रंडी बहन की बड़ी चूची दबाके पीछे से चोदा - भाई बहन सेक्स
मेरी रंडी बहन टाइट टॉप में बहुत माल लग रही थी। मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पाया और पीछे से उसे पकड़ लिया। उसके बड़े रसीले स्तनों को जोर-जोर से दबाते हुए अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक घुसा दिया और जोर से चोदने लगा, वह रंडी की तरह कराहने लगी।
रोहन और उसकी छोटी बहन आराध्या एक छोटे से शहर में रहते थे। रोहन 25 साल का था, एक हैंडसम युवक जो अपने पिता के बिजनेस को संभालता था। आराध्या 22 साल की थी, कॉलेज में पढ़ती थी, और उसका बदन एकदम गजब का था।
उनके माता-पिता का दुर्घटना में निधन हो गया था। अब ये दोनों भाई-बहन ही एक दूसरे के सहारे थे। घर बड़ा था, खाली था, और रातों में सन्नाटा छाया रहता था।
रोहन रात को सो नहीं पाता था। वो अपने कमरे से बाहर आता और घर में घूमता रहता था। एक रात उसने देखा कि आराध्या की कमरे की रोशनी जल रही थी।
दरवाजा हल्का सा खुला था। रोहन ने झांका और देखा कि आराध्या बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसने नीली रंग की नाइटी पहनी हुई थी जो उसके घुटनों तक थी।
रोहन का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने कभी अपनी बहन को इस नजरिए से नहीं देखा था। लेकिन आज कुछ अलग था। शायद अकेलेपन ने उसे कमजोर कर दिया था।
आराध्या ने देखा कि कोई दरवाजे पर है। "भैया?" उसने पूछा।
रोहन अंदर आया। "मुझे नींद नहीं आ रही थी।"
आराध्या बैठ गई। उसके बाल बिखरे हुए थे और चेहरा थका हुआ लग रहा था। "मुझे भी नहीं आ रही।"
रोहन उसके बिस्तर के किनारे बैठ गया। दोनों एक दूसरे को देख रहे थे। आंखों में वही दर्द था, वही खोया हुआपन।
"मैं तुम्हें गले लगा सकता हूँ?" रोहन ने पूछा।
आराध्या ने हामें भरी। रोहन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसका सिर आराध्या के कंधे पर था और उसे वो खुशबू आ रही थी जो उसे पागल कर रही थी।
आराध्या ने भी अपने हाथ रोहन की पीठ पर रखे। वो रोने लगी। रोहन ने उसके आंसू पोंछे और उसके माथे पर चूमा।
"डरो मत। मैं हूँ ना," रोहन ने कहा।
लेकिन जैसे ही उसने माथे पर चूमा, उसके होठ आराध्या की त्वचा को छू गए। वो गरम थे, नरम थे। रोहन का शरीर जाग गया।
उसने धीरे से आराध्या का चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आंखें आंसुओं से भरी थीं लेकिन वो खूबसूरत लग रही थीं।
"भैया..." आराध्या ने धीमी आवाज़ में कहा।
रोहन रुक नहीं सका। उसने धीरे से अपने होठ आराध्या के होठों पर रखे। पहले तो हल्का सा चुंबन था, फिर और जोर से।
आराध्या ने कुछ नहीं कहा। उसने आंखें बंद कर लीं और रोहन का साथ देने लगी। दोनों एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ घुसा रहे थे।
रोहन का हाथ आराध्या की पीठ पर था और धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ रहा था। उसने नाइटी के ऊपर से ही उसकी कमर को सहलाया।
"यह गलत है भैया," आराध्या ने कहा लेकिन वो रुकी नहीं।
"मुझे पता है। लेकिन मैं रोक नहीं पा रहा," रोहन ने कहा।
उसने आराध्या को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसने नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे बटन खुले।
आराध्या ने अंदर सफेद रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। उसका बदन एकदम गोरा और चिकना था। रोहन ने उसके पेट पर चूमा।
"कितनी सुंदर हो तुम," रोहन ने कहा।
उसने ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाना शुरू किया। वो नरम थे, गरम थे। आराध्या ने सिसकी भरी।
"आह... भैया... धीरे..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने ब्रा को ऊपर खींचा और उसके चूचे बाहर आ गए। उसके निप्पल गुलाबी और कड़े थे। रोहन ने एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया।
वो उसे चूसने लगा, काटने लगा, और जीभ से सहला रहा था। आराध्या अपने हाथ बिस्तर की चादरों में पकड़े हुए थी और मज़े ले रही थी।
रोहन ने दूसरे चूचे को भी वैसे ही चूसा। उसके हाथ आराध्या की पैंटी के ऊपर थे और उसकी चूत को सहला रहे थे।
"तुम गीली हो चुकी हो," रोहन ने कहा।
आराध्या ने शरमा कर नीचे देखा। रोहन ने उसकी पैंटी नीचे खींची और उसकी चूत दिखी। वो बिल्कुल साफ थी, गुलाबी, और चमक रही थी।
रोहन ने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। आराध्या की कमर ऊपर उठ गई। उसने अपने पैर फैला दिए।
"ओह... भैया... यह..." आराध्या बोल नहीं पा रही थी।
रोहन ने उसकी चूत की दीवारों को चाटा और फिर क्लिटोरिस को अपने होठों में भर लिया। वो उसे चूस रहा था और आराध्या पागल हो रही थी।
"मैं... मैं झड़ गई..." आराध्या ने कहा और उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
रोहन ने उसका सारा रस पी लिया। फिर वो खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतारने लगा। उसका लंड ८ इंच का था और मोटा।
आराध्या ने देखा और उसकी आंखें खुली रह गईं। "भैया... यह तो बहुत बड़ा है..."
रोहन ने उसके पैर फैलाए और खुद उनके बीच में आ गया। उसने अपने लंड को चूत के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया।
"ओह... दर्द हो रहा है..." आराध्या ने कहा।
रोहन रुक गया। फिर धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा। आराध्या की चूत बहुत टाइट थी और उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
"और जोर से भैया... चोदो मुझे..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने गति बढ़ा दी। वो पूरी तेजी से धक्के मार रहा था। पच-पच की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं।
आराध्या ने अपनी टांगें ऊपर उठाईं और रोहन के कंधों पर रख दीं। अब लंड और भी गहरा जा रहा था।
"हाँ... हाँ... और तेज... मुझे अपनी बना लो..." आराध्या चिल्ला रही थी।
रोहन ने उसे घुमाया और पीछे से धक्के मारने लगा। आराध्या घुटनों और हाथों के बल थी और रोहन उसकी गांड के पीछे खड़ा था।
"तुम्हारी चूत बहुत मस्त है बहन," रोहन ने कहा।
"हाँ भैया... और चोदो... मेरी चूत फाड़ दो..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने ३० मिनट तक उसे चोदा। फिर उसने लंड बाहर निकाला और आराध्या को घुमाया।
"मुँह में लो," रोहन ने कहा।
आराध्या ने उसका लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। वो उसे पूरा गले तक लेने की कोशिश कर रही थी।
"मैं झड़ने वाला हूँ," रोहन ने कहा।
"मेरे मुँह में ही निकालो..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने अपना गरम वीर्य आराध्या के मुँह में निकाल दिया। आराध्या ने उसे पूरा पी लिया और फिर मुस्कुराई।
"स्वाद अच्छा है भैया," आराध्या ने कहा।
दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए। उनका यह रिश्ता अब एक नए मोड़ पर था।
अगली सुबह जब सूरज की रोशनी कमरे में आई, तो रोहन और आराध्या अभी भी एक दूसरे से लिपटे हुए थे। रोहन का हाथ आराध्या के चूचे पर था और आराध्या का सिर रोहन की छाती पर था।
रोहन की आंख खुली और उसने देखा कि आराध्या उसे देख रही थी। दोनों ने एक दूसरे को देखा और मुस्कुराए।
"कल रात..." रोहन ने शुरुआत की।
"मुझे कोई पछतावा नहीं है भैया," आराध्या ने कहा और उसके होठों पर चूमा।
रोहन ने उसे कसकर पकड़ लिया। "मैं भी नहीं पछताता।"
आराध्या ने बिस्तर से उठने की कोशिश की लेकिन रोहन ने उसे रोक लिया। "कहाँ जा रही हो?"
"नहाने," आराध्या ने कहा।
"मैं भी चलूँ?" रोहन ने पूछा।
आराध्या ने शरमा कर नीचे देखा और फिर सिर हिलाया। दोनों बाथरूम में गए। आराध्या ने शावर चालू किया और गर्म पानी की बौछार शुरू हुई।
रोहन ने आराध्या को पीछे से पकड़ा और उसके चूचों को दबाना शुरू कर दिया। वो गीले हो चुके थे और फिसल रहे थे।
"भैया... अभी तो कल रात..." आराध्या ने कहा।
"मुझे फिर से चाहिए," रोहन ने कहा और उसके गर्दन पर चूमा।
उसने आराध्या को दीवार से सटाया और उसके पैर फैलाए। शावर का पानी दोनों पर गिर रहा था। रोहन ने अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाला।
"ओह..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने धक्के मारने शुरू किए। पानी की आवाज़ के साथ-साथ पच-पच की आवाज़ भी आ रही थी। आराध्या ने अपने हाथ दीवार पर टिकाए।
"और जोर से भैया..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने पूरी गति से धक्के मारे। उसका लंड आराध्या की चूत में पूरी तरह से अंदर-बाहर हो रहा था।
"तुम्हारी चूत इतनी टाइट है..." रोहन ने कहा।
"सिर्फ तुम्हारे लिए भैया..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने उसकी कमर पकड़ी और और जोर से धक्के मारने लगा। आराध्या चिल्ला रही थी और पानी की आवाज़ उसकी आवाज़ को दबा रही थी।
"मैं झड़ने वाला हूँ..." रोहन ने कहा।
"मेरे अंदर ही..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने अपना वीर्य आराध्या की चूत में निकाल दिया। वो गरम गरम उसके अंदर भर गया।
दोनों थक कर बाथरूम के फर्श पर बैठ गए। पानी अभी भी गिर रहा था और दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।
दोपहर को दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे। आराध्या ने रोहन की छाती पर अपना सिर रखा हुआ था और उसके बालों में हाथ फेर रही थी।
"भैया, क्या हम यह सही कर रहे हैं?" आराध्या ने पूछा।
"पता नहीं। लेकिन यह गलत नहीं लगता," रोहन ने कहा।
आराध्या ने उठकर रोहन के चेहरे को देखा। "मैं तुमसे प्यार करती हूँ।"
"मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ," रोहन ने कहा और उसे कसकर पकड़ लिया।
दोनों ने फिर से चुंबन शुरू किए। इस बार और जोश से, और गहराई से। रोहन ने आराध्या को अपने ऊपर खींचा और वो अब उसके ऊपर बैठी हुई थी।
"मैं आज ऊपर रहूँगी," आराध्या ने कहा।
रोहन ने सिर हिलाया। आराध्या ने रोहन का लंड अपने हाथ में लिया और अपनी चूत पर रखा। धीरे से वो बैठ गई और लंड अंदर चला गया।
"ओह... यह तो और भी गहरा जा रहा है..." आराध्या ने कहा।
उसने अपनी कमर हिलानी शुरू की। वो ऊपर-नीचे हो रही थी और रोहन के लंड को अपनी चूत में पूरी तरह से ले रही थी।
रोहन ने उसके चूचों को पकड़े और दबाने लगा। वो उसकी कमर को नीचे से उठाने लगा ताकि और गहरा जाए।
"हाँ... हाँ... और तेज..." आराध्या चिल्ला रही थी।
उसने अपनी गति तेज कर दी। वो अब पूरी तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी और रोहन का लंड उसकी चूत में पूरी तरह से घुस रहा था।
"मैं झड़ने वाली हूँ..." आराध्या ने कहा।
"मैं भी..." रोहन ने कहा।
दोनों एक साथ झड़े। आराध्या की चूत ने पानी छोड़ा और रोहन ने अपना वीर्य उसके अंदर निकाला।
थक कर आराध्या रोहन के ऊपर गिर गई। दोनों की सांसें तेज चल रही थीं।
"यह बहुत अच्छा था," आराध्या ने कहा।
"हमेशा की तरह," रोहन ने कहा और उसके माथे पर चूमा।
रात को दोनों ने साथ में खाना बनाया। आराध्या ने रोहन के लिए उसकी पसंदीदा डिश बनाई और रोहन ने उसे खिलाया।
खाने के बाद दोनों सोफे पर बैठे TV देख रहे थे। आराध्या रोहन की गोद में बैठी हुई थी और उसके गले में हाथ डाले हुए थी।
रोहन का लंड फिर से खड़ा हो गया। आराध्या ने महसूस किया और मुस्कुराई। "फिर से?"
"तुम्हारे सामने हमेशा," रोहन ने कहा।
आराध्या ने उठकर रोहन के कपड़े खोले और उसका लंड बाहर निकाला। वो उसे चूसने लगी।
रोहन ने अपना सिर पीछे किया और मज़े लेने लगा। आराध्या उसके लंड को पूरा गले तक ले रही थी और जीभ से सहला रही थी।
"ओह... बहुत अच्छा..." रोहन ने कहा।
आराध्या ने उसके टट्टों को भी चूसा और फिर लंड को फिर से अपने मुँह में भर लिया।
"मैं झड़ने वाला हूँ..." रोहन ने कहा।
आराध्या ने लंड बाहर निकाला और अपने चूचों के बीच में रख दिया। वो उन्हें दबाते हुए लंड को ऊपर-नीचे करने लगी।
रोहन ने अपना वीर्य आराध्या के चूचों पर निकाल दिया। वो गरम गरम उन पर गिरा और आराध्या ने उसे फैलाया।
"अब मेरी बारी," आराध्या ने कहा।
रोहन ने उसे सोफे पर लिटाया और उसकी टांगें फैलाई। उसने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और आराध्या को झड़ा दिया।
फिर उसने अपना लंड उसकी चूत में डाला और धक्के मारने लगा। सोफे पर दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे।
"और जोर से..." आराध्या ने कहा।
रोहन ने पूरी तेजी से धक्के मारे और फिर अपना वीर्य उसके अंदर निकाल दिया।
दोनों थक कर सोफे पर ही सो गए। उनका यह रिश्ता अब एक नए मोड़ पर था और वो दोनों इसे आगे बढ़ाना चाहते थे।
हमें विज्ञापन-मुक्त रहने में मदद करें
हम आपका अनुभव खराब नहीं करना चाहते, इसलिए साइट पर कोई Ads नहीं है। इसे साफ-सुथरा रखने में कृपया थोड़ा सपोर्ट करें। ❤️

