देवर ने भाभी को घर में अकेला पाकर पूरी रात चोदा - टाइट चूत और भारी गांड दोनों छेद भर दिए
देवर ने भाभी को घर में अकेला पाकर पूरी रात खूब चोदा। भाभी की टाइट चूत और भारी गांड के दोनों छेद भर दिए। भाभी भी पागल होकर चुदवाती रही।
नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो सुनते ही आपके शरीर में सनसनी दौड़ जाएगी। यह कहानी सिर्फ काल्पनिक नहीं, बल्कि कई घरों में छुपी हुई हकीकत है। देवर और भाभी के बीच का रिश्ता भारत में सबसे ज्यादा खतरनाक और मजेदार रिश्तों में से एक माना जाता है। और आज की कहानी उसी पर आधारित है।
मेरा नाम राहुल है। उम्र 24 साल। मैं दिल्ली के एक अच्छे मिडिल क्लास फैमिली से हूँ। मेरे बड़े भाई की शादी पिछले 3 साल पहले हुई थी। भाभी का नाम प्रिया है। उम्र सिर्फ 26 साल। लेकिन देखने में वो किसी 22 साल की लड़की जैसी लगती है। गोरी स्किन, बड़ी-बड़ी गोल चूचियाँ, पतली कमर और एकदम टाइट व भारी गांड। वो हमेशा टाइट जींस, कुर्ती या नाइटी पहनती थी जिसमें उसकी बॉडी के कर्व्स साफ नजर आते थे।
शुरुआत में मैं भाभी को सिर्फ सम्मान की नजर से देखता था। लेकिन धीरे-धीरे मेरी नजरें बदलने लगीं। जब भी भाभी घर में घूमती, उनकी गांड हिलती और चूचियाँ उछलती, तो मेरा लंड अपने आप खड़ा हो जाता। कई बार मैं बाथरूम जाकर खुद को संभालता।
एक दिन ऐसा मौका आया जो मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गया। भाई ऑफिस के काम से 2 दिन के लिए बाहर गए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। शाम को करीब 8 बजे भाभी किचन में खाना बना रही थीं। उन्होंने एक बहुत ही पतली और टाइट नाइटी पहन रखी थी। अंदर ब्रा और पैंटी तो थी, लेकिन नाइटी इतनी पतली थी कि उनकी चूचियों के निप्पल साफ दिख रहे थे और गांड का पूरा शेप निकल रहा था।
मैं टीवी हॉल में बैठा था। अचानक भाभी किचन से बाहर आईं और बोलीं, “राहुल, खाना तैयार है। आ जाओ।”
मैं उठा और किचन की तरफ बढ़ा। भाभी सिंक के पास खड़ी थीं। पीछे से उनकी गांड इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैं धीरे से उनके पीछे गया और दोनों हाथ उनकी कमर पर रख दिए।
भाभी चौंक गईं। “राहुल… क्या कर रहे हो?” मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “भाभी… बहुत दिनों से देख रहा हूँ आपको। आज भाई नहीं हैं… आज तो मैं आपको छोड़ने वाला नहीं हूँ।”
भाभी घबरा गईं। “राहुल छोड़ो… ये गलत है… मैं तुम्हारी भाभी हूँ…” लेकिन मैंने उनकी कमर और जोर से पकड़ ली। एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी बड़ी चूची पर रख दिया और जोर से दबाया। भाभी की सांसें तेज हो गईं।
“भाभी… आपकी चूचियाँ कितनी सॉफ्ट और बड़ी हैं… आज रात मैं इनका पूरा मजा लूंगा।”
भाभी विरोध कर रही थीं लेकिन उनका शरीर मेरे खिलाफ नहीं जा रहा था। मैंने उनकी नाइटी ऊपर कर दी और उनकी गांड को दोनों हाथों से जोर से मसला। फिर मैंने उनकी पैंटी साइड में की और अपनी उंगली उनकी चूत पर फेरने लगा। वो गीली हो चुकी थी।
“देखो भाभी… आपकी चूत कितनी गीली हो गई है… मतलब आपको भी चाहिए…”
भाभी शरमा गईं लेकिन कुछ बोल नहीं पाईं। मैंने उन्हें किचन की स्लैब पर झुका दिया और पीछे से अपना लंड उनकी गांड पर रगड़ने लगा। फिर धीरे से उनकी चूत में उंगली डाल दी। भाभी कराह उठीं – “आह्ह्ह… राहुल… मत करो…”
लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने अपनी जींस खोली और अपना 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। भाभी ने पीछे मुड़कर देखा और उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
मैंने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। भाभी की चूत बहुत टाइट थी। पूरा लंड अंदर जाते ही वो जोर से चीख पड़ीं। “आआह्ह्ह… राहुल… धीरे… बहुत मोटा है…”
मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उनकी बड़ी चूचियाँ स्लैब पर दब रही थीं और गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी। किचन में सिर्फ “पच-पच-पच” और भाभी की कराहें गूंज रही थीं।
मैंने लगभग 25 मिनट तक उन्हें किचन में ही चोदा। फिर मैंने उन्हें उठाया और बेडरूम में ले गया। वहाँ मैंने उनकी नाइटी पूरी उतार दी। अब भाभी पूरी तरह नंगी थीं। उनकी गोरी बॉडी, बड़ी चूचियाँ और टाइट गांड देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया।
मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और उनकी टांगें फैला दीं। फिर मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत चाटना शुरू किया। भाभी पागल हो गईं। वो मेरे बाल पकड़कर अपनी चूत मेरे मुँह में और जोर से दबाने लगीं। “आह्ह्ह… राहुल… और चाटो… उफ्फ्फ…”
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया। पीछे से उनकी गांड फैलाकर पहले चूत में फिर गांड में लंड डालने लगा। भाभी शुरू में दर्द से चीख रही थीं लेकिन बाद में खुद कमर हिलाने लगीं।
“राहुल… दोनों छेद में डालो… आज रात मुझे पूरी तरह चोदो…” रात भर मैंने भाभी को हर पोजीशन में चोदा। मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, स्टैंडिंग… सब कुछ। उनकी चूत और गांड दोनों में कई बार माल भरा। सुबह होते-होते भाभी पूरी तरह थककर बेहोश जैसी हो गई थीं। उनका पूरा शरीर पसीने और मेरे वीर्य से लथपथ था।
सुबह जब भाभी की आँख खुली तो वो शरमा गईं। लेकिन मैंने उन्हें चूमते हुए कहा, “भाभी… अब से जब भी भाई घर पर नहीं होंगे… तुम मेरी हो।” भाभी ने धीरे से सिर हिला दिया।
उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, मैं भाभी को चोदता। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी रात को भाई के सो जाने के बाद। भाभी अब खुद मुझे इशारे करने लगी थीं।
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती… दोस्तों, देवर-भाभी का रिश्ता कितना खतरनाक और मजेदार हो सकता है, ये आपने खुद पढ़ लिया।
अगर आपको यह स्टोरी पसंद आई हो तो कमेंट में जरूर बताएं। और हाँ, अगर आप चाहते हैं कि मैं इस कहानी का पार्ट 2 लिखूं जिसमें भाभी खुद देवर को सेड्यूस करती है, तो कमेंट में “पार्ट 2” लिख दें।
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