सेक्सी माँ की भूखी चूत में बेटे ने पूरी रात लंड डाला

गाँव में अकेली रह रही सेक्सी माँ की भूखी चूत में जवान बेटे ने पूरी रात अपना मोटा लंड डाले रखा। माँ कराहती रही, बेटा जोर-जोर से चोदता रहा और बार-बार उसके अंदर ही अपना माल उड़ेलता रहा।

लेखक: Aalok Pandey6 मिनट पढ़ने में
सेक्सी माँ की भूखी चूत में बेटे ने पूरी रात लंड डाला

गाँव की उस गर्म दोपहर में हवा भी भारी चल रही थी। कच्चे मकान के आँगन में नीम की छाँव थी, लेकिन गर्मी फिर भी चुभ रही थी। घर में सिर्फ दो लोग थे—सुमन और उसका बेटा आरव।

सुमन की उम्र तैंतालीस साल थी, लेकिन शरीर देखकर कोई विश्वास नहीं करता। गोरा रंग, चिकनी त्वचा, और एक ऐसी बॉडी जो अभी भी जवान लगती थी। भारी और टIGHT स्तन, जो उसकी ब्लाउज़ में सिमटे रहते थे। पतली कमर और गोल गाँड। साड़ी पहनने पर भी उसका शरीर छुप नहीं पाता था।

स्वभाव से वह सख्त महिला थी। घर का हर काम समय पर होता, कोई ढिलाई बर्दास्त नहीं करती थी। लेकिन रातों को जब चारपाई पर अकेली लेटती, तो उसका शरीर तड़पता था। पति दिल्ली में नौकरी करते थे। साल में दो-तीन बार ही घर आते थे। सुमन चाहती थी कि कोई उसे छुए, सहलाए, लेकिन वह किसी से कह नहीं पाती थी।

आरव बाईस साल का था। ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में पढ़ रहा था। लंबा और मजबूत शरीर। पिछले कई महीनों से वह अपनी माँ को एक अलग ही नज़र से देखने लगा था। जब सुमन साड़ी में घर का काम करती, तो उसकी गाँड की गोलाई, ब्लाउज़ में दबी हुई चुचियाँ… आरव बेचैन हो जाता। रात को नींद नहीं आती थी।

एक दिन दोपहर का समय था। सुमन रसोई में रोटी बना रही थी। लाल रंग का टIGHT ब्लाउज़ और हरी साड़ी पहनी हुई थी। पसीने की वजह से ब्लाउज़ उसके शरीर से चिपक गया था। स्तनों की शक्ल साफ़ उभर आई थी।

आरव धीरे से रसोई में आया। थोड़ी देर खड़ा माँ को देखता रहा, फिर बोला, “माँ, बहुत गर्मी लग रही है ना?”

सुमन ने मुड़कर देखा। “हाँ। तू जाके पढ़ाई कर। परीक्षा नज़दीक है।”

आरव करीब गया। “माँ… पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। घर बड़ा खाली-खाली लगता है।”

सुमन चुपचाप रोटी पलटती रही। आरव और नज़दीक आ गया। उसकी आवाज़ बहुत धीमी हो गई।

“माँ… मैं सच कहूँ? तुम्हें देख-देखकर मैं पागल हो जाता हूँ। बाबूजी इतने दिनों से दूर हैं… तुम कैसे रह लेती हो अकेली?”

सुमन के हाथ रुक गए। वह सख्त आवाज़ में बोली, “आरव! चुप रह। ऐसी गंदी बातें मुँह से मत निकाला कर।”

लेकिन आरव इस बार रुका नहीं। उसने धीरे से हाथ बढ़ाकर माँ की कमर पर रख दिया। सुमन का शरीर सहम गया, लेकिन वह हटी नहीं।

“माँ… मैंने तुम्हें रातों को कराहते हुए सुना है। तुम भी चाती हो ना?”

सुमन की साँसें तेज़ हो गईं। वह कुछ कहना चाहती थी, लेकिन शब्द नहीं निकले। आरव ने हिम्मत बढ़ाई और साड़ी के ऊपर से ही माँ की गोल गाँड पर हाथ फेर दिया। हल्के से दबाया।

“आरव… मत कर… ये पाप है…” सुमन की आवाज़ काँप रही थी।

आरव ने दूसरा हाथ आगे किया और टIGHT ब्लाउज़ के ऊपर से ही उसकी भारी चुची को पकड़ लिया। हल्के से निचोड़ा। निपल ब्लाउज़ के ऊपर से ही सख्त महसूस हो रहा था।

सुमन की आँखें बंद हो गईं। “बेटा… छोड़ दे… कोई देख लेगा…”

“कौन देखेगा माँ? सब लोग खेत में हैं। घर में सिर्फ हम दोनों हैं,” आरव ने उसके कान में धीरे से कहा। उसने चुची को थोड़ा और दबाया। गाँड पर हाथ फेरता रहा।

सुमन का शरीर अब काँप रहा था। इतने सालों बाद किसी ने उसे छुआ था। शरीर मानने को तैयार नहीं हो रहा था। आरव ने धीरे-धीरे ब्लाउज़ के हुक खोलने शुरू किए। एक करके तीन हुक खुले। ब्लाउज़ ढीला पड़ गया। भारी गोरे स्तन लगभग बाहर आ चुके थे। आरव ने साड़ी का पल्लू हटाया और दोनों स्तनों को अपने हाथों में ले लिया।

“माँ… कितने नरम हैं… कितने भारी…” उसने एक निपल को उँगलियों से मसलना शुरू कर दिया।

सुमन की हल्की कराह निकल गई। “आरव… मैं तेरी माँ हूँ… ये गलत है…”

“आज नहीं हो माँ,” आरव ने कहा और झुककर एक स्तन को मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा। सुमन का हाथ उसके सिर पर जाकर टिक गया। धक्का देने के बजाय वह दबाए रखा।

थोड़ी देर बाद आरव ने माँ को चूल्हे की तरफ़ मोड़ दिया। साड़ी को कमर तक ऊपर किया। पेटीकोट के साथ पैंटी भी गीली हो चुकी थी। आरव ने उँगली से छुआ तो उसकी उँगली गीली हो गई।

“माँ… तुम भी भीग चुकी हो…”

सुमन ने शर्म से अपना चेहरा दूसरी तरफ़ कर लिया। आरव ने अपनी पैंट का बटन खोला। मोटा और सख्त लंड बाहर आ गया। उसने उसे माँ की चूत पर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया।

“माँ… आज रात को मैं तुम्हें पूरा लूँगा। पूरी रात।”

सुमन ने आँखें बंद किए हुए बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “रात को… दरवाज़ा बंद करके आ जाना।”

आरव की साँसें तेज़ चल रही थीं। उसने माँ की दोनों चुचियों को आखिरी बार ज़ोर से दबाया, गाँड पर एक हल्का थप्पड़ मारा, और वहाँ से चला गया।

सुमन वहीं खड़ी रह गई। ब्लाउज़ खुला हुआ था, स्तन बाहर थे, और पूरा शरीर काँप रहा था। वह जानती थी कि आज की रात सब कुछ बदलने वाली है।

रात के बारह बज चुके थे। गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ दूर कहीं कुत्तों की भौंक सुनाई दे रही थी। सुमन अपने कमरे में चारपाई पर बैठी थी। उसने दीया जला रखा था। ब्लाउज़ और साड़ी अभी भी वही थे, लेकिन शरीर के अंदर एक अजीब बेचैनी दौड़ रही थी। दोपहर वाली छुअन बार-बार याद आ रही थी।

दरवाज़े पर हल्की सी खटखटाहट हुई। सुमन का दिल ज़ोर से धड़क उठा। उसने धीरे से कहा, “आ जा।”

आरव अंदर आया। उसने दरवाज़ा बंद करके सिटकिनी लगा दी। दोनों की नज़रें मिलीं। दीये की रोशनी में सुमन का चेहरा गमका हुआ लग रहा था। आरव पास गया और बिना कुछ कहे माँ की साड़ी का पल्लू हटा दिया। फिर ब्लाउज़ के बाकी हुक भी खोल दिए। भारी गोरे स्तन पूरी तरह बाहर आ गए। निपल्स पहले से ही सख्त थे।

आरव ने दोनों स्तनों को हाथों में लिया और जोर से निचोड़ा। “माँ… पूरे दिन बस यही सोचा।”

सुमन की साँसें तेज़ हो गईं। इस बार उसने मना नहीं किया। आरव झुका और एक स्तन को मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा। कभी दाँत से हल्के से काटता, कभी जीभ से गोल-गोल घुमाता। सुमन का हाथ उसके सिर पर था। आँखें बंद थीं।

थोड़ी देर बाद आरव ने सुमन को चारपाई पर लिटा दिया। साड़ी और पेटीकोट एक साथ खींचकर नीचे कर दिए। पैंटी भी। सुमन पूरी नंगी हो गई। गोरा शरीर दीये की रोशनी में चमक रहा था। आरव ने उसके पैर फैलाए और मुँह उसके बीच रख दिया।

जीभ से पहले बाहर चाटा, फिर अंदर तक घुसा दी। सुमन की कमर उछल गई। “आह… आरव…”

आरव माँ की चूत को जोर-जोर से चाटने लगा। क्लिट को मुँह में लेकर चूसता, उँगलियाँ अंदर डालकर हिलाता। सुमन की कराहें धीरे-धीरे तेज़ होने लगीं। पानी टपकने लगा। वह अपने आप आरव के सिर को और दबाने लगी।

जब सुमन का शरीर काँपने लगा तो आरव रुक गया। उसने अपनी पजामा उतार दी। मोटा, सख्त और नसों वाला लंड बाहर आया। वह सुमन के ऊपर चढ़ गया। लंड को उसकी गीली चूत पर टिकाया और आँखों में आँखें डालकर बोला, “माँ… अब सह लेना।”

एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर घुस गया। सुमन की जोरदार कराह निकली। इतने सालों बाद उसका शरीर इतना भरा जा रहा था। आरव रुक गया। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं। फिर वह हिलने लगा—पहले धीरे, फिर तेज़।

हर धक्के के साथ सुमन के भारी स्तन हिल रहे थे। आरव ने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ रखा था और निचोड़ते हुए चोद रहा था। चारपाई की चर्र-चर्र आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।

“माँ… कितनी टIGHT हो… बाबूजी ने इतने सालों से छुआ तक नहीं…” आरव की आवाज़ भारी थी।

सुमन अब बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ कराहें निकल रही थीं। “आह… और जोर से… बेटा… अंदर तक डाल…”

आरव ने रफ्तार बढ़ा दी। वह अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। कभी पूरा बाहर निकालता, फिर एक झटके में अंदर तक धकेल देता। सुमन के नाखून उसकी पीठ में धँस गए।

थोड़ी देर बाद आरव ने माँ को घुटनों के बल कर दिया। पीछे से फिर से लंड अंदर डाला और इस बार और तेज़ चोदने लगा। एक हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींच लिया। दूसरे हाथ से उसकी गाँड पर थप्पड़ मारने लगा।

थप-थप की आवाज़ तेज़ हो गई। सुमन की आवाज़ भी। “आरव… जोर से चोदो… माँ को चोदो…”

आरव पागल हो रहा था। उसने माँ की गाँड को दोनों हाथों से फैलाया और और गहराई तक जाने लगा। पसीना दोनों के शरीर पर बह रहा था। सुमन का शरीर अचानक तन गया। वह जोर से काँपी और पानी छोड़ दिया। उसकी चूत आरव के लंड को जोर-जोर से निचोड़ने लगी।

आरव और तेज़ हो गया। कुछ गहरे धक्के और मारकर वह भी चरम पर पहुँच गया। उसने लंड गहराई तक धंसाए रखा और अपना गाढ़ा माल माँ की चूत में उड़ेल दिया। एक के बाद एक झटके आते रहे। सुमन की चूत पूरी भर गई। बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा।

दोनों वहीं गिर गए। आरव अभी भी माँ के अंदर था। साँसें हाँफ रही थीं। थोड़ी देर बाद आरव ने लंड बाहर निकाला। फिर से सख्त हो चुका था।

उसने सुमन को पलटकर फिर से चोदना शुरू कर दिया। इस बार आमने-सामने। चुचियाँ मुँह में ले-लेकर चूसता रहा और नीचे जोर-जोर से धक्के मारता रहा। सुमन दूसरी बार भीग गई। आरव ने फिर से उसके अंदर ही झाड़ दिया।

रात भर ये सिलसिला चलता रहा। कभी आरव माँ को अपने ऊपर बैठाकर चोदता, कभी उसकी टाँगें कंधों पर रखकर गहराई तक जाता, कभी मुँह में लंड डालकर चूसवाता। सुमन की चूत और मुँह दोनों उसके माल से भरते गए। चारपाई गीली हो गई। कमरे में सिर्फ शरीर की गंध और कराहें बाकी रह गईं।

तड़के करीब चार बजे दोनों थककर सो गए। आरव की बाँह में सुमन नंगी पड़ी थी। उसके स्तनों पर दाँतों के निशान थे, जाँघों पर सूखा हुआ माल, और चेहरे पर एक अजीब सी शांति।

आरव ने आधी नींद में माँ के स्तन पर हाथ रखते हुए कहा, “अब जब भी बाबूजी दिल्ली में होंगे… मैं तुम्हें ऐसे ही चोदूंगा माँ।”

सुमन ने आँखें नहीं खोलीं। बस उसके हाथ को अपने स्तन पर दबाए रखा।

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