पेट में बच्चा और चूत में देवर का लंड - गर्भवती भाभी की चुदाई

पेट में पति का बच्चा और चूत में देवर का मोटा लंड! 5 महीने की गर्भवती गोरी भाभी ने देवर से रात भर बेदर्दी से चुदवाया, बार-बार झड़ गई और फिर भी भूखी रही!

लेखक: Suraj Kumar8 मिनट पढ़ने में
पेट में बच्चा और चूत में देवर का लंड - गर्भवती भाभी की चुदाई

मेरा नाम विक्रम है। उम्र 24 साल। मैं दिल्ली में अपनी भाभी के साथ रहता हूँ। मेरे बड़े भाई अमित 32 साल के हैं और वो जॉब के सिलसिले में अक्सर 10-15 दिन बाहर रहते हैं। भाभी का नाम सोनाली है। उम्र 28 साल।

सोनाली भाभी बेहद गोरी, निहायत खूबसूरत और सेक्सी हैं। उनकी गोरी चमकती त्वचा, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें और मोटे गुलाबी होंठ किसी को भी पागल कर सकते हैं। शादी के बाद से ही उनकी बॉडी और ज्यादा आकर्षक हो गई थी। अब तो वो 5 महीने की प्रेग्नेंट हैं।

उनका पेट थोड़ा उभरा हुआ है, लेकिन उनकी छातियां अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ी और भारी हो गई हैं। 38 साइज की ये गोरी उभरी हुई चूचियां ब्लाउज में समाती ही नहीं। कमर अब भी पतली है, लेकिन नितंब और जांघें अब और ज्यादा गोल-मोटी हो गई हैं।

मैं भाभी को बचपन से ही चाहता था। जब भैया बाहर जाते, तो मैं भाभी के साथ ज्यादा समय बिताता। अब प्रेग्नेंट होने के बाद भाभी की कामुकता और बढ़ गई थी। उनके हार्मोन्स की वजह से वो अक्सर गर्म रहती थीं।

एक दिन भैया फिर 12 दिनों के लिए मुंबई चले गए। घर में सिर्फ मैं और भाभी रह गए। शाम को भाभी रसोई में खाना बना रही थीं। उन्होंने हल्का सा पीला नाइट सूट पहना हुआ था, जिसका टॉप काफी टाइट था।

उनके बड़े-बड़े स्तन सूट के अंदर से साफ झांक रहे थे। पेट के उभार के नीचे सूट की नाडी थोड़ी नीचे सरक गई थी, जिससे उनकी गोरी कमर और नाभि दिख रही थी।

मैं पानी पीने के बहाने रसोई में गया। "भाभी, आप बैठ जाओ ना... प्रेग्नेंट हो, ज्यादा काम मत करो," मैंने कहा।

सोनाली भाभी मुड़ीं। उनका चेहरा थोड़ा लाल था। "विक्रम, मुझे अब थोड़ी बहुत हलचल की जरूरत है... बैठे-बैठे बहुत बोरियत हो रही है," उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी नजरें मेरे शरीर पर घूम रही थीं।

रात का खाना खाने के बाद हम दोनों टीवी देखने बैठे। भाभी सोफे पर आधे लेटे हुए थे। उनका सूट ऊपर चढ़ गया था, जिससे उनका गोल पेट और गोरी जांघें साफ दिख रही थीं। मैं बगल में बैठा था। हवा में भाभी की खुशबू आ रही थी।

अचानक भाभी ने कराहते हुए कहा, "विक्रम... मेरी पीठ में बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा मालिश कर दोगे?" मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं उनके पीछे बैठ गया। भाभी ने सूट का ऊपरी हिस्सा थोड़ा नीचे सरका दिया। उनकी चिकनी गोरी पीठ सामने थी। मैंने दोनों हाथों से उनकी पीठ दबानी शुरू की।

"ऊपर... कंधों के पास..." भाभी ने धीमी आवाज में कहा। जैसे-जैसे मैं मालिश करता गया, भाभी की सांसें भारी होती गईं। "आह... अच्छा लग रहा है विक्रम... और जोर से..."

मेरे हाथ धीरे-धीरे उनकी कमर की तरफ सरक गए। भाभी ने कोई विरोध नहीं किया। उल्टा वो थोड़ा और पीछे झुक गईं। उनके बड़े स्तन मेरी बाहों को छू रहे थे।

तभी भाभी ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और उसे अपने पेट पर रख दिया। "देखो... तुम्हारा भतीजा कितना सक्रिय है आजकल," उन्होंने शरमाते हुए कहा।

मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैंने हिम्मत करके कहा, "भाभी... आप बहुत सुंदर लग रही हैं प्रेग्नेंट होकर।" भाभी मुड़ीं। उनकी आँखों में शरम के साथ वासना साफ दिख रही थी।

"विक्रम... सच कहूँ तो... प्रेग्नेंट होने के बाद... बहुत ज्यादा मन करता है... भैया तो कभी हैं ही नहीं..." उन्होंने मेरी तरफ देखा और धीरे से बोलीं, "तुम मुझे थोड़ा राहत दे सकते हो क्या... देवर जी?"

भाभी के मुँह से “देवर जी” सुनकर मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया। सोनाली भाभी की आँखों में शर्म के साथ भूख साफ दिख रही थी। उन्होंने मेरे हाथ को अपने गोल-मोटे पेट पर और जोर से दबाया।

"विक्रम... बहुत दिन से किसी ने मुझे ऐसे छुआ ही नहीं... प्रेग्नेंट होने के बाद मेरी चूत हमेशा गीली रहती है... भैया को तो फुर्सत ही नहीं," उन्होंने धीमी, कामुक आवाज में कहा।

मैंने हिम्मत करके उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उन्हें अपनी तरफ खींचा। भाभी का गर्म सांस वाला मुँह मेरे मुँह के पास आ गया। मैंने झुककर उनके गुलाबी होंठों को चूम लिया। भाभी ने भी जोर से जवाब दिया। हमारी जीभें एक-दूसरे में लिपट गईं।

कुछ देर किसिंग के बाद भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाया, "देवर जी... आज रात तुम मेरे पति हो... मेरी सारी प्यास बुझा दो... मेरी गर्भवती चूत को ठंडा कर दो..."

मैंने भाभी को उठाकर बेडरूम में ले गया। लाइट हल्की रखी। भाभी बेड पर लेट गईं। मैंने उनका नाइट सूट ऊपर चढ़ाना शुरू किया। उनके भारी-भरकम 38 साइज के गोरे स्तन ब्रा में कैद थे। प्रेग्नेंट होने की वजह से निप्पल गुलाबी और बड़े हो गए थे।

मैंने ब्रा का हुक खोला। दोनों स्तन छूटते ही उछल पड़े। मैंने एक स्तन को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। भाभी की कमर अकड़ गई।

"आह्ह्ह... विक्रम... धीरे... लेकिन जोर से चूसो... दूध पीने का मन कर रहा है ना तुम्हें?" मैंने दोनों स्तनों को बारी-बारी चूसा, दबाया, चाटा। भाभी कराह रही थीं। उनके हाथ मेरे बालों में थे।

फिर मैंने उनका पजामा नीचे उतारा। भाभी ने कोई पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी गोरी, मोटी जांघों के बीच गर्भवती चूत पूरी तरह भीगी हुई थी। छोटे-छोटे बालों के साथ फूली हुई लाल चूत देखकर मेरा लंड फटने को तैयार था।

मैंने उनकी जांघें फैलाईं और चूत पर मुंह रख दिया। जीभ से क्लिटोरिस चाटते ही भाभी जोर से चीखीं – "आआआह्ह्ह... देवर जी... वहाँ... हाँ... चूसो अपनी भाभी की चूत को...!"

मैंने 10 मिनट तक उनकी चूत चाटी। भाभी दो बार झड़ चुकी थीं। उनका गर्म पानी मेरे मुँह में आ रहा था। अब भाभी अधीर हो गईं। उन्होंने मेरा पजामा खींचा और मेरा 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। आँखें फैलकर बोलीं, "वाह... इतना मोटा और खड़ा... आज इसने मेरी चूत फाड़ देनी है..."

भाभी ने बैठकर मेरा लंड मुंह में ले लिया। गर्म, गीले मुँह में लंड लेते ही मैं सिहर गया। वे पूरा लंड मुंह में लेने की कोशिश कर रही थीं। उनकी जीभ लंड के सुपाड़े पर घूम रही थी।

कुछ देर चूसने के बाद भाभी लेट गईं और बोलीं, "अब डाल दो देवर जी... अपनी गर्भवती भाभी की चूत में... धीरे से... पेट का ध्यान रखना..." मैंने उनकी जांघों के बीच घुटनों के बल बैठकर लंड की नोक उनकी चूत पर रखी और धीरे से धक्का मारा।

"आआआह्ह्ह... विक्रम... धीरे... बड़ा मोटा है... फट जाएगी मेरी चूत..." धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गर्म, भीगी चूत में चला गया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। मैंने रुक-रुक कर धीमी गति से चोदना शुरू किया। उनके बड़े पेट को देखकर मुझे और जोश आ रहा था।

धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। भाभी अब पूरी तरह पागल हो गई थीं – "जोर से... और जोर से पेलो देवर जी... फाड़ दो अपनी भाभी की चूत... हाँ... यही... आह्ह्ह... मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज...!"

मैंने उन्हें कुत्ते की姿 में किया। उनकी मोटी गांड ऊपर थी। मैंने लंड अंदर डाला और जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। भाभी तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थीं। उस रात मैंने भाभी को 4 बार चोदा।

पहली बार मिशनरी में, दूसरी बार doggy में, तीसरी बार भाभी ऊपर बैठकर, और चौथी बार सुबह होने से पहले side position में। हर बार भाभी झड़ रही थीं। आखिरी राउंड में मैंने उनकी चूत के अंदर ही अपना सारा माल छोड़ दिया।

"ले लो भाभी... तुम्हारे बच्चे के भाई का बीज..." भाभी थकी हुई, लेकिन खुश मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा, "देवर जी... अब भैया जब तक नहीं आएंगे, तुम रोज मेरी चूत की सेवा करोगे... समझे?"

अगली सुबह जब मैं उठा तो भाभी बेड पर ही लेटी हुई थीं। उनकी नंगी गोरी देह चादर से आधी ढकी हुई थी। बड़े-बड़े स्तन एक तरफ लुढ़के हुए थे और निप्पल अभी भी सूजे हुए थे। कल रात की चुदाई के निशान उनकी गर्दन, छातियों और जांघों पर हल्के लाल चमक रहे थे।

मैं बेड के पास गया। भाभी ने आँखें खोलीं और मुस्कुराईं। "गुड मॉर्निंग देवर जी... कल रात तुमने अपनी भाभी को अच्छे से ठोका... लेकिन अभी भी मेरी चूत में आग लगी हुई है..."

उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और मुझे बेड पर खींच लिया। सुबह-सुबह ही उनकी भूख जाग चुकी थी। भाभी ने मेरे लंड को पकड़कर हिलाना शुरू किया। कुछ ही देर में वो खड़ा हो गया।

"आज मैं ऊपर बैठकर चुदूंगी... तुम आराम से लेट जाओ," भाभी ने कहा। वे मेरे ऊपर चढ़ गईं। उनका गोल-मोटा गर्भवती पेट मेरे पेट से टकरा रहा था। भाभी ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी भीगी चूत पर रखकर धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा लंड एक बार में अंदर चला गया। "आआह्ह्ह... कितना गहरा जा रहा है आज..." भाभी ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा।

फिर उन्होंने धीमी गति से ऊपर-नीचे होना शुरू किया। उनके भारी स्तन उछल-उछल कर मेरे मुँह के पास आ रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़कर जोर से चूसना शुरू किया। भाभी की रफ्तार बढ़ती गई।

"हाँ देवर जी... चूसो इनको... ये तो तुम्हारे ही बच्चे के लिए दूध बना रहे हैं... आह्ह्ह... जोर से पेलो नीचे से..." मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। भाभी की चूत मेरे लंड को पूरा निचोड़ रही थी। कुछ देर बाद भाभी झड़ गईं। उनका गर्म पानी मेरे लंड पर बह गया।

लेकिन भाभी रुकी नहीं। उन्होंने मुझे घुटनों के बल खड़ा किया और खुद चारों पैरों पर हो गईं। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। गर्भवती पेट नीचे लटक रहा था।

"अब गांड भी मार दो देवर जी... कल रात तो सिर्फ चूत मारी थी... आज मेरी गांड की प्यास बुझाओ..." मैंने थूक लगाकर अपनी उंगलियाँ उनकी टाइट गांड के छेद में डालीं। भाभी सिहर उठीं। फिर मैंने लंड की नोक रखी और धीरे से दबाया।

"उफ्फ्फ... धीरे... दर्द हो रहा है... लेकिन रुकना मत... फाड़ दो अपनी भाभी की गांड..." धीरे-धीरे आधा लंड अंदर चला गया। भाभी दर्द और मजे के मिश्रण में चीख रही थीं। मैंने रुककर उनकी कमर पकड़ी और पूरा लंड अंदर ठेल दिया।

"आआआह्ह्ह मर गई... देवर जी... मार डाला... अब जोर से चोदो..." मैंने उनकी गांड को जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। भाभी का पूरा शरीर हिल रहा था। उनके स्तन नीचे लटककर झूल रहे थे। मैंने आगे झुककर एक हाथ से उनका स्तन दबाया और दूसरे हाथ से क्लिटोरिस रगड़ने लगा।

"हाँ... हाँ... ऐसे ही... मैं तुम्हारी गर्भवती रंडी हूँ... रोज चोदना मुझे... आह्ह्ह... फिर से आ रहा है..." भाभी तीसरी बार झड़ गईं। मैं भी अपनी हद पर था। मैंने उनकी गांड के अंदर ही अपना सारा माल छोड़ दिया।

दोनों थककर लेट गए। भाभी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनके हाथ मेरे लंड को सहला रहे थे। "विक्रम... भैया आने वाले हैं 4 दिन बाद... इन 4 दिनों में तुम मुझे जितना मर्जी चोदना... मैं तुम्हारी हूँ... सुबह-शाम-रात... किचन में, बाथरूम में, बालकनी में... जहां भी मन करे..."

मैंने उनकी गोरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा, "ठीक है भाभी... लेकिन अब से तुम घर में सिर्फ मेरे सामने नंगी घूमोगी... ब्रा-पैंटी बिल्कुल नहीं..." भाभी शरमाकर मेरे सीने में मुँह छिपा गईं, लेकिन उनके चेहरे पर संतोष और वासना दोनों थे।

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Suraj Kumar
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