पड़ोसन भाभी को अपनी रंडी बना लिया - रियल सेक्स स्टोरी
पड़ोस की अकेली हॉट भाभी को मैंने अपनी पर्सनल रंडी बना लिया। उसके अकेलेपन को अपनी हवस से भर दिया और रात भर जमकर चोदा।
मेरा नाम विक्रम है, 24 साल। मैं दिल्ली के एक सोसाइटी में रहता हूँ। हमारे ठीक सामने वाले फ्लैट में राहुल भैया और उनकी पत्नी शीमा भाभी रहते हैं।
शीमा भाभी 29 साल की हैं। बहुत ही attractive औरत हैं — गोरा रंग, अच्छी हाइट, भरी हुई चूचियां और गोल भारी गांड। वो ज्यादातर सलवार सूट या घर पर हल्के नाइट सूट में रहती हैं। राहुल भैया जॉब के सिलसिले में अक्सर 15-20 दिन बाहर रहते हैं।
मैं भाभी के फ्लैट पर अक्सर आता-जाता रहता था। कभी उनके लिए सामान लाने, कभी वाईफाई शेयर करने, या बस बात करने। धीरे-धीरे हम दोनों की अच्छी बन गई थी। भाभी मुझे “विक्की” कहकर बुलाती थीं।
एक शाम मैं ऑफिस से घर लौटा। 8:30 बजे थे। मैंने ऊपर देखा तो भाभी के फ्लैट की लाइट जल रही थी। मैंने सोचा चाय पी लूं उनके यहां। मैंने ऊपर जाकर बेल मारी।
भाभी ने दरवाजा खोला। वो हल्के गुलाबी नाइट सूट में थीं। उनके बाल खुले हुए थे और चेहरा थोड़ा उदास लग रहा था। “आ जा विक्की, अंदर आ।”
मैं अंदर गया। भाभी ने मुझे सोफे पर बिठाया और चाय बनाने चली गईं। जब वो लौटीं तो मैंने देखा उनकी आँखें थोड़ी लाल थीं। “क्या हुआ भाभी? सब ठीक तो है?” मैंने पूछा।
भाभी ने लंबी सांस ली और बोली, “राहुल फिर 10 दिन के लिए सिंगापुर गया है। घर में अकेलापन बहुत लग रहा है विक्की।”
हम दोनों काफी देर तक बातें करते रहे। भाभी ने मुझे बताया कि राहुल भैया उन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। शारीरिक संबंध तो लगभग बंद ही हो गए हैं।
रात के 10:30 बज गए थे। मैं उठने लगा तो भाभी ने कहा, “अभी मत जा… थोड़ी देर और बैठ।”
मैं फिर बैठ गया। भाभी मेरे बगल में आईं और मेरे कंधे पर अपना सिर टिका दिया। उनका शरीर हल्का सा कांप रहा था। मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ नहीं छुड़ाया। मैंने धीरे से उनकी उंगलियों को सहलाया।
कुछ देर बाद मैंने उनका चेहरा अपनी तरफ किया और धीरे से उनके होंठों पर किस कर दिया। भाभी ने आँखें बंद कर लीं, लेकिन मुझे दूर नहीं किया।
फिर मैंने उन्हें अपनी गोद में खींच लिया। भाभी की नरम चूचियां मेरी छाती से दब रही थीं। मैंने उनका नाइट सूट का टॉप थोड़ा नीचे सरकाया और उनकी एक गोरी चूची बाहर निकाल ली।
मैंने धीरे-धीरे उसे चूसना शुरू कर दिया। भाभी की सांसें तेज हो गईं। उन्होंने मेरे बालों में हाथ फेरा और धीरे से बोलीं, “विक्की… ये गलत है… लेकिन बहुत दिनों बाद अच्छा लग रहा है…”
उस रात हम दोनों सिर्फ चुंबन, छूने और चूचियां चूसने तक ही रुके। लेकिन ये हमारे अफेयर की शुरुआत थी।
उस रात के बाद कुछ दिन तो सब नॉर्मल रहा। लेकिन अंदर ही अंदर दोनों में एक आग सुलगने लगी थी।
तीन दिन बाद राहुल भैया फिर से 12 दिन के लिए दुबई चले गए। शाम को 7 बजे भाभी ने मुझे मैसेज किया — “विक्की, ऊपर आ जाना। खाना बना रखा है।”
मैं ऊपर गया। भाभी ने उस दिन ब्लैक कलर का टाइट नाइट सूट पहना हुआ था, जो उनके शरीर को अच्छे से हाइलाइट कर रहा था। उनके बाल खुले हुए थे और हल्का मेकअप भी किया हुआ था।
खाना खाते समय भाभी चुप थीं। मैंने पूछा, “भाभी, आज कुछ परेशान लग रही हो?” भाभी ने कांपते हाथों से पानी का ग्लास रख दिया और बोलीं, “विक्की… वो रात के बाद से मुझे बहुत ग्लानि हो रही है। मैं शादीशुदा हूँ… ये गलत है।”
मैं चुप रहा। खाना खत्म होने के बाद भाभी सोफे पर बैठ गईं। मैं उनके पास गया और उनके कंधे पर हाथ रख दिया। भाभी ने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की, लेकिन मैंने नहीं हटाया।
अचानक भाभी फूट-फूट कर रो पड़ीं। “मैं बहुत अकेली हूँ विक्की… राहुल मुझे सिर्फ शादी का नाम दे रखा है। न तो प्यार करता है, न ही छूता है। मैं औरत हूँ… मेरी भी जरूरतें हैं।”
मैंने उन्हें अपनी गोद में खींच लिया। भाभी रोते हुए मेरी छाती से लग गईं। मैंने उनके आंसू पोंछे और धीरे से उनके होंठों को चूम लिया। इस बार भाभी ने भी जोर से जवाब दिया।
हम दोनों के बीच की दीवार पूरी तरह टूट चुकी थी। मैंने भाभी को उठाकर बेडरूम में ले गया। लाइट बंद कर दी। सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था। मैंने भाभी का नाइट सूट उतार दिया। वो अब सिर्फ काली पैंटी में थीं। उनकी भरी हुई चूचियां, पतली कमर और मोटी जांघें देखकर मेरा लंड फटने को तैयार था।
मैंने भाभी को बेड पर लिटाया। उनकी चूचियों को दोनों हाथों से दबाया और निप्पल को जोर-जोर से चूसने लगा। भाभी कराह रही थीं — “आह्ह्ह… विक्की… धीरे… बहुत दिनों बाद…”
मैं नीचे उतरा। उनकी पैंटी उतारी और जांघों को फैलाकर उनकी चूत को चाटने लगा। भाभी की चूत पहले से गीली थी। उन्होंने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाया और जोर से कराहने लगीं।
“हां… वहाँ… और जोर से…” कुछ देर चाटने के बाद मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा मोटा और खड़ा लंड बाहर आ गया। भाभी ने उसे देखा तो उनकी आँखों में डर और चाहत दोनों थे।
“विक्की… धीरे से डालना… बहुत दिनों से नहीं हुआ है।” मैंने भाभी की जांघों को अपने कंधों पर रखा और धीरे से अपना लंड उनकी चूत में दबाया। भाभी ने आँखें बंद करके जोर से कराहा — “आआह्ह्ह… उफ्फ… बड़ा है तेरा…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर कर लिया और रफ्तार बढ़ा दी। भाभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। कमरा उनकी आहों और चुदाई की आवाज से भर गया था।
मैंने उन्हें कई पोजीशन में चोदा — पहले मिशनरी में, फिर साइड में, और आखिर में doggy style में। उनकी गांड पकड़कर जोर-जोर से ठोका। भाभी बिल्कुल पागल हो गई थीं।
“चोद मुझे विक्की… और जोर से… मैं तेरी हूँ आज… आह्ह्ह!” आखिर में मैंने उनकी चूत के अंदर ही अपना सारा माल भर दिया। भाभी भी मेरे साथ झड़ गईं।
चुदाई के बाद भाभी मेरी छाती पर सिर रखकर लेटी रहीं। उनकी आँखों में आंसू थे। “विक्की… अब मैं तेरी हो गई हूँ… लेकिन ये राज हमेशा राज ही रहेगा।”
मैंने उनके बालों में हाथ फेरा और बोला, “जितनी बार चाहोगी, उतनी बार चोदूंगा भाभी।” उस रात हम दोनों नंगे ही सो गए। बाहर अंधेरा था, अंदर एक नया अंधेरा शुरू हो चुका था।
अगले 10 दिन राहुल भैया के बाहर रहने के दौरान हमारा अफेयर पूरी तरह से भड़क उठा। भाभी अब पूरी तरह बदल चुकी थीं। दिन में वो सामान्य रहतीं, लेकिन रात होते ही मेरे लिए बेकरार हो जातीं। वो खुद मुझे मैसेज करतीं — “विक्की, आज जल्दी आ जाना… बहुत याद आ रही है।”
एक रात मैं ऊपर गया तो भाभी ने दरवाजा खोलते ही मुझे अंदर खींच लिया। उन्होंने मुझे दीवार से सटा दिया और जोर-जोर से किस करने लगीं। उनके होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे।
“आज मुझे बहुत हार्ड चोदना विक्की… मुझे दर्द चाहिए,” भाभी ने फुसफुसाते हुए कहा। मैंने भाभी को उठाकर बेड पर फेंक दिया। उनका नाइट सूट फाड़कर उतार दिया। भाभी अब पूरी नंगी थीं। मैंने उनकी दोनों चूचियों को जोर से मसला, निप्पल काटे। भाभी दर्द से कराह रही थीं लेकिन रोक नहीं रही थीं।
मैंने उन्हें घुटनों के बल बैठाया और अपना लंड उनके मुंह में ठेल दिया। भाभी गले तक ले रही थीं। उनकी आँखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन वो रुक नहीं रही थीं।
“और गहरे… मेरा मुंह चोदो…” मैंने उनके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदा। फिर उन्हें बेड पर लिटाकर उनकी चूत और गांड दोनों में उंगलियां डालीं। भाभी तड़प रही थीं।
“विक्की… आज मेरी गांड भी ले ले… मैं सब कुछ देना चाहती हूँ आज।” मैंने शैंपू लगाकर अपनी उंगलियां उनकी गांड में डालीं। फिर अपना मोटा लंड उनकी गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया।
भाभी जोर से चीख पड़ीं — “आआह्ह्ह… फट जाएगी… धीरे… आह्ह्ह!” लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उनकी गांड की जमकर चुदाई की। भाभी दर्द और मजा दोनों से पागल हो रही थीं। उनके नाखून बेडशीट को फाड़ रहे थे।
मैंने उन्हें कई बार चोदा — कभी चूत में, कभी गांड में, कभी मुंह में। रात के 2 बजे तक लगातार चुदाई चलती रही। भाभी कई बार झड़ चुकी थीं। आखिरकार जब मैंने उनकी गांड में अपना माल भर दिया, तो भाभी थककर बेजान सी हो गईं। उनका पूरा शरीर मेरे वीर्य और पसीने से सना हुआ था।
लेकिन सबसे डार्क मोमेंट तब आया जब चुदाई के बाद भाभी रोने लगीं। “मैं क्या कर रही हूँ विक्की… मैं एक शादीशुदा औरत हूँ। अगर राहुल को पता चल गया तो… मैं मर जाऊंगी। लेकिन तेरे बिना भी नहीं रह पाती। मैं बुरी औरत बन गई हूँ…”
मैंने उन्हें चुप कराने की कोशिश की, लेकिन भाभी रोती रहीं। फिर अचानक उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया और बोलीं, “फिर भी… मुझे छोड़ मत देना। मैं अब तेरी हूँ। जितना मन करे, चोदो मुझे। मुझे दर्द दो, मुझे अपना बना लो।”
उसके बाद से हमारा रिश्ता और गहरा और डार्क हो गया। भाभी अब मेरी गुलाम बन चुकी थीं। वो दिन में सामान्य भाभी बनकर रहतीं, लेकिन रात में मेरी पूरी तरह से हवस की भूखी रंडी बन जातीं।
कभी-कभी वो खुद मुझे बोलतीं — “आज मुझे मार के चोद… मुझे लगता है मैं सजा पाने लायक हूँ।”
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