बहू की चूत चोद के पानी निकाला ठरकी ससुर ने - हार्डकोर सेक्स स्टोरी

रमेश जी के थरकी लंड ने अपनी जवान बहू प्रिया की टाइट चूत और गांड का भोसड़ा बना दिया। पति के टूर पर जाते ही ससुर जी ने नंगी बहू को जबरदस्ती चोदा, चूत में उंगली, मुंह में लंड और गांड में ठुकाई कर के पानी निकाल दिया।

लेखक: Abhay Kumar6 मिनट पढ़ने में
बहू की चूत चोद के पानी निकाला ठरकी  ससुर ने - हार्डकोर सेक्स स्टोरी

रमेश जी की बहू प्रिया एकदम माल थी। 26 साल की जवान लड़की, हाइट 5 फुट 6 इंच, रंग एकदम गोरा चिट्टा जैसे दूध में हल्दी मिला दी हो। उसके बूब्स तो क्या बताएं, 36 साइज के गोल-गोल मुलायम आम जैसे, जो किसी भी सूट में उभर कर आते थे। कमर बिल्कुल पतली 28 इंच की, और गांड 38 साइज की एकदम उभरी हुई, जैसे दो बड़े-बड़े संतरे हों।

उसके होठ गुलाबी और मोटे, जिन पर लिपिस्टिक लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। नीली आंखें और लंबे बाल जो कमर तक आते थे। जब वो चलती थी तो उसकी गांड इतनी मस्त हिलती थी कि पूरे मोहल्ले के मर्द उसे घूरते थे।

रमेश जी, जो 55 साल के थे लेकिन अभी भी जवानों जैसे फिट, रोज अपनी बहू को देखकर कल्पनाएं करने लगे थे। एक रात उनके बेटे विकास के कमरे से अजीब आवाजें आ रही थीं। रमेश जी उठकर पानी पीने गए तो बेटे का कमरा थोड़ा खुला था। उन्होंने झांक कर देखा तो उनका होश उड़ गया। उनका बेटा विकास प्रिया को घोड़ी बना कर चोद रहा था।

प्रिया पूरी नंगी थी, उसकी गांड हवा में उठी हुई थी और विकास पीछे से अपना लंड पेल रहा था। प्रिया की चूचियां हर धक्के के साथ आगे-पीछे हो रही थीं। उसके मुंह से सिसकियां निकल रही थीं। रमेश जी का लंड तुरंत खड़ा हो गया। उन्होंने सोचा, "क्या माल है ये बहू, इसे तो मैं ही चोदूंगा।"

उसके बाद रमेश जी रोज रात को उसी दरवाजे पर आकर सुनने लगे। कभी प्रिया बेटे के ऊपर चढ़कर कूदती हुई दिखती, कभी 69 की पोजीशन में उसकी चूत चूसते हुए विकास। रमेश जी का बदन आग बन जाता। वो सोचते कि कैसे इस बहू की चूत का मजा लूं। एक दिन विकास को ऑफिस से एक हफ्ते का टूर पर जाना पड़ा। रमेश जी के मन में एक प्लान बना।

तीसरे दिन दोपहर को रमेश जी बाहर से आए तो घर में कोई आवाज नहीं थी। उन्होंने सोचा प्रिया कहां है। अचानक बाथरूम से हल्की-हल्की आवाजें आईं। वो चुपके से गए और दरवाजे का छेद से झांका। उनका दिल धड़कने लगा। प्रिया नंगी बाथटब में बैठी थी, एक हाथ से अपनी चूची दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी।

उसकी आंखें बंद थीं, मुंह से आहें निकल रही थीं। वो अपनी उंगली अंदर-बाहर कर रही थी और अपने निप्पलों को मसल रही थी। रमेश जी का लंड पैंट फाड़ने को तैयार था। उन्होंने सोचा आज तो इसे चोद कर ही रहूंगा।

उसी रात रमेश जी ने प्लान बनाया। उन्होंने प्रिया को बुलाया और कहा, "बहू, आज मेरे पैरों में बहुत दर्द है, तुम रात को सोने से पहले मेरे कमरे में आ जाना, थोड़ा तेल मालिश कर देना।" प्रिया ने हां कर दी। रात के 11 बजे प्रिया एक पतली नाइटी पहन कर आई। नीचे से उसकी पैंटी की लाइन साफ दिख रही थी। रमेश जी बिस्तर पर लेटे हुए थे, शर्ट उतारी हुई थी, बनियान में थे।

प्रिया ने तेल लिया और उनके पैरों की मालिश करने लगी। धीरे-धीरे वो ऊपर बढ़ी, रमेश जी की जांघों पर तेल लगाया। उनका हाथ प्रिया के हाथ पर आ गया। उन्होंने प्रिया का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। प्रिया चौंक गई, वो उठकर जाने लगी। रमेश जी ने उसका हाथ खींचा और अपनी ओर कर लिया। प्रिया घबरा गई, "पापा जी, ये क्या कर रहे हैं, छोड़िए मुझे।"

रमेश जी ने उसे जोर से अपनी ओर खींचा और बिस्तर पर गिरा दिया। वो प्रिया के ऊपर चढ़ गए। प्रिया छटपटाने लगी, "नहीं पापा जी, ये गलत है, प्लीज।" रमेश जी ने उसके दोनों हाथ पकड़े और उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। जोर-जोर से चूसने लगे। प्रिया मुंह हिलाने की कोशिश कर रही थी लेकिन रमेश जी का जोर ज्यादा था। उन्होंने प्रिया की नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे बटन खोल दिए। प्रिया ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, उसके गोल-गोल बूब्स बाहर आ गए।

रमेश जी झुके और एक चूची को मुंह में ले लिया। दांत से काटा, जीभ से चाटा। प्रिया के मुंह से दर्द और मजे की मिक्स आह निकली। वो कह रही थी, "पापा जी मत करो, मैं चिल्लाऊंगी।" रमेश जी ने उसके मुंह पर हाथ रखा और दूसरी चूची को मसलने लगे। फिर नीचे हाथ बढ़ाया और नाइटी ऊपर की। प्रिया की काली पैंटी दिखने लगी। रमेश जी ने पैंटी पकड़ी और एक झटके में फाड़ दी।

प्रिया की चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई थी, गुलाबी रंग की। रमेश जी ने उसकी टांगें फैलाईं और अपना मुंह उसकी चूत पर लगा दिया। जीभ से चाटने लगे। प्रिया कांप रही थी, उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन मजा भी आ रहा था। रमेश जी ने उसकी चूत में उंगली डाली और अंदर-बाहर करने लगे। प्रिया की कमर हवा में उठने लगी।

अब रमेश जी ने अपनी बनियान और पैंट उतारी। उनका 9 इंच का मोटा काला लंड बाहर निकला। प्रिया की आंखें फटी की फटी रह गईं। इतना बड़ा लंड उसने कभी नहीं देखा था। रमेश जी ने प्रिया के मुंह पर अपना लंड रगड़ा। प्रिया ने मुंह बंद कर लिया। रमेश जी ने उसके गाल थपथपाए और जोर से मुंह खोलवाया। पूरा लंड अंदर घुसा दिया। प्रिया के मुंह से उल्टी आने लगी। वो खांसने लगी। रमेश जी ने उसके सिर पकड़ा और जोर-जोर से मुंह चोदने लगे।

कुछ देर बाद रमेश जी ने लंड बाहर निकाला और प्रिया की चूत पर रखा। एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। प्रिया की चीख निकल गई। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। रमेश जी ने फिर से धक्का मारा, पूरा लंड अंदर घुस गया। प्रिया की चूत फट रही थी। रमेश जी धीरे-धीरे धक्के मारने लगे। फिर रफ्तार बढ़ा दी। पच-पच-पच की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं।

प्रिया अब दर्द में भी मजा लेने लगी थी। उसके मुंह से अब आहें निकल रही थीं। रमेश जी ने उसे घोड़ी बनाया। पीछे से उसकी चूत में लंड पेल दिया। एक हाथ से उसके बाल पकड़े और दूसरे हाथ से गांड दबाने लगे। जोर-जोर से पीछे से धक्के मारने लगे। प्रिया की चूत से पानी निकलने लगा। वो झड़ने वाली थी।

रमेश जी ने उसे लिटाया और उसकी टांगें अपने कंधों पर रख दीं। अब लंड और गहराई तक जा रहा था। प्रिया चिल्ला रही थी, "पापा जी मार डालोगे क्या, अराम से करो।" रमेश जी ने कहा, "आज तो तेरी चूत का भोसड़ा बनाकर ही रहूंगा।" वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे। प्रिया की चूत लाल हो गई थी।

फिर रमेश जी ने उसे उल्टा किया और उसकी गांड के छेद पर लंड लगाया। प्रिया चिल्लाई, "नहीं पापा जी, वहां मत डालो, बहुत दर्द होगा।" रमेश जी ने थूक लगाया और एक ही धक्के में आधा लंड गांड में घुसा दिया। प्रिया की चीख कानों में भर गई। वो रोने लगी। रमेश जी ने उसके मुंह पर तकिया दबाया और गांड की चुदाई शुरू कर दी। धक्के पर धक्के जा रहे थे। प्रिया की गांड फट रही थी।

कुछ देर बाद रमेश जी ने लंड बाहर निकाला और प्रिया के मुंह में घुसा दिया। उन्होंने जोर से धक्का मारा और अपना गाढ़ा गर्म माल उसके गले में उतार दिया। प्रिया खांसते हुए सारा वीर्य निगल गई। रमेश जी थककर उसके बगल में गिर पड़े। प्रिया रो रही थी लेकिन उसकी चूत में अजीब सी तृप्ति थी।

उस रात के बाद रमेश जी रोज रात को प्रिया के कमरे में जाते। कभी जबरदस्ती, कभी प्रिया भी मजे लेने लगी। विकास के आने तक उन्होंने प्रिया की चूत और गांड की खूब सेवा की। प्रिया भी अब अपने ससुर की दीवानी हो गई थी। वो रोज रात को उनके लिए नए-नए तरीके से तैयार होती कभी नर्स बनकर, कभी टीचर बनकर।

रमेश जी ने उसे पूरे एक हफ्ते में हर तरह से चोदा। बाथरूम में, किचन में, सोफे पर, फर्श पर। जब विकास वापस आया तो प्रिया उससे मन ही मन उबने लगी थी। उसे अपने ससुर का मोटा लंड याद आता था। और रमेश जी भी रोज मौका देखकर अपनी बहू की चूत का मजा लेते रहते थे।

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