माँ की चूत और गाँड दोनों बेटे ने फाड़ दी

पतली नाइटी में माँ बिल्कुल नंगी खड़ी थी… बेटे की नज़रें वहीं अटक गईं। धीरे-धीरे सब कुछ हो गया… पहले प्यार से, फिर हवस से… पूरी रात माँ बेटे के बीच सिर्फ कराहें गूँजती रहीं।

लेखक: Aanya Sharma7 मिनट पढ़ने में
माँ की चूत और गाँड दोनों बेटे ने फाड़ दी

रात के लगभग डेढ़ बज रहे थे। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। पिता जी ऑफिस टूर पर गए हुए थे, तीन दिन के लिए।

आरव (23) अपने कमरे में लेटा हुआ था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। दिमाग में बार-बार वही ख्याल घूम रहे थे जो पिछले कुछ महीनों से उसे परेशान कर रहे थे—उसकी माँ सुनीता (45)।

सुनीता अभी भी बहुत खूबसूरत थीं। लंबे काले बाल, भरे हुए स्तन, पतली कमर और गोल गाँड। घर में जब वह नाइटी में घूमतीं तो आरव की निगाहें बार-बार उनकी बॉडी पर चली जातीं। वह खुद को रोकने की कोशिश करता, लेकिन हर दिन यह आकर्षण और गहरा होता जा रहा था।

आज रात वह प्यास के बहाने रसोई गया। वहाँ हल्की सी लाइट जल रही थी। सुनीता फ्रिज के सामने खड़ी थीं। उन्होंने एक पतली सफेद नाइटी पहन रखी थी। नीचे कुछ नहीं था। नाइटी के पार उनके भारी स्तन और गहरे निप्पल्स साफ दिख रहे थे।

आरव की साँस अटक गई।

सुनीता ने पीछे मुड़कर देखा। “अभी तक नहीं सोया, बेटा?”

“नींद नहीं आ रही माँ…” आरव ने धीमी आवाज़ में कहा। उसकी निगाहें अनजाने में उनकी छाती पर चली गईं।

सुनीता ने उसकी नज़र पकड़ ली। कुछ पल दोनों चुप रहे। हवा में एक अजीब तनाव तैर रहा था। फिर सुनीता धीरे से मुस्कुराई और पास आ गई।

“तुम मुझे ऐसे देख रहे हो… जैसे कोई औरत को देखते हैं,” उसने धीरे से कहा।

आरव का गला सूख गया। “माँ… मैं… माफ़ करना…”

सुनीता ने उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी कमर पर रख दिया। “माफ़ करने की क्या बात है? मैंने भी देखा है… तुम्हारी निगाहें कई दिनों से मेरी बॉडी पर हैं।”

आरव का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सुनीता ने उसका हाथ और ऊपर सरकाया—सीधे अपने नरम, भारी स्तन पर। आरव की हथेली में पूरा स्तन आ गया। निप्पल पहले से सख्त था।

“छूओ…” सुनीता ने फुसफुसाया। “जितना चाहो छूओ।”

आरव ने दोनों हाथों से उसके स्तन पकड़ लिए। नाइटी के ऊपर से मसलने लगा। सुनीता की आँखें बंद हो गईं। वह हल्के से कराह उठी। आरव ने नाइटी ऊपर की और उसके नंगे स्तन बाहर निकाल लिए। गोल, भारी, और थोड़े लटकते हुए। उसने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह… आरव… हल्के से… नहीं… जोर से चूसो,” सुनीता ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा।

आरव पागल हो रहा था। उसने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा, काटा, जीभ से घुमाया। सुनीता की कमर उसके हाथ में थी। उसने नाइटी पूरी तरह उतार दी। सुनीता अब बिल्कुल नंगी खड़ी थीं—भरे स्तन, चिकनी त्वचा, और जाँघों के बीच हल्के बालों वाली चूत।

आरव ने घुटनों के बल बैठकर अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी। सुनीता की टाँगें काँपने लगीं। वह किचन की काउंटर पकड़कर खड़ी रहीं। आरव की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, क्लिट को चूस रहा था।

“उह्ह्ह… बेटा… वहाँ… और… आह्ह…”

सुनीता का पहला ऑर्गेज्म जल्दी आ गया। उसकी जाँघें काँप रही थीं और रस आरव के मुँह पर लग रहा था। आरव खड़ा हुआ। उसने अपनी पैंट खोली। उसका लंड पूरी तरह तन चुका था—मोटा, लंबा, और ऊपर से पहले ही गीला।

सुनीता ने उसे देखा और धीरे से मुस्कुराई। “इतना बड़ा हो गया है तुम्हारा… आओ, माँ को दो।”

आरव ने उसे काउंटर पर बैठा दिया। सुनीता के पैर फैला दिए। उसने अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया। सुनीता की आँखें फैल गईं।

“आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है…”

आरव ने धीरे-धीरे पूरा अंदर डाला। उसकी चूत गर्म और टाइट थी। फिर वह धक्के मारने लगा—पहले धीमे, फिर तेज़। किचन में मांस की टकराहट की आवाज़ गूँजने लगी। सुनीता के स्तन हर धक्के के साथ हिल रहे थे। आरव कभी उनके निप्पल चूसता, कभी उनके होठों को चूमता।

“माँ… तुम्हारी चूत कितनी अच्छी लग रही है…” आरव हाँफते हुए बोला।

सुनीता ने उसके कंधे पकड़ लिए। “और जोर से… बेटा… अपनी माँ को चोदो… आह्ह्ह…”

आरव ने रफ्तार बढ़ा दी। सुनीता की पीठ काउंटर से रगड़ रही थी। वह दूसरी बार झड़ गई। उसकी चूत ने आरव के लंड को कसकर पकड़ लिया। आरव रुकने वाला नहीं था। वह लगातार चोदता रहा।

थोड़ी देर बाद उसने सुनीता को उतारा और पीछे से लेने लगा। सुनीता काउंटर पकड़े खड़ी थीं, गाँड बाहर निकाले हुए। आरव ने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारे। हर धक्के के साथ उनके अंडकोष उसकी चूत से टकरा रहे थे।

“माँ… मैं अंदर छोड़ दूँ?” आरव ने पूछा।

सुनीता ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में वही हवस थी। “हाँ… अंदर छोड़ दो… अपनी माँ की चूत में…”

आरव के धक्के और तेज़ हो गए। कुछ पल बाद वह गहरी कराह के साथ सुनीता की चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य की धारें उसके अंदर जाती रहीं। सुनीता भी तीसरी बार उसके साथ पहुँची।

दोनों हाँफते हुए खड़े रहे। आरव का लंड अभी भी अंदर था। सुनीता ने पीछे हाथ बढ़ाकर उसकी जाँघ सहला दी।

“यह तो बस शुरुआत है, बेटा,” उसने धीरे से कहा। “रात अभी बाकी है… चलो कमरे में चलते हैं। आज माँ को पूरा लेना।”

आरव ने उसे चूम लिया। दोनों नंगे ही उसके बेडरूम की तरफ चल दिए। बाहर सन्नाटा था, लेकिन अंदर एक नई आग जल चुकी थी।

कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही आरव ने माँ को बिस्तर पर धकेल दिया। सुनीता अभी भी नंगी थीं। उनके स्तन तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे और जाँघों के बीच से आरव का गाढ़ा वीर्य धीरे-धीरे बह रहा था।

आरव ने कोई नरमी नहीं दिखाई। उसने सुनीता के पैर फैलाए और बिना किसी प्रस्तावना के अपना अभी भी कठोर लंड फिर से उनकी चूत में धकेल दिया। एक ही जोरदार धक्के में पूरा अंदर तक।

“आह्ह्ह… आरव!” सुनीता जोर से कराह उठीं।

आरव ने उनके दोनों टखनों को पकड़कर कंधों तक उठा लिया और पागलों की तरह धक्के मारने लगा। हर धक्का इतना तेज़ था कि बिस्तर की हेडबोर्ड दीवार से टकरा रही थी। सुनीता के स्तन बेकाबू होकर हिल रहे थे। आरव कभी झुककर उनके निप्पल काटता, कभी उनके गले को चूमता, कभी बाल पकड़कर उनका मुँह अपनी तरफ खींच लेता।

“माँ… आज तुम्हें छोड़ने वाला नहीं हूँ,” आरव हाँफते हुए बोला। “पूरी रात चोदता रहूँगा।”

सुनीता की आँखें आधी बंद थीं। “तो चोदो… जितना कठोर चाहो… माँ सह लेगी…”

आरव ने लगभग बीस मिनट तक इसी मिशनरी पोजीशन में बेरहमी से लिया। सुनीता दो बार झड़ चुकी थीं, लेकिन आरव रुका नहीं। फिर उसने उन्हें पलटा दिया।

अब कुत्ते की पोजीशन। सुनीता के हाथ बिस्तर पर थे, गाँड पूरी तरह ऊपर उठी हुई। आरव ने उनकी गाँड के दोनों गाल जोर से फैलाए और फिर से पूरा लंड एक ही धक्के में चूत में ठूस दिया। इस बार और तेज़। थप्पड़-थप्पड़ की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगी।

आरव एक हाथ से उनके बाल पकड़े हुए था, दूसरे हाथ से उनकी गाँड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था। हर थप्पड़ के साथ सुनीता की गाँड लाल होती जा रही थी।

“आह्ह्ह… और जोर से मार… बेटा…” सुनीता तकिए में मुँह दबाकर कराह रही थीं।

आरव ने अचानक लंड निकाला, थूक लगाया और धीरे से उनका गाँड का छेद सहलाने लगा। सुनीता सहम गईं लेकिन मना नहीं किया। आरव ने पहले एक उंगली, फिर दो उंगलियाँ अंदर डालीं। जब छेद थोड़ा ढीला हुआ तो उसने अपना मोटा लंड उनके गाँड के मुँह पर रखा और दबाव डालना शुरू किया।

“आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है…” सुनीता की आवाज़ में दर्द था।

आरव रुक-रुक कर अंदर जाता रहा। आधा लंड समा गया, फिर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर तक चला गया। सुनीता जोर से चिल्लाईं। आरव कुछ पल रुककर उन्हें आदी होने दिया, फिर धीरे-धीरे धक्के शुरू किए।

दर्द और मज़े का मिश्रण सुनीता को पागल कर रहा था। आरव की रफ्तार बढ़ती गई। वह उनकी गाँड को बेरहमी से चोद रहा था। बीच-बीच में लंड निकालकर चूत में डाल देता, फिर वापस गाँड में ठूस देता। सुनीता कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं, आवाज़ बैठ रही थी, लेकिन वह और माँग रही थीं।

“और… और गहरा… आरव… माँ की गाँड फाड़ दो…”

आरव ने लगभग पैंतालीस मिनट तक उनकी गाँड ली। पसीने से दोनों तर-बतर हो चुके थे। कमरे में सिर्फ मांस की तेज़ आवाज़ और सुनीता की कराहें गूँज रही थीं।

फिर आरव ने उन्हें उठाया और अपनी गोद में बिठा लिया। सुनीता खुद उसके लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगीं। आरव उनके दोनों स्तन मुँह में लिए हुए जोर-जोर से चूस रहा था और गाँड पकड़कर उन्हें और तेज़ी से ऊपर-नीचे कर रहा था।

“माँ… तुम्हारी चूत मेरी हो गई है… आज के बाद कोई और नहीं छूएगा,” आरव ने दाँतों से निप्पल काटते हुए कहा।

सुनीता ने उसके बाल पकड़कर और तेज़ी से कमर हिलाई। “हाँ… सिर्फ तू… सिर्फ मेरा बेटा… आह्ह्ह… मैं आ रही हूँ…”

सुनीता जोर से झड़ीं। उनकी चूत ने आरव के लंड को इतनी कसकर जकड़ा कि आरव भी लगभग गिरने वाला था, लेकिन उसने खुद को रोके रखा। उसने सुनीता को बिस्तर पर लिटाया, उनके पैर अपने कंधों पर रखे और फिर से पागलों की तरह धक्के मारने लगा।

इस बार वह कोई रोक-टोक नहीं मान रहा था। हर धक्का इतना गहरा और तेज़ था कि सुनीता की साँस फूल रही थी। उनकी चूत अब पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी, फिर भी आरव लगातार चोदता जा रहा था।

“माँ… अब अंदर छोड़ रहा हूँ…”

“हाँ… छोड़ दो… पूरी माँ की चूत भर दो…”

आरव ने कुछ और बेरहम धक्के मारे और फिर गहरी गर्जना के साथ अपना पूरा गर्म, गाढ़ा वीर्य उनकी चूत के अंदर उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि जब उसने लंड बाहर निकाला तो सफेद वीर्य की धार उनकी जाँघों से बहने लगी।

दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। आरव का लंड अभी भी हल्का तना हुआ था। सुनीता की आँखें बंद थीं, साँसें तेज़ चल रही थीं।

आरव ने उनके बाल सहलाते हुए कहा, “माँ… अभी थका नहीं हूँ।”

सुनीता ने आँखें खोलीं और धीरे से मुस्कुराईं। उन्होंने उसका आधा तना लंड हाथ में ले लिया और हिलाने लगीं।

“तो फिर ले… माँ अभी भी तैयार है। आज रात तुझे पूरी तरह पागल बनाकर ही मानूँगी।”

आरव ने फिर से उन्हें चूम लिया। दोनों एक बार फिर एक-दूसरे में उलझ गए। उस रात आरव ने अपनी माँ को बार-बार लिया—कभी धीरे, कभी बेरहमी से, कभी प्यार से, कभी गंदे शब्दों के साथ। सुनीता की चूत और गाँड दोनों उसके लंड से भरती रहीं।

सुबह के करीब चार बजे दोनों थककर सो गए। बिस्तर पर पसीने और वीर्य के निशान फैले हुए थे। सुनीता आरव की छाती पर सिर रखे सो रही थीं, और आरव की उंगलियाँ अभी भी उनकी जाँघ पर थीं।

बाहर सन्नाटा था। अंदर एक माँ और बेटे के बीच की वो आग अब बुझने वाली नहीं थी।

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