चाची को नेट कपड़े पहनाकर चूत गांड और चूची चोदी - रातभर चुदवाती रही
अकेली पड़ी सेक्सी चाची को नेट कपडे पहनाकर भतीजे ने बहुत चोदा। टाइट चूत, गांड और मुँह मे सुबह तक माल लबालब भर दी।

दिल्ली की गर्मी अलग ही लेवल की होती है। घर के अंदर भी पसीना छूटता है, और जब घर में कोई नया चेहरा आ जाए तो गर्मी और बढ़ जाती है।
राहुल के पापा ने अपने छोटे भाई को गाँव से बुला लिया था। छोटा चाचा नौकरी ढूँढने आए थे दिल्ली। साथ में उनकी नई-नवेली बीवी भी थी — सुनीता। शादी को अभी बस एक साल हुआ था। उम्र अट्ठाईस की। गाँव की सीधी-सादी, लेकिन दिखने में एकदम हॉट। गोरा रंग, गोल-मटोल चेहरा, और शरीर ऐसा कि साड़ी के अंदर भी छुप नहीं पाता था। भारी छातियाँ, पतली कमर, और कूल्हे इतने गोल कि चलते वक्त साड़ी लहराती रहती थी। पहली बार दिल्ली आई थी वो। शहर देख-देख के आँखें फटी रहती थीं।
पापा ने दोनों को अपने घर में ही जगह दे दी थी। जब तक चाचा को अच्छी जॉब नहीं मिल जाती, तब तक यहीं रहना था। बाद में अलग रूम ले लेना था।
सब कुछ नॉर्मल चल रहा था… जब तक कि वो फैमिली फंक्शन का मामला नहीं आ गया।
पापा-मम्मी और चाचा दो दिन के लिए बाहर जा रहे थे। कोई रिश्तेदार का engagment था शहर से थोड़ा दूर। राहुल और सुनीता घर पर अकेले रह गए।
सुबह पापा वाले निकल गए। घर में सन्नाटा छा गया।
दोपहर के आसपास राहुल अपने कमरे से निकला। टीशर्ट और लोअर में था। किचन में सुनीता खड़ी थीं। हल्की पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई थी। पल्लू थोड़ा सरक चुका था। उनकी पीठ की नाली और ब्रा का हुक साफ दिख रहा था। पसीने से गर्दन चमक रही थी।
राहुल की नजर वहीं अटक गई। वो धीरे से पास गया।
“चाची…”
सुनीता मुड़ीं। “हाँ बोलो राहुल। भूख लगी है क्या? खाना लगा दूँ?”
राहुल ने दीवार पर हाथ रखकर उन्हें थोड़ा सा घेर लिया। आँखों में शरारत थी।
“खाना बाद में। अभी कुछ और मन कर रहा है।”
सुनीता की भौंहें चढ़ गईं। “क्या मतलब?”
“मतलब ये,” राहुल ने धीरे से उनका पल्लू पूरा खींच लिया। साड़ी का ऊपरी हिस्सा ढीला पड़ गया। अंदर क्रमी कलर की ब्रा थी, जो उनकी भारी छातियों को मुश्किल से समेट पा रही थी। कप के ऊपर से आधा निप्पल लगभग निकल चुका था।
सुनीता झटके से पीछे हटीं। “राहुल! ये क्या कर रहा है तू? पागल हो गया है क्या?”
“पागल तो तेरे इस शरीर ने बना दिया है चाची,” राहुल ने धीमी आवाज में कहा। “गाँव से आई हो, शादी को एक साल हुआ है… और इतना हॉट शरीर लेकर घूम रही हो। सोचती हो मैं कंट्रोल में रहूँगा?”
सुनीता का चेहरा लाल हो चुका था। “ये गलत बात है… मैं तेरी चाची हूँ… छोड़ मुझे…”
लेकिन उनकी आवाज में उतना जोर नहीं था। राहुल ने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ ली और पास खींच लिया। उसका लंड पहले से ही लोअर में तना हुआ था, और वो सुनीता की जाँघ से छू रहा था।
“गलत है तो क्यों तेरी साँसें तेज हो गईं?” राहुल ने ब्रा के ऊपर से ही उनकी छाती दबाई। “फुक्क… कितनी सॉफ्ट और भारी हैं ये। चाचा इन्हें रोज ऐसे दबाते होंगे?”
“मत बोल ऐसे… आह…” सुनीता की आँखें बंद हो गईं जब राहुल ने ब्रा का हुक खोल दिया। भारी छातियाँ झूलते हुए बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल खड़े थे। राहुल ने तुरंत मुँह लगा लिया। एक को जोर से चूसने लगा, दूसरी को हाथ से मसलने लगा। जीभ घुमा-घुमा कर निप्पल को चाटने लगा, हल्के दाँतों से काटने लगा।
सुनीता का हाथ अपने आप उसके बालों में चला गया। “राहुल… बहुत सिहरन हो रही है यार… छोड़…”
राहुल नीचे उतर आया। साड़ी और पेटीकोट एक साथ खींचकर नीचे गिरा दिए। अंदर सफेद पैंटी थी, जाँघों के बीच पूरी गीली हो चुकी थी। उसने पैंटी को एक तरफ सरकाया और जीभ से सीधा लंबा चाट लिया।
“मम्म… क्या स्वाद है चाची का,” उसने नीचे से कहा। “चाचा को ये रोज मिलता होगा क्या?”
सुनीता दोनों हाथों से उसका सिर दबाए हुए थीं। उनकी कमर अपने आप आगे को धकेल रही थी। राहुल ने दो मोटी उँगलियाँ अंदर डाल दीं और जोर-जोर से चलाने लगा। साथ में जीभ भी छेद के ऊपर घूम रही थी।
“आह्ह्ह… अंदर तक जा रही है… राहुल रुक जा यार…”
थोड़ी देर बाद राहुल खड़ा हुआ। लोअर नीचे किया। उसका लंड पूरा बाहर आ गया — मोटा, लंबा, नसों से भरा हुआ। सुनीता की नजर वहाँ गई तो उनकी साँस अटक गई।
“इतना… मोटा?”
राहुल मुस्कुराया। “अब इसे अंदर ले ले चाची।”
उसने उन्हें किचन की स्लैब पर ही लिटा दिया। दोनों टाँगें फैलाईं और लंड उनके गीले छेद पर लगाकर धीरे-धीरे धकेलने लगा।
“आह्ह्ह्ह… धीरे कर… पूरा अंदर जा रहा है… दर्द हो रहा है राहुल…”
“दर्द सह ले… थोड़ी देर में मजा आने लगेगा,” कहते हुए उसने पूरा अंदर तक घुसा दिया। फिर धक्के लगाने लगा। पहले धीरे, फिर जोर से।
सुनीता की भारी छातियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं। राहुल उन्हें दोनों हाथों से दबा-दबा कर चूस रहा था। थोड़ी देर बाद सुनीता खुद कमर उठाने लगीं।
“जोर से… और जोर से मार…”
राहुल ने रफ्तार बढ़ा दी। स्लैब पर थप-थप की आवाज गूँजने लगी। घर में सिर्फ मांस की आवाज और सुनीता की सिसकियाँ थीं।
लगभग एक घंटे तक लगातार चलाया। फिर लंड बाहर निकाला और उनके मुँह के पास ले गया।
“चाची, इसे साफ कर दे थोड़ा।”
सुनीता ने शर्माते हुए जीभ निकाली। राहुल ने पूरा मुँह में ठूस दिया। उनकी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उन्होंने चूसना शुरू कर दिया। राहुल उनके बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुँह चोदने लगा। थूक मुँह से बाहर निकल रहा था।
फिर वापस चूत में डाल दिया। इस बार और जबरदस्त। सुनीता की चीखें निकलने लगीं।
“राहुल… मत चोद इतना जोर से… तुम तो अपने चाचा के पहले ही मुझे प्रेग्नेंट कर दोगे…”
राहुल हँसते हुए बोला, “कोई बात नहीं चाची। अगर चाचा तुझे बच्चा नहीं दे पा रहे तो मैं ही दे दूँगा। मोटा-ताजा बेटा पैदा करूँगा तेरे पेट से।”
सुनीता की आँखें फटी रह गईं, लेकिन उनका शरीर और ज्यादा गीला हो गया।
उस दोपहर और शाम को राहुल ने उन्हें तीन बार लिया। हर बार उनका छेद, पेट, छातियाँ और मुँह… सब जगह अपना माल भर दिया। आखिरी राउंड में जब वो राहुल के कमरे की चारपाई पर थे, तो सुनीता थक कर लगभग बेहोश सी हो चुकी थीं। शरीर पर पसीना और माल दोनों चिपके हुए थे।
रात को जब दोनों लेटे, तो सुनीता ने हांफते हुए कहा, “राहुल… गाँड मत करना… वो बहुत दर्द होता है… मैं मना करती हूँ…”
राहुल ने उनके गले पर धीरे से चुंबन लिया और मुस्कुराया।
“ठीक है चाची। आज नहीं। लेकिन कल रात… कल रात कुछ अलग प्लान है। मैं कुछ नेट वाले कपड़े मँगवाता हूँ। पहन के सोना तुझे।”
सुनीता की आँखों में डर और एक अजीब सी उत्तेजना दोनों साफ दिख रहे थे। उन्हें पता था कि कल रात और भी लंबी और जबरदस्त होने वाली है। और इस बार शायद वो मना भी नहीं कर पाएँगी।
अगली सुबह राहुल ने आँख खुलते ही फोन उठाया। कुछ देर सर्च करने के बाद उसने एक ऑनलाइन शॉप से ऑर्डर कर दिया — ब्लैक नेट का फुल सेट। बाडीसूट जैसा, बहुत पतला, लगभग पारदर्शी। साथ में मैचिंग थोंग भी। डिलीवरी उसी दोपहर तक लग गई।
सुनीता पूरे दिन शर्माती रही। कल रात वाली बात याद आते ही उनका चेहरा लाल हो जाता था। लेकिन जब राहुल ने वो पैकेट खोला और कपड़े निकाले, तो उनकी आँखें फैल गईं।
“ये… ये क्या है राहुल? मैं ये पहनूँगी?”
राहुल मुस्कुराया। “पहन। आज आखिरी रात है। कल सुबह सब आ जाएँगे। आज पूरा मजा लेना है।”
रात के नौ बजे सुनीता बाथरूम से निकलीं। ब्लैक नेट का वो सेट पहना हुआ था। कपड़ा इतना पतला था कि उनकी भारी गोरी छातियाँ, गुलाबी निप्पल, गोल पेट और जाँघों के बीच की चीज सब साफ दिख रही थी। थोंग जाँघों में खोया हुआ था। शरीर पर नेट का पैटर्न पड़ रहा था।
राहुल की नजर देखते ही लंड तन गया।
“फुक्क चाची… तुम तो मार ही डालोगी आज।”
वो उठकर गया और उन्हें कमर से पकड़ लिया। दोनों हाथों से नेट के ऊपर से ही छातियाँ दबाने लगा। निप्पल उँगली में लेकर मसलने लगा।
“कितनी हॉट लग रही हो… गाँव की छोकरी बन के आई थी, आज दिल्ली वाली रंडी लग रही हो।”
सुनीता शर्मा गईं लेकिन उनका शरीर काँप रहा था। “गंदी बात मत कर… और धीरे से…”
राहुल ने उन्हें बिस्तर पर धकेल दिया। खुद उनके ऊपर चढ़ गया। पहले नेट के ऊपर से ही दोनों छातियों को मुँह में लिया। कपड़े समेत चूसने लगा। थूक से नेट गीला हो गया। फिर नीचे गया। थोंग को एक तरफ सरकाया और जीभ से सीधा लंबा चाट लिया।
“मम्म… कल से भी ज्यादा गीली है आज।”
दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। जोर-जोर से चलाने लगा। सुनीता की कमर उछलने लगी।
“आह्ह्ह… राहुल… उंगली मत इतनी जोर से…”
थोड़ी देर बाद राहुल ने अपना लंड निकाला। सुनीता के मुँह के सामने ले जाकर थपथपाया।
“खा इसको अच्छे से। आज लंबी रात पड़ने वाली है।”
सुनीता ने मुँह खोला। राहुल ने पूरा अंदर तक ठूस दिया। बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदने लगा। थूक मुँह से निकल-निकल कर उनके गले और छातियों पर गिर रहा था। सुनीता की आँखों में आँसू आ गए लेकिन उन्होंने झेल लिया।
फिर राहुल ने उन्हें चारपाई पर लिटाया। दोनों टाँगें कंधों पर चढ़ाईं और एक झटके में पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… धीरे कर यार… पूरा अंदर तक जा रहा है…”
“आज धीरे नहीं चलेगा चाची,” राहुल ने कहा और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। नेट की बाडीसूट अभी भी उन पर थी। हर धक्के के साथ उनकी भारी छातियाँ हिल-हिल कर बाहर आने को हो रही थीं। राहुल नेट को ऊपर सरका कर दोनों निप्पल मुँह में ले लेता और जोर से चूसता।
एक घंटा… दो घंटा… लगातार चलता रहा। सुनीता की आवाज बैठने लगी। शरीर पसीने से तर हो चुका था। लेकिन राहुल रुकने वाला नहीं था।
बीच-बीच में लंड निकाल कर उनके मुँह में दे देता, फिर वापस चूत में मार देता। दो बार माल उनके अंदर ही छोड़ चुका था। पेट के ऊपर नेट चिपक गया था।
तीसरे घंटे में जब सुनीता लगभग ढीली पड़ चुकी थीं, तब राहुल ने उन्हें पेट के बल लिटा दिया। थोंग को एक तरफ किया और लंड उनकी गाँड के छेद पर लगा दिया।
सुनीता तुरंत सहम गईं। “नहीं राहुल… वहाँ मत करना… बहुत दर्द होगा… मैंने मना किया था…”
“आज आखिरी रात है चाची,” राहुल ने धीरे से कहा। “कल के बाद ये मौका फिर नहीं मिलेगा। थोड़ा सह ले।”
उसने थूक लगाकर पहले एक उंगली अंदर डाली। सुनीता की चीख निकल गई। फिर दूसरी उंगली। थोड़ी देर बाद लंड का सिरा लगाकर धीरे-धीरे धकेलने लगा।
“आह्ह्ह्ह्ह… निकल जा… बहुत दर्द हो रहा है… पूरा फट जाएगा…”
राहुल रुकता नहीं। धीरे-धीरे आधा अंदर तक ले गया। फिर पूरा। सुनीता के नाखून चादर में गड़ गए। आँखों से आँसू बह रहे थे। लेकिन कुछ देर बाद दर्द के साथ एक अजीब सा मजा भी मिलने लगा।
राहुल ने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से गाँड चोदने लगा। हर धक्के के साथ उनकी भारी छातियाँ बिस्तर से रगड़ खा रही थीं। नेट फटने को हो रहा था।
“चाची… कितनी टाइट है तेरी गाँड… चाचा ने कभी नहीं मारी होगी ना?”
सुनीता हांफते हुए बोलीं, “बस कर… मत बोल… और धीरे…”
लेकिन राहुल ने रफ्तार और बढ़ा दी। चार घंटे… साढ़े चार घंटे… वो लगातार मारता रहा। कभी चूत में, कभी गाँड में, कभी मुँह में। सुनीता कई बार झड़ चुकी थीं। शरीर काँप रहा था। आवाज भी नहीं निकल रही थी। लेकिन राहुल नहीं रुका।
सुबह के चार बज रहे थे जब उसने आखिरी बार गाँड में जोर से धक्का मारा और अपना पूरा माल उनके अंदर छोड़ दिया। फिर निकाला और बची हुई गिरावट उनकी पीठ और नेट वाले कपड़े पर फैला दी।
सुनीता बिस्तर पर ढीली पड़ी थीं। शरीर पर पसीना, थूक और माल की परत चढ़ी हुई थी। नेट का कपड़ा फटा हुआ और गीला। आँखें बंद थीं। साँसें तेज चल रही थीं।
राहुल उनके पास लेट गया। हाथ से उनकी गीली छाती सहलाते हुए बोला, “थक गई क्या चाची?”
सुनीता ने आँखें नहीं खोलीं। सिर्फ हल्के से सिर हिलाया।
“कल सुबह सब आ जाएँगे,” राहुल ने धीरे से कहा। “फिर ये सब बंद। लेकिन आज… आज तो मैंने तुझे याद रखने लायक चोदा है।”
सुनीता ने कमजोर आवाज में कहा, “तू पागल है… मेरे शरीर का कुछ नहीं छोड़ा तूने…”
राहुल हँसा। “अगली बार जब गाँव जाना तो याद रखना… दिल्ली वाले भतीजे ने क्या-क्या किया था।”
बाहर हल्की रोशनी आने लगी थी। दोनों थक कर सो गए। शरीर अभी भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
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