“पापा आज पूरी रात चोदो” - बेटी खुद नंगी होकर पापा के बिस्तर पर आ गई
बेटी खुद नंगी होकर पापा के बिस्तर पर आ गई और बोली “पापा आज पूरी रात चोदो”। पहली बार की टाइट चूत में दर्द के बावजूद पापा ने नहीं छोड़ा। फिर रोज अलग-अलग कपड़ों में बुरी तरह चोदने लगे। पूरी गर्म कहानी अभी पढ़ो।
अनन्या 22 साल की थी। गोरी रंगत, बड़ी-बड़ी गोल चूचियाँ, चौड़ी और भारी गाँड, पतली कमर और लंबी टाँगें। बॉडी ऐसी थी कि कपड़े पहनने के बाद भी सब कुछ साफ झलकता था। कॉलेज में लड़के पीछे पड़े रहते थे, लेकिन अनन्या को किसी में दिलचस्पी नहीं थी। उसका मन अपने ही पापा पर अटक चुका था।
पापा 48 साल के थे। पत्नी के जाने के बाद अकेले ही बेटी के साथ रहते थे। वे अपनी ही बेटी को देखकर पागल होते जा रहे थे। कई बार उन्होंने कोशिश की। कभी सोफे पर बैठे-बैठे हाथ उसकी जांघ पर रख दिया, कभी पीछे से खड़े होकर उसकी गाँड को हल्के से छू लिया, कभी रात को उसके कमरे में जाकर बिस्तर के पास खड़े हो गए। लेकिन हर बार हिम्मत जवाब दे जाती। अनन्या भी समझती थी। वह जानती थी कि पापा उसे चाहते हैं। और धीरे-धीरे वह खुद भी उन्हें चाहने लगी थी।
एक रविवार की दोपहर। घर में सिर्फ दोनों थे। अनन्या ने जानबूझकर एक छोटी सी टॉप और टाइट शॉर्ट्स पहन रखी थी। शॉर्ट्स उसकी चौड़ी गाँड पर ऐसे चिपके थे कि आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था। वह पापा के कमरे में चली गई। पापा बिस्तर पर लेटे फोन देख रहे थे। अनन्या उनके पास जाकर बैठ गई। फिर धीरे से उनकी गोद में लेट गई।
पापा की साँस रुक गई। “अनन्या… ये क्या…?”
अनन्या ने उनका हाथ पकड़ा और अपनी बड़ी चूची पर रख दिया। “पापा… आज छू लो। जितना मन करे छू लो।”
पापा का हाथ काँप रहा था। उन्होंने पहले हल्के से दबाया, फिर जोर से मसलने लगे। अनन्या की साँसें तेज हो गईं। वह उनकी गर्दन में मुँह रखकर बोली, “आज रात मुझे चोदना है पापा… पहली बार… आप ही चोदो।”
पापा ने उसका चेहरा अपने करीब किया और होठों पर होठ रख दिए। चुंबन तुरंत गहरा हो गया। उन्होंने अनन्या का टॉप उतार दिया। उसकी बड़ी-बड़ी गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। पापा ने एक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगे। दूसरी को हाथ से मसल रहे थे। अनन्या कराह रही थी।
फिर पापा ने उसके शॉर्ट्स और पैंटी दोनों खींचकर उतार दिए। अब अनन्या पूरी नंगी थी। उसकी चौड़ी गाँड और चिकनी चूत पापा के सामने थी। पापा ने उसकी टाँगें फैलाईं और उंगलियाँ अंदर डालीं। अनन्या पहले से गीली थी।
“अब लंड डालो पापा…” अनन्या ने खुद कहा।
पापा ने अपने कपड़े उतारे। उनका मोटा लंड बाहर निकला। उन्होंने उसे अनन्या की चूत पर रखा और धीरे से धक्का मारा। सिर्फ थोड़ा सा अंदर गया। अनन्या की आँखें फटी की फटी रह गईं।
“आह्ह्ह… दर्द हो रहा है पापा… निकालो…”
पापा रुके नहीं। उन्होंने उसकी टाँगें और फैलाईं और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। अनन्या जोर से चीख पड़ी। आँखों से आँसू आ गए। वह पापा की छाती पर मुक्के मारने लगी।
“दर्द हो रहा है… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…”
पापा ने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। “सह ले बेटा… थोड़ी देर में आदत हो जाएगी।”
अनन्या रो रही थी, लेकिन पापा रुकने वाले नहीं थे। वे धीरे-धीरे धक्के बढ़ाते गए। दर्द के साथ-साथ अनन्या को हल्का सा मजा भी आने लगा। उसकी कराहें बदलने लगीं। पापा ने उसकी बड़ी चूचियाँ मसलते हुए और जोर से चोदना शुरू कर दिया।
“आह्ह… अब… अब थोड़ा अच्छा लग रहा है पापा…” अनन्या ने आँसू पोंछते हुए कहा।
पापा ने उसकी टाँगें कंधों पर चढ़ा दीं और गहराई तक मारने लगे। अनन्या की चौड़ी गाँड हर धक्के के साथ काँप रही थी। थोड़ी देर बाद पापा ने उसे पलटा। अब अनन्या पेट के बल थी। पापा ने उसकी चौड़ी गाँड को दोनों हाथों से पकड़ा और पीछे से फिर से अंदर घुस गए। इस बार और जोर से।
अनन्या तकिया दबाए कराह रही थी। दर्द अब कम हो चुका था, मजा बढ़ रहा था। पापा ने उसके बाल पकड़कर सर पीछे खींचा और कान में कहा, “आज के बाद रोज चोदूँगा तुझे… अलग-अलग तरीके से।”
अनन्या ने सिर्फ कराह के साथ जवाब दिया। पापा ने उस रात सिर्फ उसकी चूत में ही अपना पानी छोड़ा। अनन्या थककर उनके नीचे गिर गई थी। उसके अंदर से पापा का पानी बह रहा था। पहली बार का दर्द अभी भी महसूस हो रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति थी।
पापा उसके पास लेट गए और उसकी गोरी पीठ सहलाते हुए बोले, “अब रोज होगा… तैयार रह।”
अनन्या ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। उस रात के बाद घर में सब कुछ बदलने वाला था।
पहली रात के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। अनन्या की चूत में अभी भी हल्का दर्द था, लेकिन उसके अंदर एक नई भूख जाग चुकी थी। पापा अब कोई संकोच नहीं कर रहे थे। वे जान गए थे कि बेटी अब उनकी है।
अगली सुबह अनन्या कॉलेज जाने की तैयारी कर रही थी। उसने टाइट जींस और छोटा टॉप पहन रखा था। जींस उसकी चौड़ी गाँड पर ऐसे चिपकी थी कि आधा हिस्सा बाहर झाँक रहा था। पापा ने पीछे से आकर उसकी गाँड दोनों हाथों से पकड़ ली।
“आज कॉलेज जाने से पहले थोड़ा ले लूँ,” पापा ने उसके कान में कहा।
अनन्या ने विरोध करने की कोशिश की, “पापा… लेट हो जाएगा…”
पापा ने उसकी जींस और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। उसे किचन की स्लैब पर झुका दिया और पीछे से एक ही धक्के में लंड अंदर डाल दिया। अनन्या की कराह निकल गई। पापा ने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्का इतना तेज था कि अनन्या की बड़ी चूचियाँ स्लैब से टकरा रही थीं। पापा ने पाँच-सात मिनट में ही अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
“अब कॉलेज जा… शाम को और लूँगा,” पापा ने उसके गाँड पर थप्पड़ मारते हुए कहा।
शाम को अनन्या कॉलेज से लौटी तो पापा पहले से घर पर थे। उन्होंने अनन्या को आते ही पकड़ लिया। उसकी कॉलेज की ड्रेस में ही उसे दीवार से सटा दिया। टॉप ऊपर किया, ब्रा हटाई और दोनों बड़ी चूचियों को मुँह में लेकर जोर से चूसने लगे। अनन्या के हाथ उनके बालों में थे।
पापा ने उसकी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी साइड में सरकाकर खड़े-खड़े ही लंड अंदर डाल दिया। अनन्या एक पैर ऊपर करके सह रही थी। पापा ने उसकी गाँड को दोनों हाथों से फैला रखा था और गहराई तक मार रहे थे। इस बार उन्होंने उसकी गाँड के छेद पर भी उंगली की। अनन्या का शरीर काँप रहा था।
रात को पापा ने उसे नंगी कर दिया। बिस्तर पर लिटाकर पहले उसकी चूत चोदी, फिर उसे घोड़ी बनाकर उसकी चौड़ी गाँड के छेद में लंड डाल दिया। अनन्या तकिया दबाए कराह रही थी। दर्द के साथ मजा भी आ रहा था। पापा ने दोनों छेदों में पानी छोड़ा।
तीसरे दिन अनन्या ने घर पर ही साड़ी पहन रखी थी। पतली रेशमी साड़ी, बिना ब्लाउज के। पापा ने उसे देखते ही सोफे पर खींच लिया। साड़ी का पल्लू हटाया और उसकी नंगी बड़ी चूचियों को मसलने लगे। फिर साड़ी ऊपर करके उसे अपनी गोद में बिठा लिया। अनन्या ने खुद लंड अपनी चूत में डाल लिया और कमर हिलाने लगी। पापा उसकी चूचियाँ चूस रहे थे।
उस दिन पापा ने उसे तीन बार चोदा। एक बार गोद में, एक बार पीछे से, और रात को उसके मुँह में। अनन्या के चेहरे और चूचियों पर पापा का पानी लगा हुआ था।
चौथे दिन पापा और भी बेकाबू हो गए। अनन्या शॉर्ट्स और टॉप में थी। पापा ने उसे बाल पकड़कर घुटनों के बल बिठाया और उसका मुँह चोदा। अनन्या की आँखों से आँसू आ रहे थे लेकिन वह मुँह नहीं हटा रही थी। फिर पापा ने उसे बिस्तर पर पेट के बल लिटाया, शॉर्ट्स साइड में सरकाए और उसकी गाँड के छेद में पूरा लंड डाल दिया। इस बार वे बहुत देर तक चोदते रहे। अनन्या की आवाज़ बैठ गई थी।
पापा उसके कान में बोले, “अब रोज ऐसे ही चोदूँगा… कभी साड़ी में, कभी जींस में, कभी नंगी। तेरी ये चौड़ी गाँड और बड़ी चूचियाँ अब सिर्फ मेरी हैं।”
अनन्या ने सिर्फ हाँफते हुए सिर हिलाया। “जो करना है करो पापा… मैं आपकी हूँ।”
उसके बाद हर दिन यही सिलसिला चलने लगा। सुबह कॉलेज से पहले, शाम को लौटते ही, रात को सोते समय। कभी किचन में, कभी सोफे पर, कभी बाथरूम में, कभी बिस्तर पर। पापा अनन्या को अलग-अलग कपड़ों में लेते। कभी टाइट जींस में, कभी छोटी स्कर्ट में, कभी नाइट ड्रेस में, कभी सिर्फ तौलिया लपेटे। कभी सिर्फ चूत, कभी गाँड, कभी दोनों, कभी मुँह।
धीरे-धीरे अनन्या की हिचक खत्म हो गई। वह खुद पापा के पास जाने लगी। कभी उनकी गोद में बैठकर लंड बाहर निकाल लेती, कभी रात को खुद नंगी होकर उनके बिस्तर पर चली जाती। घर में अब कोई संकोच नहीं बचा था। दोनों रोज़ सेक्स करते और एक साथ रहते।
पापा अक्सर कहते, “तेरी माँ के जाने के बाद पहली बार घर भरा-भरा लग रहा है।”
अनन्या उनकी छाती से चिपककर जवाब देती, “अब मैं कभी नहीं जाऊँगी पापा… आप रोज जितना चाहो चोदना।”
और पापा रोज़ चोदते… अलग-अलग तरीके से, अलग-अलग कपड़ों में, पूरी तरह अपनी बेटी को अपनी रंडी बनाते हुए।
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