बड़ी चूची और गांड वाली नौकरानी को चोदा - चूची चूसी और हर छेद मे लंड डाला
घर की 36 साल की गरम नौकरानी… बड़ी-बड़ी चूचियाँ, कसी हुई गाँड और गोरी चमकती बॉडी। जब घर में कोई नहीं था तो मालिक के 22 साल के बेटे ने पैसे देकर उसे रात भर चोदा। पहले चूचियाँ चूसीं, फिर उँगलियाँ डालीं, जीभ से चाटा और आखिर में हर छेद में अपना मोटा लंड घुसा दिया। पूरी रात हार्ड सेक्स की असली कहानी।

रमेश 22 साल का युवक था। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके वह अपने पिता के बड़े बंगले में रह रहा था। पिता अक्सर व्यापार के सिलसिले में बाहर रहते थे और माँ भी कभी-कभी रिश्तेदारों के यहाँ चली जाती थीं। घर की देखभाल के लिए एक नौकरानी रहती थी—सुनीता।
सुनीता 36 साल की थी। देहाती अंदाज की, लेकिन शरीर बिलकुल शहर की हसीना जैसा कसा हुआ। गोरी-चिट्टा रंग, लंबे काले बाल जो अक्सर खुले रहते, गोल-मटोल बड़े स्तन जो ब्लाउज में ठसाठस भरे रहते, पतली कमर और भारी, लटकी हुई पर कसी हुई चूतड़। जब वह घर के काम करती तो साड़ी की पल्लू बार-बार सरक जाती और उसकी चिकनी कमर तथा गहरी नाली दिखाई दे जाती। रमेश कई महीनों से उसे घूरता रहता था।
एक दोपहर की बात है। घर में सिर्फ वे दोनों ही थे। पिता शहर गए हुए थे और माँ भी दो दिन के लिए बाहर थीं। सुनीता रसोई में बर्तन साफ कर रही थी। उसकी साड़ी कमर तक ऊपर की हुई थी, पेट की गोरी त्वचा चमक रही थी। रमेश पीछे से आया और धीरे से उसकी कमर पर हाथ रख दिया।
सुनीता चौंक गई। “क्या कर रहे हो बाबूजी… छोड़ो…” उसने हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन रमेश का हाथ और कस गया। उसने उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी छाती से सटा लिया।
“सुनीता… तुम्हारा शरीर… बहुत गरम है,” रमेश ने धीरे से कान में कहा। उसका हाथ साड़ी के अंदर घुस गया और पेट पर फिसलने लगा। सुनीता का शरीर सिहर उठा।
“नहीं… बाबूजी… पाप लगेगा… मैं तुम्हारी माँ जैसी हूँ… छोड़ दो…” वह मना करती रही, लेकिन आवाज में कमजोरी आ गई थी। रमेश ने उसका मुँह घुमाया और होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो सुनीता ने दाँत भींच लिए, फिर धीरे-धीरे उसके होंठ खुल गए। रमेश की जीभ अंदर घुस गई। दोनों की साँसें तेज हो गईं।
रमेश का हाथ ऊपर की ओर बढ़ा। उसने उसकी ब्लाउज के बटनों को एक-एक करके खोला। बड़े, भारी, गोरे स्तन बाहर निकल आए। निप्पल गाढ़े भूरे रंग के और सख्त हो चुके थे। रमेश ने एक स्तन को मुट्ठी में भर लिया और जोर से दबाया। सुनीता की आँखें बंद हो गईं।
“आह… बाबूजी… धीरे…”
रमेश ने दूसरा स्तन भी पकड़ा और दोनों को मसलने लगा। फिर झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से गोल-गोल घुमाते हुए काटने जैसा भी किया। सुनीता की कमर काँपने लगी। उसका एक हाथ रमेश के बालों में घुस गया।
रमेश ने साड़ी को और ऊपर किया। उसकी सफेद पैंटी दिखाई दी, बीच में हल्की गीली रेखा बन चुकी थी। रमेश ने उँगली से पैंटी के ऊपर से ही रगड़ना शुरू किया। सुनीता की टाँगें थोड़ी फैल गईं।
“इतनी गीली हो गई हो तुम…” रमेश ने कहा और पैंटी को एक तरफ सरका दिया। उसकी गुलाबी, मुलायम चूत बाहर आ गई। रमेश ने दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं। सुनीता जोर से कराह उठी।
“उँह… बाबूजी… मत करो… प्लीज…”
लेकिन रमेश रुकने वाला नहीं था। उसने उँगलियों को अंदर-बाहर करना शुरू किया। अंगूठे से उसकी चूत के ऊपर वाले हिस्से को रगड़ता रहा। सुनीता की साँसें हाँफने लगीं। थोड़ी देर बाद रमेश घुटनों के बल बैठ गया। उसने उसकी टाँगों को और फैलाया और जीभ चूत पर लगा दी।
लंबी-लंबी चाटें… कभी ऊपर से नीचे, कभी अंदर घुसाकर चूसना। सुनीता की दोनों टाँगें काँप रही थीं। वह रसोई के काउंटर को मजबूती से पकड़े हुए थी। रमेश ने उसकी चूत को पूरा मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसा। सुनीता का शरीर अकड़ गया और वह काँपते हुए झड़ गई।
रमेश उठा। उसने अपनी पैंट खोली। उसका मोटा, कड़ा लंड बाहर निकल आया। सुनीता की आँखें फटी की फटी रह गईं।
“बाबूजी… इतना बड़ा… मैं नहीं ले पाऊँगी…”
रमेश मुस्कुराया। “ले लोगी। पहले मुँह में लो।”
सुनीता झिझकते हुए नीचे बैठी। उसने धीरे से लंड को हाथ में लिया और जीभ से चाटा। फिर मुँह में लिया। रमेश ने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। सुनीता की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन वह चूसती रही। थूक टपक रहा था। रमेश कुछ देर मुँह में झाड़ने के बाद उसे खींचकर खड़ा किया।
उसने सुनीता को काउंटर की ओर मोड़ा। साड़ी पूरी तरह ऊपर कर दी, पैंटी एक तरफ सरकाई और अपने लंड को उसकी गीली चूत पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्के के साथ अंदर घुस गया।
“आह्ह्ह… बाबूजी… टूट गई…” सुनीता चिल्ला उठी।
रमेश रुकने वाला नहीं था। उसने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ सुनीता की बड़ी चूतड़ काँपती थीं। स्तन काउंटर पर रगड़ खा रहे थे। रमेश कभी तेज, कभी धीमा करता रहा। कभी पूरा निकालकर फिर जोर से घुसाता। सुनीता अब मना नहीं कर रही थी। वह कराह रही थी, गाली भी दे रही थी और रमेश को और जोर से करने के लिए कह रही थी।
एक घंटे तक रमेश ने उसे उसी पोजीशन में चोदा। फिर उसे पलटा, पैरों को कंधे पर रखा और और गहरे घुसने लगा। सुनीता दो बार और झड़ चुकी थी। आखिर में रमेश ने जोर से धक्के मारते हुए अपना पानी उसके अंदर ही छोड़ दिया।
दोनों हाँफते हुए फर्श पर बैठ गए। सुनीता की आँखों में शर्म और सुकून दोनों थे।
रमेश ने उसके गाल सहलाते हुए कहा, “कल रात घर में कोई नहीं होगा। पूरी रात तुम्हारे साथ बिताऊँगा। तुम्हें जितना पैसा चाहिए, दूँगा। बस मना मत करना।”
सुनीता चुपचाप बैठी रही। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। उसने धीरे से सिर हिला दिया।
अगला दिन आया। पूरे घर में सन्नाटा था। पिता और माँ दोनों बाहर थे। सिर्फ रमेश और सुनीता। शाम होते-होते रमेश ने दरवाजे बंद कर दिए और पर्दे गिरा दिए। सुनीता रसोई से निकलकर बैठक में आई तो रमेश पहले से इंतजार कर रहा था।
सुनीता ने साड़ी बाँधी हुई थी, लेकिन ब्लाउज के ऊपर से स्तनों की गोल गोलाई साफ दिख रही थी। रमेश ने बिना कुछ कहे उसे अपनी बाँहों में खींच लिया और जोर से चूमने लगा। इस बार सुनीता ने विरोध नहीं किया। उसने रमेश की गर्दन में हाथ डाल दिए और जीभ से जीभ लड़ा दी। दोनों की साँसें मिल गईं।
रमेश ने उसकी साड़ी का पल्लू खींचकर फर्श पर गिरा दिया। फिर ब्लाउज के हुक खोले। भारी, गोरे स्तन बाहर आ गए। रमेश ने दोनों हाथों से उन्हें दबाया, मसला, निप्पल को उँगलियों से दबा-दबाकर खींचा। सुनीता की कराह निकल गई। रमेश झुका और एक निप्पल मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसा, दाँतों से हल्का काटा, जीभ से गोल घुमाया। दूसरे स्तन पर भी वही किया। सुनीता का शरीर काँप रहा था।
रमेश ने उसे बिस्तर तक धकेला। सुनीता बिस्तर पर लेट गई। रमेश ने उसकी साड़ी पूरी तरह खोल दी। अब वह सिर्फ सफेद पैंटी में थी। पैंटी के बीच का हिस्सा पहले से गीला था। रमेश ने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाया और उसकी टाँगों से निकाल फेंका। सुनीता की चिकनी, मुलायम चूत पूरी तरह नंगी हो गई। रमेश ने उसके दोनों पैर फैला दिए और बीच में बैठ गया।
पहले उसने उँगलियों से चूत को सहलाया, फिर दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं। अंदर-बाहर करने लगा। सुनीता की कमर उछलने लगी। रमेश ने तीसरी उँगली भी डाल दी और जोर से दबाने लगा। सुनीता जोर-जोर से कराह रही थी। फिर रमेश झुका और जीभ चूत पर लगा दी। लंबी-लंबी चाटें। कभी ऊपर वाले मुलायम हिस्से को चूसना, कभी जीभ को अंदर तक घुसाकर हिलाना। सुनीता के दोनों हाथ रमेश के बालों में घुस गए। वह उसकी सर को अपनी चूत पर और जोर से दबाने लगी।
“आह्ह… बाबूजी… जीभ और अंदर… हाँ… ऐसे…”
रमेश ने उसकी चूत को पूरा मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। सुनीता का शरीर अकड़ गया और वह काँपते हुए झड़ गई। पानी रमेश के मुँह पर लग गया। रमेश ने उसे चाटते हुए साफ किया।
अब रमेश ने अपनी सारी कपड़े उतार दिए। उसका मोटा, कड़ा लंड तनकर खड़ा था। सुनीता ने आँखें फाड़कर देखा। रमेश उसके पास आया और लंड उसके मुँह के सामने कर दिया।
“लो, पूरा अंदर लो।”
सुनीता ने मुँह खोला। रमेश ने धीरे-धीरे लंड अंदर धकेला। सुनीता की आँखें नम हो गईं, लेकिन वह चूसने लगी। रमेश ने उसके बाल पकड़कर सिर हिलाने लगा। कभी धीरे, कभी जोर से। लंड गले तक पहुँच रहा था। सुनीता का गला भर रहा था, लेकिन वह रुक नहीं रही थी। थूक उसके मुँह से टपक रहा था। रमेश कुछ देर तक मुँह में झाड़ता रहा, फिर निकाल लिया।
अब उसने सुनीता को चारों खाने चित लिटाया। उसके दोनों पैर कंधों पर रखे और लंड को चूत पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… बाबूजी… पूरा अंदर… टूट गई मैं…” सुनीता चिल्ला उठी।
रमेश ने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ बिस्तर चरमरा रहा था। सुनीता के बड़े स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। रमेश कभी तेज, कभी धीमा करता। कभी पूरा निकालकर फिर जोर से घुसाता। सुनीता की चूतड़ उसके जाँघों से टकरा-टकराकर लाल हो रही थीं।
एक घंटे तक रमेश ने उसे इसी पोजीशन में चोदा। सुनीता दो बार और झड़ चुकी थी। फिर रमेश ने उसे पलटा। सुनीता को घुटनों के बल बैठाया, कमर दबाई और पीछे से घुस गया। इस पोजीशन में लंड और गहरा जाता था। रमेश ने उसके बाल पकड़ लिए और जोर-जोर से ठोके मारने लगा। हर धक्के के साथ सुनीता की आवाज निकल रही थी।
“उँह… बाबूजी… और जोर से… हाँ… मारो… पूरी रात मारो…”
रमेश ने उसके दोनों स्तन पीछे से पकड़ लिए और मसलते हुए चोदने लगा। कमरा कराहों और मांस की आवाजों से गूँज रहा था। रमेश ने फिर पोजीशन बदली। सुनीता को अपनी गोद में बैठाया। सुनीता ने खुद लंड को अपनी चूत में बैठाया और ऊपर-नीचे होने लगी। रमेश नीचे से धक्के मार रहा था। दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे।
रात के बारह बज चुके थे। रमेश थका नहीं था। उसने सुनीता को फिर लिटाया, उसके पैरों को फैलाया और घुटनों के बल बैठकर और गहरे घुसने लगा। इस बार उसने उँगलियाँ भी उसकी गाँड में डाल दीं। सुनीता सन्न रह गई, लेकिन दर्द के साथ मजा भी आने लगा। रमेश ने दोनों जगह एक साथ काम करना शुरू किया। सुनीता पागलों की तरह कराह रही थी।
दो बज गए। रमेश ने आखिर में सुनीता को दीवार से सटाया। एक पैर ऊपर उठाया और खड़े-खड़े जोर-जोर से चोदने लगा। दीवार पर सुनीता की पीठ रगड़ खा रही थी। रमेश के धक्के इतने जोरदार थे कि सुनीता की आवाज रुक-रुककर निकल रही थी। आखिर में रमेश ने जोर से धक्के मारते हुए अपना सारा पानी उसके अंदर छोड़ दिया। गर्म पानी की धार महसूस करके सुनीता भी काँपते हुए झड़ गई।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। शरीर पसीने और पानी से लथपथ थे। रमेश ने सुनीता के स्तनों को सहलाते हुए कहा, “अब सो जा। सुबह फिर शुरू करेंगे।”
सुनीता ने थकी हुई आँखों से देखा और धीरे से सिर हिला दिया। उसकी जाँघों के बीच से रमेश का पानी रिस रहा था। पूरी रात का वह हिसाब अभी बाकी था।

