सेक्सी पड़ोसी आंटी को प्रेग्नेंट करने के लिए रात भर चोदा

रात भर बिना रुके चोदा सेक्सी पड़ोसी आंटी को… गर्भ तक भर दिया सीड! देखो कैसे बेकाबू होकर चीख-चीख कर मजा लिया

लेखक: Amol Goyal6 मिनट पढ़ने में
सेक्सी पड़ोसी आंटी को प्रेग्नेंट करने के लिए रात भर चोदा

पड़ोस वाले घर में नई आंटी आई थीं। नाम सुनीता। उम्र 36 साल, लेकिन बदन ऐसा कि 28 की लगती थीं। गोरी स्किन, लंबे काले बाल, कमर इतनी पतली कि हाथों में आ जाए और गाँड एकदम गोल, भारी और उभरी हुई। चुचियाँ बड़ी-बड़ी और कड़क, जो हर बार टाइट कपड़ों में साफ़ झलकती थीं।

उनके पति बिजनेस के चक्कर में हफ्ते में चार-पाँच दिन बाहर रहते थे। आंटी अकेली घर में रह जाती थीं।

मैं आर्यन। सिर्फ 23 साल का। आज तक कुंवारा। किसी लड़की का हाथ तक नहीं पकड़ा था, छूना तो दूर की बात। लेकिन जब पहली बार सुनीता आंटी को देखा तो मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया। उनकी मुस्कान, चलने का अंदाज़, आँखों में वो अनुभव… सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।

धीरे-धीरे मैं बहाने ढूँढने लगा। कभी चीनी खत्म हो गई, कभी वाईफाई नहीं चल रहा, कभी पंखे में समस्या। आंटी हर बार मुस्कुराकर अंदर बुला लेतीं। चाय पिलातीं, बातें करतीं। मैं उनकी जाँघों को छिप-छिपकर देखता, चुचियों की शेप को निहारता। कभी-कभी हमारी नज़रें मिलतीं तो वे हल्के से मुस्कुरा देतीं।

फिर वो दोपहर आ गई।

पति फिर से बाहर गए हुए थे। गर्मी तेज़ थी। मैं मन ही मन तय करके उनके घर की तरफ बढ़ा। दिल जोर-जोर से धधक रहा था। हाथ पसीने से गीले थे। कुंवारा होने की घबराहट और इच्छा दोनों एक साथ चल रहे थे।

दरवाज़ा खटखटाया। आंटी ने खोला।

आज वे एकदम अलग लग रही थीं। टाइट, पतली सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी। इतनी पतली और चिपकने वाली कि उनके अंडरवियर का पूरा शेप और गोल गाँड की गोलाइयाँ साफ़ दिख रही थीं। साड़ी के पारदर्शीपन में काली लेस पैंटी की रेखाएँ तक नज़र आ रही थीं। ऊपर हाफ-कट ब्लाउज—इतना गहरा और टाइट कि उनकी कड़क चुचियाँ आधे से ज्यादा बाहर को धकेल रही थीं। क्लीवेज गहरा था और निप्पल की हल्की छाप भी साफ़ पड़ रही थी। बिना ब्रा के।

“आओ आर्यन… दोपहर दोपहर कैसे?” उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा। “आंटी… घर में अकेला था… बात करने आ गया।” मेरी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी।

अंदर गए। बैठक में सोफे पर बैठे। आंटी ने चाय बनाई। मैं उनकी पतली साड़ी में हिलती गाँड को देखे जा रहा था। चाय पीते-पीते बातें होने लगीं। धीरे-धीरे मैं उनके करीब खिसक गया। जाँघ से जाँघ छू गई। आंटी ने हटाया नहीं।

मैंने अचानक उनका हाथ पकड़ लिया। “आंटी… आज मुझे आपसे एक बात कहनी है।” वे मेरी तरफ देखीं। “कहो।” “मैं… मैं कुंवारा हूँ। आज तक किसी लड़की के साथ कुछ नहीं किया। और… मुझे आप चाहिए।”

आंटी का चेहरा बदल गया। “आर्यन! ये क्या बकवास कर रहे हो? मैं तुम्हारी आंटी हूँ। होश में रहो!”

मैंने और जोर से हाथ पकड़ा। “नहीं आंटी। आपके पति हमेशा बाहर रहते हैं। आप अकेली। मैं भी अकेला। आज मेरा पहला सेक्स आपसे ही होगा।”

वे उठने वाली थीं कि मैंने उन्हें सोफे पर वापस धकेल दिया। पतली साड़ी में उनका बदन और भी उभरा हुआ लग रहा था। मैंने झुककर उनके होंठों पर जोर से चुम्बन ले लिया। वे धक्का देने लगीं।

“नहीं… छोड़ो… ये गलत है… आर्यन मत करो!”

लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। एक हाथ से उनका हाफ-कट ब्लाउज ऊपर खींच दिया। बड़ी-बड़ी कड़क चुचियाँ झटके से बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल तने हुए। मैंने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दाँतों से हल्के काटा।

“आाह्ह… छोड़ो… दर्द हो रहा है… आाह्ह…” आंटी छटपटा रही थीं, लेकिन मेरी पकड़ मजबूत थी। दूसरी चुची को हाथ से जोर-जोर से मसल रहा था।

“आंटी… आपकी चुचियाँ कितनी कड़क हैं… पहली बार छू रहा हूँ…”

मैंने साड़ी को कमर तक समेट लिया। पतली साड़ी में से ही उनकी गोल गाँड और पैंटी का शेप मुझे पागल कर रहा था। काली लेस पैंटी को साइड में सरकाया। बालों वाली चुत नज़र आ गई। अभी पूरी गीली नहीं थी, लेकिन चमक रही थी। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और जोर से चलाने लगा।

“आाह्ह… निकालो… जबरदस्ती मत करो… आाह्ह…” “चुत तो गीली होने लगी है आंटी… विरोध मत करो।”

मेरे हाथ काँप रहे थे। कुंवारा था। दिल जोर-जोर से धधक रहा था। लेकिन इच्छा ज्यादा तेज़ थी। मैंने पैंट खोली। मेरा मोटा, सख्त लंड बाहर निकला—पहली बार किसी औरत के सामने। आंटी की आँखें उस पर टिक गईं। थोड़ी देर के लिए वे चुप हो गईं।

“इतना… मोटा…” उन्होंने हल्के से कहा।

मैंने पैंटी को और साइड किया और लंड उनके छेद पर रखा। एक जोरदार धक्के में आधा अंदर धँस गया।

“आाह्ह्ह… दर्द… निकालो… बहुत मोटा है… आाह्ह्ह!” आंटी ने जोर से आवाज़ लगाई। नाखून मेरे कंधों में गड़ गए।

मैंने और धक्का मारा। पूरा लंड उनकी टाइट चुत में समा गया। पहली बार किसी गर्म, गीली, टाइट चुत का अहसास… मेरा दिमाग सुन्न पड़ गया। इतना मजा, इतनी गर्माहट… मैं कुछ सेकंड हिल भी नहीं पाया।

“आाह्ह… आंटी… बहुत टाइट है…” “निकल… दर्द हो रहा है… आाह्ह…”

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीमे, फिर जोर से। आंटी पहले तो सिर्फ दर्द की आवाज़ें निकाल रही थीं, लेकिन दस-बारह धक्कों के बाद उनकी आवाज़ बदलने लगी।

“आाह्ह… धीरे… आाह्ह… रुको… नहीं… और… आाह्ह…”

मैंने महसूस किया कि उनकी चुत अब खुद लंड को कस रही है। वे हल्के-हल्के कमर भी हिला रही थीं। मैंने और तेज़ कर दिया। चुचियाँ मेरे मुँह में थीं। मैं चूसता, काटता, मसलता।

“आंटी… अब मजा आ रहा है ना?” वे आँखें बंद किए कराह रही थीं। “तुम… कुंवारे हो… इसलिए… आाह्ह… अलग लग रहा है… और तेज़…”

अब वे खुद एक्साइटेड हो चुकी थीं। मैंने पोजीशन बदली। उन्हें घोड़ी बना दिया। पतली साड़ी कमर पर उलझी हुई थी। पीछे से गाँड पकड़कर जोर-जोर से धक्के देने लगा। थप्पड़ मारे उनकी गोल गाँड पर।

“आाह्ह… और मारो… जोर से… कुंवारे लंड से चोदो आंटी को…” आंटी अब खुद गाँड पीछे की तरफ धकेल रही थीं। “आर्यन… सुनो… अंदर छोड़ना… अपना पहला गाढ़ा वीर्य… आंटी की चुत में डाल दो… प्रेग्नेंट होना चाहती हूँ तुम्हारे कुंवारे बच्चे से…”

उनकी ये बात सुनकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया। मैं पागलों की तरह कुदने लगा। आंटी भी जोर-जोर से कराह रही थीं, खुद मिलकर हिल रही थीं।

दोपहर के ढाई बज गए थे। पसीने से दोनों के बदन चमक रहे थे। पतली साड़ी पूरी तरह गंदी और बिखरी हुई थी। हाफ ब्लाउज खुला पड़ा था।

जब मैं निकट आया तो आंटी ने दोनों हाथों से मेरी गाँड दबाई और जोर से कहा, “अंदर… पूरा अंदर छोड़ो… पहला वीर्य मत बर्बाद करना… आंटी को प्रेग्नेंट करो!”

मैंने आखिरी जोरदार धक्के दिए और एकदम गहराई में सारा गाढ़ा, पहला माल उनकी चुत में छोड़ दिया। आंटी भी उसी समय जोर से काँपते हुए झड़ गईं। उनकी चुत मेरे लंड को कस-कसकर पकड़े हुए थी।

दोनों ढेर हो गए। मैं उनके ऊपर गिरा पड़ा था। साँसें तेज़ चल रही थीं।

आंटी ने धीरे से मेरे बाल सहलाए और कान में फुसफुसाया, “पहले जबरदस्ती लगी… लेकिन अब… कुंवारे लड़के का लंड… और उसका पहला वीर्य…अलग ही मजा दे गया।

रात को फिर आना आर्यन। आज रात मैं खुद तुम्हें और सिखाऊँगी और फिर से… तुम्हारा वीर्य अंदर लूँगी।”

मेरा लंड अभी भी उनकी चुत के अंदर था। पहली बार का अनुभव… और आंटी की ये बातें… सब कुछ हमेशा के लिए बदल चुका था।

रात के 9 बज रहे थे। मेरे घर वाले रिश्तेदारों की शादी में चले गए थे। पूरी रात नहीं लौटने वाले थे। सुनीता आंटी के पति भी बाहर ही थे। घर पूरा खाली।

मैं नहा-धोकर तैयार हुआ। दिल अभी भी जोर से धधक रहा था। दोपहर वाला पहला अनुभव बार-बार याद आ रहा था—उनकी टाइट चुत, कड़क चुचियाँ, और वो बात जब उन्होंने कहा था “प्रेग्नेंट होना चाहती हूँ तुम्हारे कुंवारे वीर्य से”। मेरा लंड फिर से तनने लगा।

उनके घर का दरवाज़ा हल्के से खटखटाया। आंटी ने खुद खोला।

आज वे फिर से उसी पतली सिल्क साड़ी में थीं। लेकिन इस बार ब्लाउज और भी गहरा हाफ-कट था। चुचियाँ आधे से ज्यादा बाहर। साड़ी इतनी पतली कि काली पैंटी और गाँड का पूरा शेप साफ़ दिख रहा था। बाल खुले थे, आँखों में वो भूख जो दोपहर में नहीं थी।

“आ गए… कुंवारे राजा,” वे मुस्कुराईं। “अंदर आओ।”

दरवाज़ा बंद होते ही उन्होंने मुझे दीवार से सटा दिया और खुद मेरे होंठों पर टूट पड़ीं। इस बार कोई विरोध नहीं था। जीभ से जीभ मिल रही थी। उनका हाथ सीधे मेरे लंड पर चला गया।

“दोपहर में तो जबरदस्ती की थी… अब खुद देखो कितना तना हुआ है,” उन्होंने हँसते हुए कहा। “आज रात मैं तुम्हें सिखाऊँगी। और हाँ… आज भी अंदर ही छोड़ना। प्रेग्नेंट होना है मुझे।”

मैंने उनका हाफ-कट ब्लाउज खींचकर फाड़ दिया। कड़क चुचियाँ बाहर आ गईं। मैंने दोनों को मुँह में ले लिया, जोर-जोर से चूसा, काटा। आंटी कराहने लगीं।

“आाह्ह… ऐसे ही… दाँतों से… आाह्ह…”

वे मुझे बेडरूम में खींच ले गईं। बिस्तर पर धकेल दिया। खुद साड़ी को धीरे-धीरे खोलने लगीं। पतली साड़ी शरीर से सरकते हुए गिर गई। अब सिर्फ काली लेस पैंटी में खड़ी थीं। गाँड गोल और भारी, चुत पर बाल साफ़ दिख रहे थे।

“आज पैंटी भी मत उतारना,” उन्होंने कहा। “साइड में करके चोदना। मजा ज्यादा आएगा।”

मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। पैंटी साइड की और पहले जीभ से उनकी बालों वाली चुत चाटी। आंटी ने मेरे बाल पकड़ लिए।

“आाह्ह… कुंवारे की जीभ… और अंदर… हाँ… ऐसे चूसो…”

जब वे गीली होकर काँपने लगीं तो मैं ऊपर चढ़ गया। लंड उनके छेद पर रखा। आंटी ने खुद दोनों हाथों से अपनी चुत फैलाई।

“धीरे डाल… फिर जोर से… आज रात बहुत लेनी है।”

मैंने धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया। दोनों एक साथ कराह उठे।

“आाह्ह्ह… कितना गहरा… आर्यन… अब हिलो…”

मैंने मिशनरी में जोर-जोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए। आंटी की टाँगें मेरे कमर पर लिपट गईं। वे खुद ऊपर उठ-उठकर लंड ले रही थीं। चुचियाँ मेरे मुँह में थीं।

“और तेज़… आाह्ह… चोदो आंटी को… अपना लंड पूरी तरह अंदर डालो…”

थोड़ी देर बाद उन्होंने खुद पोजीशन बदली। घोड़ी बन गईं। पैंटी अभी भी कमर में अटकी थी। मैंने गाँड पकड़ी और पीछे से जोरदार धक्के दिए। थप्पड़ मार-मारकर।

“आाह्ह… और मारो… जोर से थप्पड़ मारो… गाँड लाल कर दो…”

मैंने उनकी गाँड पर थप्पड़ की बारिश कर दी। फिर लंड निकालकर थूक लगाया और धीरे-धीरे उनके गाँड के छेद में धकेलना शुरू किया।

“आाह्ह्ह… गाँड में… दर्द… लेकिन मत निकालना… पूरा डालो… कुंवारे का लंड गाँड में भी चाहिए…”

पूरा लंड अंदर जाने पर आंटी जोर से चिल्लाईं। मैंने धीरे-धीरे धक्के दिए, फिर तेज़। एक हाथ से उनकी चुची मसल रहा था, दूसरे से बाल खींच रहा था।

रात के 11 बज गए थे। हमने पोजीशन के पोजीशन बदले। कभी वे ऊपर बैठकर खुद कुदतीं, कभी मैं उन्हें दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदता। कभी उल्टा करके उनकी चुत और गाँड दोनों चाटता। आंटी हर बार कहतीं—

“अंदर छोड़ना… बर्बाद मत करना… प्रेग्नेंट होना है…”

मैं दो बार उनकी चुत में और एक बार गाँड में छोड़ चुका था। लेकिन लंड फिर से तन जाता था। आंटी खुद मुँह में लेकर सख्त करतीं।

“देखो… कुंवारा होकर भी कितनी बार छोड़ रहा है… आाह्ह… और दो…”

रात के 1 बज गए। दोनों पसीने से लथपथ थे। बिस्तर गीला हो चुका था। पतली साड़ी और पैंटी एक तरफ पड़ी थीं। आंटी की चुचियाँ लाल, निप्पल सूजे, चुत और गाँड दोनों से मेरा गाढ़ा वीर्य रिस रहा था।

फिर भी वे थकने वाली नहीं थीं। उन्होंने मुझे लिटाया और खुद ऊपर बैठ गईं।

“अब आखिरी राउंड… इस बार सबसे गहरा छोड़ना। आंटी को पक्का प्रेग्नेंट करना है।”

वे जोर-जोर से कमर हिलाने लगीं। मैं नीचे से धक्के देता। दोनों की आवाज़ें मिल रही थीं। जब मैं निकट आया तो आंटी ने जोर से मेरी गाँड दबाई और कहा—

“अब… अभी… पूरा अंदर… पहला वाला नहीं, ये वाला भी गाढ़ा है… डाल दो!”

मैंने आखिरी ताकत लगाई और एकदम तलक सारा माल उनकी चुत में छोड़ दिया। आंटी भी उसी समय जोरदार ऑर्गैज्म से काँपने लगीं। उनकी चुत मेरे लंड को इतने जोर से कस रही थी कि निकला ही नहीं जा रहा था।

घड़ी में 2:40 बज रहे थे।

दोनों ढेर हो गए। आंटी मेरे सीने पर लेटी हुई थीं। उनकी उँगली मेरे लंड पर घूम रही थी जो अभी भी आधा तना था।

वे धीरे से बोलीं, “आज रात तुमने आंटी को कई बार प्रेग्नेंट करने की कोशिश की।

अगली बार जब पति बाहर हों… फिर से आना। मैं तुम्हारा और वीर्य लूँगी।”

मैंने उनकी गाँड दबाते हुए जवाब दिया, “आऊँगा आंटी… जब तक तुम्हारी चुत में मेरा बच्चा न लग जाए… आता रहूँगा।”

बाहर रात बाकी थी। लेकिन दोनों जानते थे—यह सिलसिला अब सिर्फ एक रात का नहीं रहने वाला।

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Amol Goyal
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