विधवा मम्मी को बेटे ने अपनी रंडी बनाया – रोज चुदाई की कहानी
अकेली विधवा मम्मी को बेटे ने अपनी पर्सनल रंडी बना लिया! रोज सुबह-शाम मम्मी की चूत और गांड फाड़कर बेटे ने अपनी पूरी हवस निकाली – अब मम्मी बेटे की गुलाम बन गई!
मेरा नाम राहुल है, उम्र 21 साल। मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ। मेरी मम्मी का नाम रीना है। उम्र 42 साल, लेकिन देखने में 32-33 से ज्यादा नहीं लगतीं।
मम्मी बेहद गोरी, सेक्सी और मोटी-भरी हुई बॉडी वाली हैं। उनकी कमर 30 इंच, छातियां 36D और गांड इतनी मोटी और गोल है कि चलते वक्त हिलती हुई किसी को भी पागल कर दे। पापा 5 साल पहले गुजर गए थे। उसके बाद से मम्मी अकेली रहती थीं। घर में सिर्फ हम दोनों ही थे।
मम्मी बहुत मॉडर्न कपड़े पहनती थीं — साड़ी, नाइट सूट, टॉप-शॉर्ट्स। उनकी बड़ी-बड़ी छातियां और मोटी गांड हमेशा मेरी नजरों में रहती। मैं कई बार उनके बारे में सोचकर मुठ मारता था।
एक दिन रात को मैं बाथरूम से निकला तो देखा मम्मी अपने कमरे में टीवी देख रही थीं। उन्होंने ब्लैक कलर का हल्का नाइट सूट पहना हुआ था, जिसका टॉप काफी डीप नेक था। उनकी गोरी छातियां आधे बाहर झांक रही थीं।
मैं चुपके से दरवाजे से झांकने लगा। मम्मी का एक हाथ अपनी छाती पर था और दूसरा धीरे-धीरे अपनी जांघों के बीच में घुम रहा था। उनकी सांसें तेज हो रही थीं।
मैं वहां खड़ा-खड़ा ही मुठ मारने लगा। तभी अचानक मम्मी ने मेरी तरफ देख लिया। उनकी आँखें फैल गईं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस शर्म से आँखें बंद कर लीं।
मैं डरते हुए अंदर चला गया। "मम्मी... sorry..." मैंने कहा।
मम्मी ने आँखें खोलीं। उनका चेहरा लाल था। उन्होंने धीरे से कहा, "राहुल... तुम्हें देखना नहीं चाहिए था... लेकिन... मम्मी बहुत अकेली है बेटा।"
मैं उनके पास बैठ गया। मम्मी ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और अपनी छाती पर रख दिया। "दबाओ... बहुत दिनों से किसी ने छुआ ही नहीं..."
मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैंने मम्मी की बड़ी छातियों को जोर से दबाया। मम्मी की सांसें भारी हो गईं। "आह्ह्ह... राहुल... जोर से... मम्मी की चूचियों को दबाओ बेटा..."
मम्मी की बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। मैंने उनका नाइट सूट ऊपर किया। उनकी भारी-भरकम गोरी छातियां बिना ब्रा के बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल सख्त हो चुके थे।
मैंने एक छाती मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। मम्मी मेरे सिर को दबाती हुई कराह रही थीं — "हाँ बेटा... चूसो मम्मी की चूचियां... बहुत दिनों बाद मजा आ रहा है..."
मैंने उनका सूट पूरी तरह उतार दिया। मम्मी नंगी लेटी थीं। उनकी जांघों के बीच मोटी, गोरी चूत बिना बाल की, पूरी भीगी हुई थी। मैंने उनकी जांघें फैलाईं और चूत पर मुंह रख दिया। जीभ से चूत चाटते ही मम्मी जोर से चीखीं — "आआह्ह्ह... राहुल... वहाँ... मम्मी की चूत चूसो... हाँ बेटा... अपनी मम्मी को चाटो..."
मैंने 10-15 मिनट तक उनकी चूत चाटी। मम्मी दो बार झड़ चुकी थीं। उनका गर्म पानी मेरे मुंह में आ रहा था। फिर मम्मी ने मुझे पकड़ा और बोलीं, "अब अपनी मम्मी को चोदो बेटा... अपनी मम्मी की प्यासी चूत में लंड डालो..."
मैंने पैंट उतारी। मेरा 7.5 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया। मम्मी ने आँखें फैलाकर उसे पकड़ा और बोलीं, "इतना मोटा... आज मेरी चूत फाड़ देगा..."
मैंने मम्मी की जांघों के बीच लंड रखा और धीरे से धक्का मारा। पूरा लंड उनकी गर्म चूत में चला गया। "आआआह्ह्ह... बेटा... फाड़ दिया... जोर से चोदो मम्मी को...!"
मैंने जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। मम्मी की छातियां उछल रही थीं। वे चीख रही थीं — "हाँ राहुल... और जोर से... मम्मी तुम्हारी रंडी है... आज पूरी रात चोदो मुझे..."
उस रात मैंने मम्मी को 3 बार चोदा। पहली बार नॉर्मल पोजीशन में, दूसरी बार doggy में, और तीसरी बार मम्मी ऊपर बैठकर। हर बार मम्मी जोर-जोर से चीख रही थीं और झड़ रही थीं। आखिरी में मैंने उनकी चूत के अंदर ही अपना माल छोड़ दिया।
मम्मी थककर मेरे सीने पर लेट गईं और बोलीं, "राहुल... अब से तुम मेरे पति हो... जब मन करे, मम्मी को चोद लेना..."
अगली सुबह जब मैं उठा तो मम्मी रसोई में नंगी ही खाना बना रही थीं। उनकी मोटी गांड हिल रही थी। मैंने पीछे से उन्हें पकड़ लिया। मम्मी मुस्कुराईं।
"सुबह-सुबह ही मम्मी की चूत में लंड डालना चाहते हो?" मैंने उन्हें किचन काउंटर पर झुकाया और पीछे से लंड डाल दिया। मम्मी चीख उठीं — "आह्ह्ह... राहुल... जोर से... किचन में ही मम्मी को चोदो..."
मैंने जोर-जोर से उनकी चूत ठोकी। मम्मी बार-बार झड़ रही थीं। फिर हम बेडरूम गए। मम्मी ने मुझे लिटाया और खुद ऊपर बैठ गईं। उनकी भारी छातियां उछल रही थीं। वे तेजी से कूद रही थीं — "हाँ बेटा... मम्मी की चूत में गहरा डालो... भर दो मम्मी को..."
मैंने उन्हें doggy स्टाइल में किया और गांड भी मारी। मम्मी दर्द और मजे में पागल हो रही थीं — "फाड़ दो मम्मी की गांड भी... तुम्हारी मम्मी पूरी तरह तुम्हारी रंडी है बेटा..."
उस दिन मैंने मम्मी को 4 बार चोदा। शाम तक घर में हर जगह — बेड, सोफा, किचन, बाथरूम — हमने सेक्स किया। रात को मम्मी मेरे सीने पर लेटी हुई बोलीं, "राहुल... अब हम पति-पत्नी की तरह रहेंगे। जब भी मन करे, मम्मी को चोद लेना। मम्मी हमेशा तुम्हारे लंड के लिए तैयार रहेगी..."
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा, "ठीक है मम्मी... अब से तुम मेरी personal randi हो।"
कुछ दिनों बाद मम्मी पूरी तरह बदल चुकी थीं। अब वो घर में ज्यादातर समय नंगी ही रहती थीं। सिर्फ मेरे सामने। उनकी गोरी देह, भारी छातियां और मोटी गांड देखकर मेरा लंड हमेशा खड़ा रहता।
एक शाम को मैं कॉलेज से लौटा। मम्मी किचन में नंगी खड़ी चाय बना रही थीं। उनकी मोटी गांड हिल रही थी। मैंने पीछे से उन्हें जोर से पकड़ लिया।
"आज मम्मी को रसोई में ही चोदना है," मैंने उनके कान में कहा। मम्मी मुस्कुराईं और काउंटर पर झुक गईं। "चोद लो बेटा... मम्मी की चूत तुम्हारे लंड के लिए हमेशा गीली रहती है..."
मैंने अपना लंड निकाला और एक झटके में मम्मी की चूत में डाल दिया। मम्मी जोर से चीखीं — "आआह्ह्ह... राहुल... फाड़ दिया... जोर से पेलो अपनी मम्मी को..."
मैंने किचन में ही मम्मी को जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। उनकी भारी छातियां काउंटर पर दब रही थीं। मम्मी लगातार चीख रही थीं — "हाँ बेटा... और तेज... मम्मी को रंडी बनाकर चोदो... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मम्मी की चूत में कितना अच्छा लगता है..."
मैंने 10 मिनट तक किचन में चोदा। मम्मी दो बार झड़ गईं। फिर मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम ले गया। मम्मी को बेड पर लिटाया और उनकी जांघें कंधों पर रख दीं। इस पोजीशन में मेरा लंड बहुत गहरा जा रहा था। मम्मी पागल हो रही थीं — "बहुत गहरा जा रहा है बेटा... मम्मी की चूत फट जाएगी... लेकिन मत रुकना... चोदते रहो..."
मैंने तेजी से धक्के मारे। मम्मी की आँखें ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। "मम्मी... मैं अंदर छोड़ने वाला हूँ..."
"हाँ बेटा... मम्मी की चूत में ही छोड़ दो... भर दो अपनी मम्मी को..." मैंने जोर से धक्का मारकर मम्मी की चूत के अंदर अपना सारा गर्म माल छोड़ दिया। मम्मी भी उसी वक्त झड़ गईं।
थोड़ी देर आराम करने के बाद मम्मी ने मुझे चूम लिया और बोलीं, "राहुल... आज मम्मी तुम्हें कुछ नया सिखाना चाहती है..."
उन्होंने मुझे लिटाया और अपनी गांड मेरे मुंह की तरफ कर दी। फिर खुद मेरे लंड को मुंह में ले लिया। हम 69 पोजीशन में थे। मैं उनकी चूत और गांड चाट रहा था, और मम्मी मेरा लंड चूस रही थीं।
"आह्ह्ह... मम्मी... तुम्हारी गांड बहुत स्वादिष्ट है..." मैंने कहा। मम्मी ने लंड मुंह से निकाला और बोलीं, "अब मम्मी की गांड भी मारो बेटा... आज मम्मी पूरी तरह तुम्हारी हो जाना चाहती है..."
मैंने मम्मी को घुटनों के बल किया। उनकी मोटी गोरी गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे से गांड में डाला। "उफ्फ्फ... दर्द हो रहा है... लेकिन चोदो... अपनी मम्मी की गांड फाड़ दो..."
धीरे-धीरे पूरा लंड मम्मी की टाइट गांड में चला गया। फिर मैंने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। मम्मी तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थीं। "हाँ राहुल... मारो... मम्मी की गांड तुम्हारी है... जोर से पेलो..."
मैंने मम्मी की गांड भी अच्छे से मारी। आखिर में मैंने उनकी गांड के अंदर ही माल छोड़ दिया। रात को मम्मी मेरे सीने से चिपकी हुई लेटी थीं। उन्होंने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा, "राहुल... अब से हर रोज मम्मी को चोदना... सुबह, दोपहर, रात... मम्मी तुम्हारे लंड की गुलाम बन गई है बेटा..."
मैंने उनकी छाती दबाते हुए कहा, "हाँ मम्मी... अब तुम मेरी personal randi हो।"
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