साड़ी उतारकर माँ को चोदा - देहाती माँ और बेटे की जबरदस्त चुदाई

38 साल की अकेली देहाती माँ ममता की भारी चूचियाँ और गीली चुत देखकर 23 साल के जवान बेटे का लंड फड़क उठा। पहले रोमांस, फिर गंदी बातें, फिर बिना रुके चुत और गाँड दोनों की जबरदस्त चुदाई। माँ ने खुद कहा – बेटा, जितना चाहे चोद… माँ तेरी है!

लेखक: Anil Shukla6 मिनट पढ़ने में
साड़ी उतारकर माँ को चोदा - देहाती माँ और बेटे की जबरदस्त चुदाई

गाँव की धूल भरी गलियों में शाम का उजाला धीरे-धीरे डूब रहा था। ममता देवी की उम्र अड़तीस साल थी। देहती औरत, गोरी-चिट्टी चमड़ी पर धूप की हल्की छाप, लेकिन जिस्म अभी भी जवान और भरा-पूरा। बड़े-बड़े गोल चूचियाँ जो साड़ी की पल्लू के नीचे से उभरी रहतीं, कमर पतली और गाँड मोटी-गोल। पति सालों से शहर में मजदूरी करता था, घर में सिर्फ वो और उसका तेईस साल का बेटा राजू।

राजू कॉलेज से लौटा था। पसीने से भीगी कमीज, चौड़ी छाती, मजबूत बाँहें। ममता रसोई में खड़ी थी। उसने राजू को देखा और दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई। बेटा अब जवान हो चुका था। नज़रें बार-बार उसके सीने पर चली जातीं, जहाँ कमीज के बटन खुले थे।

“माँ, आज बहुत थक गया हूँ,” राजू ने कहा और पास आकर उसकी कमर में हाथ डाल दिया। ममता सिहर उठी। राजू का हाथ उसकी पतली कमर पर था, उंगलियाँ साड़ी के नीचे से छू रही थीं।

“बेटा… हाथ हटा,” उसने धीमी आवाज़ में कहा, लेकिन आवाज़ में नकार नहीं था। राजू मुस्कुराया। उसने माँ को दीवार की तरफ धकेल दिया। ममता की पीठ दीवार से लगी और राजू का मजबूत जिस्म उसके ऊपर आ गया। दोनों की साँसें मिल गईं।

राजू ने माँ की साड़ी का पल्लू खींच लिया। बड़े-बड़े चूचियाँ बाहर आ गईं। गोरे-गोरे, गुलाबी निप्पल्स कड़े हो चुके थे। राजू ने एक चूची को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। ममता की आँखें बंद हो गईं। “आह… राजू… बेटा… ये क्या कर रहा है तू…” उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन हाथों से वो राजू के सिर को और अंदर दबा रही थी।

राजू ने दूसरी चूची भी दबाई। दोनों हाथों से मसल रहा था, निप्पल्स को दाँतों से काट रहा था। ममता की चुत गीली हो चुकी थी। साड़ी के नीचे पैंटी पूरी भीग गई थी। राजू ने हाथ नीचे किया, साड़ी ऊपर की और पैंटी के अंदर उँगली डाल दी।

“माँ… तेरी चुत कितनी गीली है,” राजू ने गंदी बात कही। ममता शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसके होंठ खुद राजू के होंठों पर आ गए। दोनों ने जोर से चुंबन किया। जीभें लड़ रही थीं। राजू की उँगली चुत के अंदर घुस गई, अंदर-बाहर करने लगी। ममता की टाँगें काँपने लगीं।

राजू ने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया। साड़ी पूरी खोल दी। नंगी ममता… बड़े चूचियाँ, गोल गाँड, और बीच में काली घनी झाड़ी वाली चुत। राजू ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड सीधा और मोटा बाहर निकला। ममता की आँखें फैल गईं।

“बेटा… ये तो बहुत बड़ा है…” उसने फुसफुसाया। राजू ने माँ की टाँगें फैलाईं और चुत पर अपना लंड रगड़ने लगा। चिख-चिख की आवाज़ आने लगी। गीली चुत पर लंड सरक रहा था। फिर उसने धीरे से आगे बढ़ाया।

लंड चुत के छेद में घुसने लगा। ममता ने जोर से आह भरी। “आह्ह… धीरे… राजू… अंदर तक जा रहा है…” राजू ने एक झटके में पूरा लंड चुत में ठोक दिया। दोनों सिसक उठे। ममता की चुत तन गई, लंड को कसकर पकड़ लिया।

राजू ने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। बिस्तर चरमरा रहा था। चूचियाँ हिल रही थीं। राजू एक हाथ से चूची मसल रहा था, दूसरे से गाँड को दबा रहा था। “माँ… तेरी चुत कितनी टाइट है… जैसे कुंवारी हो,” उसने गंदी बात कही। ममता शर्मा रही थी, लेकिन उसके मुँह से सिर्फ मस्त आहें निकल रही थीं।

“और जोर से… बेटा… माँ की चुत फाड़ दे…” ममता खुद बोल उठी। राजू पागल हो गया। उसने माँ को करवट से घुमाया, गाँड ऊपर की और पीछे से चोदने लगा। एक हाथ से गाँड के छेद को भी छेड़ रहा था। उँगली गाँड के छेद में घुसा दी। ममता चीख पड़ी, लेकिन मजे से।

राजू की कमर जोर-जोर से चल रही थी। लंड चुत के अंदर गहरे तक जा रहा था। चिख-चिख, थप-थप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। ममता की चुत से पानी बहने लगा। वो काँप रही थी, अपने बेटे के लंड पर चोद खा रही थी।

राजू ने माँ को फिर से पीठ के बल लिटाया। टाँगें कंधों पर रखीं और पूरे जोर से ठोकने लगा। चूचियाँ मुँह में लेकर चूस रहा था। ममता की आँखों में पानी आ गया मजे से। “राजू… माँ को चुदवा… और गहरा… हाँ… वहीं… चुत फट जाएगी…”

राजू की साँसें तेज हो गईं। वो और तेज चोदने लगा। कमरा गर्म हो चुका था। दोनों के जिस्म पसीने से चमक रहे थे। राजू ने अचानक लंड बाहर निकाला और माँ के मुँह के पास ले गया।

“माँ… चाट… अपने बेटे का लंड चाट,” उसने कहा। ममता ने बिना हिचकिचाहट लंड मुँह में ले लिया। गीली चुत का स्वाद अभी भी लंड पर था। उसने जोर से चूसा, जीभ से चाटा। राजू ने माँ के बाल पकड़कर और गहरा मुँह में ठोक दिया।

फिर से चुत में डाल दिया। इस बार और तेज, और गहरा। ममता चीख रही थी। उसका पहला पानी निकल चुका था। चुत में से झाग निकल रहा था। राजू भी करीब था। उसने जोर की आखिरी ठोकरें मारीं और माँ की चुत के अंदर ही अपना गर्म पानी छोड़ दिया।

ममता सिसक उठी। गर्म वीर्य उसकी चुत में भर गया। राजू लंड अंदर ही रखे हुए माँ के ऊपर गिरा। दोनों पसीने से लथपथ, साँसें फूल रही थीं।

राजू ने धीरे से माँ के होंठों पर चुंबन किया। “माँ… आज रात और चोदूँगा… तेरी गाँड भी…”

ममता मुस्कुराई, थकी हुई आँखों से बेटे को देखा। “बेटा… माँ तेरी है… जितना चाहे उतना चोद…”

बाहर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। घर में सिर्फ दो साँसें और गीली चुत की हल्की सिसकियाँ बाकी थीं।

रात और गहरी हो चुकी थी। कमरे में सिर्फ दीये की मंद रोशनी थी। राजू अभी भी माँ के ऊपर लेटा हुआ था। उसका आधा कड़ा लंड ममता की गीली चुत से बाहर निकला हुआ था, और अंदर बचा हुआ गर्म वीर्य धीरे-धीरे चुत के छेद से रिस रहा था। ममता की साँसें अभी भी तेज थीं। बड़े-बड़े चूचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं।

राजू ने माँ के माथे पर पसीना पोंछा और फिर उसकी गर्दन चूसने लगा। “माँ… अभी तो सिर्फ शुरूआत हुई है,” उसने फुसफुसाया। ममता की आँखें खुल गईं। बेटे की बात सुनकर उसकी चुत फिर से सिहर उठी।

राजू उठ बैठा। उसने माँ को पेट के बल लिटा दिया। ममता की मोटी-गोल गाँड ऊपर उठ गई। दोनों गोल लोईयाँ चमक रही थीं। बीच में गाँड का कसा हुआ छेद और नीचे अभी भी गीली चुत दिखाई दे रही थी। राजू ने दोनों हाथों से गाँड की लोईयाँ फैलाईं और जीभ से गाँड के छेद पर चाटना शुरू कर दिया।

ममता सिसक उठी। “आह्ह… राजू… वहाँ मत… गंदी जगह है…” लेकिन उसकी आवाज़ में मनाही नहीं थी। राजू की जीभ गाँड के छेद में घुस रही थी, अंदर-बाहर। साथ ही उँगली से चुत को भी मसल रहा था। ममता की टाँगें फैल गईं। वो तकिया दबाकर कराह रही थी।

राजू ने अपनी उँगली गाँड के छेद में धीरे से घुसा दी। ममता जोर से चीखी। “आह्ह… दर्द… लेकिन… अच्छा लग रहा है…” राजू ने एक और उँगली डाली। दोनों उँगलियाँ गाँड के छेद को फैला रही थीं। फिर उसने अपना लंड फिर से कड़ा किया और चुत में एक जोरदार झटका मारा।

लंड पूरा चुत में धँस गया। राजू ने जोर-जोर से पीछे से चोदना शुरू किया। एक हाथ से माँ के बाल पकड़े हुए थे, दूसरे हाथ से गाँड की लोईयाँ मसल रहा था। हर ठोकर पर ममता की चूचियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। निप्पल्स इतने कड़े हो गए थे कि दर्द होने लगा था।

“माँ… तेरी चुत मेरा लंड निगल रही है… कितनी रसीली है,” राजू गंदी बातें बोल रहा था। ममता अब खुद बोलने लगी। “और जोर से चोद… बेटा… माँ की चुत फाड़ दे… हाँ… वहीं… गहरा…”

राजू ने अचानक लंड बाहर निकाला। चुत से वीर्य और पानी की धार बह निकली। उसने लंड को गाँड के छेद पर टिकाया। “अब गाँड ले… माँ…” ममता ने सिर घुमाकर देखा। आँखों में डर और मस्ती दोनों थे। “धीरे डालना… पहली बार है…”

राजू ने थूक लगाकर लंड को गीला किया और धीरे-धीरे गाँड के छेद में धकेलने लगा। ममता की चीख निकल गई। “आह्ह्ह… फट रहा है… राजू… धीरे…” लेकिन राजू रुकने वाला नहीं था। उसने धीरे-धीरे पूरा लंड गाँड में ठोक दिया। ममता की आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन साथ ही उसकी चुत से फिर पानी बहने लगा।

राजू ने गाँड चोदनी शुरू की। पहले धीरे, फिर जोर से। हर ठोकर पर ममता की गाँड हिल रही थी। चूचियाँ बिस्तर पर दब रही थीं। राजू एक हाथ से माँ की चुत में उँगलियाँ घुसाए हुए था। दो छेद एक साथ भरे हुए थे। ममता पागल हो रही थी।

“बेटा… माँ को चुदवा… दोनों छेद फाड़ दे… आह्ह… कितना मोटा है तेरा लंड…” राजू और तेज हो गया। कमर झटके मार रही थी। गाँड के छेद से चिख-चिख की आवाज़ आ रही थी। ममता की चीखें अब आनंद की हो गई थीं।

राजू ने माँ को फिर से करवट दी। एक टाँग ऊपर उठाई और साइड से चोदने लगा। इस बार लंड कभी चुत में, कभी गाँड में। दोनों छेद बारी-बारी से ले रहे थे। ममता की एक चूची मुँह में लेकर जोर से चूस रहा था। दाँतों से निप्पल काट रहा था।

ममता का दूसरा पानी निकल आया। उसका पूरा जिस्म काँप रहा था। “राजू… माँ मर गई… और मत चोद… सहन नहीं हो रहा…” लेकिन राजू रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसने माँ को घोड़ी बना दिया। दोनों हाथों से कमर पकड़ी और पूरे जोर से गाँड में ठोकने लगा।

लंड गाँड के अंदर गहराई तक जा रहा था। ममता की चुत खुली हुई थी, पानी टपक रहा था। राजू ने अचानक लंड बाहर निकाला और माँ के मुँह के सामने ले आया। “चाट… दोनों छेदों का स्वाद चाट,” उसने कहा। ममता ने जीभ निकालकर लंड चाटना शुरू किया। चुत और गाँड दोनों का स्वाद मिला हुआ था। उसने लंड को गले तक ले लिया।

राजू ने फिर से माँ को लिटाया। इस बार उसने दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और चुत में पूरा लंड धँसा दिया। जोर की आखिरी ठोकरें शुरू हो गईं। बिस्तर चरमरा रहा था। दीवार हिल रही थी। ममता चीख-चीखकर बोल रही थी, “चोद… बेटा… माँ की चुत में डाल… पूरा पानी अंदर छोड़…”

राजू की कमर अकड़ गई। उसने जोर की आखिरी ठोकर मारी और माँ की चुत के अंदर ही दूसरी बार गर्म वीर्य की धार छोड़ दी। इतना ज्यादा कि चुत से बाहर निकलने लगा। ममता सिसकते हुए काँप रही थी। उसका तीसरा पानी भी निकल चुका था।

राजू लंड अंदर रखे हुए माँ के ऊपर गिर पड़ा। दोनों पूरी तरह थक चुके थे। पसीने से भीगे जिस्म चिपक गए थे। राजू ने धीरे से माँ के होंठ चूमे। “माँ… अब तू पूरी तरह मेरी हो गई…”

ममता ने थकी हुई मुस्कान दी। उसने बेटे के बाल सहलाए और फुसफुसाई, “बेटा… जब चाहे चोद लेना… माँ की चुत, गाँड, मुँह… सब तेरे हैं…”

बाहर मुर्गे बाँग दे रहे थे। सुबह होने वाली थी। लेकिन कमरे में अभी भी गीली चुत की महक और दो गर्म साँसें बाकी थीं। राजू का लंड धीरे-धीरे फिर से कड़ा होने लगा था… और ममता जानती थी कि यह रात अभी खत्म नहीं हुई है।

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Anil Shukla
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