बहन की तड़पती चूत में लंड दिया
रात में एक ही बेड पर भाई ने अपनी कुंवारी बहन की तड़पती चूत में अपना मोटा लंड घुसा दिया। डॉगी स्टाइल, काउगर्ल और खड़े-खड़े चोदते हुए उसकी सील तोड़ दी। बेहद गर्म और रोमांचक भाई-बहन की चुदाई की पूरी कहानी।
हम चारों हिल स्टेशन घूमने गए थे। होटल में दो अलग-अलग रूम लिए थे — एक रूम मम्मी-पापा के लिए और दूसरा रूम मैं (आर्यन, 23) और मेरी छोटी बहन अन्वी (19) के लिए।
दूसरे रूम में सिर्फ एक डबल बेड था। बाहर भयंकर बारिश हो रही थी, ठंडी हवा चल रही थी, बिजली बार-बार चली जा रही थी। पूरा माहौल ठंडा, अंधेरा और बहुत sexy था।
अन्वी ने उस रात हल्का गुलाबी स्लीपिंग टॉप पहना था जो उसके ऊपर काफी टाइट था। उसकी 34C वाली भारी, गोरी और उभरी हुई छातियां टॉप के अंदर से साफ दिख रही थीं। नीचे बहुत छोटा शॉर्ट्स था, जिससे उसकी मोटी जांघें और गोल-मटोल गांड का निचला हिस्सा बाहर झांक रहा था। उसके लंबे काले बाल खुले हुए थे।
बारिश की ठंड बढ़ने लगी तो अन्वी कांपते हुए मेरे पास आई और बोली, "भैया, बहुत ठंड लग रही है... मैं तुम्हारे पास सो जाऊं?"
मैंने हाँ कहते ही वो मेरे सीने से सटकर लेट गई। उसकी नरम छातियां मेरी छाती पर दब रही थीं। कुछ देर बाद उसे मेरे लंड का खड़ा होना महसूस हो गया।
"भैया... वो खड़ा हो गया है ना?" उसने शर्माते हुए फुसफुसाया।
मैंने जवाब में उसके होंठ चूम लिए। अन्वी भी धीरे-धीरे मेरे साथ जुड़ गई। किसिंग के दौरान मैंने उसके टॉप को ऊपर किया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उसकी दो गोरी, भरी-भरी छातियां बाहर आ गईं। मैंने दोनों छातियों को जोर से मसला और निप्पल चूसने लगा। अन्वी कराहने लगी — "आह्ह भैया... बहुत अच्छा लग रहा है..."
फिर मैंने उसके शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी। अन्वी की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और कुंवारी थी। मैंने उंगली से सहलाया तो वो गीली होने लगी।
अब असली चुदाई शुरू हुई: सबसे पहले मैंने अन्वी को उल्टा (doggy style) कर दिया। उसकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया।
"आआआह्ह्ह भैया... दर्द हो रहा है!" अन्वी चीखी। उसकी कुंवारी सील टूट गई और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। मैंने उसकी कमर कसकर पकड़ी और पूरे जोर से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। "फच फच फच" की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अन्वी तकिए को काट रही थी और चीख रही थी — "भैया... और जोर से... फाड़ दो मेरी चूत!"
15 मिनट तक doggy style में चोदने के बाद मैंने उसे खड़ा कर दिया। खड़े-खड़े दीवार से लगा दिया। उसकी एक टांग को अपनी कमर पर उठाया और फिर से लंड घुसा दिया। इस पोजीशन में लंड बहुत गहराई तक जा रहा था। अन्वी मेरी गर्दन में मुंह छिपाए चीख रही थी — "भैया... बहुत गहरा जा रहा है... आह्ह्ह... मैं मर जाऊंगी... और जोर से पेलो!"
फिर मैं बेड पर लेट गया। अन्वी मेरे ऊपर बैठ गई (cowgirl)। उसने खुद मेरा लंड पकड़ा, अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा लंड अंदर घुसते ही वो सिहर उठी। फिर वो तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी भारी छातियां जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने दोनों छातियों को दबाते हुए कहा, "जोर से बैठ अन्वी... पूरी चूत में ले!"
कुछ देर बाद मैंने उसे लिटाया, उसके पैर फैलाए और उसकी चूत चूसने लगा। मेरी जीभ उसकी गुलाबी चूत में घुस रही थी, क्लिटोरिस चूस रहा था। अन्वी पागल हो गई — "भैया... क्या कर रहे हो... आह्ह्ह... निकल रहा है!" वो पहली बार झड़ गई और मेरे मुंह पर अपना पानी छोड़ दिया।
आखिर में मैं उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी दोनों छातियों के बीच अपना लंड रखकर चोदा। उसकी नरम और भारी छातियों को दोनों हाथों से दबाकर बीच-बीच में लंड घुसाया। अन्वी खुद अपनी छातियों को दबा रही थी। कुछ मिनट बाद मैंने उसकी छातियों, गले और मुंह पर अपना गाढ़ा गर्म वीर्य छोड़ दिया।
अन्वी पूरी तरह थक चुकी थी। वो मेरे सीने से लिपट गई और बोली, "भैया... आज तुमने मुझे पूरी तरह अपनी बना लिया। अब मेरी चूत, गांड, मुंह... सब तुम्हारा है। जब भी मन करे, मुझे चोद लेना।"
हम चारों हिल स्टेशन घूमने गए थे। होटल में दो अलग-अलग रूम लिए थे — एक रूम मम्मी-पापा के लिए और दूसरा रूम मैं (आर्यन, 23) और मेरी छोटी बहन अन्वी (19) के लिए।
दूसरे रूम में सिर्फ एक डबल बेड था। बाहर भयंकर बारिश हो रही थी, ठंडी हवा चल रही थी, बिजली बार-बार चली जा रही थी। पूरा माहौल ठंडा, अंधेरा और बहुत sexy था।
अन्वी ने उस रात हल्का गुलाबी स्लीपिंग टॉप पहना था जो उसके ऊपर काफी टाइट था। उसकी 34C वाली भारी, गोरी और उभरी हुई छातियां टॉप के अंदर से साफ दिख रही थीं। नीचे बहुत छोटा शॉर्ट्स था, जिससे उसकी मोटी जांघें और गोल-मटोल गांड का निचला हिस्सा बाहर झांक रहा था। उसके लंबे काले बाल खुले हुए थे।
बारिश की ठंड बढ़ने लगी तो अन्वी कांपते हुए मेरे पास आई और बोली, "भैया, बहुत ठंड लग रही है... मैं तुम्हारे पास सो जाऊं?"
मैंने हाँ कहते ही वो मेरे सीने से सटकर लेट गई। उसकी नरम छातियां मेरी छाती पर दब रही थीं। कुछ देर बाद उसे मेरे लंड का खड़ा होना महसूस हो गया।
"भैया... वो खड़ा हो गया है ना?" उसने शर्माते हुए फुसफुसाया।
मैंने जवाब में उसके होंठ चूम लिए। अन्वी भी धीरे-धीरे मेरे साथ जुड़ गई। किसिंग के दौरान मैंने उसके टॉप को ऊपर किया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उसकी दो गोरी, भरी-भरी छातियां बाहर आ गईं। मैंने दोनों छातियों को जोर से मसला और निप्पल चूसने लगा। अन्वी कराहने लगी — "आह्ह भैया... बहुत अच्छा लग रहा है..."
फिर मैंने उसके शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी। अन्वी की चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और कुंवारी थी। मैंने उंगली से सहलाया तो वो गीली होने लगी।
अब असली चुदाई शुरू हुई: सबसे पहले मैंने अन्वी को उल्टा (doggy style) कर दिया। उसकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया।
"आआआह्ह्ह भैया... दर्द हो रहा है!" अन्वी चीखी। उसकी कुंवारी सील टूट गई और मेरा लंड आधा अंदर चला गया। मैंने उसकी कमर कसकर पकड़ी और पूरे जोर से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। "फच फच फच" की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अन्वी तकिए को काट रही थी और चीख रही थी — "भैया... और जोर से... फाड़ दो मेरी चूत!"
15 मिनट तक doggy style में चोदने के बाद मैंने उसे खड़ा कर दिया। खड़े-खड़े दीवार से लगा दिया। उसकी एक टांग को अपनी कमर पर उठाया और फिर से लंड घुसा दिया। इस पोजीशन में लंड बहुत गहराई तक जा रहा था। अन्वी मेरी गर्दन में मुंह छिपाए चीख रही थी — "भैया... बहुत गहरा जा रहा है... आह्ह्ह... मैं मर जाऊंगी... और जोर से पेलो!"
फिर मैं बेड पर लेट गया। अन्वी मेरे ऊपर बैठ गई (cowgirl)। उसने खुद मेरा लंड पकड़ा, अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा लंड अंदर घुसते ही वो सिहर उठी। फिर वो तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी भारी छातियां जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने दोनों छातियों को दबाते हुए कहा, "जोर से बैठ अन्वी... पूरी चूत में ले!"
कुछ देर बाद मैंने उसे लिटाया, उसके पैर फैलाए और उसकी चूत चूसने लगा। मेरी जीभ उसकी गुलाबी चूत में घुस रही थी, क्लिटोरिस चूस रहा था। अन्वी पागल हो गई — "भैया... क्या कर रहे हो... आह्ह्ह... निकल रहा है!" वो पहली बार झड़ गई और मेरे मुंह पर अपना पानी छोड़ दिया।
आखिर में मैं उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी दोनों छातियों के बीच अपना लंड रखकर चोदा। उसकी नरम और भारी छातियों को दोनों हाथों से दबाकर बीच-बीच में लंड घुसाया। अन्वी खुद अपनी छातियों को दबा रही थी। कुछ मिनट बाद मैंने उसकी छातियों, गले और मुंह पर अपना गाढ़ा गर्म वीर्य छोड़ दिया।
अन्वी पूरी तरह थक चुकी थी। वो मेरे सीने से लिपट गई और बोली, "भैया... आज तुमने मुझे पूरी तरह अपनी बना लिया। अब मेरी चूत, गांड, मुंह... सब तुम्हारा है। जब भी मन करे, मुझे चोद लेना।"
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