सौतेली माँ की टाइट चूत बेटे ने इतना चोदा कि वो चल भी नहीं पाई
अकेली पड़ी 34 साल की हॉट सौतेली माँ को बेटे ने रातभर जमकर चोदा। इतनी टाइट चूत थी कि सुबह तक वो ठीक से चल भी नहीं पाई।

अर्जुन की उम्र 21 साल थी। कॉलेज का आखिरी साल चल रहा था। घर में सिर्फ वही और उसकी सौतेली माँ मीरा रहती थीं।
मीरा 34 साल की थीं। अर्जुन के पिता से शादी को तीन साल हुए थे। पिताजी अक्सर बाहर रहते थे, बिजनेस ट्रिप पर। इसलिए घर में ज्यादातर सिर्फ दोनों ही होते थे।
मीरा गोरी थीं, लंबी और शरीर एकदम टाइट। नियमित जिम जाती थीं। गोल चेहरा, बड़ी आँखें और होंठ ऐसे कि देखते ही चूमने का मन करे। उनकी छातियाँ भरी हुई थीं, कमर पतली और गाँड एकदम गोल। जब लेगिंग पहनती थीं तो उनका आकार साफ दिखता था। नाइटी में तो और भी ज्यादा।
उस दिन पिताजी चार दिन के लिए दुबई गए हुए थे। घर बिल्कुल खाली था।
शाम के सात बजे अर्जुन अपने कमरे से निकला। टी-शर्ट और शॉर्ट्स में था। किचन में मीरा खड़ी थीं। काले रंग की पतली नाइटी पहनी हुई थी। कपड़ा इतना हल्का था कि बिना ब्रा के उनकी छातियों का आकार साफ दिख रहा था। निप्पल्स का हल्का उभार भी नजर आ रहा था। नाइटी उनकी जाँघों के ऊपर तक ही थी।
अर्जुन की नजर वहीं अटक गई।
मीरा ने मुड़कर देखा। “खाना लगा दूँ? भूख लगी होगी।”
अर्जुन पास आया। उसने काउंटर पर हाथ रखकर उसे थोड़ा सा घेर लिया। आँखों में देखते हुए बोला,
“खाना बाद में। अभी कुछ और मन कर रहा है।”
मीरा की भौंहें थोड़ी चढ़ गईं। “अर्जुन… ये क्या बात कर रहा है?”
“वही जो तुम समझ रही हो,” अर्जुन ने धीरे से कहा। उसने हाथ बढ़ाकर मीरा की कमर पकड़ ली। “पापा घर पर नहीं हैं। चार दिन तक नहीं आएंगे। और तुम इतनी हॉट लग रही हो कि मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।”
मीरा का चेहरा थोड़ा लाल हो गया। “अर्जुन, मैं तुम्हारी माँ हूँ… ये गलत है।”
“माँ नहीं, सौतेली माँ,” अर्जुन ने उसे और पास खींच लिया। उसका कठोर लंड उसकी जाँघों से छू रहा था। “और तुम जानती हो मैं तुम्हें कैसे देखता हूँ। जब तुम जिम से पसीने में आती हो, जब तुम नाइटी में घर में घूमती हो… मैं हर बार सोचता हूँ कि तुम्हें एक बार अच्छे से चोदूँ।”
मीरा ने थोड़ा विरोध किया, लेकिन उसकी आवाज में कमजोरी थी। “अर्जुन… प्लीज… मत करो।”
अर्जुन ने उसकी नाइटी का स्ट्रैप एक तरफ से उतार दिया। उसकी बाईं छाती बाहर आ गई। ब्रा नहीं पहनी थी। नरम, भारी और गुलाबी निप्पल पहले से थोड़ा टाइट था। अर्जुन ने तुरंत उसे मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
“आह्ह… अर्जुन… छोड़ो… ये नहीं…” मीरा की आवाज काँप रही थी, लेकिन उसने अर्जुन का सिर धक्का नहीं दिया। उल्टा उसके बाल पकड़ लिए।
अर्जुन दूसरी छाती भी बाहर निकालकर दोनों को मसलने लगा। कभी एक चूसता, कभी दूसरी। अपनी जीभ से निप्पल को घुमाता, हल्का काटता, फिर फिर से चूसता। मीरा की साँसें तेज होने लगीं।
फिर अर्जुन नीचे गया। नाइटी ऊपर उठाई। उसके नीचे सिर्फ एक छोटी काली पैंटी थी, जो पहले से थोड़ी गीली थी। अर्जुन ने पैंटी को साइड में खींचकर अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी।
“फक… कितनी नरम और स्वादिष्ट है,” उसने नीचे से कहा। “पापा को पता भी नहीं होगा कि उनकी बीवी कितनी गीली हो सकती है।”
मीरा दोनों हाथ काउंटर पकड़े हुए थी। उसकी टाँगें थोड़ी सी खुल गई थीं। अर्जुन ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और तेज-तेज चलाने लगा जबकि जीभ उसके क्लिट पर घूम रही थी।
“अर्जुन… आह्ह्ह… धीरे… बहुत फील हो रहा है…”
थोड़ी देर बाद अर्जुन खड़ा हुआ। उसने अपने शॉर्ट्स नीचे किए। उसका लंड बाहर आया — मोटा, लंबा और बिल्कुल टाइट। मीरा की आँखें उस पर अटक गईं।
अर्जुन ने उसे वहीं काउंटर पर उल्टा कर दिया। उसके हाथ काउंटर पर थे, गाँड बाहर को। अर्जुन ने पैंटी बिल्कुल नीचे खींच दी और अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगा।
“बोल, अंदर डालूँ?”
मीरा ने सिर्फ सिसकी दी। अर्जुन ने एक ही धक्के में आधा अंदर तक डाल दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… अर्जुन… बड़ा है… धीरे…”
उसने पूरा अंदर तक धक्का मारा और फिर तेज धक्के लगाने लगा। मीरा की छातियाँ काउंटर से रगड़ खा रही थीं। अर्जुन एक हाथ से उसकी छाती दबाता, दूसरे से उसकी गाँड।
“इतनी टाइट चूत… लगता है पापा अच्छे से नहीं चोदते थे तुम्हें।”
मीरा सिर्फ मोगन कर रही थी। “जोर से… और जोर से कर…”
अर्जुन ने उसके बाल पकड़ लिए और और तेज चोदने लगा। किचन में सिर्फ थप-थप की आवाज और मीरा की सिसकियाँ गूँज रही थीं।
वह उसे वहीं काउंटर पर लगभग चालीस मिनट तक चोदता रहा। फिर उसे बेडरूम ले गया। बिस्तर पर लिटाकर उसकी टाँगें फैलाईं और फिर से अंदर घुसा दिया। इस बार और गहरा।
मीरा ने उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। “अर्जुन… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…”
अर्जुन ने उसकी चूची मुँह में ली और धक्के तेज कर दिए। मीरा झड़ गई, उसका शरीर काँपने लगा। अर्जुन रुका नहीं। वह उसे अलग-अलग पोजीशन में लेता रहा — मिशनरी, डॉगी, फिर उसे ऊपर बिठाकर।
दूसरी बार जब अर्जुन झड़ने वाला था, तो उसने लंड बाहर निकालकर मीरा के मुँह के सामने रख दिया। मीरा ने खुद मुँह खोल दिया। अर्जुन ने उसके मुँह में वीर्य छोड़ दिया। मीरा ने थोड़ा निगल लिया, बाकी उसके होठों और छातियों पर गिर गया।
रात के ग्यारह बज चुके थे। दोनों पसीने से गीले थे। मीरा बिस्तर पर लेटी हुई थी, साँसें तेज चल रही थीं। उसकी नाइटी बिल्कुल बिगड़ चुकी थी, पैंटी साइड में पड़ी थी।
अर्जुन उसके बगल में लेटा। उसने उसकी गीली चूची को सहलाते हुए कहा, “ये सिर्फ शुरुआत है। पापा चार दिन बाद आएंगे। तब तक मैं तुम्हें हर दिन ऐसे ही चोदूँगा।”
मीरा ने आँखें बंद करके कहा, “तुम पागल हो… मुझे तुम्हें रोकना चाहिए था…”
अर्जुन मुस्कुराया। “लेकिन तुमने नहीं रोका। कल रात मैं तुम्हें और कुछ पहनाने वाला हूँ। और इस बार मैं तुम्हारी गाँड भी लूँगा।”
मीरा की आँखें खुल गईं। उसमें डर भी था, और एक अजीब सी उत्तेजना भी।
घर में अभी भी सन्नाटा था। बाहर से सिर्फ एसी की आवाज आ रही थी। और बिस्तर पर दो शरीर अभी भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
अगली सुबह मीरा देर तक सोई रहीं। कल रात का असर उनके शरीर पर अभी भी था। उनकी चूत हल्की सी दर्द कर रही थी, छातियों पर अर्जुन के मुँह के निशान थे। वे उठकर बाथरूम गईं और आईने में खुद को देखा। उनकी आँखों में शर्म भी थी, लेकिन एक अजीब सी भूख भी।
अर्जुन उनसे पहले से किचन में खड़ा था। उसने नाश्ता बनाया था। मीरा को देखते ही उसकी आँखों में वही भूख दिख गई।
“कैसे हो?” उसने धीरे से पूछा।
मीरा ने नजर झुका ली। “अर्जुन… कल रात जो हुआ… वो बिल्कुल गलत था।”
अर्जुन पास आया और उसकी कमर पकड़ ली। “गलत था, लेकिन तुम्हें मजा आया। मैं जानता हूँ। आज रात मैं तुम्हें और ज्यादा मजा दूँगा।”
दोपहर में अर्जुन ने ऑनलाइन से कुछ ऑर्डर किया। शाम तक डिलीवरी आ गई। एक पूरे काले, लगभग पारदर्शी नेट का पूरा बॉडी सेट। बहुत पतला कपड़ा, जो शरीर से चिपक जाए। साथ में मैचिंग थोंग।
रात के नौ बजे अर्जुन ने मीरा को बेडरूम में बुलाया। उसने पैकेट उसके हाथ में दिया।
“पहन के आओ।”
मीरा ने अंदर का सामान देखा तो उनकी आँखें फैल गईं। “ये… मैं ये नहीं पहनूँगी।”
अर्जुन ने उसका चेहरा अपनी तरफ किया। “पहनो। पापा दो दिन बाद आएंगे। उसके बाद ये मौका नहीं मिलेगा। आज रात मैं तुम्हें पूरी तरह से लेना चाहता हूँ।”
मीरा थोड़ी देर खड़ी रहीं, फिर धीरे से बाथरूम चली गईं। पंद्रह मिनट बाद वे निकलीं।
काला नेट उनके शरीर पर चिपका हुआ था। उनकी भारी छातियाँ, गुलाबी निप्पल्स, पेट और जाँघों के बीच सब कुछ साफ दिख रहा था। थोंग उनकी गाँड के बीच में खोया हुआ था। शरीर पर नेट का पैटर्न पड़ रहा था।
अर्जुन का लंड तुरंत टाइट हो गया।
“फक… तुम तो मार डालोगी आज।”
वह उठा और उनके पास गया। दोनों हाथों से उनकी छातियाँ नेट के ऊपर से दबाने लगा। निप्पल्स को उँगलियों में लेकर मसलने लगा। फिर झुककर नेट के ऊपर से ही चूसने लगा। थूक से कपड़ा गीला हो गया।
मीरा की साँसें तेज हो गईं। “अर्जुन… आह्ह…”
अर्जुन नीचे गया। थोंग को साइड में खींचकर उसकी चूत पर जीभ फेरने लगा। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और तेज चलाने लगा। मीरा के पैर काँपने लगे।
“कितनी गीली हो चुकी हो… कल से भी ज्यादा।”
थोड़ी देर बाद अर्जुन खड़ा हुआ। उसने अपना लंड निकाला और मीरा के मुँह के सामने रख दिया। मीरा ने खुद होंठ खोल दिए। अर्जुन ने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुँह चोदने लगा। कभी पूरा अंदर तक, कभी निकालकर उसके होंठों पर रगड़ता। थूक मीरा के गले से लेकर छातियों तक बहने लगा।
फिर उसने मीरा को बिस्तर पर लिटाया। टाँगें फैलाईं और एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… अर्जुन… पूरा अंदर है…”
अर्जुन तेज धक्के लगाने लगा। नेट की बॉडी-सूट अभी भी उन पर थी। हर धक्के के साथ उनकी छातियाँ हिल रही थीं। अर्जुन नेट को ऊपर सरकाकर दोनों निप्पल्स मुँह में लेता और चूसता रहता।
एक घंटे तक वह लगातार चोदता रहा। बीच में पोजीशन बदलता — कभी उनके ऊपर, कभी पीछे से डॉगी में। मीरा कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी आवाज बैठने लगी थी, लेकिन अर्जुन रुका नहीं।
दूसरे घंटे में अर्जुन ने उन्हें पेट के बल लिटा दिया। थोंग बिल्कुल हटा दिया। अपना लंड उनकी गाँड के छेद पर रख दिया।
मीरा तुरंत टाइट हो गईं। “अर्जुन… नहीं… वहाँ मत कर… दर्द होगा…”
“आज लेना है,” अर्जुन ने कहा। उसने थूक लगाया, पहले एक उँगली डाली, फिर दो। मीरा की सिसकी निकल गई। फिर उसने लंड का सिरा लगाकर धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया।
“आह्ह्ह्ह्ह… निकाल… बहुत दर्द… प्लीज…”
अर्जुन रुका नहीं। धीरे-धीरे आधा अंदर किया, फिर पूरा। मीरा के नाखून चादर में गड़ गए। आँखों से आँसू आ गए। लेकिन कुछ देर बाद दर्द के साथ मजा भी मिलने लगा। उनकी कराहें बदल गईं।
अर्जुन ने उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज गाँड चोदनी शुरू कर दी। हर धक्के के साथ मीरा की छातियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। नेट का कपड़ा फटने लगा था।
“कितनी टाइट गाँड है तुम्हारी… पापा ने कभी नहीं मारी होगी।”
मीरा हाँफते हुए बोलीं, “धीरे… आह्ह… बहुत गहरा जा रहा है…”
अर्जुन ने रफ्तार और बढ़ा दी। वह उन्हें गाँड में ही लगभग एक घंटे चोदता रहा। बीच-बीच में निकालकर चूत में डालता, फिर वापस गाँड में। कभी मुँह में देकर साफ करवाता।
मीरा बिल्कुल गीली थीं — पसीने से, थूक से, और अपने रस से। उनका शरीर काँप रहा था। वे कई बार झड़ चुकी थीं, अब सिर्फ धीमी सिसकियाँ निकल रही थीं।
रात के दो बज चुके थे जब अर्जुन ने उन्हें फिर से चूत में लिया। इस बार बहुत तेज। मीरा की टाँगें उसके कंधे पर थीं। अर्जुन ने उनकी दोनों छातियाँ दबाए रखीं और आखिरी धक्के मारते हुए उनके अंदर ही वीर्य छोड़ दिया। बहुत सारा।
फिर निकाला और बाकी का वीर्य उनकी छातियों, पेट और नेट पर फैला दिया।
मीरा बिस्तर पर बिल्कुल ढीली पड़ी थीं। नेट का कपड़ा लगभग फट चुका था। उनकी चूत और गाँड दोनों से वीर्य निकल रहा था। आँखें बंद थीं, साँसें तेज।
अर्जुन उनके बगल में लेट गया। उसने उनकी चिपचिपी चूची सहलाते हुए कहा, “थक गईं?”
मीरा ने सिर्फ हल्का सा सिर हिलाया।
“अभी भी दो दिन बाकी हैं,” अर्जुन ने धीरे से कहा। “कल रात मैं तुम्हें फिर से लूँगा। और उसके अगले दिन भी। जब तक पापा नहीं आ जाते, तब तक तुम मेरी हो।”
मीरा ने आँखें नहीं खोलीं। कमजोर आवाज में बोलीं, “तुम मुझे खराब कर दोगे अर्जुन…”
अर्जुन मुस्कुराया और उनके गले पर चुंबन लिया।
“तुम पहले से ही खराब होना चाहती थीं। इसलिए आज तक नहीं रोका तुमने।”
बाहर हल्की सी सुबह की रोशनी आने लगी थी। दोनों थककर सो गए। मीरा के शरीर में अभी भी अर्जुन का गर्म वीर्य भरा हुआ था — चूत में भी, गाँड में भी।
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