पापा गए तो माँ को पूरी रात चोदा
पापा 2 दिन के टूर पर गए… और बेटे ने जवान, गोरी, भरी-भरी चुचियों वाली माँ को दोनों रातें फाड़ डाली। पहले दिन कंडोम लगाकर, दूसरी रात बिना कंडोम के 5 घंटे लगातार दोनों छेद खोल दिए।

रात का अंधेरा कमरे में गहरा था। पंखे की धीमी आवाज़ के अलावा सन्नाटा था। बाईस साल का आर्यन अपने बेड पर लेटा हुआ था, लेकिन नींद कहीं दूर थी। दिमाग में सिर्फ माँ की तस्वीर घूम रही थी—अड़तीस साल की, गोरी चमकदार त्वचा, भरी-भरी छाती, टाइट और गोल चुचियाँ जो हमेशा ब्लाउज़ में ज़ोर से दबाई रहतीं, और हल्की उठी हुई गाँड जो साड़ी के नीचे से भी साफ दिखती थी। शरीर इतना जवान और भरा हुआ कि देखने वाले की साँसें अटक जाएँ।
पापा दो दिन के ऑफिस टूर पर बाहर गए थे। घर में सिर्फ माँ और आर्यन थे। पिछले कई महीनों से आर्यन रोज माँ को चुपके से देखता रहता था—जब वो रसोई में झुकतीं, जब साड़ी ठीक करतीं, जब नहाने के बाद गीले बालों के साथ निकलतीं। आज रात कुछ अलग था।
आर्यन चुपके से माँ के कमरे के दरवाज़े के पास गया। दरवाज़ा आधा खुला था। अंदर हल्की लाइट जल रही थी। माँ बिस्तर पर लेटी हुई थीं। साड़ी की पल्लू छाती से नीचे खिसकी हुई थी। एक हाथ से उन्होंने अपनी चूत पकड़ी हुई थी और दो उँगलियाँ अंदर-बाहर कर रही थीं। चूत से पतला रस निकल रहा था, जाँघों पर चमक रहा था। माँ की साँसें तेज़ थीं, आँखें बंद, होंठ काटे हुए। “आह… हम्म…” हल्की आवाज़ें निकल रही थीं।
आर्यन का लंड तुरंत सख्त हो गया। वो चुपके से अंदर घुस गया और दरवाज़ा बंद कर दिया। माँ की आँखें खुल गईं। डर और शर्म दोनों उनके चेहरे पर थे।
“आर्यन… तू… यहाँ क्या कर रहा है?” आवाज़ काँप रही थी।
आर्यन ने धीरे से पास जाकर बिस्तर के किनारे बैठ गए। “माँ… मैं रोज देखता हूँ तुम्हें। आज पापा नहीं हैं… मुझे रोक मत। मैं तुम्हें चाहता हूँ।”
माँ ने चेहरा घुमा लिया। “पागल मत हो… मैं तेरी माँ हूँ…”
आर्यन ने उनका चेहरा पकड़कर अपनी तरफ किया और गहरी चुम्बन दे दी। जीभ अंदर तक घुसा दी। माँ पहले झिझकीं, फिर धीरे-धीरे जवाब देने लगीं। चुम्बन लंबा और गहरा होता गया। आर्यन का हाथ उनकी कमर पर था, फिर पीछे जाकर गाँड को मजबूती से दबाया।
वो माँ को पलटकर पेट के बल लिटा दिया। साड़ी को कमर तक ऊपर खींच लिया। नीचे सिर्फ पेटीकोट था। आर्यन ने पीछे से बैठकर दोनों हाथ आगे बढ़ाए और भरी-भरी चुचियों को थाथ में भर लिया। ब्लाउज़ के ऊपर से ही जोर-जोर से दबाने लगा। चुचियाँ नरम और भारी थीं, निप्पल पहले से ही सख्त।
“ब्लाउज़ खोल…” आर्यन ने फुसफुसाया।
माँ ने कुछ नहीं कहा। आर्यन ने हुक खोले और ब्लाउज़ तथा ब्रा दोनों उतार दिए। गोरी, बड़ी, टाइट चुचियाँ बाहर आ गईं। आर्यन ने दोनों हाथों से उन्हें मजबूती से थामा, निप्पल को उँगलियों के बीच दबाकर मसलने लगा। माँ की कमर हिलने लगी।
फिर आर्यन ने पेटीकोट और चड्डी एक साथ नीचे सरका दी। जाँघें फैला दीं। चूत पहले से गीली थी, बालों को एक तरफ करके उँगलियाँ अंदर डाल दीं। दो उँगलियाँ धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रस की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी।
एक हाथ से चुची दबाता रहा, दूसरे से फिंगरिंग करता रहा। फिर माँ को पलटकर अपनी तरफ किया। अपना लंड निकाला—मोटा, सख्त, नसों से भरा। माँ की आँखों के सामने लाकर मुँह के पास रखा।
“मुँह खोल माँ…”
माँ ने झिझकते हुए मुँह खोला। आर्यन ने लंड को अंदर धकेल दिया, गले तक। माँ की आँखों में पानी आ गया, लेकिन उन्होंने चूसा। लार बहने लगी। आर्यन ने लंड निकाला और लार को माँ की गाँड और चूत के छेद पर लगा दिया, फिसलन के लिए।
माँ ने हांफते हुए कहा, “कंडोम लगा… जो कभी-कभी तेरे पापा लगाते हैं… वरना मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी…”
आर्यन ने दराज से कंडोम निकाला, पहना और माँ की जाँघें फैलाकर उनके ऊपर चढ़ गया। चूत के मुँह पर लंड रखकर धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। माँ की चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से आसानी से अंदर चला गया। पूरा अंदर जाने तक माँ की आँखें बंद थीं, मुँह से कराह निकल रही थी।
आर्यन ने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। चुचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा, काटने लगा। कमर जोर-जोर से हिलाई। पलंग की चरचर आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। माँ के नाखून आर्यन की पीठ पर गड़ गए।
“आह… आर्यन… धीरे… बहुत जोर से…”
लेकिन आर्यन रुकने वाला नहीं था। वो गहरी चोदता रहा—कभी तेज, कभी धीमा, कभी पूरा बाहर निकालकर फिर एक झटके में अंदर। माँ का शरीर काँप रहा था। दोनों के पसीने मिल गए थे। गोरी त्वचा पर लाल निशान पड़ने लगे थे।
बहुत देर तक चोदने के बाद आर्यन ने कंडोम के अंदर ही झड़ दिया। लंड चूत के अंदर ही धड़कता रहा। माँ भी उसी समय झड़ गईं, चूत सिकुड़-सिकुड़ कर रस छोड़ रही थी।
आर्यन लंड अंदर ही रखे हुए माँ के ऊपर लेटा रहा। दोनों की साँसें तेज थीं। माँ ने आँखें खोलीं तो उनमें शर्म और सुकून दोनों थे।
“कल रात… फिर…” आर्यन ने फुसफुसाया।
माँ ने कुछ नहीं कहा, बस आर्यन के बालों में हाथ फेर दिया।
अगली रात। पापा अगले दिन सुबह लौटने वाले थे। घर फिर से सिर्फ दोनों का था। आर्यन ने पूरे दिन इंतज़ार किया। रात के लगभग ग्यारह बजे वो माँ के कमरे में गया। माँ बिस्तर पर लेटी हुई थीं—सिर्फ ब्रा और चड्डी में। गोरी त्वचा पर हल्की रोशनी पड़ रही थी। भरी-भरी चुचियाँ ब्रा से बाहर निकलने को तैयार थीं, और हल्की उठी हुई गाँड चड्डी में टाइट दिख रही थी।
आर्यन ने दरवाज़ा बंद किया और कपड़े उतार दिए। लंड पहले से सख्त और मोटा था। माँ ने उसे देखा तो आँखें बड़ी हो गईं।
“आर्यन… आज मत… कल पापा आ रहे हैं… और कल रात बहुत हो चुका…”
आर्यन ने जवाब नहीं दिया। सीधा उनके ऊपर चढ़ गया। मुँह से ब्रा का हुक खोला और बड़ी-बड़ी चुचियाँ बाहर निकाल लीं। दोनों को मुँह में भर-भर कर चूसने लगा, दाँत से हल्के-हल्के काटा। माँ की कमर अपने-आप उठने लगी।
“नहीं… छोड़… कंडोम तो लगा…” माँ ने कमज़ोर आवाज़ में कहा।
आर्यन ने चड्डी को एक झटके में नीचे खींच लिया और जाँघें फैला दीं। बिना किसी रुकावट के अपना मोटा लंड चूत के मुँह पर लगाया और एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया—सीधा पेट तक। माँ की चीख निकल गई।
“आह्ह्ह… इतना अंदर… रुको… बहुत गहरा…”
आर्यन ने दोनों हाथों से उनके कंधे दबाए और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के में लंड पूरा बाहर निकलता और फिर पूरा पेट तक अंदर चला जाता। चूत की दीवारें फैल रही थीं। आर्यन की कमर तेज़ गति से हिल रही थी। पलंग जोर-जोर से चरचरा रहा था।
माँ बार-बार मना कर रही थीं—“आर्यन… छोड़… कंडोम लगा… मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी… पापा आ रहे हैं…” लेकिन आर्यन नहीं रुका। वो और तेज़ चोदने लगा। चुचियों को दोनों हाथों से मसल रहा था, निप्पल को उँगलियों से घुमा रहा था। कभी-कभी झुककर चुचियों को मुँह में लेकर जोर से चूस लेता।
लगभग आधे घंटे लगातार चोदने के बाद आर्यन ने लंड निकाला। माँ की चूत पूरी तरह खुली और लाल हो चुकी थी, रस बह रहा था। आर्यन ने माँ को पेट के बल पलट दिया। गाँड को ऊपर उठाया और दोनों गालों को फैलाया। पहले लार थूककर छेद पर लगाई, फिर धीरे-धीरे अपना लंड गाँड में धकेलने लगा।
“नहीं… वहाँ मत… दर्द होगा…” माँ चीखीं।
लेकिन आर्यन ने धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। फिर जोर-जोर से गाँड चोदने लगा। एक हाथ से आगे जाकर चूत में उँगलियाँ डाल दीं। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। माँ का शरीर काँप रहा था, मुँह से सिर्फ कराह निकल रही थी।
आर्यन ने करीब एक घंटे तक गाँड चोदी, फिर वापस चूत में डाल दिया। इस बार और rough। माँ को घुटनों के बल बैठाया, बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और पीछे से जोर-जोर से धक्के मारे। हर धक्के में माँ की चुचियाँ हवा में झूल रही थीं।
रात के दो बज चुके थे। आर्यन थकता नहीं दिख रहा था। वो माँ को अलग-अलग पोजीशन में ले जा रहा था—कभी मिशनरी में पूरा वजन डालकर, कभी साइड से जाँघ उठाकर, कभी माँ को ऊपर बैठाकर खुद नीचे लेटकर। हर बार लंड पूरा पेट तक अंदर जाता। माँ की चूत और गाँड दोनों अब पूरी तरह खुल चुके थे, लाल और सूजे हुए। रस और पसीना बिस्तर पर फैल चुका था।
माँ बार-बार कह रही थीं—“बस कर… अब और नहीं… दर्द हो रहा है… कल पापा आएँगे…” लेकिन आर्यन उनकी बात अनसुनी करके और जोर से चोदता रहा।
रात के लगभग चार बजे आर्यन ने आखिरी राउंड शुरू किया। माँ को फिर से पेट के बल लिटाया, गाँड ऊपर उठाई और दोनों छेद बारी-बारी से चोदने लगा—कभी चूत, कभी गाँड। गति इतनी तेज़ थी कि माँ की आवाज़ भी काँप रही थी। आखिर में आर्यन ने लंड चूत के अंदर गहराई तक दबाया और जोर से झड़ गया। गर्म माल सीधा अंदर उड़ेल दिया। माँ की चूत सिकुड़-सिकुड़ कर सारा माल अंदर ले रही थी।
आर्यन ने लंड बाहर नहीं निकाला। अंदर ही रखे हुए लेटा रहा। माँ का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था। चूत और गाँड दोनों लाल, सूजे और खुले हुए थे। बिस्तर गीला था।
पाँच घंटे से ज़्यादा लगातार भारी सेक्स के बाद दोनों थककर सो गए। आर्यन का हाथ अभी भी माँ की चुची पर था।
सुबह पापा आने वाले थे। लेकिन उस रात माँ की दोनों जगहें इतनी इस्तेमाल हुई थीं कि चलते समय भी दर्द हो रहा था।

