सेक्सी भाभी को फंसा कर पहली बार चोदा - चूत और गाँड दोनों ले ली

21 साल के पड़ोसी ने 36 साल की सेक्सी भाभी को धीरे-धीरे फंसाया और पहली बार उनकी चूत और गाँड दोनों ले लीं। पति के बाहर रहते रातभर दोनों होल फाड़ दिए।

लेखक: Amol Goyal6 मिनट पढ़ने में
सेक्सी भाभी को फंसा कर पहली बार चोदा - चूत और गाँड दोनों ले ली

मेरा नाम कबीर है। उम्र इक्कीस साल। कॉलेज का लास्ट ईयर चल रहा था। मैं अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से सोसाइटी में रहता था। हमारे ठीक बगल वाले फ्लैट में अमित और उनकी पत्नी अनन्या रहते थे। अनन्या… यानी मेरी पड़ोस वाली भाभी।

उम्र छत्तीस साल की थीं, लेकिन दिखने में तीस से ऊपर की नहीं लगती थीं। गोरी चिट्टा रंग, बड़े-बड़े बादामी आँखें, पतली कमर, भारी भरकम बूब्स और ऐसी गोल मटोल गाँड कि जेब में हाथ डाले बिना बात नहीं बनती थी। कोई बच्चा नहीं था उनके। अमित अंकल अक्सर कंपनी के काम से बाहर रहते थे – कभी तीन दिन, कभी पूरा हफ्ता।

पहले-पहले मैं सिर्फ नजरें चुरा-चुरा कर देखा करता था। भाभी सुबह दूध लेने निकलतीं तो उनकी साड़ी की पल्लू में बूब्स का उभार साफ दिखता। शाम को जब बालकनी में खड़ी होकर बाल सुखातीं तो उनकी लोअर बैक और गाँड का कर्व दिल थाम लेता।

धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं। कभी मैं उनका गैस सिलेंडर उठा कर रख देता, कभी ऑनलाइन ऑर्डर का पार्सल पहुँचा देता। भाभी भी मुस्कुरा कर धन्यवाद कहतीं। उनकी मुस्कान में एक अलग ही मिठास थी।

एक दिन शाम को अमित अंकल फिर से चार दिन की ट्रिप पर निकले। मैं छत पर खड़ा था तभी भाभी की आवाज आई –

“कबीर… थोड़ा इधर आओ ना।”

मैं उनके फ्लैट में गया। भाभी ने हल्की सी कॉटन की कुर्ती और लेगिंग पहनी हुई थी। कुर्ती पतली थी, अंदर ब्रा का हुक साफ दिख रहा था। उन्होंने मुझे सोफे पर बैठाया और खुद सामने वाली कुर्सी पर बैठ गईं।

“तुम्हारे पापा-मम्मी घर पर हैं?” उन्होंने पूछा।

“नहीं भाभी, दोनों शहर गए हुए हैं। तीन दिन बाद आएँगे।”

भाभी थोड़ी देर चुप रहीं। फिर धीरे से बोलीं, “अमित भी चार दिन बाद ही आएगा… घर बड़ा सुनसान लगता है।”

मैंने हिम्मत करके कहा, “मैं शाम को आ जाया करूँ भाभी… बातें हो जाएँगी।”

वे मुस्कुरा दीं। “ठीक है… लेकिन ज्यादा देर मत रुकना।”

अगले दिन शाम को मैं फिर गया। इस बार भाभी ने सिर्फ एक ढीली सी नाइटी पहनी हुई थी। नेकलाइन थोड़ी गहरी थी। जब वे चाय बना रही थीं तो झुकने पर उनके बूब्स का गहरा क्लीवेज साफ दिख रहा था। मेरी नजर बार-बार वहीं चली जाती। एक बार उनकी नजर भी मुझ पर पड़ी। वे जल्दी से सीधी हो गईं, लेकिन चेहरा थोड़ा लाल हो गया था।

चाय पीते-पीते बातें गहरी होने लगीं। मैंने पूछा, “भाभी, आप इतनी खूबसूरत होकर भी अकेले कैसे रह लेती हैं?”

वे हँसीं, “अब क्या करें… अमित का काम ही ऐसा है।”

मैंने धीरे से कहा, “अगर कभी बहुत अकेला लगे तो मुझे बुला लेना।”

भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में कुछ पल के लिए एक अजीब सी चमक थी। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिला दिया।

तीसरे दिन शाम को मैंने देखा कि उनका दरवाजा थोड़ा खुला है। मैंने हल्के से खटखटाया। अंदर से आवाज आई, “आ जाओ कबीर।”

अंदर गया तो भाभी सोफे पर बैठी थीं। नीचे शॉर्ट्स जैसी कोई चीज थी, लेकिन जाँघें ज्यादातर नंगी थीं। उन्होंने मुझे पास बैठने को कहा।

बातें करते-करते मैंने जानबूझकर अपना हाथ उनके कंधे पर रख दिया। वे सिमट गईं, लेकिन हटाया नहीं। थोड़ी देर बाद मेरा हाथ धीरे-धीरे उनके कंधे से नीचे सरक कर उनकी बाजू पर आ गया। त्वचा बहुत नरम थी।

“कबीर…” उन्होंने धीमी आवाज में कहा, “यह ठीक नहीं है।”

मैंने उनकी आँखों में देखा, “मुझे पता है भाभी… लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पा रहा।”

वे चुप हो गईं। कमरे में पंखे की आवाज के अलावा कुछ नहीं था। मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ा। उन्होंने मना नहीं किया। मैंने उनका हाथ अपनी जाँघ पर रख दिया। मेरा लंड पहले से ही तन चुका था। उनका हाथ जब लंड के ऊपर आया तो वे हल्के से काँप गईं।

“यह… यह क्या कर रहे हो…” उनकी आवाज थरथर काँप रही थी।

मैंने उनके और करीब होकर कहा, “भाभी… मुझे छूने दीजिए… बस एक बार।”

वे कुछ सेकंड तक मेरी आँखों में देखती रहीं। फिर बहुत धीरे से सिर हिला दिया।

मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपनी पैंट के अंदर डाल दिया। उनका नरम हाथ जब मेरे लंड पर लगा तो मेरी साँस रुक गई। उन्होंने पहले तो सिर्फ छुआ, फिर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हिलाने लगीं। उनकी साँस भी तेज हो गई थी।

मैंने अपना हाथ उनकी नाइटी के अंदर डाल दिया। सीधे उनके बूब्स पर। ब्रा के ऊपर से ही दबाया। बड़े और भारी थे। निप्पल पहले से खड़े थे। मैंने ब्रा का हुक खोला। दोनों बूब्स बाहर आ गए। मैंने एक को मुँह में ले लिया और हल्के से चूसने लगा।

भाभी की एक हल्की सी कराह निकल गई। “कबीर… धीरे…”

मैंने दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूसा, निचोड़ा, मसला। उनकी नाइटी अब लगभग कमर तक ऊपर उठ चुकी थी। मैंने हाथ नीचे किया। शॉर्ट्स के अंदर उंगली डाल दी। चूत पहले से गीली थी। दो उंगलियाँ अंदर जाते ही भाभी की कमर लचक गई।

“आह्ह… मत करो… यह गलत है…” वे कह तो रही थीं, लेकिन उनकी चूत मेरी उंगलियों को कस रही थी।

मैंने उन्हें सोफे पर लिटा दिया। शॉर्ट्स और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। उनकी चूत साफ मुँडी हुई, गुलाबी और चमक रही थी। मैंने मुँह लगा दिया। जीभ से क्लिट को सहलाने लगा, फिर छेद के अंदर जीभ डाल दी। भाभी के दोनों हाथ मेरे बालों में घुस गए।

“कबीर… बस… अब और नहीं…” लेकिन उनकी आवाज में मना करने का जोर नहीं था।

मैंने अच्छी देर तक चाटा। जब वे अच्छी तरह भीग गईं तो मैं खड़ा हो गया। पैंट पूरी तरह उतार दी। लंड सीधा उनके चेहरे के सामने था। उन्होंने आँखें बंद कर लीं, लेकिन मुँह खोल दिया। मैंने धीरे से लंड उनके मुँह में डाल दिया। उन्होंने चूसना शुरू कर दिया – पहले धीमे, फिर थोड़ा जोर से।

थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकाला और उनकी जाँघों के बीच रख दिया। छेद पर टिकाया।

“भाभी… अब अंदर जाने दूँ?”

वे आँखें खोले बिना बोलीं, “धीरे से… दर्द न हो…”

मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया। आधा लंड अंदर गया। उनकी चूत बहुत तंग थी। फिर पूरा अंदर तक धकेल दिया। दोनों की साँसें एक साथ रुक गईं।

“उफ्फ… कितना मोटा है…” भाभी की आवाज में दर्द और मजा दोनों थे।

मैं हिलने लगा। पहले बहुत धीरे, फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। हर धक्के पर उनके भारी बूब्स उछल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़ कर दबाए रखा। कभी निप्पल चूसता, कभी काटता। नीचे उनकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी।

“जोर से मत करना… अमित… नहीं… कबीर… थोड़ा और…” उनकी बातें उलझ रही थीं।

मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रख लिए और गहराई तक जाने लगा। कमरे में सिर्फ गीली आवाजें और हमारी साँसें गूँज रही थीं। थोड़ी देर बाद मेरा लंड और तन गया। मैंने कई जोरदार धक्के मारे और उनके अंदर ही झड़ गया। गरम कम की धार उनकी चूत में फैल गई।

मैं उनके ऊपर गिरा रहा। लंड अभी भी अंदर था। भाभी की आँखों में पानी था, लेकिन वे रो नहीं रही थीं। उन्होंने मेरे बालों को सहलाते हुए धीरे से कहा –

“यह सिर्फ एक बार था… समझे? अब कभी नहीं।”

मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “जैसा आप कहें भाभी…”

लेकिन दोनों जानते थे कि यह सिर्फ शुरुआत है।

रात के लगभग साढ़े दस बज रहे थे। कबीर फिर से भाभी के फ्लैट के बाहर खड़ा था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने हल्के से दस्तक दी।

दरवाजा खुला। चेहरे पर एक अजीब सा भाव था – शर्म, गुस्सा और चाहत सब मिला हुआ।

“तुम फिर आ गए?” उनकी आवाज में नाराजगी थी, लेकिन दरवाजा बंद नहीं किया।

कबीर अंदर घुस गया और दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी। “भाभी… मैं रह नहीं पाया।”

भाभी ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन कबीर ने उनका हाथ पकड़ लिया। एक झटके में उन्हें दीवार से सटा दिया। उनके बड़े बूब्स उसके सीने से दब गए। कबीर ने उनके होंठों पर अपना मुँह रख दिया। पहले तो भाभी ने मना किया, दाँत भींचे, लेकिन जब कबीर की जीभ उनके मुँह में घुसी तो वे धीरे-धीरे जवाब देने लगीं।

कबीर ने उनकी नाइटी के नीचे दोनों हाथ डाल दिए। ब्रा पहले से ही खुली हुई थी। उसने दोनों बूब्स को जोर से पकड़ कर निचोड़ा। निप्पल्स को उंगलियों के बीच लेकर मसलने लगा। भाभी की हल्की कराह उनके मुँह में ही दब गई।

“कबीर… मत करो… कल वाली बात याद है?” वे साँस लेते हुए बोलीं।

“याद है भाभी… लेकिन आज मैं रुकने वाला नहीं।”

उसने नाइटी को एक झटके में ऊपर उतार दिया। भाभी अब सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं। कबीर ने उन्हें उठा कर सीधे बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर फेंक दिया। पैंटी को भी खींच कर फेंक दिया। भाभी पूरी नंगी लेटी थीं। उनकी मोटी गुलाबी चूत पहले से ही चमक रही थी।

कबीर ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। लंड पूरी तरह तन चुका था। वह उनके ऊपर चढ़ गया। बिना किसी प्रस्तावना के अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर तक घुसेड़ दिया।

“आह्ह्ह… धीरे… दर्द हो रहा है…” भाभी चिल्लाईं।

लेकिन कबीर नहीं रुका। वह जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर बिस्तर की कराह निकल रही थी। भाभी के भारी बूब्स उछल-उछल रहे थे। कबीर ने दोनों बूब्स को पकड़ कर जोर से दबाया और निप्पल्स को मुँह में ले कर काटने लगा।

“इतनी टाइट चूत… कल रात भीगी थी, आज फिर से फाड़ रहा हूँ…” कबीर गुर्राते हुए बोला।

भाभी की आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन उनकी चूत उसके लंड को कस-कस कर चूस रही थी। थोड़ी देर बाद दर्द की आवाजें मजे की कराहों में बदलने लगीं।

“जोर से… और जोर से चोदो… आज पूरी तरह इस्तेमाल कर लो…” भाभी ने खुद कह दिया।

कबीर ने उनके दोनों पैर उठा कर अपने कंधों पर रख लिए। अब लंड और गहरा जा रहा था। वह इतनी ताकत से धक्के मार रहा था कि भाभी का शरीर हर बार ऊपर सरक जा रहा था। चूत से गीली आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।

अचानक कबीर ने लंड बाहर निकाला। भाभी की चूत खुली हुई थी और उसमें से पानी बह रहा था। उसने भाभी को पेट के बल पलट दिया। उनकी बड़ी गोल गाँड को दोनों हाथों से फैलाया और थूक लगा कर अपना लंड उनके गाँड के छेद पर रख दिया।

“नहीं… वहाँ नहीं… बहुत दर्द होगा…” भाभी ने तकिया पकड़ते हुए कहा।

कबीर ने धीरे से धक्का दिया। सिर्फ टिप अंदर गई। भाभी की आवाज निकल गई। उसने और थूक लगाया और धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गाँड में धकेल दिया।

“उफ्फ्फ… निकल… बहुत फैल गया…” भाभी तकिए में मुँह गड़ाए कराह रही थीं।

कबीर रुकने वाला नहीं था। वह धीरे-धीरे लेकिन जोरदार धक्के लगाने लगा। एक हाथ से उनकी चोटी पकड़ी हुई थी, दूसरे हाथ से उनकी चूत में दो उंगलियाँ घुमा रहा था। गाँड की तंग गरम दीवारें उसके लंड को मसल रही थीं।

“भाभी की गाँड भी कमाल की है… कल चूत ली, आज गाँड फाड़ रहा हूँ…”

वह कई मिनट तक उनकी गाँड चोदता रहा। फिर लंड निकाला और फिर से चूत में डाल दिया। इस बार और भी ज्यादा बर्बर। वह भाभी के ऊपर पूरा लेट गया। उनके कान में साँस छोड़ते हुए गंदे शब्द बोल रहा था।

“बोलो… किसकी चूत है? किसकी गाँड है?”

भाभी तकिए में से जवाब दिया, “तुम्हारी… कबीर… सब तुम्हारा…”

कबीर ने रफ्तार और बढ़ा दी। आखिरी कई धक्के इतने जोर के थे कि भाभी का शरीर काँपने लगा। वह भी झड़ गई। उसकी चूत अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगी। उसी समय कबीर ने उनकी चूत के अंदर ही अपना पूरा माल छोड़ दिया। इतना कम निकला कि बाहर तक बहने लगा।

लेकिन वह अभी भी हार्ड था। उसने लंड निकाला और भाभी के मुँह के सामने ले आया।

“साफ करो।”

भाभी ने आँखें खोलीं। थकी हुई सी नजरों से देखा, फिर मुँह खोल दिया। कबीर ने अपना गंदा लंड उनके मुँह में डाल दिया। भाभी ने चूसना शुरू कर दिया – अपनी ही चूत और गाँड का स्वाद लेते हुए। कबीर ने उनके बाल पकड़ कर जोर-जोर से मुँह चोदने लगा। गल-गल की आवाजें निकल रही थीं। आखिर में उसने उनके मुँह में ही दूसरी बार झड़ गया। भाभी ने पूरा निगल लिया।

कबीर बिस्तर पर गिर गया। भाभी भी बगल में लेट गईं। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं। उनके शरीर से पसीना और कम की महक आ रही थी।

थोड़ी देर बाद कबीर ने फिर से उनका एक बूब मुँह में ले लिया और हल्के से चूसने लगा। भाभी ने उसके बाल सहलाते हुए धीरे से कहा –

“अब हर बार जब अमित बाहर जाएगा… तुम आ जाना। जितना चाहो, जैसे चाहो… चोदना। आज के बाद मैं तुम्हारी हूँ।”

कबीर ने निप्पल छोड़ कर उनकी आँखों में देखा और मुस्कुरा दिया। बाहर रात गहरी हो चुकी थी। और दोनों जानते थे कि यह सिलसिला अब सिर्फ शुरू हुआ है।

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Amol Goyal
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