वर्जिन बहन की टाइट चूत भाई के लंड से चुदी

22 साल की वर्जिन बहन ने बॉयफ्रेंड से OYO प्लान किया, भाई ने सुन लिया और ब्लैकमेल कर लिया। पिंक अंडरवेयर में पहली बार भाई के लंड से टाइट चूत फटी, पहले सिर्फ दर्द था… फिर खुद कमर हिलाने लगी। दो दिन तक चली भाई-बहन की वर्जिन चुदाई की पूरी कहानी।

लेखक: Hemant Singh7 मिनट पढ़ने में
वर्जिन बहन की टाइट चूत भाई के लंड से चुदी

आदित्य 24 साल का था। सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहा था और ज्यादातर घर पर ही रहता था। उसकी छोटी बहन नायरा 22 साल की थी, कॉलेज के फाइनल ईयर में। नायरा एकदम जवान और आकर्षक हो चुकी थी। उसके स्तन गोल-मटोल और हल्के से उभरे हुए थे, गांड भी थोड़ी भरी और सटोल थी। वो अक्सर टाइट जींस, लेगिंग्स और फिट शर्ट पहनती थी, जिनमें उसकी बॉडी की आकृति साफ झलकती।

आदित्य लंबे समय से उसे चुपके-चुपके देखता था। कभी मौका मिलने पर उसके स्तन या गांड पर हल्का हाथ फेर देता, दबा देता। नायरा को आमतौर पर शक नहीं होता था। रात में वो कई बार उसके बाथरूम से अंडरवेयर लेकर मुठ मारता था और ख्यालों में उसे चोदने का सोचता।

कभी-कभी जब नायरा गहरी नींद में होती, तो आदित्य उसके कमरे में चुपके से जाकर बगल में लेट जाता और अपना तना हुआ लंड कपड़ों के ऊपर से उसकी चूत पर रगड़ता। नायरा कभी हल्की आवाज में कराहती, लेकिन जागती नहीं थी।

एक दिन मम्मी-पापा दो दिन के फॅमिली फंक्शन पर चले गए। घर में सिर्फ दोनों रह गए।

शाम को आदित्य घर लौटा तो उसने नायरा को फोन पर बात करते सुना। वो बॉयफ्रेंड से कह रही थी:

“आज कॉलेज बंक मार लूंगी… घर पर लेट बता दूंगी। तू OYO बुक कर ले। मैं पिंक वाली टाइट अंडरवेयर पहनूंगी ताकि तू आराम से कर सके। कंडोम लेना मत भूलना, वरना प्रेग्नेंट हो जाऊंगी।”

आदित्य ने पूरी बात रिकॉर्ड कर ली। जब नायरा ने फोन काटा, तो वो कमरे में घुस गया। नायरा का चेहरा देखकर डर गया।

आदित्य ने फोन दिखाया और शांत लेकिन सख्त आवाज में कहा, “सब रिकॉर्ड है। अगर मना किया तो ये मम्मी-पापा और तेरे दोस्तों तक पहुंच जाएगा। एक ही शर्त है – आज तू वही पिंक अंडरवेयर पहन और मेरे साथ सेक्स कर।”

नायरा की आंखें भर आईं। “आदित्य… मैं तुम्हारी बहन हूं… ये गलत है… मैं अब तक वर्जिन हूं… प्लीज ऐसा मत करो।”

आदित्य ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “या तो मेरे साथ, या सबके सामने बेइज्जती। फैसला तेरा।”

काफी देर तक नायरा रोती रही, मनाती रही। आखिरकार डर और मजबूरी में वो मान गई।

रात को नायरा ने वही पिंक टाइट अंडरवेयर और एक ढीला टी-शर्ट पहना। वो बिस्तर पर बैठी कांप रही थी। आदित्य अंदर आया। दोनों की नजरें मिलीं। नायरा की सांसें तेज थीं।

आदित्य ने धीरे से उसका टी-शर्ट उतारा। उसके गोल स्तन सामने आ गए। उसने पहले उन्हें हल्के हाथों से सहलाया, फिर निप्पल को मुंह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगा। नायरा की सांस भारी होने लगी। थोड़ी देर बाद आदित्य ने पिंक अंडरवेयर नीचे खींची। नायरा की चूत गुलाबी और पूरी तरह बंद थी – पहली बार किसी ने छुआ था।

आदित्य ने उसके पैर धीरे से फैलाए। अपना लंड निकाला और चूत के मुंह पर रखा। नायरा के चेहरे पर डर साफ था। आदित्य ने धीरे से धक्का दिया। सिर्फ अग्रीमा हिस्सा अंदर गया। नायरा की आंखें बंद हो गईं और दर्द से सिसकारी निकल गई।

“आह्ह… दर्द हो रहा है… बहुत टाइट है…” उसने कहा।

आदित्य थोड़ा रुका, फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेलने लगा। आधा लंड अंदर गया तो नायरा के नाखून उसकी पीठ में चुभ गए। खून की हल्की लकीर निकली। आदित्य ने पूरा लंड अंदर करने की कोशिश की। नायरा जोर से कराह उठी।

“रुक… पूरी तरह अंदर मत कर… फट जाएगी…”

लेकिन कुछ क्षण बाद आदित्य ने पूरा लंड अंदर कर दिया। नायरा की चूत पूरी तरह भर गई थी। दोनों कुछ देर बिना हिले पड़े रहे। नायरा की आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन साथ ही उसकी सांसें भी बदल रही थीं।

आदित्य ने धीमी गति से हिलना शुरू किया। पहले बहुत धीरे। दर्द अभी भी था, लेकिन धीरे-धीरे नायरा के शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैलने लगी। कुछ देर बाद उसकी कराहें दर्द वाली कम और सुकून वाली ज्यादा होने लगीं।

आदित्य ने उसके स्तन चूसते हुए रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। नायरा की टांगें अपने आप उसकी कमर पर लिपटने लगीं।

“आदित्य… अभी भी दर्द है… लेकिन… अंदर तक महसूस हो रहा है…” उसने हल्के स्वर में कहा।

आदित्य ने उसके होंठ चूम लिए। दोनों की जीभ मिल गई। नायरा अब खुद भी हल्के-हल्के कमर हिलाने लगी थी। दर्द और मजे का मिश्रण उसे अजीब लग रहा था। आदित्य ने पोजीशन बदलते हुए उसे थोड़ा साइड में किया और गहराई तक जाने लगा। नायरा की आवाजें अब स्पष्ट रूप से बदल चुकी थीं।

“और… थोड़ा और अंदर… आह्ह…” उसकी आवाज में पहली बार मजा झलक रहा था।

आदित्य ने उसकी गांड को सहलाते हुए और तेज किया। नायरा की चूत अब थोड़ी गीली हो चुकी थी। दर्द कम हो रहा था और एक नई सी सनसनाहट बढ़ रही थी। दोनों की सांसें तेज थीं। आदित्य उसके कान में धीरे से बोल रहा था और नायरा जवाब में हल्की कराहें निकाल रही थी।

काफी देर तक दोनों इसी तरह जुड़े रहे। नायरा की आंखें बंद थीं, होंठ खुले हुए। पहली बार का दर्द अभी भी कहीं पीछे था, लेकिन अब उसका शरीर भी प्रतिक्रिया दे रहा था। आदित्य जब और गहराई तक गया तो नायरा की कमर अपने आप उठ गई।

आखिर में आदित्य ने उसके अंदर ही झड़ गया। नायरा भी एक हल्की सी कंपकंपी के साथ चरम पर पहुंच गई। दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके लेटे रहे।

नायरा की आंखों में अभी भी आंसू थे, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सा सुकून भी था। आदित्य ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अब आराम कर… रात को फिर मिलते हैं।”

नायरा ने कुछ नहीं कहा। बस आंखें बंद किए लेटी रही। पहली बार के दर्द, मजबूरी और फिर धीरे-धीरे उभरते मजे का मिला-जुला अहसास उसके शरीर में घूमा जा रहा था।

रात के लगभग साढ़े बारह बजे आदित्य फिर नायरा के कमरे में आया। नायरा बिस्तर पर लेटी हुई थी। पहली बार की चुदाई के बाद उसकी चूत अभी भी हल्की सूजी हुई थी और चलने में हल्का दर्द हो रहा था। वो आदित्य को देखते ही थोड़ी सिमट गई।

“आदित्य… अभी भी दर्द है अंदर… आज मत करो ना,” उसने हल्की आवाज में कहा।

आदित्य ने दरवाजा बंद किया और पास आकर उसके बाल सहलाए। “दर्द तो पहली बार में होता है। थोड़ी देर बाद आराम हो जाएगा। तूने वादा किया था।” उसने फोन निकाला और रिकॉर्डिंग का एक छोटा सा हिस्सा चलाकर दिखाया। नायरा चुप हो गई।

आदित्य ने धीरे से उसका टी-शर्ट उतारा। स्तनों को पहले हाथों से सहलाया, फिर मुंह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगा। नायरा की सांसें तेज होने लगीं। थोड़ी देर बाद उसने नायरा के पैर फैलाए। चूत अभी भी गुलाबी और संवेदनशील थी। आदित्य ने लंड के सिरे को उसके मुंह पर रखा और बहुत धीरे से धक्का दिया।

नायरा की भौंहें सिकुड़ गईं। “आह्ह… फिर से दर्द… धीरे…”

आदित्य रुका नहीं, लेकिन रफ्तार बहुत धीमी रखी। धीरे-धीरे आधा लंड अंदर गया। नायरा की उंगलियां चादर कसकर पकड़ रही थीं। पूरा लंड जब अंदर गया तो दोनों कुछ पल बिना हिले रहे। नायरा की आंखें बंद थीं, सांसें भारी।

आदित्य ने धीमी गति से हिलना शुरू किया। पहले तो सिर्फ दर्द था, लेकिन कुछ मिनट बाद नायरा की चूत थोड़ी गीली होने लगी। दर्द के बीच एक अलग सी गर्माहट फैलने लगी। नायरा की कराहें अब सिर्फ दर्द वाली नहीं रह गई थीं।

“आदित्य… अभी भी चुभ रहा है… लेकिन… अंदर तक जा रहा है…” उसने सिसकते हुए कहा।

आदित्य ने उसके होंठ चूम लिए। दोनों की जीभ मिल गई। नायरा अब खुद भी हल्के-हल्के कमर हिलाने लगी थी। आदित्य ने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। हर धक्के पर नायरा की सांस रुकती और फिर तेज हो जाती। उसकी टांगें धीरे-धीरे आदित्य की कमर पर लिपटने लगीं।

थोड़ी देर बाद आदित्य ने उसे कुत्ते की तरह मोड़ा। गांड ऊपर की। पीछे से धीरे-धीरे लंड अंदर किया। नायरा ने तकिया दबा लिया। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक जा रहा था। पहले तो दर्द बढ़ा, लेकिन फिर नायरा की आवाज बदलने लगी।

“उफ्फ्… बहुत गहरा… लेकिन… अच्छा भी लग रहा है अब…”

आदित्य ने उसकी गांड सहलाते हुए रफ्तार बढ़ाई। नायरा की चूत अब काफी गीली हो चुकी थी। दर्द लगभग पीछे छूट गया था और एक तेज सनसनाहट ने जगह ले ली थी। नायरा खुद भी पीछे की तरफ धक्के देने लगी थी। दोनों की त्वचा की टकराहट की आवाज कमरे में गूंज रही थी।

आदित्य ने उसके बाल हल्के से खींचकर कान में कहा, “तेरी चूत अब मेरे लंड की आदी हो रही है।”

नायरा शर्म और मजे के मेल से बोली, “हं… आदित्य… और… थोड़ा और जोर से…”

यह सुनकर आदित्य ने और तेज कर दिया। नायरा की चीखें अब मजे वाली हो चुकी थीं। कुछ देर बाद नायरा का शरीर अचानक कांप उठा। उसकी चूत जोर से सिकुड़ी और वो कराहते हुए झड़ गई। आदित्य ने भी उसके अंदर ही सब छोड़ दिया। दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे से चिपके रहे।

अगले दिन: सुबह नायरा की चाल में अभी भी हल्की तकलीफ थी, लेकिन चेहरे पर वैसी डरी हुई भावना नहीं थी। दोपहर में आदित्य ने उसे फिर बुलाया। इस बार नायरा ने खुद वही पिंक अंडरवेयर और टाइट जींस पहन ली थी।

आदित्य ने उसे सोफे पर लिटाया। जींस और अंडरवेयर उतारकर पहले उसकी चूत को जीभ से सहलाया। नायरा की कमर उठ गई। फिर उसने मिशनरी पोजीशन में लंड अंदर किया। इस बार नायरा ने खुद अपने पैर उसके कंधों पर रख दिए।

“आज… पूरा अंदर डाल… धीरे-धीरे,” नायरा ने खुद कहा।

आदित्य ने धीरे से पूरा लंड अंदर कर दिया। नायरा की आंखें बंद हो गईं, लेकिन इस बार दर्द की जगह गहरी संतुष्टि थी। दोनों लंबे समय तक धीमी और फिर तेज चुदाई करते रहे। नायरा कई बार खुद आदित्य को और पास खींचती।

फिर नायरा ऊपर चढ़ गई। काउगर्ल में बैठकर खुद अपनी गति से लंड लेने लगी। उसके स्तन आदित्य के चेहरे के सामने हिल रहे थे। आदित्य दोनों स्तन चूस रहा था। नायरा की आवाजें अब खुलकर निकल रही थीं।

“आदित्य… यहां… बहुत अच्छा लग रहा है… और तेज…”

रात को आखिरी बार दोनों ने सबसे लंबा समय बिताया। आदित्य ने नायरा को अलग-अलग पोजीशन में लिया – साइड से, खड़े होकर दीवार के सहारे, और फिर से डॉगी में। हर बार नायरा अब खुद सहयोग कर रही थी। दर्द की यादें पीछे छूट चुकी थीं। दोनों पसीने और सांसों में खोए हुए थे।

आखिर में जब आदित्य उसके अंदर झड़ा, तो नायरा ने उसे कसकर पकड़ लिया। दोनों काफी देर तक चुपचाप लेटे रहे। नायरा की उंगलियां आदित्य की पीठ पर घूम रही थीं।

सुबह जब मम्मी-पापा आने वाले थे, आदित्य ने नायरा के कान में धीरे से कहा, “ये बात सिर्फ हमारे बीच रहेगी।”

नायरा ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया। उसकी आंखों में अब डर के बजाय एक अजीब सा सुकून और थकान थी। दो दिन में उसके शरीर ने पहली बार का दर्द सहा था, फिर धीरे-धीरे मजा भी सीखा था… और वो भी अपने ही भाई के साथ।

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