बहन की कुँवारी चूत फाड़कर गांड भी चोदी - हिंदी सेक्स स्टोरी
रात 10:50 बजे दरवाज़ा बंद हुआ… और कुँवारी बहन की टाइट चूत पहली बार फट गई। फिर भाई ने उसकी गांड भी नहीं छोड़ी। पूरी रात की बेकाबू चुदाई अब पढ़ो।
रात के 10:50 बज रहे थे। घर में सिर्फ दो ही लोग थे। मम्मी-पापा रिश्तेदारों के यहाँ रुके थे और कल दोपहर से पहले लौटने वाले नहीं थे। खामोशी इतनी थी कि घड़ी की टिक-टिक भी साफ सुनाई दे रही थी।
मैं हॉल में बैठा था। मन बिलकुल नहीं लग रहा था। पिछले कई हफ्तों से जो चीज़ अनन्या और मेरे बीच चल रही थी, आज वो बाहर आने वाली लग रही थी। नज़रों का मिलना, अचानक छू जाना, देर रात तक बातें करना… सब कुछ बदल चुका था।
मैं उठा और उसके कमरे की तरफ चला गया। दरवाज़ा आधा खुला था। अंदर हल्की सी लाइट जल रही थी। अनन्या बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसने टाइट ब्लैक लेगिंग और छोटा सा क्रॉप टॉप पहना था। लेगिंग उसके कूल्हों पर इतनी चिपकी हुई थी कि उसकी गाँड की शेप साफ उभर रही थी।
मैं अंदर गया और दरवाज़ा बंद कर दिया। अनन्या ने गर्दन घुमाकर देखा। उसकी आँखों में हैरानी थी, लेकिन डर नहीं।
“क्या कर रहे हो इतनी रात को…?” उसने धीरे से पूछा।
मैं कुछ नहीं बोला। सीधे उसके बिस्तर के पास जाकर बैठ गया। एक हाथ उसके पेट पर रखा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले जाने लगा। क्रॉप टॉप के अंदर मेरा हाथ चला गया। ब्रा नहीं थी। उसके नरम स्तन मेरे हाथ में आ गए। निप्पल पहले से ही थोड़े कड़े थे।
अनन्या की साँस रुक गई। “भाई… ये क्या… मत कर…”
मैंने उसके निप्पल को उंगली से घुमाते हुए कहा, “कितने दिन से देख रहा हूँ तुझे। आज मम्मी-पापा नहीं हैं। आज कुछ नहीं रोकने वाला।”
उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की लेकिन जोर नहीं था। मैंने दूसरा हाथ उसकी जांघ पर रखा और लेगिंग के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर दबाया। वो पहले से थोड़ी गीली थी। अनन्या की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से हल्की सी आवाज़ निकल गई।
मैं उसके ऊपर झुक गया। उसके होठों के बहुत करीब। “बोल… नहीं करना है तो अभी कह दे। मैं उठ जाऊँगा।”
अनन्या कुछ पल चुप रही। फिर उसकी आवाज़ बहुत कमज़ोर आई, “मत छोड़ना… आज…”
इतना सुनते ही मैंने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। चुंबन पहले धीमा था, फिर गहरा होता चला गया। मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गई। अनन्या ने भी जवाब देना शुरू कर दिया। उसके हाथ मेरे बालों में थे।
मैंने उसका क्रॉप टॉप ऊपर खींचकर निकाल दिया। दोनों स्तन बाहर आ गए। मैंने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरी तरफ हाथ से मसल रहा था। अनन्या की कमर उठने लगी। वो मेरे सर को और जोर से अपने सीने से दबा रही थी।
“आह्ह… भाई… जोर से चूसो…” उसने फुसफुसाया।
मैंने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा, काटा, जीभ फेरी। फिर नीचे की तरफ बढ़ने लगा। उसकी लेगिंग के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया। लेगिंग गीली हो चुकी थी। मैंने लेगिंग का नाड़ा खोला और धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया। अनन्या ने अपनी कमर थोड़ी ऊपर उठाई ताकि आसानी से उतर जाए।
लेगिंग उसके पैरों से निकलते ही वो सिर्फ ब्लैक अंडरवियर में रह गई। मैंने अंडरवियर के ऊपर से ही उंगली रखी और जोर से दबाया। अनन्या की टांगें अपने आप खुलने लगीं। मैंने अंडरवियर किनारे किया और एक उंगली उसके अंदर डाल दी। वो इतनी गीली थी कि उंगली आसानी से अंदर चली गई।
“कितनी गीली हो चुकी है तू…” मैंने कहा और दूसरी उंगली भी अंदर डाल दी।
अनन्या की कमर उछलने लगी। मैं उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा। कभी ऊपर उसके टाइट बिंदु को सहलाता, कभी गहराई तक जाता। अनन्या की कराहें बढ़ने लगीं। उसने मेरा हाथ पकड़ रखा था लेकिन रोक नहीं रही थी।
मैंने अंडरवियर भी नीचे खींच दिए। अब वो पूरी नंगी थी। मैंने उसके पैरों को फैलाया और अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। जीभ से लंबा चाटा। अनन्या की चीख निकल गई। मैंने उसके दोनों होंठों को चूसना शुरू किया, क्लिट पर जीभ घुमाई, फिर अंदर तक जीभ डाल दी।
“भाई… आह्ह… वहीं… वहीं चाटो…” वो अपने बालों को नोच रही थी।
मैंने उसे अच्छी तरह चाटा, चूसा, उंगलियाँ चलाईं। जब वो चरम के करीब पहुँचने लगी तो मैं रुक गया। अनन्या हताश हो गई।
“क्यों रोक दिया…?” उसने हाँफते हुए पूछा।
मैंने अपने कपड़े तेजी से उतारे। लंड पूरी तरह तना हुआ था। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। लंड को उसकी गीली चूत पर रखा और धीरे से रगड़ने लगा। अनन्या की आँखें मुझ पर टिकी थीं।
“अब अंदर डाल…” उसने खुद कहा।
मैंने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड उसके अंदर चला गया। अनन्या की नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। उसकी चूत इतनी टाइट और गर्म थी कि मेरी साँस रुक गई।
“आह्ह्ह… भाई… धीरे… बहुत जोर से गया…”
मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे धक्के बढ़ाने लगा। हर धक्के के साथ अनन्या की कराहें तेज होती जा रही थीं। मैंने उसके दोनों हाथ ऊपर पकड़ लिए और जोर-जोर से चुदने लगा। उसके स्तन मेरे सीने से रगड़ रहे थे। कमरे में गीली आवाज़ें गूंज रही थीं।
“तेरी ये टाइट चूत… कितने दिन से लेनी थी…” मैंने उसके कान में कहा।
अनन्या की आँखों में आँसू थे लेकिन वो मुस्कुरा रही थी। “ले… जितना लेना है ले ले… आज पूरी रात तेरी हूँ…”
मैंने उसकी एक टांग अपने कंधे पर चढ़ाई और और गहराई तक मारने लगा। अनन्या का शरीर कांपने लगा। वो अपने पहले ऑर्गेज्म के बहुत करीब थी…
मैंने गति और तेज कर दी। हर धक्का गहरा और जोरदार था। अनन्या की चूत इतनी टाइट थी कि हर बार अंदर जाते हुए जोर लग रहा था। उसकी कराहें अब छुप नहीं रही थीं।
“आह्ह्ह… भाई… और जोर से… वहीं मार…” वो अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा रही थी। मैं रुका नहीं। उसके अभी भी कांपते हुए शरीर में धक्के मारता रहा। अनन्या हाँफ रही थी।
“रुक… थोड़ा… बहुत हो गया…” उसने कमजोर आवाज में कहा।
मैंने उसके कान में कहा, “अभी तो शुरुआत है। पूरी रात बाकी है।”
मैंने लंड बाहर निकाला। अनन्या की चूत खुली हुई और लाल हो रही थी। मैंने उसे पलटा। अब वो पेट के बल लेटी थी। मैंने उसके कूल्हों को ऊपर उठाया और पीछे से फिर से अंदर घुस गया। इस पोजीशन में और भी गहरा जा रहा था। अनन्या की चीख निकल गई।
“आह्ह… बहुत गहरा… भाई धीरे…”
मैंने उसके बाल पकड़ कर सर पीछे खींचा और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसके कूल्हे मेरे खिलाफ टकरा रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके स्तन को नीचे से पकड़ कर मसलना शुरू किया। निप्पल को उंगलियों के बीच दबा रहा था।
“तेरी ये गाँड… और ये टाइट चूत… आज दोनों लेनी है,” मैंने कहा।
अनन्या की आवाज कांप रही थी, “ले… जो लेना है ले… बस मत छोड़…”
मैंने कुछ देर और पीछे से मारा। फिर लंड बाहर निकाला और उसके गाँड के छेद पर रख दिया। अनन्या तनाव में आ गई।
“वहाँ मत… अभी…” उसने कहा लेकिन शरीर नहीं हटाया।
मैंने सिर्फ छेद के ऊपर जोर-जोर से रगड़ना शुरू किया। कभी थोड़ा दबाव दिया, कभी हटाया। अनन्या की साँसें फिर तेज हो गईं। उसकी चूत से पानी टपक रहा था। मैंने दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं और साथ में गाँड के छेद पर लंड रगड़ता रहा। अनन्या पागल होने लगी।
“भाई… अंदर डाल… चूत में डाल… अब सह नहीं सकती…”
मैंने तुरंत उसकी चूत में लंड डाल दिया और तेज गति से चुदने लगा। अनन्या दूसरी बार चरम पर पहुँच गई। इस बार उसकी आवाज और तेज थी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था।
मैंने उसे फिर से उलटा। अब वो ऊपर थी। मैंने उसे अपने लंड पर बिठा दिया। अनन्या ने खुद कमर घुमाना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने हिल रहे थे। मैंने दोनों को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। अनन्या मेरे बाल पकड़ कर और जोर से अपने सीने से दबा रही थी।
“चूस… जोर से चूस मेरे स्तन…” वो खुद बोल रही थी।
मैंने उसके कूल्हे पकड़ कर नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। अनन्या अब खुद भी जोर से उतर-चढ़ रही थी। पसीने से दोनों के शरीर चमक रहे थे। कमरे में सिर्फ गीली आवाजें और कराहें थीं।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे फिर नीचे दबाया। इस बार और रफ हो गया। उसके दोनों हाथ ऊपर पकड़ लिए और गले पर हल्का सा हाथ रखा। अनन्या की आँखें बड़ी हो गईं लेकिन उसने मना नहीं किया। उल्टे अपनी कमर और ऊपर उठाई।
“मार… और जोर से मार… मुझे अपनी बना ले…” उसने हाँफते हुए कहा।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए। बिस्तर दीवार से टकरा रहा था। अनन्या की आँखों में आँसू थे लेकिन वो मुस्कुरा रही थी। उसकी चूत बार-बार सिकुड़कर मुझे और अंदर खींच रही थी।
आखिरकार मैं खुद को रोक नहीं पाया। “अनन्या… ले… अंदर ले रहा हूँ…”
एक जोरदार धक्के के साथ मैंने पूरा पानी उसके अंदर छोड़ दिया। गरम-गरम तरल उसकी चूत में भर गया। अनन्या भी उसी पल तीसरी बार चरम पर पहुँच गई। दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए जोर-जोर से कांप रहे थे।
लंबी खामोशी।
सिर्फ दोनों की भारी साँसें। अनन्या के जांघों के बीच से मेरा पानी धीरे-धीरे बाहर बह रहा था। मैं उसके ऊपर गिरा रहा। उसने मेरे बाल सहलाते हुए धीरे से कहा,
“आज रात यहीं सो… अभी और चाहिए मुझे।”
मैंने उसके माथे पर चुंबन किया। “पूरी रात लूँगा… जितना चाहे।”
बाहर आसमान में अभी भी अंधेरा था। घर खाली था। और बहन-भाई की भूख अभी खत्म होने वाली नहीं थी।
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