बगल वाली सेक्सी भाभी को ब्लैकमेल करके किचन में ही चोद दिया - हिंदी सेक्स स्टोरी
पति के बाहर जाते ही नई भाभी को वीडियो दिखाकर मजबूर किया और किचन की दीवार से सटाकर जोर-जोर से चोदा। गोरी चूत, मोटी गांड और बड़े स्तनों का पूरा मजा लिया! रात भर थोकते रहे।
मेरा नाम राहुल है। मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ और शहर में एक मकान के किराए पर रहता हूँ। मेरे ठीक बगल वाले कमरे में कुछ महीने पहले एक नई फैमिली शिफ्ट हुई थी। उसमें पति, पत्नी और उनका 7-8 साल का छोटा बेटा था।
पत्नी का नाम था रेखा। वह सच में बेहद सेक्सी और हॉट थी। उम्र करीब 30-32 साल। गोरा रंग, पतली कमर, बड़े-बड़े गोल स्तन और मोटी, उभरी हुई गांड। वह हमेशा टाइट हाफ ब्लाउज और बहुत पतली सिल्क की साड़ी पहनती थी। साड़ी का ब्लाउज इतना छोटा और टाइट होता कि उसकी छाती का आधा हिस्सा बाहर झांकता दिखाई देता। पहली बार जब मैंने उसे देखा तो मेरा मुंह ही खुला रह गया। दिन भर उसी के बारे में सोचता रहता।
धीरे-धीरे हमारी अच्छी पहचान हो गई। उनके पति दिन भर बाहर काम पर रहते थे। कभी-कभी वे हमारे घर भी आ जाते थे। रेखा भाभी हमेशा सजी-धजी, मेकअप किए, टिप-टॉप रहती। देखने में बिल्कुल वैसी लगती जैसे चुदने के लिए तैयार हो। मैं कई बार मन ही मन सोचता, “ये औरत पक्का किसी से चुदवाती होगी। काश मुझे भी मौका मिल जाए।”
मेरे बगल वाले ही एक 35-36 साल के अंकल रहते थे। मैं अक्सर उन्हें दोपहर के समय भाभी के घर जाते देखता। खासकर जब भाभी का पति बाहर होता और उनका बेटा स्कूल में। अंकल अंदर जाते ही दोनों दरवाजा-खिड़कियाँ बंद कर लेते। जब अंकल बाहर निकलते तो उनका चेहरा बहुत खुश और संतुष्ट दिखता।
मेरी माँ ने भी एक बार पूछ लिया था तो भाभी ने कहा था, “वो मेरे पति के खास दोस्त हैं।” लेकिन मुझे कुछ गड़बड़ लगती थी।
एक दिन मेरा कॉलेज का लेक्चर कैंसल हो गया। मैं दोपहर 1 बजे के आसपास घर लौट रहा था। भाभी के घर के पास पहुँचा तो अंदर से अजीब सी आवाजें आने लगीं — “आह्ह्ह… उम्म्म… और जोर से चोदो… हाँ… फाड़ दो मेरी चूत…”
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं चुपचाप पीछे वाली खिड़की के पास गया। खिड़की थोड़ी खुली थी और सिर्फ पर्दा लगा हुआ था। मैंने धीरे से पर्दा हटाया और अंदर झाँका।
मेरी आँखें फट गईं। अंकल भाभी को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोद रहे थे। भाभी की साड़ी कमर तक ऊपर थी। अंकल का मोटा लंड उनकी गोरी चूत में जोर-जोर से घुस रहा था। अंकल एक हाथ से उनके बड़े स्तनों को जोर से दबा रहे थे। भाभी आँखें बंद किए कराह रही थीं — “हाँ अंकल… और तेज… पूरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह!”
उनकी गोरी-गोरी मोटी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी। उनके बड़े स्तन ब्लाउज से बाहर निकलकर उछल रहे थे। मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया। मैंने सोचा, “क्या किस्मत है अंकल की! इतनी सेक्सी औरत को रोज चोद रहे हैं।”
मैंने तुरंत अपना फोन निकाला और खिड़की से पूरा सीन वीडियो में रिकॉर्ड कर लिया। करीब 4-5 मिनट की क्लियर वीडियो बन गई जिसमें भाभी बार-बार “चोदो… और चोदो” कह रही थीं।
मैं वहाँ से चुपचाप निकल गया। उस रात मैं सो नहीं पाया। बार-बार वही वीडियो देखता और लंड हिलाता रहा। भाभी की गोरी चूत, मोटी गांड और बड़े स्तन याद करके मेरा मन पागल हो रहा था।
उसी रात मैंने फैसला कर लिया — “मुझे रेखा भाभी को चोदकर ही रहना है।”
अगले कुछ दिन मैं रेखा भाभी को देखकर बस मुस्कुराता रहता। अब मेरे पास उनका पूरा सबूत था। मैं जानता था कि अब वे मेरी मुट्ठी में हैं।
नसीब से कुछ दिन बाद मेरे माँ-पापा किसी रिश्तेदार के यहाँ 2 दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। मैंने कॉलेज के बहाने मना कर दिया और घर पर ही रह गया। सुबह माँ-पापा चले गए। अब घर में मैं अकेला था।
मैं खिड़की से नजर रखे हुए था। करीब 10:30 बजे रेखा भाभी अपने बेटे को स्कूल छोड़कर वापस आईं। उन्होंने दरवाजा बंद किया और अंदर चली गईं।
मैंने करीब 15 मिनट इंतजार किया। फिर दिल में हिम्मत बांधकर मैं उनके दरवाजे पर गया और खटखटाया।
दरवाजा खुला। सामने रेखा भाभी खड़ी थीं। उस दिन उन्होंने हल्की नीली पतली सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज बहुत छोटा और टाइट था। उनकी गोरी छाती का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था। पेट पर साड़ी नीचे सरककर उनकी नाभि भी झलक रही थी।
रेखा: अरे राहुल! तुम यहाँ? कुछ काम है क्या? अंदर आओ ना बैठो।
मैं अंदर गया। उनकी मोटी गांड साड़ी के अंदर हिल रही थी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा होने लगा था।
रेखा: तुम्हारे मम्मी-पापा तो बाहर गए हैं ना? कोई टेंशन मत लेना। कुछ चाहिए तो बताना। मैं अभी पानी लेके आती हूँ।
वे किचन की तरफ गईं। जैसे ही वे अंदर गईं, मैंने चुपके से मुख्य दरवाजा बंद कर दिया और चिटकनी लगा दी। फिर दबे पाँव उनकी पीछे किचन में घुस गया।
रेखा भाभी सिंक के सामने खड़ी पानी भर रही थीं। मैंने पीछे से एकदम से उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया। मेरे दोनों हाथ उनकी कमर पर थे और मेरा खड़ा लंड उनकी साड़ी के ऊपर से उनकी गांड पर दब गया।
रेखा: (चौंककर) आह! क्या कर रहे हो राहुल?! छोड़ो मुझे! वे जोर से धक्का देने लगीं।
रेखा: यह क्या हरकत है? मैं तुम्हारे मम्मी-पापा को बता दूँगी और अपने पति को भी!
मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “बताना चाहती हो तो बता दो… लेकिन पहले ये वीडियो तो देख लो।”
मैंने अपना फोन निकाला और उस वीडियो को प्ले कर दिया जिसमें अंकल उन्हें दीवार से चोद रहे थे और वे “और जोर से चोदो” कह रही थीं। रेखा भाभी का चेहरा सफेद पड़ गया। उनकी आँखें फट गईं।
रेखा: (काँपते हुए) यह… यह वीडियो तुम्हें कहाँ से मिली? राहुल प्लीज… इसे डिलीट कर दो… मैं तुमसे माफी माँगती हूँ।
मैं: माफी? अब माफी से काम नहीं चलेगा भाभी। तुमने अंकल से चुदवाया है तो मुझे भी चोदने दो। वरना ये वीडियो मैं तुम्हारे पति को, पूरे मोहल्ले में और सोशल मीडिया पर भी डाल दूँगा।
रेखा भाभी रोने लगीं।
रेखा: राहुल प्लीज… मेरे बच्चे का ख्याल करो… ऐसा मत करो।
मैं: बच्चे का ख्याल तो मुझे भी है भाभी… लेकिन अब तुम मेरी हो।
मैंने उन्हें जोर से पकड़कर किचन की दीवार से सटा दिया। उनकी साड़ी का पल्लू खींचकर नीचे गिरा दिया। टाइट ब्लाउज के हुक तेजी से खोल दिए। उनके बड़े-बड़े गोरे स्तन बाहर आ गए। मैंने दोनों स्तनों को जोर से पकड़कर मसलना शुरू कर दिया और एक निप्पल मुंह में ले लिया। रेखा: आह्ह्ह… नहीं… मत करो राहुल… उफ्फ…
वे विरोध कर रही थीं लेकिन धीरे-धीरे उनका शरीर ढीला पड़ने लगा। मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक ऊपर कर दिया। उनकी गोरी जांघें और पतली पैंटी दिख रही थी। मैंने पैंटी खींचकर नीचे कर दी। उनकी साफ, गोरी और थोड़ी फूली हुई चूत अब मेरे सामने थी।
मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना खड़ा मोटा लंड बाहर निकाला।
मैंने रेखा भाभी की टांगों को फैलाया और अपना लंड उनकी गोरी चूत पर रगड़ने लगा। वे अभी भी हल्का विरोध कर रही थीं।
रेखा: राहुल… प्लीज… कंडोम पहन लो… और धीरे करना…
मैं: आज तो बिना कंडोम के ही लूँगा भाभी। तुम्हारी चूत का पूरा मजा लेना है।
मैंने एक जोरदार धक्का मारा और मेरा आधा लंड उनकी टाइट चूत में घुस गया।
रेखा: आआह्ह्ह्ह!!! धीरे… बहुत मोटा है… आह!
मैं रुक नहीं। दूसरे धक्के में पूरा लंड उनकी गर्म और नरम चूत में उतर गया। फिर मैंने तेज-तेज धक्के मारना शुरू कर दिए। किचन में “थप-थप-थप” की आवाज गूंजने लगी।
भाभी की बड़ी-बड़ी छातियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं। मैं उन्हें मसलता हुआ और चूसता हुआ जोर-जोर से चोद रहा था।
रेखा: उफ्फ… राहुल… आह्ह्ह… धीरे… मेरी चूत फट जाएगी…
धीरे-धीरे उनका विरोध कम होता गया। अब वे खुद अपनी कमर हिलाने लगी थीं। मैंने उन्हें घुमाकर कुत्ते की मुद्रा में खड़ा कर दिया। उनकी मोटी गोरी गांड अब मेरे सामने थी। मैंने गांड पर दो-तीन जोरदार थप्पड़ मारे और फिर पीछे से उनकी चूत में लंड घुसा दिया।
रेखा: आह्ह्ह… हाँ… गहरा… आह!
अब भाभी पूरी तरह गरम हो चुकी थीं। वे जोर-जोर से कराह रही थीं। मैंने उन्हें 10-15 मिनट तक किचन में ही अलग-अलग तरीके से चोदा। फिर उन्हें उठाकर बेडरूम ले गया।
बेडरूम में मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया। मिशनरी पोजीशन में उनकी आँखों में देखते हुए मैं तेजी से चोद रहा था। उनके स्तनों को चूसता, उनके होंठों को चूमता।
रेखा: राहुल… मैं आ रही हूँ… आह्ह्ह… जोर से चोदो…
भाभी का शरीर काँप उठा। उन्होंने अपनी चूत मेरे लंड को जकड़ लिया और जोर से झड़ गईं। मैं भी कुछ देर बाद उनके अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ने वाला था…
मैं भाभी की टाइट चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उनकी आँखें बंद थीं और मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थीं।
रेखा: राहुल… आह्ह्ह… मैं फिर से आने वाली हूँ… जोर से… हाँ… फाड़ दो मेरी चूत…
मैंने उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख दीं और और भी गहराई तक लंड घुसाने लगा। हर धक्के के साथ उनकी मोटी गोरी गांड हिल रही थी। उनके बड़े स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने झुककर एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
कुछ ही देर बाद रेखा भाभी का शरीर जोर से काँप उठा। उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड के चारों ओर सिकोड़ लिया और जोर से झड़ गईं। उनकी गर्म चूत का रस मेरे लंड पर बहने लगा।
रेखा: आआह्ह्ह्ह!!! निकल गया… बहुत मजा आया…
अब मेरी बारी थी। मैंने तेज़ी से 10-12 और धक्के मारे और आखिर में उनकी गहरी चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। पूरा माल उनकी चूत में भर गया।
हम दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए। भाभी की साड़ी अब पूरी तरह खुली और बिखरी हुई थी। उनका गोरा शरीर पसीने, तेल और वीर्य से चमक रहा था।
कुछ देर शांति रही। फिर मैंने उन्हें अपनी तरफ खींचा और बोला,
मैं: भाभी, अब से जब भी तुम्हारा पति बाहर जाएगा, तुम मेरी हो। समझी? रेखा भाभी ने शर्माते हुए सिर हिलाया। अब वे विरोध नहीं कर रही थीं।
रेखा: तुमने तो मेरी मजबूरी का फायदा उठा लिया… लेकिन सच कहूँ तो आज के बाद… मुझे भी अच्छा लगा।
मैं मुस्कुराया। फिर उन्हें उठाकर बाथरूम ले गया। शावर के नीचे दोनों नंगे खड़े होकर एक-दूसरे को अच्छे से नहलाया। मैं फिर से उनके स्तनों को दबाने और गांड पर हाथ फेरने लगा।
नहाने के बाद हम वापस बेडरूम आए। अब भाभी खुद मेरे पास आईं और मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगीं। फिर उन्होंने झुककर मेरा लंड मुंह में ले लिया और अच्छे से चूसने लगीं।
मैं: वाह भाभी… तुम तो प्रोफेशनल हो।
कुछ देर चूसने के बाद मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और फिर से उनकी चूत में लंड डाल दिया। इस बार वे पूरी तरह तैयार थीं। वे खुद पीछे से अपनी गांड हिला-हिलाकर धक्के ले रही थीं।
रेखा: राहुल… आज पूरा दिन चोदो मुझे… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा लग रहा है…
हमने उस दिन दोपहर से शाम तक कई राउंड लिए। कभी बेड पर, कभी सोफे पर, कभी खड़े-खड़े। मैंने उनकी चूत, मुंह और गांड तीनों जगह अपना माल भरा।
शाम को जब उनका बेटा स्कूल से आने वाला था, तब हमने कपड़े पहन लिए। रेखा भाभी ने मुझे आखिरी बार चूम लिया और बोलीं,
रेखा: राहुल… आज के बाद जब भी मौका मिले, आ जाना। लेकिन सावधानी से।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ज़रूर भाभी… अब तुम मेरी प्राइवेट रंडी हो।”
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