भाभी ने बिजली वाले से करवाई जोरदार चुदाई
36 साल की हॉट पत्नी ने पति के ऑफिस टूर पर जाते ही 23 साल के युवा बिजली वाले को घर बुलाया। टाइट साड़ी में आकर जोरदार चुदाई करवाई, अलग-अलग पोजिशन में रात-दिन मस्ती मनाई और बिना कंडोम के अपना मनपसंद बच्चा माँगा। 3 दिन तक चली असली महाचुदाई की पूरी कहानी।

अमित सिर्फ 23 साल का था। शहर के एक छोटे मोहल्ले में बिजली का काम करता था। लंबे-पतले लेकिन मजबूत शरीर वाला, गेहुंआ रंग, थोड़ी मुस्कुराहट वाले होंठ और मेहनत से बने हुए हाथ। लोग उसे “अमित बिजलीवाला” ही बुलाते थे। एक दिन उसके फोन पर कॉल आया।
“अमित भाई, मेरा घर का पंखा खराब हो गया है। कल सुबह आ जाओ।” आवाज एक मध्यम आयु के आदमी की थी। नाम था राजेश शर्मा। ऑफिस में मैनेजर थे। घर पर पत्नी अकेली रहती थी।
अगली सुबह अमित टूल बॉक्स लेकर घर पहुंचा। दो मंजिला मकान था। दरवाजा खुला और सामने खड़ी थी सीमा। उम्र 36 साल, लेकिन लगती थीं 28-29 की। लंबे काले बाल कंधों तक खुले हुए, गोरा-सा चिकना चेहरा, बड़ी-बड़ी आंखें और भरे हुए होंठ। उसने आज टाइट साड़ी और ब्लॉउज पहना था। साड़ी हल्के गुलाबी रंग की थी, बिल्कुल फिट। ब्लॉउज इतना टाइट था कि उसके बड़े और भारी स्तन साफ उभर रहे थे। साड़ी की पल्लू कमर पर बंधी हुई थी, जिससे उसकी पतली कमर और गोल-मटोल भारी गांड साफ नजर आ रही थी। साड़ी की फिटिंग ऐसी थी कि जब वो चलती तो गांड हल्के-हल्के लहराने लगती। बच्चों की कोई तस्वीर घर में नहीं दिखी।
“अंदर आइए,” सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा। आवाज में एक हल्की मधुरता और भूख सी थी। अमित ने जूते बाहर उतारे और अंदर गया। बैठक में पंखा घूम नहीं रहा था। सीमा पास खड़ी होकर देख रही थी। टाइट ब्लॉउज में उसकी छाती की शेप हर सांस के साथ हल्की सी ऊपर-नीचे हो रही थी।
“क्या दिक्कत है?” अमित ने पूछा, लेकिन उसकी नजरें बार-बार सीमा की टाइट साड़ी पर चली जा रही थीं।
“रात से ही बंद है। पति ने कहा आप ही ठीक कर देंगे।”
अमित ने सीढ़ी पर चढ़कर पंखे की जांच शुरू की। सीमा नीचे खड़ी रही। कभी-कभी वो पानी लाती, कभी पूछती “थोड़ा ऊपर देखो तो, वायर ठीक है?” उसकी आवाज करीब आती तो अमित को उसकी खुशबू आती – हल्का सा अत्तर और साबुन की मिलावट। एक बार जब अमित ने पीछे मुड़कर देखा तो सीमा की नजरें उसके मजबूत कंधों और बाजू की नसों पर थीं। वो जल्दी से नजरें हटा लेतीं, लेकिन साड़ी में उसकी गांड की शेप अमित की आंखों में बस गई।
पांच-सात मिनट में पंखा ठीक हो गया। अमित नीचे उतरा। सीमा ने कहा, “चाय पी लीजिए। पति ऑफिस में हैं, अकेली हूं।”
अमित ने मना किया, लेकिन सीमा जोर देने लगी। दोनों बैठक में बैठ गए। सीमा ने चाय बनाकर लाई। जब वो झुककर चाय रख रही थी तो टाइट ब्लॉउज में उसके स्तन और ज्यादा उभर आए। अमित की नजरें वहीं अटक गईं। सीमा ने भी उसकी नजरें पकड़ लीं, लेकिन कुछ नहीं बोली। बस हल्की सी मुस्कुराहट दी।
बातें शुरू हुईं।
“आप कितने साल से ये काम करते हो?”
“तीन साल। कॉलेज छोड़कर शुरू किया।”
“अकेले रहते हो?”
“हां, रूम में।”
सीमा हल्के से मुस्कुराई। “हमारे यहां कोई नहीं रहता। पति ऑफिस में देर तक रहते हैं। घर सूना लगता है।” उसकी आंखों में एक हल्की उदासी थी। अमित ने देखा कि उसकी शादी के 12 साल हो चुके थे, लेकिन कोई बच्चा नहीं था। सीमा खुद बताने लगी, “डॉक्टर कहते हैं मेरी कोई समस्या नहीं। शायद… पति की तरफ से। वो रात को जल्दी थक जाते हैं… बात भी कम होती है।”
बातें लंबी होती गईं। अमित ने देखा कि सीमा जब हंसती तो टाइट ब्लॉउज में उसके स्तन हल्के से कांपते। साड़ी की पल्लू थोड़ी सरक गई थी, जिससे उसकी कमर का चिकना हिस्सा दिख रहा था। अमित का मन मचलने लगा, लेकिन उसने खुद को नियंत्रित रखा।
चाय खत्म होने के बाद अमित ने बिल लिया और जाने लगा। सीमा दरवाजे तक आई। टाइट साड़ी में उसकी चाल बहुत सेक्सी लग रही थी। “अगर कोई और काम हो तो बताइएगा। नंबर आपके पास है।”
अगले तीन-चार दिनों में अमित फिर बुलाया गया। एक बार स्विच बोर्ड खराब हो गया, एक बार बालकनी की लाइट। हर बार सीमा अकेली होती। और हर बार वो अलग-अलग टाइट साड़ी और ब्लॉउज में होती। कभी काली साड़ी में, कभी लाल में। ब्लॉउज हमेशा टाइट। हर बार चाय, बातें, हल्की हंसी। धीरे-धीरे दोनों आराम से बात करने लगे। सीमा ने एक दिन धीरे से कहा, “कभी-कभी मन करता है किसी से बात भी कर लूं… छू भी लूं। पति तो… नाममात्र का रह गया है।”
अमित की नजरें अब खुलकर उसकी बॉडी पर जातीं। एक दिन सीमा ने गहरा लाल रंग की टाइट साड़ी पहनी थी। ब्लॉउज इतना फिट था कि निप्पल की शेप हल्की सी झलक रही थी। जब वो झुककर चाय रख रही थी तो उसके स्तन का भारीपन साफ नजर आ रहा था। अमित का लंड पैंट में हल्का तन गया। सीमा ने भी उसकी नजरें पकड़ लीं। दोनों कुछ सेकंड तक चुप रहे।
उस दिन सीमा ने अमित का हाथ पकड़ लिया। “तुम बार-बार क्यों आते हो?” उसकी आवाज में हल्की कंपन थी।
“आप बुलाती हो,” अमित ने कहा।
“मैं जानबूझकर बुलाती हूं।” सीमा ने आंखें मिलाईं। “पति तीन दिन के ऑफिस टूर पर जा रहे हैं। अगले हफ्ते। अगर तुम… आ सको तो।”
अमित की सांसें तेज हो गईं। उसने धीरे से सीमा का हाथ अपने हाथ में लिया। “आ जाऊंगा।”
उस दिन सिर्फ इतना ही हुआ। लेकिन दोनों के मन में आग लग चुकी थी। सीमा अब रोज आईने के सामने खड़ी होकर अपनी टाइट साड़ी वाली बॉडी देखती – बड़े स्तन, गोल गांड, गोरी जांघें। अमित रात को सोचता कि जब वो अकेली होगी तो क्या होगा।
तीन दिन बाद राजेश ऑफिस टूर पर निकल गए। सीमा ने सुबह ही अमित को मैसेज किया:
“आज शाम 5 बजे आ जाना। घर खुला रहेगा।”
अमित का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वो जानता था कि आज सिर्फ पंखा ठीक करने नहीं जा रहा।
शाम के ठीक 5 बजे अमित घर के बाहर खड़ा था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दरवाजा अधखुला था। उसने हल्के से खटखटाया। अंदर से सीमा की आवाज आई, “आ जाओ… दरवाजा खुला है।”
अमित अंदर घुसा और दरवाजा बंद कर दिया। सीमा लिविंग रूम में खड़ी थी। आज उसने काली रंग की बहुत टाइट साड़ी पहनी थी। ब्लॉउज इतना फिट था कि उसके बड़े भारी स्तन पूरी तरह उभर रहे थे। साड़ी की पल्लू कमर पर बंधी हुई थी, जिससे उसकी गोल-मटोल गांड और पतली कमर साफ दिख रही थी। बाल खुले थे, होंठ हल्के लाल।
दोनों कुछ देर चुपचाप एक-दूसरे को देखते रहे। फिर सीमा पास आई। “पति तीन दिन के लिए गए हैं… पूरा घर हमारा है।” उसकी आवाज में भूख साफ झलक रही थी।
अमित ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया। दोनों के होंठ मिल गए। पहले हल्की किसिंग, फिर गहरी। सीमा ने अमित की गर्दन में हाथ डालकर उसे और पास खींचा। अमित के हाथ उसकी कमर पर थे, फिर धीरे-धीरे पीछे सरककर उसकी भारी गांड को पकड़ लिया। साड़ी के ऊपर से ही गांड को मसलने लगा। सीमा कराह उठी।
“कमरे में चलो,” सीमा ने सांस लेते हुए कहा।
बेडरूम में जाते ही अमित ने सीमा को दीवार से सटा दिया। टाइट ब्लॉउज के बटन एक-एक करके खोले। बड़े गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल पहले से ही खड़े थे। अमित ने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ से मसल रहा था। सीमा का सिर पीछे की ओर झुक गया, “आह्ह… अमित… बहुत दिनों बाद किसी ने ऐसे छुआ है…”
अमित ने साड़ी की पल्लू खोली और साड़ी को कमर तक ऊपर कर दिया। सीमा की गोरी जांघें और काली पैंटी नजर आई। अमित घुटनों पर बैठ गया। पैंटी को धीरे से नीचे खींचा और अपनी जीभ चूत पर लगा दी। सीमा की टांगें कांपने लगीं। “उफ्फ्… चाटो… और अंदर… आह्ह्ह!”
काफी देर तक अमित ने उसकी चूत चाटी, उंगलियां अंदर-बाहर कीं। सीमा कई बार कांप चुकी थी। फिर उसने अमित को खड़ा किया, उसकी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। 23 साल के युवा लंड को देखकर सीमा की आंखें चमक उठीं। उसने घुटनों पर बैठकर लंड को मुंह में ले लिया। पहले सिर्फ आगे का हिस्सा, फिर धीरे-धीरे गहराई तक। अमित के हाथ उसके बालों में थे।
थोड़ी देर बाद सीमा बिस्तर पर लेट गई। साड़ी पूरी तरह खोल दी, अब वो सिर्फ खुली हुई थी। अमित उसके ऊपर चढ़ गया। लंड को चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। सीमा की आंखें बंद हो गईं, “आह्ह… पूरा डालो… मत रोको…”
अमित ने पूरा लंड अंदर कर दिया और धीमी रफ्तार से चोदने लगा। सीमा की टांगें उसकी कमर पर लिपट गईं। दोनों की सांसें तेज थीं। थोड़ी देर बाद अमित ने रफ्तार बढ़ाई। बिस्तर चरमरा रहा था। सीमा जोर-जोर से कराह रही थी, “हां… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…”
अलग-अलग पोजीशन: अमित ने सीमा को कुत्ते की तरह मोड़ दिया। उसकी भारी गांड ऊपर थी। पीछे से लंड अंदर किया और जोर-जोर से ठोके मारने लगा। हर ठोके पर गांड लहराने लगती। अमित गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था। सीमा चीख रही थी, “आह्ह्ह अमित… और तेज… हां यही… बहुत मजा आ रहा है!”
फिर सीमा खुद ऊपर चढ़ गई। काउगर्ल पोजीशन में। उसके बड़े स्तन अमित के चेहरे के सामने उछल रहे थे। अमित दोनों स्तनों को मुंह से पकड़कर चूस रहा था। सीमा अपनी गांड हिला-हिलाकर लंड को पूरा अंदर-बाहर कर रही थी।
एक बार अमित ने उसे खड़ा करके दीवार से सटाया। एक टांग ऊपर उठाई और खड़े-खड़े जोरदार चुदाई की। सीमा के नाखून उसकी पीठ पर चिपक गए।
रात भर दोनों ने कई बार किया। बीच-बीच में पानी पिया, फिर से शुरू कर दिया। सीमा कभी लाल टाइट साड़ी में आई (जल्दी से पहनकर), कभी सिर्फ ब्लॉउज और पेटीकोट में, कभी पूरी नंगी। हर बार अमित ने उसे अलग तरीके से चोदा – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, स्पून, खड़े-खड़े, कुर्सी पर।
प्रेग्नेंसी वाली बात: दूसरी रात जब दोनों थककर लेटे थे, सीमा ने अमित के सीने पर सिर रखकर कहा, “अमित… कंडोम मत लगाना। मुझे गर्भवती होना है। पति से नहीं हो पा रहा… तुमसे हो जाएगा। मैं चाहती हूं तुम्हारा बच्चा हो।”
अमित ने उसकी आंखों में देखा। सीमा पूरी गंभीर थी। उसने सिर हिलाया। उसके बाद जितनी बार भी दोनों मिले, अमित ने अंदर ही झड़ने दिया। सीमा हर बार उसके ऊपर बैठकर लंड को गहराई तक लेती और कहती, “पूरा डालो अंदर… मुझे भर दो…”
तीसरे दिन दोपहर में भी दोनों मिले। सीमा ने पीली टाइट साड़ी पहनी थी। अमित ने उसे किचन में ही काउंटर पर लिटाकर चोदा। फिर बालकनी के पास खड़े-खड़े। आखिरी रात सबसे लंबी रही। दोनों ने लगभग चार-पांच बार किया। सीमा कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में वो अमित के ऊपर लेटी हुई थी, लंड अभी भी अंदर था। दोनों पसीने से तर।
सुबह जब अमित जाने लगा तो सीमा ने उसे गले लगाया। “जब भी पति ऑफिस में हों… तुम आ जाना। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी।”
अमित ने उसके होंठ चूमे और निकला। पीछे मुड़कर देखा तो सीमा दरवाजे पर खड़ी थी – टाइट साड़ी में, बाल बिखरे, होंठ सूजे हुए, और आंखों में एक अलग सी चमक।
उन तीन दिनों में दोनों के बीच वो सब हो गया जो सीमा सालों से तरस रही थी। और अब उसके मन में एक नई उम्मीद भी थी… अमित का बच्चा।

