बेटी ने अपनी कुवारी चूत में बाप का लंड घुसवाया - पापा बेटी सेक्स
बेटी की कुवारी चूत में पहली बार अपने बाप का मोटा लंड घुसते ही वो चीख उठी, लेकिन मजे के आगे रुक न सकी। पापा की गोद में बैठकर बेटी ने अपनी भूखी चूत को पूरी तरह से भर लिया – दर्द और मज़ा का खतरनाक मेल!
मेरा नाम राकेश है। उम्र 45 साल। मैं एक साधारण सरकारी अधिकारी हूँ। मेरी पत्नी की मौत 8 साल पहले हो गई थी। उसके बाद मैंने कभी किसी और को नहीं देखा। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपनी बेटी प्रिया पर था।
प्रिया अब 20 साल की हो चुकी थी। कॉलेज में पढ़ रही थी। वो बेहद खूबसूरत थी — लंबे काले बाल, गोरा रंग, नाजुक चेहरा, भरे हुए स्तन और गोल-गोल नितंब। वो मेरी आँखों की पुतली थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से मैं उसके शरीर को अलग नजर से देखने लगा था।
गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं। घर में सिर्फ हम दोनों ही थे। प्रिया अक्सर हल्के कपड़ों में घर में घूमती — छोटी-छोटी नाइट सूट या टॉप और शॉर्ट्स। उसके स्तन नाइट सूट के अंदर हिलते हुए मुझे पागल कर देते।
एक रात बारिश तेज हो रही थी। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। प्रिया डर के मारे मेरे कमरे में आ गई। "पापा... मुझे डर लग रहा है।" उसने काँपती हुई आवाज में कहा।
मैंने उसे अपने बिस्तर पर बिठा लिया। वो मेरे सीने से सटकर बैठ गई। उसके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। मेरे शरीर में एक अजीब सा तनाव होने लगा।
"पापा... आप मुझे छोड़कर तो कभी नहीं जाओगे ना?" उसने मेरी छाती पर सिर रखते हुए पूछा।
"कभी नहीं बेटा। तुम मेरी जान हो।" मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा।
अंधेरे में उसकी साँसें मेरे गले पर पड़ रही थीं। मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा। मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रिया ने खुद को और चिपका लिया।
"पापा... आजकल मुझे कुछ अजीब सा लगता है।" उसने धीरे से कहा। "क्या बेटा?" मैंने पूछा।
"जब आप मुझे छूते हो... तो मेरे शरीर में कुछ होता है। नीचे... बहुत गर्मी हो जाती है।" मेरे दिमाग में बिजली सी कौंध गई। मैंने हिम्मत करके उसके गाल पर हाथ फेरा। वो काँप उठी।
"प्रिया... हम पापा-बेटी हैं।" "पता है पापा... लेकिन मैं आपको बहुत चाहती हूँ। सिर्फ पापा की तरह नहीं..." उसकी आवाज में शर्म और भूख दोनों थी।
मैंने उसे अपने सीने से और कस लिया। फिर धीरे से उसके माथे को चूमा। प्रिया ने आँखें बंद कर लीं। मैंने उसकी गर्दन पर किस किया। वो हल्का सा कराह उठी। "पापा... और करो ना..."
मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया। पहला किस था, लेकिन वो जुनूनी था। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। प्रिया ने मेरी पीठ पर हाथ फेरने शुरू कर दिए।
मैंने उसकी नाइट सूट के बटन खोलने शुरू किए। उसके बड़े-बड़े, गोरे स्तन बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
"आह्ह्ह... पापा... बहुत अच्छा लग रहा है... चूसो ना जोर से..." प्रिया मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपने स्तनों पर दबा रही थी। मैं दोनों स्तनों को बारी-बारी चूस रहा था, काट रहा था। मेरे लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था।
मैंने नीचे हाथ डाला। उसकी शॉर्ट्स के अंदर उसकी पैंटी पूरी गीली थी। मैंने शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और कुंवारी थी।
"पापा... पहली बार किसी ने छुआ है..." उसने शरमाते हुए कहा। मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी चूत पर फेरीं। वो काँप उठी। फिर मैंने एक उँगली अंदर डाली। वो बहुत टाइट थी।
"आह्ह्ह... पापा... धीरे... लेकिन अच्छा लग रहा है..." मैंने उँगली अंदर-बाहर करने लगा। दूसरे हाथ से उसका क्लिटोरिस रगड़ रहा था। प्रिया जोर-जोर से कराह रही थी। कुछ ही मिनटों में उसका शरीर तन गया और वो पहली बार झड़ गई।
"पापा... कुछ हो गया... आह्ह्ह्ह!" उसका रस मेरी उँगलियों पर बह निकला। मैंने उसे चाट लिया।
प्रिया अभी भी हाँफ रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और शरमाते हुए कहा, "पापा... अब आपका भी... मुझे दिखाओ ना..." मैंने अपनी पजामा उतार दी। मेरा मोटा, 8 इंच लंबा लंड लहरा रहा था। प्रिया की आँखें फैल गईं।
"इतना बड़ा है पापा..." वो डरते-डरते अपना हाथ बढ़ाकर उसे छूने लगी।
प्रिया मेरे लंड को देखकर हैरान थी। उसकी आँखें फैली हुई थीं। वो धीरे से अपना छोटा-सा हाथ आगे बढ़ाकर मेरे मोटे लंड को छूने लगी। "पापा... ये इतना गर्म और मोटा है..." उसने फुसफुसाकर कहा।
मैंने उसके बालों को प्यार से सहलाया और बोला, "डरो मत बेटा। आज पापा तुम्हें औरत बना देंगे।" प्रिया शरमा गई लेकिन उसकी आँखों में भूख साफ दिख रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। बारिश बाहर तेज हो रही थी और कमरे में बिजली की चमक आ रही थी, जिससे उसका नग्न शरीर और भी आकर्षक लग रहा था।
मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को जोर से चूसने लगा। फिर गर्दन, स्तन, पेट... मैं नीचे उतरता गया। आखिरकार मैं उसकी जाँघों के बीच झुक गया। उसकी कुंवारी चूत गुलाबी और पूरी तरह गीली थी।
"पापा... क्या कर रहे हो?" उसने शरमाते हुए पूछा। "तुम्हें चाट रहा हूँ बेटा..."
जैसे ही मेरी जीभ उसकी चूत पर पड़ी, प्रिया जोर से उछल पड़ी — "आआह्ह्ह... पापा...!"
मैंने उसकी चूत को पूरी तरह चाटना शुरू कर दिया। जीभ से क्लिटोरिस को घुमाया, चूसा, और अंदर उँगली डालकर अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया पागल हो रही थी। वो अपनी कमर ऊपर-नीचे कर रही थी और मेरे सिर को अपनी जाँघों में दबा रही थी।
"पापा... बहुत मजा आ रहा है... वहाँ... हाँ... जोर से चूसो... आह्ह्ह... मैं फिर से... आ रही हूँ..." वो दूसरी बार जोर से झड़ गई। उसका मीठा रस मेरे मुंह में भर गया। मैंने पूरा चाट लिया।
अब वो पूरी तरह तैयार थी। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा मोटा लंड उसकी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था। प्रिया ने डरी हुई नजरों से मुझे देखा। "पापा... धीरे करना... दर्द होगा ना?"
"पहली बार थोड़ा दर्द होगा बेटा, लेकिन फिर बहुत मजा आएगा। पापा प्यार से करेंगे।" मैंने लंड की टिप उसके चूत के छेद पर रखी और बहुत धीरे से दबाया। सिर्फ सिरा ही अंदर गया तो प्रिया ने मेरी पीठ में नाखून गड़ाए — "उफ्फ... पापा... फट रही हूँ..."
मैं रुका रहा, उसके माथे को चूमता रहा, उसके स्तनों को सहलाता रहा। फिर एक जोरदार धक्का दिया। "आआआह्ह्ह... पापा...!"
मेरा आधा लंड उसके अंदर चला गया। उसकी कुंवारी चूत फट गई थी। हल्का खून निकला। मैंने उसे चूमकर शांत किया और धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया।
"पूरा अंदर चला गया बेटा... अब तुम पूरी तरह पापा की हो।" प्रिया की आँखों में आँसू थे, लेकिन दर्द के साथ-साथ मजे की आवाज भी आने लगी थी। "पापा... हिलिए ना... धीरे..."
मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। लंबे स्ट्रोक। हर धक्के पर प्रिया कराह रही थी — "आह्ह... पापा... गहरा... बहुत अच्छा लग रहा है..." धीरे-धीरे मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब कमरे में "पच-पच-पच" की आवाजें बारिश की आवाज के साथ मिल रही थीं। मैं उसके स्तनों को चूसता हुआ जोर-जोर से चोद रहा था।
प्रिया ने अपने पैर मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लिए और मुझे और गहरा खींचने लगी। "पापा... तेज... और तेज चोदिए... आपकी बेटी की चूत फाड़ दीजिए... हाँ... आह्ह्ह... मुझे बहुत अच्छा लग रहा है..."
मैं पागल हो गया। अब पूरी ताकत से उसकी चूत में धक्के मार रहा था। उसके बड़े स्तन उछल रहे थे। मैं एक स्तन को मुंह में दबाए हुए था और दूसरे को मसल रहा था।
कुछ देर बाद मैंने उसे घुमाकर डॉगी स्टाइल में लिया। उसके गोल नितंबों को थपथपाते हुए पीछे से जोरदार चोदने लगा। "पापा... इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है... उफ्फ... मैं फिर से आने वाली हूँ..." हम दोनों एक साथ झड़ने वाले थे। मैंने उसकी कमर कसकर पकड़ी और अंतिम तेज धक्के मारे।
"प्रिया... पापा आ रहे हैं...!" "पापा... अंदर डालिए... अपनी बेटी की चूत में भर दीजिए... आआह्ह्ह!" मैंने अपनी सारी गर्म मलमल उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। प्रिया भी जोर से काँपी और झड़ गई।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। प्रिया मेरी छाती पर सिर रखे हुए थी। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। "पापा... मुझे इतना अच्छा कभी नहीं लगा। अब मैं पूरी तरह आपकी हूँ... आपकी बेटी भी और आपकी औरत भी।"
मैंने उसके माथे को चूमते हुए कहा, "हाँ बेटा। अब ये घर सिर्फ हमारा है।"
सुबह होने वाली थी, लेकिन हम दोनों की नींद उड़ी हुई थी। प्रिया अभी भी मेरी छाती से चिपकी हुई नंगी लेटी थी। उसके शरीर पर पसीना और मेरे वीर्य की कुछ बूँदें सूख रही थीं। मैं उसके बालों को सहला रहा था।
"पापा... मुझे नींद नहीं आ रही। मेरी चूत अभी भी गर्म है और आपको माँग रही है," उसने शरमाते हुए मेरे कान में फुसफुसाया। मैं मुस्कुराया और बोला, "तो आज पापा तुम्हें पूरा दिन और रात चोदेंगे।"
प्रिया की आँखों में नई चमक आ गई। वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसके भरे स्तन मेरी छाती पर दब रहे थे। उसने मेरा लंड पकड़ा जो फिर से खड़ा हो चुका था और अपनी चूत पर रगड़ने लगी। "पापा... इस बार मैं ऊपर से करना चाहती हूँ।"
वो धीरे से बैठ गई और मेरा मोटा लंड अपनी चूत में उतार लिया। "आह्ह्ह... पापा... पूरा भर गया..." वो कराह उठी। प्रिया तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन जोर-जोर से उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़कर मसलने और चूसने लगा। वो पागल हो रही थी।
"पापा... आपका लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है... बहुत मजा आ रहा है... हाँ... तेज... तेज चोदिए अपनी बेटी को..." मैं नीचे से जोरदार धक्के दे रहा था। कमरे में फिर से चुदाई की आवाजें गूँजने लगीं। कुछ देर बाद मैंने उसे उठाकर बाथरूम ले गया। शावर ऑन किया। गर्म पानी हमारे शरीर पर बह रहा था।
मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से जोर से चोदा। उसके गोल नितंब मेरे पेट से टकरा रहे थे। "आह्ह... पापा... इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है... फाड़ दीजिए मेरी चूत... हाँ... जोर से..."
मैंने उसके बाल पकड़कर घोड़े की तरह चोदना शुरू कर दिया। पानी की धार के साथ मेरे धक्के और तेज हो गए थे। प्रिया जोर-जोर से चिल्ला रही थी। फिर मैंने उसे शावर के नीचे घुटनों पर बिठाया और मुंह में चोदा। प्रिया अब बहुत अच्छे से चूस रही थी। उसकी जीभ लंड के चारों तरफ घुमा रही थी।
"पापा... मुझे फिर से चोदिए... मैं आपकी रंडी हूँ आज से..." मैंने उसे उठाया और बाथरूम के फर्श पर लिटाकर मिशनरी स्टाइल में जोरदार चुदाई की। उसके पैर मेरे कंधों पर रखकर मैं बहुत गहराई तक धक्के मार रहा था।
"पापा... मैं बार-बार झड़ रही हूँ... आपका लंड मेरी आत्मा तक पहुँच रहा है... आह्ह्ह... भर दीजिए अपनी बेटी को..." हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। मैंने अपनी सारी मलमल उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। प्रिया भी काँपते हुए झड़ गई।
दिन भर हमने घर में अलग-अलग जगहों पर सेक्स किया — सोफे पर, किचन टेबल पर, बालकनी में। शाम को फिर से मेरे कमरे में लौटे। रात को प्रिया मेरी गोद में बैठकर बोली, "पापा... अब मैं आपकी हूँ। न सिर्फ बेटी, बल्कि आपकी औरत भी। जब चाहे चोद लीजिए। मेरी चूत हमेशा आपके लिए खुली रहेगी।"
मैंने उसे चूम लिया और कहा, "हाँ बेटा। ये हमारा अपना जुनून है। दुनिया कुछ भी कहे, हम दोनों एक-दूसरे के हैं।"
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