सोती माँ की गांड में पीछे से चिपक कर लंड रगड़ा और चूचियां दबायी - सेक्सी जवान माँ

सोती हुई सेक्सी जवान माँ की नंगी टाइट गांड में पीछे से चिपककर बेटे ने अपना मोटा लंड रगड़ा और भारी चूचियों को जोर-जोर से दबाया। गांव की उस खास रात में बेटा काबू नहीं रख पाया और माँ की गांड की चेद पर अपना गाढ़ा गरम माल छोड़ दिया। एकदम गंदा, गहरा और रोमांचक माँ-बेटे का निषिद्ध रिश्ता।

लेखक: Vikas Gupta6 मिनट पढ़ने में
सोती माँ की गांड में पीछे से चिपक कर लंड रगड़ा और चूचियां दबायी - सेक्सी जवान माँ

दिल्ली के एक पुराने इलाके में एक छोटा-सा घर था। उस घर में चार लोग रहते थे — पापा, माँ शलिनी, 21 साल का बेटा आर्यन और उसकी छोटी बहन। माँ शलिनी की उम्र 37-38 साल के आसपास थी। वो बेहद गोरी, चिकनी त्वचा वाली और कद में सिर्फ 5 फुट 3 इंच की थीं। उनका शरीर भरा-भरा और बेहद आकर्षक था — कमर थोड़ी मोटी, कूल्हे चौड़े और गांड बिल्कुल गोल, टाइट तथा चिकनी।

शलिनी अक्सर पतली साड़ी पहनती थीं। ज्यादातर समय पेटीकोट के बिना ही साड़ी लपेट लेती थीं और सिर्फ अंडरवियर पहनकर रहती थीं। कई बार तो अंडरवियर भी नहीं पहनती थीं — सिर्फ साड़ी के नीचे पूरी तरह नंगी। जब वो घर के काम करतीं — पोछा लगातीं या कपड़े धोतीं — तो पतली साड़ी उनके शरीर से चिपक जाती।

आर्यन दूर से देखता कि माँ झुकती हैं तो उनकी गोल और टाइट गांड का पूरा आकार साफ दिख जाता है। साड़ी की पतली परत के नीचे गांड के दोनों चूतड़ अलग-अलग नज़र आते। कभी-कभी साड़ी थोड़ी खिसक जाती तो गांड की दरार का निशान भी दिख जाता।

आर्यन अपनी माँ शलिनी की इस सेक्सी फिगर पर पूरी तरह फिदा था। वो अक्सर चुपके-चुपके माँ को देखा करता। जब शलिनी पोछा लगातीं तो उनके भारी-भरे स्तन (चूचियाँ) ब्लाउज के अंदर उछलते रहते। शलिनी ज्यादातर ब्रा नहीं पहनती थीं। वो सीधे पतले ब्लाउज में ही रहती थीं। ब्लाउज इतना पतला होता कि उनकी चूचियों के काले-काले निप्पल्स की हल्की छाया भी दिख जाती।

जब शलिनी कपड़े धोने के लिए झुकतीं, तो दोनों बड़ी-बड़ी गोरी चूचियाँ नीचे लटक जातीं और ब्लाउज के अंदर से आधी बाहर निकल आतीं। आर्यन देखता और मन ही मन सोचता — “काश इन चूचियों को दबा पाऊँ… काश माँ की गांड और चूत को छू पाऊँ…”

घर छोटा होने की वजह से सब एक ही कमरे में रहते थे। लेकिन दोपहर के समय अक्सर घर में कोई नहीं होता था। पापा ऑफिस चले जाते और बहन स्कूल या बाहर चली जाती। शलिनी सारा काम निपटा कर थक जातीं और दोपहर में सोने चली आतीं। आर्यन बाहर से देखता कि माँ अंदर जाकर लेट गई हैं। वो चुपके से दरवाजा बंद कर लेता, ताला लगा देता और माँ के बगल में चुपचाप लेट जाता।

शलिनी जब गहरी नींद में होतीं, तब आर्यन धीरे-धीरे उनके करीब खिसकता। माँ करवट लेकर दूसरी तरफ सो जातीं तो उनकी गांड आर्यन के सामने आ जाती। आर्यन पागल हो जाता। माँ की वो बिना अंडरवियर वाली गोल, चिकनी और टाइट गांड देखकर उसका लंड अपने आप खड़ा हो जाता। वो माँ शलिनी के शरीर की खुशबू सूंघता — पसीने की हल्की महक, साड़ी की खुशबू और माँ की अपनी निजी खुशबू।

धीरे-धीरे वो अपना हाथ बढ़ाता और शलिनी की टाइट गांड पर रख देता। पहले हल्के-हल्के सहलाता। फिर थोड़ा जोर से दबाता। गांड की नरम चिकनी चमड़ी उसके हाथ में आती। वो उंगलियाँ गांड की दरार में भी घुमाता। कभी-कभी हिम्मत करके अपनी पैंट का जिप खोलता, लंड बाहर निकालता और माँ के बिल्कुल करीब आ जाता। फिर अपना मोटा और तना हुआ लंड शलिनी की गांड की दरार के बीच में सटा देता। लंड की गर्म नोंक माँ की चिकनी गांड के बीच दब जाती। आर्यन धीरे-धीरे आगे-पीछे हिलता, लंड को माँ की गांड की दरार में रगड़ता।

शलिनी कभी-कभी हल्का सा हिलतीं या कराहतीं, लेकिन सोचतीं कि आर्यन सो रहा है और करीब आ गया है। वो इग्नोर करके फिर सो जातीं। आर्यन और बहादुर हो जाता। वो माँ को अपनी बाहों में भर लेता। एक हाथ माँ की पीठ से नीचे ले जाता और शलिनी की भारी चूची पर रख देता। चूची इतनी बड़ी और नरम होती कि पूरा हाथ भर जाता। आर्यन धीरे-धीरे दबाता, निप्पल को उंगलियों से घुमाता। क्योंकि शलिनी ब्रा नहीं पहनती थीं, ब्लाउज के अंदर से चूची आधी बाहर निकली रहती। आर्यन ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर सीधे नंगी चूची को पकड़ लेता और जोर-जोर से दबाता।

कभी-कभी शलिनी करवट बदलकर उल्टी सो जातीं। तब उनकी दोनों चूचियाँ ऊपर की तरफ उभर आतीं। आर्यन एक हाथ से ऊपर वाली चूची दबाता और दूसरी चूची को अपने मुँह में लेकर चूसता। हल्के-हल्के दाँतों से निप्पल को काटता भी। माँ गहरी नींद में होतीं, इसलिए कुछ नहीं समझ पातीं। आर्यन माँ शलिनी के बिल्कुल चिपककर सो जाता — एक हाथ में माँ की चूची, दूसरा हाथ माँ की गांड पर, और अपना लंड माँ की गांड की दरार में दबाकर।

ये सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। आर्यन हर रोज़ माँ शलिनी की गांड सहलाता, चूचियाँ दबाता, लंड रगड़ता। लेकिन उसके मन में हमेशा एक ही ख्वाहिश रहती — “काश मैं माँ की चूत और गांड को और अच्छे से मसल पाऊँ… काश मैं अपना लंड उनकी चूत में या गांड में डाल पाऊँ…”

वो और आगे बढ़ना चाहता था। लेकिन अभी तक सिर्फ छुपकर छूने और रगड़ने तक ही सीमित था। शलिनी की गोरी चिकनी गांड, उनकी भारी चूचियाँ, ब्लाउज से बाहर निकलते निप्पल्स, और साड़ी के नीचे नंगी चूत — ये सब आर्यन के दिमाग में दिन-रात घूमता रहता।

एक दिन परिवार में कोई फंक्शन था, इसलिए पूरी फैमिली गाँव चली गई। उस समय आर्यन की गर्मियों की छुट्टियाँ भी चल रही थीं। गाँव में उनका पुराना घर था, जो काफी छोटा था। उस घर में सिर्फ एक ही बड़ा बिस्तर था, जिसमें पहले आर्यन, फिर पापा, फिर माँ शलिनी और उनके बगल में छोटी बहन सोती थी।

पापा वहाँ सिर्फ 10 दिन रुके। उसके बाद उन्हें दिल्ली वापस लौटना पड़ा। जाने से पहले पापा ने कहा कि तुम सब यहीं रहकर छुट्टियाँ एंजॉय करो। शलिनी ने भी आर्यन और छोटी बहन को गाँव में ही छोड़ दिया और कहा, “तुम लोग यहीं रुको, मैं एक महीने बाद तुम्हें लेने आऊँगी।” लेकिन असल में शलिनी भी गाँव में ही रुक गईं ताकि बच्चों का ख्याल रख सकें। आर्यन के लिए ये मौका किसी लॉटरी से कम नहीं था। अब पापा दिल्ली चले गए थे, और रात में बिस्तर पर शलिनी के ठीक बगल में आर्यन सोने वाला था।

पहली रात आर्यन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। बिस्तर पर पहले आर्यन लेटा, फिर शलिनी और उनके बगल में छोटी बहन सो गई। शलिनी थकी हुई थीं, इसलिए जल्दी ही सो गईं। आर्यन चुपचाप उनके करीब खिसक गया। माँ शलिनी करवट लेकर दूसरी तरफ सो गईं तो उनकी गोल और टाइट गांड आर्यन के सामने आ गई। आर्यन ने जैसे ही माँ को अपनी बाहों में भरना शुरू किया, वैसे ही उसका लंड खड़ा हो गया।

उसने धीरे से हाथ बढ़ाया और शलिनी की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। ब्लाउज के अंदर से नंगी चूचियाँ हाथ में आतीं तो आर्यन उन्हें जोर-जोर से मसलता। एक हाथ से चूची दबाते हुए दूसरा हाथ नीचे ले जाकर उनकी गांड सहलाने लगा। माँ की चिकनी गांड पर हाथ फेरते हुए वो अपनी उंगलियाँ गांड की दरार में भी घुमाता। फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला और शलिनी की गांड की दरार के बीच में सटा दिया। धीरे-धीरे रगड़ने लगा। शलिनी गहरी नींद में थीं, इसलिए कुछ नहीं बोलीं। आर्यन माँ की चूचियों को दबाता हुआ और गांड पर लंड रगड़ता हुआ काफी देर तक मजे लेता रहा।

दूसरी रात भी लगभग वैसी ही थी। आर्यन अब और हिम्मती हो चुका था। रात को जब शलिनी सो जातीं, तो आर्यन तुरंत उनके बगल में चिपक जाता। कभी-कभी शलिनी उल्टी लेट जातीं, तब आर्यन एक चूची हाथ से दबाता और दूसरी चूची मुँह में लेकर चूसता। उनकी निप्पल्स को जीभ से चाटता और हल्का-हल्का दाँतों से काटता। शलिनी की साड़ी थोड़ी ऊपर खिसक जाती तो आर्यन उनकी नंगी गांड को हाथों से भर लेता। पूरी रात वो माँ के शरीर से चिपका रहता — एक हाथ चूचियों पर, लंड गांड की दरार में।

ये दो रातें आर्यन ने ऐसे ही गुजारीं। लेकिन अब उसके मन में और आगे बढ़ने का प्लान बन चुका था। वो सिर्फ छूने और रगड़ने से संतुष्ट नहीं था। वो शलिनी की गांड और चूत को पूरी तरह महसूस करना चाहता था। वो उनके कपड़ों को हटाकर, उनकी नंगी गांड को देखना, छूना और चाटना चाहता था।

तीसरी रात शलिनी काफी थकी हुई थीं। उन्होंने एकदम पतली सिल्क की साड़ी पहनी थी। वो साड़ी उनके शरीर से इतनी चिपकी हुई थी कि उनकी टाइट और गोल गांड का पूरा आकार साफ दिख रहा था। अंडरवियर की पतली आउटलाइन गांड पर उभरी हुई थी। शलिनी ने घर का गेट बंद किया, थकान से बिस्तर पर लेट गईं। छोटी बहन पहले ही सो चुकी थी।

आर्यन चुपचाप बिस्तर पर लेटा हुआ था। माँ की सिल्क वाली साड़ी में लिपटी टाइट गांड देखकर उसका लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था। उसने मौका देखकर कहा, “माँ, आज आप बहुत थक गई हो। मैं आपकी पीठ दबा देता हूँ।” शलिनी ने मना किया, “रहने दे बेटा, ये मेरी रोज की आदत है।” लेकिन आर्यन नहीं माना। उसने कहा, “माँ, आप इतना काम करती हो, थोड़ा आराम करो।” कहते हुए उसने शलिनी को जबरदस्ती पेट के बल लिटा दिया।

शलिनी पेट के बल लेट गईं। उनका पल्लू हट गया और दोनों भारी चूचियाँ बिस्तर पर दब गईं। आर्यन ने तुरंत मालिश शुरू कर दी। पहले तो वो पीठ पर हाथ फेर रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उसके हाथ नीचे सरक गए। अब वो शलिनी की गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबा रहा था। माँ की सिल्क वाली साड़ी के ऊपर से भी गांड का नरम और गर्म महसूस हो रहा था। आर्यन पूरी ताकत लगाकर गांड को मसल रहा था। उंगलियाँ गांड की दरार में दबा रहा था। शलिनी थकान की वजह से आँखें बंद करके सो गईं।

आर्यन ने देखा कि माँ गहरी नींद में चली गई हैं। उसने हिम्मत करके शलिनी की साड़ी को पीछे से धीरे-धीरे ऊपर उठाना शुरू कर दिया। पहले उनके गोरे और चिकने पैर दिखे, फिर मोटी गोरी जाँघें। आखिरकार उसने साड़ी को पूरी तरह कमर तक ऊपर कर दिया।

आर्यन की आँखें फैल गईं। उसके सामने शलिनी की एकदम नंगी, बड़ी, गोरी और चिकनी गांड थी। सिर्फ एक पतली सी चड्डी पहनी थी, जिसकी रस्सी गांड की दरार में घुसी हुई थी। आर्यन ने तुरंत दोनों हाथों से माँ की गांड को सहलाना शुरू किया। फिर जोर से दबाया। चड्डी को एक तरफ सरकाया। अब शलिनी की पूरी गांड और गांड की गुलाबी चेद बिल्कुल नंगी उसके सामने थी। साँस लेने के साथ-साथ वो चेद हल्की-हल्की सिकुड़ रही थी।

आर्यन ने दोनों हाथों से गांड को फैलाया, छूने लगा, दबाने लगा। फिर उँगलियों से गांड की दरार को घुमाया और चेद को छूने लगा। उसने अपना मुँह गांड के पास ले जाकर पहले दरार में साँस ली। “हाय… क्या खुशबू थी माँ की चूत की!” फिर उसने जीभ निकालकर शलिनी की गांड चाटना शुरू कर दिया। पूरे चूतड़ों को चाटा, दरार को चाटा और धीरे-धीरे गांड की चेद तक पहुँचकर उसे भी अच्छे से चाटा। बाल हटाकर पूरा चाट लिया। आर्यन को बहुत मजा आ रहा था।

अब उसकी बारी लंड की थी। आर्यन ने चड्डी को पूरी तरह एक तरफ किया। अपना मोटा, तना हुआ लंड निकाला और शलिनी की नंगी गांड के बिल्कुल पीछे चिपक गया। लंड को गांड की दरार के बीच रखकर धीरे-धीरे रगड़ने लगा। एक हाथ से लंड को सही एंगल पर रखा, दूसरे हाथ से माँ की चूची को जोर से पकड़कर दबाया। वो आगे-पीछे हिल रहा था।

लेकिन अब वो और आगे बढ़ गया। उसने लंड को गांड की चेद के ठीक सामने रखा। दोनों हाथों से शलिनी की चूचियों को जोर से दबाया और एक तेज धक्का मारा। जैसे ही लंड की नोक शलिनी की गांड की चेद में थोड़ी सी घुसी, शलिनी कराह उठीं — “आआह…!” आर्यन ने डरते हुए भी चूचियों को और जोर से दबाया। वो खुद भी काबू नहीं रख पाया।

उसका पहला गाढ़ा वीर्य शलिनी की गांड की चेद के मुहाने पर ही निकल गया। पूरा माल गांड की चेद और दरार पर फैल गया। आर्यन वहीं झड़ गया। उसका लंड ढीला पड़ गया। शलिनी फिर से कराहने लगीं। आर्यन ने जल्दी से शलिनी की साड़ी से अपना माल पोंछ दिया, ताकि उन्हें पता न चले। फिर साड़ी को नीचे कर दिया और अपना लंड अंदर कर लिया।

वो पहली रात थी जब आर्यन ने अपना माल माँ शलिनी की गांड पर गिराया था। माँ की रसीली, जूसी और बड़ी गांड को दबाकर, चाटकर और लंड रगड़कर उसे बहुत मजा आया।

शलिनी थोड़ी हिलीं, लेकिन आर्यन चुपचाप लेट गया और सोने का नाटक कर लिया।

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Vikas Gupta
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