अकेली भाभी की बड़ी चूचियाँ दबाकर कड़क चूत भरी - जोरदार चुदाई
अकेली भाभी की भरी-भरी चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए देवर ने उसकी कड़क चूत को पूरी तरह भर दिया। जोरदार ठेलों वाली रात भर की चुदाई, जिसमें भाभी चीख-चीखकर झड़ गई।
मेरा नाम राहुल है। उम्र 24 साल। मैं दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय जोड़ परिवार में रहता हूँ। पापा, मम्मी, बड़े भाई विक्रम भैया (32 साल) और उनकी पत्नी प्रिया भाभी (29 साल)। घर में हमेशा भीड़ रहती है – छोटे-छोटे रिश्तेदार आते-जाते रहते हैं। लेकिन रात होते ही सब अपने-अपने कमरों में चले जाते हैं।
भैया एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। अक्सर 10-15 दिनों के टूर पर चले जाते हैं। घर की जिम्मेदारी भाभी पर ही रहती है। मैं कॉलेज पूरा करके जॉब ढूंढ रहा था, इसलिए ज्यादातर घर पर ही रहता था।
प्रिया भाभी... उनके बारे में क्या कहूँ। शादी को 6 साल हो चुके थे, लेकिन उनका जिस्म अभी भी 25 साल की लड़की जैसा टाइट और गरम था। लंबे काले बाल कमर तक, बड़ी-बड़ी काली आँखें, गहरी नाक, और वो होंठ जो हमेशा हल्के से मुस्कुराते रहते। रंग गोरा-चिट्टा, जैसे दूध। उनके बड़े-बड़े स्तन (34D से ज्यादा) ब्लाउज में इतने टाइट कि बटन कभी भी निकल आने को तैयार रहते।
कमर पतली, लेकिन गांड़ इतनी बड़ी और गोल कि साड़ी में चलते वक्त लेफ्ट-राइट हिलती रहती। जब वे झुकती थीं किचन में या फर्श साफ करते वक्त, पल्लू सरक जाता और उनका गहरा क्लेवेज दिखता – स्तनों के बीच की वो डार्क लाइन और थोड़ा सा ब्लैक ब्रा का किनारा।
मैं शुरू-शुरू में सिर्फ देखता रहता। कभी बाथरूम में उनके नाम की मुठ मार देता। उनकी साड़ी की खुशबू, बालों का तेल, पसीने की महक – सब दिमाग में घूमती रहती।
भाभी भी नोटिस करती थीं। जब मैं उनके पीछे खड़ा होता किचन में पानी लेने के बहाने, वे हल्का सा पीछे मुड़कर देखतीं, फिर जल्दी पल्लू ठीक कर लेतीं। लेकिन धीरे-धीरे उनकी आँखों में भी कुछ बदल रहा था। शायद भैया की गैरमौजूदगी की वजह से। वे अकेली, असंतुष्ट, और घर में एक जवान देवर – ये कॉम्बिनेशन खतरनाक हो सकता था।
पहला इंसिडेंट – 15 दिन पहले: भैया 20 दिन के टूर पर गए थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी थे दोपहर को। एक शाम बिजली चली गई थी। गर्मी बहुत थी। मैं हॉल में बैठा था, सिर्फ शॉर्ट्स और बनियान में। भाभी किचन से आईं, हाथ में मोमबत्ती। उन्होंने नाइटी पहन रखी थी – पतली सी, जो उनके बड़े स्तनों और गांड़ को साफ दिखा रही थी। अंदर ब्रा नहीं थी, निप्पल हल्के से उभर रहे थे।
“राहुल, ये मोमबत्ती ले लो... और जेनरेटर से थोड़ा सा फैन ऑन कर दो,” उन्होंने कहा, आवाज में हल्की सी कंपकंपी थी।
मैं उठा और उनके पास गया। मोमबत्ती की रोशनी में उनका चेहरा चमक रहा था। जब मैं फैन ऑन करने के लिए उनके पीछे से गुजरा, मेरा हाथ उनकी कमर से टकरा गया। वे रुक गईं। मैं भी। 2 सेकंड के लिए हम दोनों बिल्कुल चुप।
फिर उन्होंने धीरे से कहा, “तुम्हारा हाथ... बहुत गरम है आज।”
मैं कुछ बोल नहीं पाया। बस उनकी कमर पर हाथ रखकर धीरे से दबाया। भाभी ने आँखें बंद कर लीं। फिर जल्दी से आगे बढ़ गईं।
उस रात मैं सो नहीं पाया। सुबह उठकर देखा तो भाभी किचन में थीं, नॉर्मल साड़ी पहनकर। लेकिन जब मैं उनके पास गया चाय लेने, उन्होंने मुझे सीधा आँखों में देखा और हल्का सा स्माइल दे दिया। आज पल्लू थोड़ा सा नीचे था।
दूसरा दिन – सिडक्शन शुरू: भैया के जाने के 5 दिन हो चुके थे। घर में सिर्फ हम दोनों थे दोपहर को। भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया – “राहुल, ये अलमारी का दरवाजा खराब हो गया है, थोड़ा देख लो।”
मैं गया। वे अंदर थीं, सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में। साड़ी का पल्लू साइड में रखा था। जब मैं दरवाजा ठीक कर रहा था, उनका हाथ मेरे कंधे पर पड़ा। “बहुत गरम हो गया है ये घर,” उन्होंने कहा।
मैं मुड़कर देखा। उनके ब्लाउज के ऊपर से बड़े स्तन साफ दिख रहे थे। मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। सीधा उनके पास गया और उनकी कमर पकड़ ली।
“भाभी... मैं आपको रोज देखता हूँ। आप इतनी सुंदर हो...”
उन्होंने पहले तो हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन फिर धीरे से मेरे सीने पर हाथ रख दिया। “राहुल... ये गलत है। मैं तेरी भाभी हूँ...”
“लेकिन आप भी तो अकेली हो... भैया आपको टाइम नहीं देते।”
उनकी आँखों में पानी आ गया। फिर उन्होंने मुझे खींचकर अपने सीने से लगा लिया। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे से टकरा गए। पहला किस – धीरे से शुरू हुआ, फिर भूखा हो गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। मैं उनके बड़े स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा। भाभी सिसकारियाँ लेने लगीं।
पहली बार – असली चुदाई (वो रात): उसी शाम को रात 1 बजे। घर में सब सो चुके थे। भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुला लिया। दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया। सिर्फ एक डिम बल्ब जल रहा था।
वे मेरे सामने खड़ी थीं – लाल रंग की साड़ी, मंगलसूत्र गले में, सिंदूर मांग में। मैंने उनका पल्लू खींचकर साइड कर दिया। ब्लाउज के हुक खोलने लगा। एक-एक करके सारे हुक खुले। ब्लाउज गिर गया। अंदर से उनके बड़े, गोरे, हल्के से लटकते स्तन सामने आ गए। डार्क ब्राउन निप्पल पहले से ही टाइट थे।
मैं उनके सामने घुटनों के बल बैठा और एक निप्पल मुंह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा। भाभी ने मेरा सर अपने सीने से दबा लिया। “आह्ह्ह राहुल... धीरे से... दूध चूस ले मेरा... भाभी का दूध पी ले...”
मैं दूसरे स्तन को भी चूसता रहा, हल्के से काटता रहा। भाभी की साँसों में आवाज आ रही थी। फिर मैंने उनकी पेटीकोट की नाड़ा खोली। पेटीकोट गिर गया। अंदर सिर्फ एक पतली सी ब्लैक पैंटी थी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी।
मैं उनकी चूत के ऊपर हाथ फेरने लगा। पैंटी के ऊपर से ही उनकी गरम, फूली हुई चूत फील हो रही थी। मैंने पैंटी नीचे खींच दी। भाभी की चूत – बिल्कुल क्लीन शेव्ड, होंठों से थोड़ी सी फूली हुई, और अंदर से गीली चमक रही थी। मैंने उंगली डाली – बहुत टाइट थी। भाभी ने टांगें फैला दीं। मैं नीचे बैठा और उनकी चूत चाटने लगा। पहले धीरे से, फिर जीभ अंदर तक डालकर। उनका नमकीन रस मुंह में आ रहा था। भाभी चीखने लगीं, लेकिन मुंह पर हाथ रख लिया। “उफ्फ्फ... राहुल... तेरी जीभ... आह्ह्ह... और अंदर... चूत चाट ले मेरी...”
उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला (मैं पहले से ही शॉर्ट्स में नंगा था)। उनका हाथ मेरे 7 इंच मोटे लंड पर पड़ा। “इतना बड़ा... भैया से भी बड़ा है तेरा...” उन्होंने कहा और मुंह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगीं। स्लर्प-स्लर्प की आवाजें पूरे कमरे में आ रही थीं।
फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया। उनकी टांगें फैलाकर उनके ऊपर चढ़ गया। अपना लंड उनकी गीली चूत पर रगड़ने लगा। भाभी ने आँखें बंद कर लीं। “डाल दे अंदर... देवर जी... अपनी भाभी को आज चोद डाल...”
मैंने एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड अंदर घुस गया। भाभी की चूत इतनी टाइट थी कि मुझे लगा लंड फट जाएगा। उन्होंने दर्द से चीख मारी लेकिन जल्दी ही मूँह करने लगीं। “आह्ह्ह... बहुत बड़ा है... धीरे... आह्ह्ह जोर से... चोद मुझे!”
मैं धीरे-धीरे स्ट्रोक्स देने लगा। फिर स्पीड बढ़ा दी। थप-थप-थप की आवाजें। भाभी के बड़े स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं उनके ऊपर झुककर उनके होंठ चूमता रहा और जोर-जोर से चोदता रहा। 10 मिनट बाद भाभी झड़ गईं – उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से पकड़ लिया और सारा रस निकाल दिया। मैं भी अंदर ही झड़ गया – गरम वीर्य उनकी चूत में भर दिया।
हम दोनों पसीने से भीग चुके थे। भाभी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया। “आज के बाद तू मेरा है राहुल... हर रात...”
अगला हफ्ता – रोज की चुदाई (और वाइल्ड): उसके बाद रोज रात को हम मिलने लगे। एक बार किचन में भी – भाभी सुबह चाय बना रही थीं, मैं पीछे से आया, उनकी साड़ी ऊपर खींचकर काउंटर पर डॉगी स्टाइल में चोद दिया। वे अपना मुंह किचन टॉवल में दबाकर चीखती रहीं।
एक और बार टेरेस पर रात को – तारे देखने के बहाने। वहाँ भाभी ने मुझे 69 पोजीशन में लंड चूसने दिया जब मैं उनकी चूत चाट रहा था। फिर मैंने उन्हें दीवार से लगाकर चोदा।
सबसे मस्त वाली रात वो थी जब भैया के लौटने से 2 दिन पहले थी। घर में कोई नहीं था (मम्मी-पापा रिश्तेदार के घर गए थे)। पूरी रात हम नंगे घूमे घर में। भाभी ने मुझे बाथरूम में ब्लोजॉब दिया, फिर ड्राइंग रूम के सोफे पर मैंने उन्हें काउगर्ल पोजीशन में चोदा – वे ऊपर बैठकर अपनी गांड़ हिला-हिलाकर मेरा लंड अंदर ले रही थीं। उनके स्तन मेरे मुंह में थे। मैं उनकी गांड़ थप-थप मार रहा था।
भाभी बोलती रहीं – “देवर जी... आज मेरी गांड़ भी मार लो... लेकिन पहले धीरे से...”
मैंने उनकी गांड़ में उंगली डालकर लूज किया, फिर धीरे से लंड डाला। भाभी दर्द से तड़प रही थीं लेकिन मज़ा भी आ रहा था। “आह्ह्ह... मेरी गांड़ फाड़ दी... लेकिन मत रुक... चोद दे अपनी भाभी की गांड़!” मैंने अंदर ही झड़ दिया उनकी गांड़ में भी।
अंत में: भैया लौट आए तो सब नॉर्मल हो गया। लेकिन अब भाभी और मैं हर मौके पर चुपके से मिलते हैं। कभी उनके कमरे में जल्दी-जल्दी चुदाई, कभी टेरेस पर। भाभी अब और भी बोल्ड हो गई हैं। वे मुझे व्हाट्सएप पर भी फोटो भेजती हैं – अपने स्तनों और चूत की।
ये फॉरबिडन चुदाई अब हम दोनों की एडिक्शन बन गई है। जोड़ परिवार में रहते हुए भी हम रोज एक-दूसरे को संतुष्ट करते हैं।
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