चाची की तनी हुई चूचियाँ और गोल गाँड – भतीजे ने दो रात लगातार चोदा
गाँव की सेक्सी चाची की तनी हुई चूचियाँ और गोल गाँड देखकर भतीजा काबू में नहीं रहा। दो रात लगातार दोनों छेद में लंड डालकर चोदता रहा। पूरी हॉट कहानी अभी पढ़ो।
मेरा नाम रोहित है। उम्र 22 साल। शहर में रहता हूँ। इस बार गर्मी की छुट्टियों में गाँव गया था। गाँव में चाचा और चाची रहते हैं। चाचा अक्सर खेतों और बाहर के काम में व्यस्त रहते। घर में ज्यादातर चाची ही होतीं।
चाची का नाम सुमन है। उम्र करीब 36 साल। लेकिन बॉडी देखो तो कोई 28 की भी नहीं लगे। गोरी चमकदार त्वचा, बड़ी-बड़ी गोल और टाइट चूचियाँ, पतली कमर और एकदम गोल भारी गाँड। वे हमेशा सूती या रेशमी साड़ी पहनतीं। साड़ी उनकी गाँड पर ऐसे चिपकती थी कि गोल आकार साफ दिखता। ब्लाउज टाइट होता, जिससे उनकी चूचियाँ तनी हुई और आगे को निकली हुई लगतीं।
मैं जब भी गाँव जाता, मेरी निगाहें बार-बार चाची पर ठहर जातीं। वे भी कभी-कभी मुझे देखते हुए मुस्कुरा देतीं, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ती थी।
इस बार चाचा दो दिन के लिए दूसरी जगह गए हुए थे। घर में सिर्फ चाची और मैं था। पहली रात नॉर्मल गुजरी। दूसरी शाम को बात बनी।
चाची रसोई में खाना बना रही थीं। साड़ी हल्की पीली थी, ब्लाउज गहरा नेवी ब्लू। साड़ी उनकी गाँड पर पूरी तरह चिपक रही थी। मैं पीछे से गया और धीरे से बोला, “चाची… आपकी साड़ी आज बहुत फब रही है।”
चाची मुस्कुराईं, “पागल लड़का। जा, हाथ-मुँह धो के आ।”
मैं उनके और करीब हो गया। मेरा सीना उनकी पीठ से छू रहा था। मैंने धीरे से कहा, “चाची… मैं आपको बहुत दिन से देख रहा हूँ। आप बहुत हॉट लगती हैं।”
चाची का शरीर थोड़ा सख्त हो गया। उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में हैरानी थी, लेकिन गुस्सा नहीं। “रोहित… ये क्या बातें कर रहा है तू? मैं तेरी चाची हूँ।”
मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। “चाची… बस एक बार छूने दो। मन नहीं मान रहा।”
चाची ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन जोर नहीं था। मैंने उनका हाथ अपनी छाती पर रखा। फिर धीरे से आगे बढ़कर उनकी कमर में हाथ डाल दिया। साड़ी के ऊपर से उनकी गाँड को हल्के से दबाया। चाची की साँस तेज हो गई।
“रोहित… मत कर… पाप लगेगा…”
मैंने उनके कान के पास मुँह लाकर कहा, “कोई नहीं जानने वाला चाची। चाचा दो दिन बाद ही आएंगे। आज रात मुझे अपनी बना लो।”
चाची कुछ पल चुप रहीं। उनकी साँसें तेज चल रही थीं। फिर उन्होंने धीरे से सिर हिलाया। “अंदर चल… रसोई में नहीं।”
हम दोनों उनके कमरे में चले गए। दरवाज़ा बंद होते ही मैंने चाची को दीवार से सटा दिया। उनका ब्लाउज टाइट था। मैंने हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके खुलते गए। ब्लाउज ढीला होते ही उनकी बड़ी-बड़ी टाइट चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स कड़े हो चुके थे।
मैंने एक चूची मुँह में ले ली और जोर से चूसने लगा। चाची की कराह निकल गई। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। “आह्ह… रोहित… हल्के से… आह्ह…”
मैंने दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसा, काटा और मसला। फिर उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और साड़ी ऊपर करने लगा। पेटीकोट के साथ साड़ी उनकी कमर तक आ गई। उनकी गोरी गोल गाँड अब मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से मसलनी शुरू कर दी।
चाची दीवार पकड़े हुए कराह रही थीं। मैंने उनकी पैंटी साइड में की और उंगली उनकी चूत में डाली। वे पहले से गीली थीं। “चाची… आप भी तो तैयार हो…”
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह हटा दिए। अब चाची सिर्फ ब्लाउज खोले और पैंटी साइड में किए हुए लेटी थीं। मैंने उनकी टाँगें फैलाईं और मुँह उनकी चूत पर रख दिया। जीभ से चाटा, चूसा, उंगलियाँ अंदर तक डालीं। चाची की कमर उठने लगी।
“रोहित… अब काफी हो गया… डाल दे…”
मैंने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह सख्त था। चाची ने खुद उसे देखा और आँखें चौड़ी कर लीं। मैंने लंड उनकी गीली चूत पर रखा और धीरे से धक्का मारा। थोड़ा अंदर गया। चाची की भौंहें सिकुड़ गईं।
“आह्ह… धीरे… बहुत दिन बाद… आह्ह…”
मैंने एक और जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। चाची ने मेरी पीठ में नाखून गड़ा दिए। मैं धीरे-धीरे हिलने लगा। उनकी बड़ी चूचियाँ मेरे सीने से रगड़ रही थीं। मैंने एक को मुँह में ले लिया और चोदते हुए चूसने लगा।
“और जोर से… अब आदत हो गई…” चाची ने हाँफते हुए कहा।
मैंने उनकी टाँगें अपने कंधों पर चढ़ा दीं और गहराई तक मारने लगा। चाची की गोल गाँड हर धक्के के साथ काँप रही थी। उनकी कराहें कमरे में गूंज रही थीं। थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें पलटा। अब चाची पेट के बल थीं। मैंने उनकी गाँड ऊपर उठाई और पीछे से फिर से अंदर घुस गया। इस बार और तेज।
चाची तकिया दबाए कराह रही थीं। “रोहित… आज रात पूरी… मत छोड़ना…”
मैंने उनके बाल पकड़कर और जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। एक हाथ से उनकी चूची मसल रहा था। उस रात मैंने चाची को दो बार लिया। एक बार चूत में और आखिर में उनके मुँह में। चाची मेरे नीचे पूरी तरह थक चुकी थीं। साड़ी बिस्तर के किनारे पड़ी थी, ब्लाउज खुला हुआ था।
चाची ने मेरी छाती पर सिर रखकर धीरे से कहा, “चाचा के आने तक… तू रात को मेरे कमरे में आना। लेकिन कोई नहीं जानने चाहिए।”
मैंने उनके माथे पर चुंबन किया। “जैसी आपकी इच्छा चाची।”
गाँव की उस रात में चाची और भतीजे के बीच वो रिश्ता शुरू हो चुका था जो अब आसानी से खत्म होने वाला नहीं था।
पहली रात के बाद चाची का व्यवहार बदल चुका था। सुबह वे थोड़ी शर्मा रही थीं, लेकिन उनकी आँखों में वह हिचक नहीं बची थी जो पहले थी। दोपहर तक चाचा के आने में अभी डेढ़ दिन बाकी थे। घर में फिर से सिर्फ हम दोनों थे।
शाम को चाची ने नहाकर एक लाल रंग की साड़ी पहन ली। ब्लाउज बहुत टाइट था। उनकी चूचियाँ तनी हुई और आगे को निकली हुई लग रही थीं। साड़ी उनकी गोल गाँड पर पूरी तरह चिपक रही थी। मैंने उन्हें रसोई में खड़े देखा तो पीछे से जाकर उनकी कमर में हाथ डाल दिया।
चाची हल्की सी काँप गईं। “रोहित… अभी नहीं… बाद में…”
मैंने उनकी गाँड दोनों हाथों से पकड़ ली और जोर से दबाया। “अब बर्दाश्त नहीं हो रहा चाची। अभी लेना है।”
चाची ने मेरी तरफ देखा। फिर उन्होंने धीरे से सिर हिलाया। मैंने उन्हें रसोई की स्लैब पर झुका दिया। साड़ी ऊपर की, पेटीकोट और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। उनकी गोरी गोल गाँड मेरे सामने नंगी थी। मैंने थूक लगाया और एक ही धक्के में लंड उनकी चूत में डाल दिया।
चाची जोर से कराह उठीं। “आह्ह… धीरे… अभी तो… आह्ह…”
मैंने उनके बाल पकड़ लिए और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्का तेज था। उनकी बड़ी चूचियाँ स्लैब पर दब रही थीं। मैंने ब्लाउज के हुक खोल दिए और एक हाथ से उनकी चूची मसलने लगा। चाची की कराहें रसोई में गूंज रही थीं।
“और जोर से… आज बहुत जोर से मार…” चाची ने खुद कहा।
मैंने उनकी गाँड पर जोर का थप्पड़ मारा और और तेज धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में ही चाची का शरीर काँपने लगा। वे चरम पर पहुँच गईं। मैंने उसी हालत में अपना पानी उनकी चूत में छोड़ दिया।
रात को चाची खुद मेरे कमरे में आईं। इस बार उन्होंने साड़ी नहीं पहनी थी। सिर्फ एक पतली नाइट ड्रेस में थीं। अंदर कुछ नहीं। वे मेरे बिस्तर पर चढ़ गईं और बिना कुछ बोले मेरा लंड निकालकर मुँह में ले लिया। वे जोर-जोर से चूसने लगीं। कभी गहराई तक ले जातीं, कभी सिर्फ आगे का हिस्सा चूसतीं। उनकी बड़ी चूचियाँ मेरे जांघों से रगड़ रही थीं।
मैंने उनके बाल पकड़कर और गहराई तक मुँह में ठूस दिया। चाची की आँखों से आँसू आ गए लेकिन उन्होंने मुँह नहीं हटाया। थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। उनकी टाँगें कंधों पर चढ़ाईं और एकदम जोर से चोदने लगा। हर धक्का इतना तेज था कि बिस्तर चरमरा रहा था।
“चाची… आज गाँड भी लूँगा,” मैंने कहा।
चाची ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। मैंने लंड निकाला, थूक लगाया और उनकी गाँड के छेद पर रखा। पहले हल्के-हल्के दबाव दिया, फिर एक जोरदार धक्के में आधा लंड अंदर धकेल दिया। चाची जोर से चिल्लाईं।
“आह्ह्ह… दर्द… रोहित… धीरे…”
मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गाँड में डाल दिया। फिर चोदना शुरू किया। पहले धीमे, फिर तेज। एक हाथ से उनकी चूची मसल रहा था, दूसरे से उनके बाल पकड़े हुए था। चाची तकिया दबाए कराह रही थीं। उनकी गाँड हर धक्के के साथ लाल हो रही थी।
मैंने बहुत देर तक उनकी गाँड चोदी। आखिर में पूरा पानी उनके अंदर छोड़ दिया। चाची मेरे नीचे पूरी तरह ढीली पड़ गई थीं। उनके शरीर पर मेरे नाखून और थप्पड़ों के निशान थे।
आखिरी रात और भी हार्ड थी। चाची को पता था कि अगले दिन चाचा आने वाले हैं। इसलिए उस रात वे खुद पूरी तरह खुल गईं। उन्होंने मुझसे कहा, “आज जितना मारना है मार ले… कल के बाद मौका नहीं मिलेगा जल्दी।”
मैंने उस रात उन्हें तीन बार लिया। पहली बार उनकी चूत में बहुत जोर से। दूसरी बार गाँड में खड़े होकर। तीसरी बार उनके मुँह में। बीच-बीच में उनकी चूचियों को काट-काट कर लाल कर दिया। उनकी गाँड पर कई थप्पड़ मारे। चाची कभी रोने जैसी आवाज़ निकालतीं, कभी और जोर से चोदने को कहतीं।
सुबह होने के करीब चाची मेरे सीने से चिपकी हुई लेटी थीं। उनका शरीर पसीने और मेरे पानी से भीगा हुआ था। उन्होंने धीरे से कहा,
“जब भी गाँव आना… मुझे बता देना। मैं मौका बना लूँगी।”
मैंने उनकी तनी हुई चूची को हल्के से दबाते हुए जवाब दिया, “जरूर चाची… अगली बार और जोर से लूँगा।”
चाची मुस्कुराईं। गाँव की उन दो रातों ने सब कुछ बदल दिया था। अब चाची और भतीजे के बीच वो रिश्ता था जो छुपाकर रखना था… लेकिन रोकना नामुमकिन।
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