सेक्सी भाभी ने रात भर पड़ोसी से चुदवाया - हिंदी सेक्स स्टोरी
रात 11:40 बजे दरवाजा खुला… और सामने नंगी पड़ोसी भाभी खड़ी थी। पति बाहर था, और जो रात भर हुआ वो पढ़कर आपके होश उड़ जाएंगे। पूरी गर्म कहानी अब पढ़ो।
प्रिया 28 साल की थी। शादी को ठीक तीन साल हो चुके थे। पति अजय बिजनेस के सिलसिले में अक्सर बाहर रहता था। इस बार भी वो मुंबई गया हुआ था और तीन दिन बाद ही लौटना था। प्रिया अकेली रहती थी फ्लैट नंबर 305 में।
राहुल उसी सोसाइटी के फ्लैट 304 में रहता था। उम्र 26, सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब। दोनों फ्लैट एक ही फ्लोर पर थे, बालकनी भी कॉमन थी। पिछले छह महीनों से राहुल और प्रिया की नजरें अक्सर मिलती रहती थीं। कभी लिफ्ट में, कभी बालकनी में। प्रिया जानती थी कि राहुल उसे देखता है… और राहुल जानता था कि प्रिया जानबूझकर नाइट ड्रेस में बालकनी में आती है।
आज रात अजय के न होने का फायदा उठाते हुए प्रिया ने कुछ अलग सोचा। रात के ग्यारह बजे उसने सब लाइटें बंद कर दीं। सिर्फ बालकनी वाली हल्की रोशनी जल रही थी। उसने अपना गुलाबी नाइट ड्रेस उतार फेंका। ब्रा-पैंटी कुछ नहीं पहनी थी। नंगी खड़ी होकर उसने खुद ही अपने स्तनों को सहलाना शुरू किया। निप्पल्स को चुटकी से दबाया, फिर एक हाथ नीचे ले जाकर योनि के होंठ खोल दिए। दो उंगलियां अंदर घुसा दीं।
“राहुल… आज रात तुझे अंदर तक लेना है…” वह फुसफुसा रही थी। आंखें बंद, सांसें तेज, जांघों से पानी टपक रहा था।
ठीक उसी समय दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।
प्रिया की आंखें खुलीं। दिल जोर से धड़कने लगा। उसने जल्दी से ड्रेस उठाई लेकिन पहनी नहीं। सिर्फ दोनों स्तन आगे करके ढकने की कोशिश की और दरवाजा खोला।
राहुल सामने खड़ा था। ऑफिस से अभी-अभी आया था। टाई ढीली, शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले। उसकी नजरें सीधे प्रिया के खुले स्तनों और गीले निप्पल्स पर जा टिकीं। उंगलियों के निशान अभी भी स्तनों पर साफ दिख रहे थे।
एक पल की खामोशी…
फिर प्रिया ने कुछ नहीं कहा। उसने राहुल का कॉलर पकड़ा और अंदर खींच लिया। दरवाजा बंद होते ही उसके होठ राहुल के होठों पर चिपक गए। जीभ अंदर घुस गई। चुंबन गहरा, गीला और भूखा था। प्रिया की एक टांग खुद-ब-खुद राहुल की कमर पर चढ़ गई। उसने राहुल का हाथ पकड़कर सीधे अपने गीले योनि पर रख दिया।
“देख… कितना गीला हो चुका है सिर्फ तुझे सोचकर…” प्रिया ने उसके कान में फुसफुसाया और राहुल की दो उंगलियां अपने अंदर धकेल दीं।
राहुल की सांस अटक गई। अंदर इतना गरम और चिपचिपा था कि उंगलियां फिसल रही थीं। प्रिया कमर हिला-हिलाकर खुद ही चुदवा रही थी। दूसरी तरफ उसने राहुल की पैंट का जिप खोला और लिंग बाहर निकाल लिया। वह पहले से ही सख्त और गर्म था। प्रिया ने उसे मुट्ठी में पकड़ा और जोर से सहलाने लगी।
“मुंह में लेना है… अभी…”
वह घुटनों के बल बैठ गई। लिंग को दोनों हाथों से पकड़कर पहले लंबा चाटा, फिर पूरा अंदर ले लिया। गले तक। गल-गल की आवाज आने लगी। लार टपक रही थी। राहुल का एक हाथ उसके बालों में था, दूसरा उसके स्तन को जोर से मसल रहा था।
प्रिया ने लिंग बाहर निकाला। वह थूक से चमक रहा था। “अब बिस्तर पर ले चल… और आज रात सिर्फ अंदर ही छोड़ना।”
वह खड़ी हुई और राहुल का हाथ पकड़कर बेडरूम की तरफ ले गई। बिस्तर पर लेटते ही उसने अपनी दोनों टांगें पूरी तरह फैला दीं। योनि के होंठ सूजे हुए और चमक रहे थे।
“अब घुसा… धीरे से नहीं। एकदम अंदर तक।”
राहुल ने लिंग को उसके द्वार पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा अंदर चला गया। प्रिया की कमर उछल गई, नाखून राहुल की पीठ में गड़ गए।
“आह्ह्ह… फट गया… और जोर से मार…”
राहुल ने दोनों हाथों से उसके कूल्हे पकड़े और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ प्रिया की छातियां ऊपर-नीचे हो रही थीं। योनि से पानी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। बेड चरमरा रहा था।
प्रिया की आंखें बंद थीं, मुंह खुला, जीभ बाहर। “और गहरा… हां… वहीं… वहीं मार… आज रात भर…”
राहुल ने एक टांग उसके कंधे पर चढ़ा दी और और भी गहराई तक घुसना शुरू किया। प्रिया का शरीर कांपने लगा। वह चरम के बहुत करीब पहुंच चुकी थी…
राहुल ने गति और तेज कर दी। हर धक्का इतना गहरा था कि प्रिया की सांसें अटक रही थीं। उसकी योनि जोर-जोर से सिकुड़ रही थी, पानी की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
“आ… आ गया… राहुल… अंदर छोड़… अंदर…” प्रिया चीख उठी।
लेकिन राहुल रुका नहीं। उसने प्रिया के बाल कसकर पकड़े और उसके सिर को पीछे खींच लिया। गर्दन तन गई। उसने कान में गरम सांस छोड़ते हुए कहा—
“अभी नहीं। पहले और सह ले।”
फिर उसने प्रिया को पलटा। अब वह घुटनों और हाथों के बल झुकी हुई थी। कूल्हे ऊपर उठे हुए। राहुल ने उसके दोनों कूल्हों को जोर से पकड़ा और एक झटके में पूरा लिंग अंदर धकेल दिया। प्रिया की कमर कांप उठी।
“आह्ह्ह… इतना गहरा… धीरे… नहीं… जोर से मार…”
राहुल ने थप्पड़ जड़ दिया उसके एक कूल्हे पर। लाल निशान पड़ गया। फिर दूसरा थप्पड़। प्रिया कराह उठी, लेकिन उसकी योनि और भी जोर से भीग गई। राहुल समझ गया—उसे दर्द और मजा दोनों एक साथ चाहिए।
उसने बाल फिर से पकड़े और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ प्रिया का शरीर आगे झपटता, स्तन लटक- लटककर हिलते। राहुल एक हाथ से उसके स्तन को नीचे से पकड़कर मसल रहा था, निप्पल को उंगली से दबा रहा था।
“बोल… कैसा लग रहा है?” राहुल ने पूछा, सांसें फूल रही थीं।
“बहुत… बहुत अच्छा… और जोर से… मुझे तोड़ दे आज…” प्रिया की आवाज कांप रही थी। आंसू और मजा दोनों उसकी आंखों में थे।
राहुल ने लिंग बाहर निकाला। प्रिया हांफ रही थी। उसने प्रिया को फिर से पलटा और उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर चढ़ा दीं। अब पोजीशन ऐसी थी कि पूरा नियंत्रण राहुल के पास था। उसने धीरे-धीरे अंदर घुसाया, फिर एकदम जोरदार धक्कों की बौछार शुरू कर दी।
प्रिया की चीखें दबी-दबी निकल रही थीं। “राहुल… मैं आ रही हूं… फिर से… आह्ह्ह…”
इस बार उसका शरीर जोर से ऐंठ गया। योनि इतनी जोर से सिकुड़ी कि राहुल को भी रोकना मुश्किल हो गया। पानी की धार निकल पड़ी। प्रिया का पूरा शरीर कांप रहा था, आंखें बंद, मुंह खुला।
राहुल अभी भी अंदर था। उसने प्रिया के होठों पर गहरे चुंबन किए। “अब मेरी बारी…” उसने फुसफुसाया।
प्रिया ने आंखें खोलीं। थकी हुई लेकिन अभी भी भूखी। उसने राहुल को नीचे लिटाया और खुद ऊपर चढ़ गई। लिंग को अपने योनि पर रखकर धीरे-धीरे अंदर लिया। फिर कमर घुमाने लगी—गोल-गोल, ऊपर-नीचे। स्तन राहुल के चेहरे के सामने हिल रहे थे। राहुल ने दोनों स्तन मुंह में ले लिए और जोर से चूसने लगा।
“चुसो… जोर से चुसो मेरे स्तन…” प्रिया कराह रही थी।
थोड़ी देर बाद राहुल ने उसे फिर से नीचे दबाया। अब वह और रफ हो गया था। उसने प्रिया के दोनों हाथ ऊपर पकड़ लिए और एक हाथ से दोनों कलाई जकड़ लीं। दूसरी हाथ से उसके गले को हल्के से दबाया। प्रिया की आंखें बड़ी हो गईं, लेकिन उसने मना नहीं किया। उल्टे और जोर से कमर उठाई।
“मार… और जोर से मार… मुझे अपनी बना ले आज रात…”
राहुल ने गले पर दबाव बनाए रखा और धक्के इतने तेज मारने लगे कि बेड जोर-जोर से दीवार से टकरा रहा था। प्रिया की सांसें फूल रही थीं, चेहरा लाल हो चुका था, लेकिन उसकी योनि बार-बार सिकुड़कर राहुल को और अंदर खींच रही थी।
अंत में राहुल खुद को रोक नहीं पाया। “प्रिया… ले… अंदर ले…”
उसने जोरदार धक्के के साथ पूरा वीर्य अंदर छोड़ दिया। गर्म तरल प्रिया के गर्भ तक पहुंच रहा था। प्रिया भी उसी पल फिर से चरम पर पहुंच गई। दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए कांप रहे थे।
लंबी खामोशी…
सिर्फ दोनों की भारी सांसें। पसीने से भीगे हुए शरीर। प्रिया के जांघों के बीच से राहुल का वीर्य धीरे-धीरे बाहर बह रहा था।
प्रिया ने राहुल के बाल सहलाते हुए धीरे से कहा— “आज रात यहीं सो… सुबह तक और लेना है मुझे।”
राहुल ने उसके माथे पर चुंबन किया। “ले लूंगा… जितना चाहे।”
बाहर आसमान में हल्की रोशनी फैलने लगी थी। लेकिन कमरे के अंदर अभी भी अंधेरा था… और दोनों की भूख अभी बाकी थी।
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