बहन की गाँड में कज़िन का पूरा लंड - गहरी चुदाई
चेंजिंग रूम का दरवाज़ा बंद होते ही कज़िन भाई ने बहन की बिकिनी फाड़ दी। पहले चूत ली, फिर गाँड में पूरा लंड ठूस दिया… 2 घंटे तक बहन सिर्फ कराहती रही!
पानी का पार्क धूप से चमक रहा था। परिवार वाले सब स्लाइड्स और पूल के आसपास बिखरे हुए थे। रोहन (24) अपनी कज़िन प्रिया (22) को देखे जा रहा था। प्रिया ने एक टाइट ब्लैक बिकिनी पहन रखी थी। उसके गोल, भरे हुए स्तन बिकिनी टॉप में लगभग बाहर आने को थे और नीचे की स्लिप उसकी गोल गाँड को कसकर पकड़े हुए थी। पानी से भीगते ही कपड़ा और ज्यादा चिपक गया था।
रोहन का लंड बार-बार तन रहा था। वह खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन प्रिया जब भी हँसती या बाल पीछे करती तो उसकी नज़रें वहीं अटक जातीं।
दोपहर के आसपास सब लोग आराम करने लगे। प्रिया ने कहा, “मैं ड्रेस चेंज करके आती हूँ।” रोहन ने तुरंत जवाब दिया, “मैं भी… कॉमन चेंजिंग रूम में ही चलता हूँ।”
चेंजिंग रूम काफी बड़ा था लेकिन उस समय अंदर कोई नहीं था। प्रिया अंदर घुसी तो रोहन ने पीछे से दरवाज़ा बंद करके कुंडी लगा दी। प्रिया मुड़ी तो रोहन को अपनी तरफ आते हुए देखा। उसकी आँखों में साफ़ हवस थी।
“रोहन… क्या कर रहे हो?” प्रिया की आवाज़ में हल्की घबराहट थी, लेकिन इनकार नहीं था।
रोहन पास आया। “तुझे देख-देख के पागल हो रहा हूँ प्रिया… ये बिकिनी… तेरी ये बॉडी…” उसने धीरे से प्रिया की कमर पकड़ ली। प्रिया पीछे नहीं हटी। बल्कि उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
रोहन ने उसे दीवार से लगा दिया और उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया। गहरी, गीली चुंबन। प्रिया ने भी जवाब दिया। दोनों की जीभें मिल गईं। रोहन के हाथ ने उसका बिकिनी टॉप खोल दिया। प्रिया के नरम, भारी स्तन बाहर निकल आए। निप्पल पहले से सख्त थे।
रोहन ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। प्रिया की आह निकल गई। “आह्ह… रोहन…”
उसने प्रिया की बिकिनी बॉटम भी नीचे खींच दी। प्रिया अब पूरी तरह नंगी थी। रोहन ने अपनी स्विमिंग ट्रंक भी उतार दी। उसका मोटा, कठोर लंड बाहर निकल आया—नसों से भरा हुआ और पहले से ही ऊपर से गीला।
प्रिया की नज़रें लंड पर टिक गईं। वह खुद ही हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ने लगी। रोहन ने उसे धीरे से घुमाया और चेंजिंग रूम की बेंच पर झुका दिया। उसने प्रिया की गाँड फैलाई और अपनी जीभ उसकी गीली चूत पर लगा दी। प्रिया काँप उठी।
“रोहन… कोई आ सकता है…” “दरवाज़ा बंद है… आज मैं तुझे पूरा लेने वाला हूँ,” रोहन ने कहा और जीभ अंदर तक घुसा दी।
प्रिया की कमर हिलने लगी। रोहन ने जब काफी चाट लिया तो खड़ा हुआ और अपने लंड का मोटा सिर उसकी चूत पर लगाया। “प्रिया… डालूँ?” प्रिया ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। “हम्म… डाल दे…”
रोहन ने एक ही धक्के में आधा लंड अंदर घुसा दिया। प्रिया जोर से कराह उठी। “उह्ह्ह… मोटा है…”
रोहन ने धीरे-धीरे पूरा अंदर डाला और फिर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ प्रिया की गाँड थरथरा रही थी। चेंजिंग रूम में सिर्फ मांस की टकराहट और दोनों की कराहें गूँज रही थीं।
“तेरी चूत कितनी टाइट है प्रिया… सालों से देख रहा था इसे,” रोहन ने हाँफते हुए कहा। प्रिया दीवार को पकड़े हुए कराह रही थी। “और जोर से… रोहन… और गहरा…”
रोहन ने उसके बाल पकड़ लिए और रफ्तार बढ़ा दी। प्रिया का पहला ऑर्गेज्म आ गया। उसकी चूत ने रोहन के लंड को कसकर जकड़ लिया और गर्म रस बहने लगा। रोहन रुका नहीं। वह लगातार चोदता रहा—कभी तेज़, कभी धीमा, कभी गहरा।
लगभग पैंतालीस मिनट तक वह उसे इसी पोजीशन में लेता रहा। फिर उसने प्रिया को उठाया, खुद बेंच पर बैठ गया और प्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया। प्रिया खुद ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन रोहन के मुँह के सामने उछल रहे थे। रोहन दोनों स्तनों को मुँह में लेकर चूस रहा था।
“मैं फिर से आ रही हूँ…” प्रिया ने काँपते हुए कहा। रोहन ने उसकी गाँड पकड़कर और तेज़ी से ऊपर-नीचे किया। प्रिया दूसरी बार झड़ गई।
रोहन अभी तक नहीं गिरा था। उसने प्रिया को फिर से घुमाया, दीवार से लगाकर मिशनरी पोजीशन में लेना शुरू किया। पैर उसके कंधों पर थे। लंड इतनी गहराई तक जा रहा था कि प्रिया को लगा वह उसके पेट तक पहुँच रहा है।
दोनों पसीने से तर-बतर थे। चेंजिंग रूम में गर्मी और सेक्स की गंध फैल चुकी थी। रोहन लगातार लगभग एक घंटे से ज्यादा से चोद रहा था। प्रिया की चूत अब पूरी तरह लाल और संवेदनशील हो चुकी थी, फिर भी वह और माँग रही थी।
“रोहन… अंदर ही छोड़ना…” प्रिया ने आँखें मिलाते हुए कहा।
रोहन के धक्के और तेज़ हो गए। आखिरकार वह गहरी कराह के साथ प्रिया की चूत के अंदर ही अपने पूरे गर्म वीर्य को उड़ेलने लगा। धार की धार जाती रही। प्रिया भी तीसरी बार उसके साथ झड़ गई।
दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। रोहन का लंड अभी भी अंदर था। बाहर परिवार वाले इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन दोनों को दुनिया की कोई सुध नहीं थी।
रोहन ने प्रिया के कान में धीरे से कहा, “ये तो बस शुरुआत है… आज घर जाकर रात को फिर जारी रखूँगा।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए उसकी गर्दन पर सिर रख दिया। “हम्म… जारी रखना…”
पार्क से घर लौटते समय गाड़ी में सब चुप थे। प्रिया खिड़की की तरफ देखती रही, लेकिन उसके मन में सिर्फ रोहन का मोटा लंड और चेंजिंग रूम की वो गर्मी घूम रही थी। रोहन भी बार-बार उसकी तरफ देख रहा था। दोनों की जाँघें हल्की-हल्की छू रही थीं और हर छुआने पर करंट जैसा महसूस हो रहा था।
रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे पूरा घर सो चुका था। रोहन चुपके से प्रिया के कमरे में घुस गया। प्रिया जाग रही थी। उसने सिर्फ एक पतली स्लिप पहनी हुई थी। रोहन ने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बिस्तर पर आ गया।
“अभी भी तरस रही है?” रोहन ने धीमी आवाज़ में पूछा।
प्रिया ने सिर हिलाया। “बहुत… चेंजिंग रूम के बाद से ही जल रही हूँ।”
रोहन ने उसकी स्लिप ऊपर की और उसके स्तनों को मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा, दाँतों से हल्का काटा। प्रिया की कमर उठने लगी। रोहन का हाथ नीचे गया और दो उंगलियाँ उसकी पहले से गीली चूत में घुस गईं।
“इतनी गीली… दिन भर से मेरा लंड याद कर रही थी ना?” “हाँ… बहुत याद आ रहा था,” प्रिया ने कराहते हुए कहा।
रोहन ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। उसका लंड फिर से पूरी तरह तन चुका था। उसने प्रिया के पैर फैलाए और बिना देर किए अपना पूरा लंड एक ही धक्के में अंदर घुसा दिया। प्रिया जोर से कराह उठी और रोहन के पीठ में नाखून गाड़ दिए।
“उह्ह्ह… रोहन… आज और गहरा लेना…”
रोहन ने कोई जल्दबाजी नहीं की। वह धीरे-धीरे लेकिन बहुत गहरे धक्के मारने लगा। हर धक्के में उसका लंड प्रिया की चूत की सबसे गहराई तक जा रहा था। बिस्तर चरमरा रहा था। प्रिया के स्तन हवा में झूल रहे थे। रोहन कभी उसके निप्पल चूसता, कभी उसके होठों को काटता।
लगभग बीस मिनट तक इसी तरह मिशनरी में लेने के बाद उसने प्रिया को पलटा दिया। अब कुत्ते की पोजीशन। प्रिया के हाथ बिस्तर पर थे, गाँड ऊपर उठी हुई। रोहन ने उसकी गाँड के दोनों गाल फैलाए और फिर से पूरा लंड अंदर धकेल दिया। इस बार और तेज़।
थप्पड़-थप्पड़ की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी। रोहन प्रिया की गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ भी मार रहा था। “तेरी ये गाँड दिन भर से पागल कर रही थी… आज इसे भी लूँगा।”
प्रिया ने सिर घुमाकर कहा, “ले ले… आज जो मन करे कर ले…”
रोहन ने थूक लगाकर पहले एक उंगली प्रिया की गाँड में डाली, फिर दूसरी। जब छेद थोड़ा ढीला हुआ तो उसने अपना लंड चूत से निकाला और धीरे-धीरे प्रिया की गाँड में धकेलना शुरू किया। प्रिया की साँस अटक गई।
“आह्ह्ह… धीरे… मोटा है…” रोहन रुक-रुक कर अंदर जाता रहा जब तक पूरा लंड उसकी गाँड में समा नहीं गया। फिर उसने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। दर्द और मज़े का मिश्रण प्रिया को पागल कर रहा था। वह तकिए में मुँह दबाकर कराह रही थी।
रोहन लगभग आधा घंटा उसकी गाँड चोदता रहा। बीच-बीच में लंड निकालकर चूत में डाल देता, फिर वापस गाँड में। प्रिया कई बार झड़ चुकी थी। उसकी जाँघें काँप रही थीं, फिर भी वह और माँग रही थी।
फिर रोहन ने प्रिया को अपनी गोद में बैठाया। प्रिया खुद उसके लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। रोहन उसके स्तन मुँह में लिए हुए था और गाँड पकड़कर मदद कर रहा था। दोनों के शरीर पसीने से चमक रहे थे। कमरे में सिर्फ साँसें और मांस की आवाज़ थी।
“रोहन… मैं फिर से आ रही हूँ…” प्रिया की चूत ने जोर से लंड को जकड़ लिया। रोहन ने भी इस बार खुद को नहीं रोका। उसने प्रिया को कसकर पकड़ा और उसके अंदर ही अपना पूरा गर्म, गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। इतना ज्यादा कि जब प्रिया उठी तो वीर्य उसकी जाँघों से बहने लगा।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। रोहन ने प्रिया को अपनी छाती से लगा लिया। “आज तू पूरी तरह मेरी हो गई,” उसने धीरे से कहा।
प्रिया ने मुस्कुराते हुए उसका लंड हाथ में ले लिया जो अभी भी आधा तना हुआ था। “हम्म… और यह अभी भी तैयार है लग रहा है।”
रोहन हंसा। “रात अभी बाकी है… थोड़ा आराम कर ले, फिर तीसरी राउंड शुरू करेंगे।”
प्रिया ने उसकी उंगलियाँ अपनी चूत पर रख दीं। “आराम बाद में… अभी ले मुझे।”
रोहन ने फिर से उसे चूम लिया और दोनों एक बार फिर एक-दूसरे में खो गए। बाहर सन्नाटा था, अंदर सिर्फ हवस की आवाज़ें गूँज रही थीं। उस रात उन्होंने कई बार एक-दूसरे को लिया—कभी धीरे, कभी पागलों की तरह, कभी प्यार से, कभी गंदे शब्दों के साथ।
सुबह होते-होते दोनों थककर सो गए थे, शरीर पर पसीने और वीर्य के निशान लिए हुए।
पानी का पार्क धूप से चमक रहा था। परिवार वाले सब स्लाइड्स और पूल के आसपास बिखरे हुए थे। रोहन (24) अपनी कज़िन प्रिया (22) को देखे जा रहा था। प्रिया ने एक टाइट ब्लैक बिकिनी पहन रखी थी। उसके गोल, भरे हुए स्तन बिकिनी टॉप में लगभग बाहर आने को थे और नीचे की स्लिप उसकी गोल गाँड को कसकर पकड़े हुए थी। पानी से भीगते ही कपड़ा और ज्यादा चिपक गया था।
रोहन का लंड बार-बार तन रहा था। वह खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन प्रिया जब भी हँसती या बाल पीछे करती तो उसकी नज़रें वहीं अटक जातीं।
दोपहर के आसपास सब लोग आराम करने लगे। प्रिया ने कहा, “मैं ड्रेस चेंज करके आती हूँ।” रोहन ने तुरंत जवाब दिया, “मैं भी… कॉमन चेंजिंग रूम में ही चलता हूँ।”
चेंजिंग रूम काफी बड़ा था लेकिन उस समय अंदर कोई नहीं था। प्रिया अंदर घुसी तो रोहन ने पीछे से दरवाज़ा बंद करके कुंडी लगा दी। प्रिया मुड़ी तो रोहन को अपनी तरफ आते हुए देखा। उसकी आँखों में साफ़ हवस थी।
“रोहन… क्या कर रहे हो?” प्रिया की आवाज़ में हल्की घबराहट थी, लेकिन इनकार नहीं था।
रोहन पास आया। “तुझे देख-देख के पागल हो रहा हूँ प्रिया… ये बिकिनी… तेरी ये बॉडी…” उसने धीरे से प्रिया की कमर पकड़ ली। प्रिया पीछे नहीं हटी। बल्कि उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
रोहन ने उसे दीवार से लगा दिया और उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया। गहरी, गीली चुंबन। प्रिया ने भी जवाब दिया। दोनों की जीभें मिल गईं। रोहन के हाथ ने उसका बिकिनी टॉप खोल दिया। प्रिया के नरम, भारी स्तन बाहर निकल आए। निप्पल पहले से सख्त थे।
रोहन ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। प्रिया की आह निकल गई। “आह्ह… रोहन…”
उसने प्रिया की बिकिनी बॉटम भी नीचे खींच दी। प्रिया अब पूरी तरह नंगी थी। रोहन ने अपनी स्विमिंग ट्रंक भी उतार दी। उसका मोटा, कठोर लंड बाहर निकल आया—नसों से भरा हुआ और पहले से ही ऊपर से गीला।
प्रिया की नज़रें लंड पर टिक गईं। वह खुद ही हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ने लगी। रोहन ने उसे धीरे से घुमाया और चेंजिंग रूम की बेंच पर झुका दिया। उसने प्रिया की गाँड फैलाई और अपनी जीभ उसकी गीली चूत पर लगा दी। प्रिया काँप उठी।
“रोहन… कोई आ सकता है…” “दरवाज़ा बंद है… आज मैं तुझे पूरा लेने वाला हूँ,” रोहन ने कहा और जीभ अंदर तक घुसा दी।
प्रिया की कमर हिलने लगी। रोहन ने जब काफी चाट लिया तो खड़ा हुआ और अपने लंड का मोटा सिर उसकी चूत पर लगाया। “प्रिया… डालूँ?” प्रिया ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। “हम्म… डाल दे…”
रोहन ने एक ही धक्के में आधा लंड अंदर घुसा दिया। प्रिया जोर से कराह उठी। “उह्ह्ह… मोटा है…”
रोहन ने धीरे-धीरे पूरा अंदर डाला और फिर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ प्रिया की गाँड थरथरा रही थी। चेंजिंग रूम में सिर्फ मांस की टकराहट और दोनों की कराहें गूँज रही थीं।
“तेरी चूत कितनी टाइट है प्रिया… सालों से देख रहा था इसे,” रोहन ने हाँफते हुए कहा। प्रिया दीवार को पकड़े हुए कराह रही थी। “और जोर से… रोहन… और गहरा…”
रोहन ने उसके बाल पकड़ लिए और रफ्तार बढ़ा दी। प्रिया का पहला ऑर्गेज्म आ गया। उसकी चूत ने रोहन के लंड को कसकर जकड़ लिया और गर्म रस बहने लगा। रोहन रुका नहीं। वह लगातार चोदता रहा—कभी तेज़, कभी धीमा, कभी गहरा।
लगभग पैंतालीस मिनट तक वह उसे इसी पोजीशन में लेता रहा। फिर उसने प्रिया को उठाया, खुद बेंच पर बैठ गया और प्रिया को अपनी गोद में बिठा लिया। प्रिया खुद ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन रोहन के मुँह के सामने उछल रहे थे। रोहन दोनों स्तनों को मुँह में लेकर चूस रहा था।
“मैं फिर से आ रही हूँ…” प्रिया ने काँपते हुए कहा। रोहन ने उसकी गाँड पकड़कर और तेज़ी से ऊपर-नीचे किया। प्रिया दूसरी बार झड़ गई।
रोहन अभी तक नहीं गिरा था। उसने प्रिया को फिर से घुमाया, दीवार से लगाकर मिशनरी पोजीशन में लेना शुरू किया। पैर उसके कंधों पर थे। लंड इतनी गहराई तक जा रहा था कि प्रिया को लगा वह उसके पेट तक पहुँच रहा है।
दोनों पसीने से तर-बतर थे। चेंजिंग रूम में गर्मी और सेक्स की गंध फैल चुकी थी। रोहन लगातार लगभग एक घंटे से ज्यादा से चोद रहा था। प्रिया की चूत अब पूरी तरह लाल और संवेदनशील हो चुकी थी, फिर भी वह और माँग रही थी।
“रोहन… अंदर ही छोड़ना…” प्रिया ने आँखें मिलाते हुए कहा।
रोहन के धक्के और तेज़ हो गए। आखिरकार वह गहरी कराह के साथ प्रिया की चूत के अंदर ही अपने पूरे गर्म वीर्य को उड़ेलने लगा। धार की धार जाती रही। प्रिया भी तीसरी बार उसके साथ झड़ गई।
दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। रोहन का लंड अभी भी अंदर था। बाहर परिवार वाले इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन दोनों को दुनिया की कोई सुध नहीं थी।
रोहन ने प्रिया के कान में धीरे से कहा, “ये तो बस शुरुआत है… आज घर जाकर रात को फिर जारी रखूँगा।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए उसकी गर्दन पर सिर रख दिया। “हम्म… जारी रखना…”
पार्क से घर लौटते समय गाड़ी में सब चुप थे। प्रिया खिड़की की तरफ देखती रही, लेकिन उसके मन में सिर्फ रोहन का मोटा लंड और चेंजिंग रूम की वो गर्मी घूम रही थी। रोहन भी बार-बार उसकी तरफ देख रहा था। दोनों की जाँघें हल्की-हल्की छू रही थीं और हर छुआने पर करंट जैसा महसूस हो रहा था।
रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे पूरा घर सो चुका था। रोहन चुपके से प्रिया के कमरे में घुस गया। प्रिया जाग रही थी। उसने सिर्फ एक पतली स्लिप पहनी हुई थी। रोहन ने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बिस्तर पर आ गया।
“अभी भी तरस रही है?” रोहन ने धीमी आवाज़ में पूछा।
प्रिया ने सिर हिलाया। “बहुत… चेंजिंग रूम के बाद से ही जल रही हूँ।”
रोहन ने उसकी स्लिप ऊपर की और उसके स्तनों को मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा, दाँतों से हल्का काटा। प्रिया की कमर उठने लगी। रोहन का हाथ नीचे गया और दो उंगलियाँ उसकी पहले से गीली चूत में घुस गईं।
“इतनी गीली… दिन भर से मेरा लंड याद कर रही थी ना?” “हाँ… बहुत याद आ रहा था,” प्रिया ने कराहते हुए कहा।
रोहन ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। उसका लंड फिर से पूरी तरह तन चुका था। उसने प्रिया के पैर फैलाए और बिना देर किए अपना पूरा लंड एक ही धक्के में अंदर घुसा दिया। प्रिया जोर से कराह उठी और रोहन के पीठ में नाखून गाड़ दिए।
“उह्ह्ह… रोहन… आज और गहरा लेना…”
रोहन ने कोई जल्दबाजी नहीं की। वह धीरे-धीरे लेकिन बहुत गहरे धक्के मारने लगा। हर धक्के में उसका लंड प्रिया की चूत की सबसे गहराई तक जा रहा था। बिस्तर चरमरा रहा था। प्रिया के स्तन हवा में झूल रहे थे। रोहन कभी उसके निप्पल चूसता, कभी उसके होठों को काटता।
लगभग बीस मिनट तक इसी तरह मिशनरी में लेने के बाद उसने प्रिया को पलटा दिया। अब कुत्ते की पोजीशन। प्रिया के हाथ बिस्तर पर थे, गाँड ऊपर उठी हुई। रोहन ने उसकी गाँड के दोनों गाल फैलाए और फिर से पूरा लंड अंदर धकेल दिया। इस बार और तेज़।
थप्पड़-थप्पड़ की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी। रोहन प्रिया की गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ भी मार रहा था। “तेरी ये गाँड दिन भर से पागल कर रही थी… आज इसे भी लूँगा।”
प्रिया ने सिर घुमाकर कहा, “ले ले… आज जो मन करे कर ले…”
रोहन ने थूक लगाकर पहले एक उंगली प्रिया की गाँड में डाली, फिर दूसरी। जब छेद थोड़ा ढीला हुआ तो उसने अपना लंड चूत से निकाला और धीरे-धीरे प्रिया की गाँड में धकेलना शुरू किया। प्रिया की साँस अटक गई।
“आह्ह्ह… धीरे… मोटा है…” रोहन रुक-रुक कर अंदर जाता रहा जब तक पूरा लंड उसकी गाँड में समा नहीं गया। फिर उसने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। दर्द और मज़े का मिश्रण प्रिया को पागल कर रहा था। वह तकिए में मुँह दबाकर कराह रही थी।
रोहन लगभग आधा घंटा उसकी गाँड चोदता रहा। बीच-बीच में लंड निकालकर चूत में डाल देता, फिर वापस गाँड में। प्रिया कई बार झड़ चुकी थी। उसकी जाँघें काँप रही थीं, फिर भी वह और माँग रही थी।
फिर रोहन ने प्रिया को अपनी गोद में बैठाया। प्रिया खुद उसके लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगी। रोहन उसके स्तन मुँह में लिए हुए था और गाँड पकड़कर मदद कर रहा था। दोनों के शरीर पसीने से चमक रहे थे। कमरे में सिर्फ साँसें और मांस की आवाज़ थी।
“रोहन… मैं फिर से आ रही हूँ…” प्रिया की चूत ने जोर से लंड को जकड़ लिया। रोहन ने भी इस बार खुद को नहीं रोका। उसने प्रिया को कसकर पकड़ा और उसके अंदर ही अपना पूरा गर्म, गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। इतना ज्यादा कि जब प्रिया उठी तो वीर्य उसकी जाँघों से बहने लगा।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। रोहन ने प्रिया को अपनी छाती से लगा लिया। “आज तू पूरी तरह मेरी हो गई,” उसने धीरे से कहा।
प्रिया ने मुस्कुराते हुए उसका लंड हाथ में ले लिया जो अभी भी आधा तना हुआ था। “हम्म… और यह अभी भी तैयार है लग रहा है।”
रोहन हंसा। “रात अभी बाकी है… थोड़ा आराम कर ले, फिर तीसरी राउंड शुरू करेंगे।”
प्रिया ने उसकी उंगलियाँ अपनी चूत पर रख दीं। “आराम बाद में… अभी ले मुझे।”
रोहन ने फिर से उसे चूम लिया और दोनों एक बार फिर एक-दूसरे में खो गए। बाहर सन्नाटा था, अंदर सिर्फ हवस की आवाज़ें गूँज रही थीं। उस रात उन्होंने कई बार एक-दूसरे को लिया—कभी धीरे, कभी पागलों की तरह, कभी प्यार से, कभी गंदे शब्दों के साथ।
सुबह होते-होते दोनों थककर सो गए थे, शरीर पर पसीने और वीर्य के निशान लिए हुए।
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