन ने धक्का दिया। सिर्फ आधा अंदर गया। माँ की चूत बहुत टाइट थी। उसने और धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया। दोनों की साँसें रुक गईं।

“उफ्फ… कितना बड़ा लग रहा है अंदर…” माँ ने कहा।

रोहन हिलने लगा। पहले धीरे, फिर तेज़। हर धक्के पे उसके बड़े बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। उसने उन्हें पकड़ के दबाए रखा। कभी निप्पल्स काटते, कभी चूसते। नीचे उसकी चूत उसके लंड को कस-कस के पकड़ रही थी।

“ज़ोर से… बेटा ज़ोर से चोद… आज तेरा पहला दिन है… पूरा मज़ा ले…”

रोहन ने रफ्तार बढ़ा दी। सोफे की आवाज़ निकलने लगी। चूत से गीली-गीली आवाज़ आ रही थी। उसने माँ के पैर अपने कंधों पे रख लिए और और गहरा चोदने लगा। माँ की गाँड भी अब दिख रही थी – बड़ी, गोल, सफेद।

थोड़ी देर बाद रोहन ने लंड निकाला। माँ की चूत से उसका पानी और उसका प्रीकम्मिलके बह रहा था। उसने माँ को पेट के बल घुमाया। गाँड ऊपर उठा दी। दोनों हाथों से उसकी बड़ी गाँड को फैलाया। बीच में उसका टाइट गाँड का छेद दिख रहा था।

“यहाँ भी डालना है क्या?” रोहन ने पूछा।

माँ ने पीछे मुड़के देखा। “पहले चूत में पूरा निकाल… फिर सिखाती हूँ गाँड कैसे चोदी जाती है।”

रोहन ने फिर से चूत में लंड डाल दिया। इस बार पीछे से। एक हाथ से उसकी गाँड दबाई, दूसरे से बाल पकड़े। तगड़े-तगड़े धक्के लगाने लगा। माँ की आवाज़ें निकलने लगीं।

“हाँ… ऐसे ही… अंदर तक… थोड़ा और तेज़…”

रोहन का लंड फूल रहा था। उसने कई ज़ोर के धक्के मारे और माँ की चूत के अंदर ही झड़ गया। गरम कम की धार अंदर फैल गई। माँ की चूत कस-कस के उसका पूरा माल निकलवा रही थी।

रोहन थक के उसके ऊपर गिर गया। लंड अभी भी अंदर था। माँ ने पीछे हाथ बढ़ा के उसके बाल सहलाए।

“अभी तो बस शुरुआत है बेटा… रात अभी बाकी है। थोड़ी देर आराम कर… फिर मैं तुझे और सिखाऊँगी। आज तू मेरी चूत, मेरी गाँड, मेरे बूब्स… सब कुछ इस्तेमाल करेगा। समझ गया?”

रोहन ने साँस लेते हुए सिर हिलाया। उसके दिमाग में अब सिर्फ माँ की बड़ी चूत, उसकी गोल गाँड और भारी बूब्स घूम रहे थे।

थोड़ी देर बाद रोहन का लंड फिर से तन गया। माँ अभी भी सोफे पे पेट के बल लेटी थी। उसके पीछे से कम बह रहा था – उसकी चूत से निकल के जाँघों पे चिपक रहा था। रोहन ने उसकी बड़ी गाँड को दोनों हाथों से फैलाया। गोल, नरम, और इतनी बड़ी कि उसके हाथ में पूरी नहीं आ रही थी। उसने गाँड के दोनों हिस्से को ज़ोर से दबाया, निचोड़ा, रगड़ा। फिर बीच में अपनी जीभ लगा दी।

माँ की साँस तेज़ हो गई। “आह्ह… बेटा… गाँड चाट रहा है… अच्छा लग रहा है…”

रोहन ने जीभ से उसके गाँड के छेद को गोला-गोला चाटना शुरू किया। थूक से भिगोया, फिर एक उंगली धीरे से अंदर डाली। माँ की गाँड बहुत टाइट थी। उंगली आधी ही गई थी कि माँ ने तकिया दबा लिया।

“धीरे… पहली बार है वहाँ… थोड़ा थूक और लगा…”

रोहन ने थूक किया और दूसरी उंगली भी ट्राई की। धीरे-धीरे दोनों उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। माँ की गाँड खुलने लगी। उसने उंगलियाँ निकाल के अपना लंड वहाँ सेट किया। लंड का सिर गाँड के छेद पे दबाया।

“अब डाल… धीरे से…” माँ बोली।

रोहन ने धक्का दिया। सिर्फ टिप अंदर गई। माँ की आवाज़ निकल गई। “उफ्फ… बड़ा है… रुक… थोड़ा और थूक…”

उसने फिर थूक लगाया और धीरे-धीरे धक्का मारता रहा। आधा लंड अंदर गया। माँ की गाँड उसके लंड को कस रही थी जैसे कुछ निकलना नहीं चाहती। रोहन ने और धक्का दिया। पूरा लंड गाँड में चला गया।

दोनों एक सेकंड के लिए रुक गए। रोहन ने नीचे देखा – उसका लंड माँ की बड़ी सफेद गाँड के बीच गायब हो चुका था। उसने धीरे हिलना शुरू किया। पहले छोटे धक्के, फिर लंबे।

“हाँ… ऐसे… अब थोड़ा तेज़ कर…” माँ ने कहा।

रोहन ने रफ्तार बढ़ा दी। गाँड की गीली आवाज़ निकलने लगी। उसने एक हाथ से माँ के बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं। चूत अभी भी उसके पहले वाले कम से भरी हुई थी। उंगलियाँ अंदर जाते ही माँ की कमर हिलने लगी।

“बेटा… तू तो एक्सपर्ट बन गया… ऐसे ही चोद… मेरी गाँड फाड़ दे आज…”

रोहन पागल हो चुका था। उसने तगड़े-तगड़े धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पे माँ की बड़ी गाँड हिल-हिल के उसके पेट से टकराती थी। उसने लंड पूरा बाहर निकाला और एक झटके में अंदर तक डाल दिया। माँ की आवाज़ें अब दबी नहीं रहीं।

“आह्ह्ह… रोहन… ज़ोर से… और ज़ोर से…”

उसने कई मिनट तक गाँड चोदी। फिर लंड निकाला। गाँड का छेद अब खुला हुआ था और उसमें से थूक और प्रीकम्म निकल रहा था। रोहन ने माँ को घुमाया। अब वह चित लेटी थी। उसके बड़े-बड़े बूब्स दोनों तरफ फैल गए थे। निप्पल्स इतने खड़े थे कि देख के ही लंड और तड़पने लगा।

रोहन ने उन बूब्स पे मुँह मारा। एक को चूसा, दूसरे को हाथ से निचोड़ा। इतना दबाया कि उंगलियों के निशान पड़ गए। फिर दोनों बूब्स को एक साथ पकड़ के बीच में अपना लंड रख दिया। माँ ने खुद अपने बूब्स को और प्रेस किया ताकि लंड अच्छे से दब जाए। रोहन ने बूब्स के बीच धक्के मारे। लंड ऊपर-नीचे होने लगा, टिप माँ के मुँह के पास आ-जा रही थी।

माँ ने मुँह खोल दिया। जब लंड पास आया तो उसने उसे चूस लिया। जीभ से गोला-गोला चाटने लगी। रोहन की आँखें बंद हो गईं।

“माँ… बहुत मज़ा आ रहा है…”

माँ ने लंड मुँह से निकाला। “अब चूत में डाल… लेकिन इस बार ऊपर से… मैं तुझे सिखाती हूँ कैसे और गहरा जाए।”

उसने रोहन को लिटाया। खुद उसके लंड के ऊपर बैठ गई। अपनी चूत को उसके लंड पे सेट किया और धीरे-धीरे बैठते गई। पूरा लंड अंदर चला गया। माँ ने कमर हिलानी शुरू की। पहले गोला-गोला, फिर ऊपर-नीचे। उसके बड़े बूब्स रोहन के फेस पे लटक रहे थे। रोहन ने उन्हें पकड़ के चूसना शुरू कर दिया।

माँ की चूत अब बिल्कुल गीली हो चुकी थी। हर बार जब वह ऊपर उठती तो लंड के साथ उसका कम भी निकलता। फिर बैठते ही गीली आवाज़ आती। रोहन ने उसकी गाँड पकड़ ली और नीचे से धक्के मारने लगा। माँ की आवाज़ें और तेज़ हो गईं।

“हाँ बेटा… ऐसे… मेरी चूत को फाड़ दे… आज पूरा माल अंदर डाल…”

थोड़ी देर बाद माँ ने पोजिशन चेंज की। वह चारों खाने चित हो गई। रोहन पीछे से आया। उसने एक हाथ से माँ के बाल पकड़े, दूसरे से उसकी कमर। और तगड़ा चोदना शुरू कर दिया। इतना ज़ोर का कि सोफे के नीचे से आवाज़ आने लगी। माँ की चूत से पानी छिटक-छिटक के गिरने लगा।

रोहन का लंड अब हद से ज़्यादा तन चुका था। उसने कई लास्ट धक्के मारे और फिर से माँ की चूत के अंदर ही झड़ गया। इतना कम निकला कि बाहर तक आ गया। माँ की चूत से सफेद धार बहने लगी।

लेकिन रोहन अभी भी हार्ड था। माँ ने देखा और मुस्कुराई।

“अभी भी खड़ा है… आजा, गाँड में डाल के निकाल।”

उसने फिर से पेट के बल पोस्चर ले लिया। रोहन ने लंड गाँड पे सेट किया। इस बार आसानी से अंदर चला गया। उसने पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू किए। गाँड की आवाज़, चूत से बहते कम की आवाज़, और माँ की कराहें – घर में बस यही सुनाई दे रहा था।

आखिरी धक्के में रोहन ने लंड गाँड के अंदर ही छोड़ दिया। गरम कम उसकी गाँड में फैल गया। माँ की बॉडी काँपने लगी। वह भी झड़ गई। उसकी चूत से पानी की धार निकलने लगी बिना छुए।

दोनों थक के सोफे पे गिर गए। रोहन का लंड अब ढीला पड़ने लगा था, लेकिन अभी भी माँ की गाँड में था। उसने धीरे से निकाला। दोनों छेदों से कम बह रहा था – चूत से भी, गाँड से भी।

माँ ने उसका सिर अपने बड़े बूब्स पे रख लिया। सहलाते हुए बोली,

“अब तू सीख गया बेटा… मेरी चूत, मेरी गाँड, मेरे बूब्स… सब तेरे हैं जब तक पापा नहीं आते। जब चाहे, जैसा चाहे, चोद। आज से तू मेरा मर्द है।”

रोहन ने आँखें बंद करके उसके निप्पल्स को हल्का सा चूसा। बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी। घर में सिर्फ उन दोनों की साँसें और लैंप की हल्की रोशनी थी।

रात अभी बाकी थी… और रोहन का लंड धीरे-धीरे फिर से तनने लगा था।

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